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    17-07-2026:‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के अंतर्गत पुनर्विकसित हर्रावाला रेलवे स्टेशन के उद्घाटन अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि : जुलाई 17, 2026

    जय हिन्द!

    जनसुविधाओं को नई ऊँचाई प्रदान करने वाले पुनर्विकसित हर्रावाला रेलवे स्टेशन के लोकार्पण के इस ऐतिहासिक अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता और संतोष का विषय है। इस महत्त्वपूर्ण उपलब्धि एवं ऐतिहासिक अवसर पर मैं आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।

    देवभूमि उत्तराखण्ड की पुण्यभूमि पर आज हम एक ऐसे ऐतिहासिक अवसर के साक्षी हैं, जो केवल एक रेलवे स्टेशन के उद्घाटन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि विकसित भारत के संकल्प, आधुनिक अधोसंरचना, जनसेवा, सांस्कृतिक गौरव और जनभागीदारी के समन्वित स्वरूप का सशक्त प्रतीक है।

    किसी भी राष्ट्र की प्रगति केवल उसकी आर्थिक उपलब्धियों से नहीं आँकी जाती, बल्कि इस बात से भी मापी जाती है कि उसके नागरिकों तक सुविधाएँ कितनी सहज, सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी रूप से पहुँचती हैं। आधुनिक भारत इसी विकास-दृष्टि को आत्मसात करते हुए नए युग की ओर अग्रसर है।

    रेलमार्ग केवल दो स्थानों को जोड़ने वाले साधन नहीं होते, बल्कि वे लोगों को लोगों से, संस्कृतियों को संस्कृतियों से, अवसरों को आकांक्षाओं से और विकास को विश्वास से जोड़ते हैं। किसी भी नगर का रेलवे स्टेशन उस क्षेत्र का प्रथम परिचय होता है। वह केवल यात्रियों के आगमन और प्रस्थान का केन्द्र नहीं, बल्कि उस क्षेत्र की संस्कृति, सभ्यता, आतिथ्य और विकास-दृष्टि का दर्पण भी होता है। इसलिए आज का यह अवसर हर्रावाला ही नहीं, सम्पूर्ण उत्तराखण्ड के लिए गर्व और गौरव का विषय है।

    माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा आज देशभर के 75 पुनर्विकसित अमृत भारत रेलवे स्टेशनों का राष्ट्र को समर्पण भारत की विकास यात्रा का एक ऐतिहासिक अध्याय है। यह केवल अधोसंरचना के विस्तार का कार्य नहीं, बल्कि नागरिक-केंद्रित विकास, आधुनिक सुविधाओं और सांस्कृतिक पहचान को एक साथ आगे बढ़ाने का अभिनव प्रयास है।

    मैं इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए भारत सरकार, रेल मंत्रालय, माननीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव जी, रेलवे बोर्ड, उत्तर रेलवे तथा मुरादाबाद मंडल के सभी अधिकारियों, अभियंताओं और कर्मचारियों को हार्दिक बधाई देता हूँ, जिनके समर्पण और परिश्रम से यह महत्वपूर्ण कार्य संभव हुआ है।

    हमारे शास्त्रों में कहा गया है-

    ‘‘उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
    न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥’’
    अर्थात् केवल कल्पनाओं से नहीं, बल्कि सतत परिश्रम, संकल्प और पुरुषार्थ से ही महान कार्य सिद्ध होते हैं। भारतीय रेलवे का यह परिवर्तन इसी कर्मशीलता, दूरदृष्टि और उत्कृष्ट कार्यसंस्कृति का प्रेरक उदाहरण है।

    यह मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल का हर्रावाला रेलवे स्टेशन उन 75 अमृत स्टेशनों में सम्मिलित है, जिन्हें आज नए स्वरूप में राष्ट्र को समर्पित किया जा रहा है। लगभग 19 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकसित यह स्टेशन आधुनिक सुविधाओं और स्थानीय सांस्कृतिक पहचान का उत्कृष्ट संगम प्रस्तुत करता है।

    इसकी वास्तुकला दून घाटी की प्राकृतिक छटा और हिमालय की भव्यता से प्रेरित है। इसकी विशिष्ट घुमावदार छत हिमालयी पर्वतमालाओं का आभास कराती है, जबकि स्टेशन परिसर में उत्तराखण्ड की पारम्परिक ऐपण कला को स्थान देकर हमारी समृद्ध लोक-संस्कृति को गरिमापूर्ण अभिव्यक्ति दी गई है। यह वास्तव में आधुनिक भारत और सांस्कृतिक भारत के समन्वय का अनुपम उदाहरण है।

    इस स्टेशन पर विशाल प्रवेश द्वार, विस्तृत कॉनकोर्स, आधुनिक प्रतीक्षालय, एग्जीक्यूटिव लाउंज, दिव्यांगजन-अनुकूल अधोसंरचना, स्वच्छ एवं सुलभ शौचालय, बेहतर पेयजल व्यवस्था, आधुनिक प्लेटफॉर्म, सुव्यवस्थित यातायात प्रबंधन तथा हरित वातावरण जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएँ विकसित की गई हैं। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आज विकास का केन्द्र केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि नागरिक सुविधा, मानवीय गरिमा, सुगमता और समावेशिता है।

    भारतीय संस्कृति का शाश्वत संदेश है-
    ‘‘चरैवेति… चरैवेति…’’
    अर्थात् निरन्तर आगे बढ़ते रहो। यही जीवन का, समाज का और राष्ट्र के विकास का मूल मंत्र है। भारतीय रेलवे आज इसी मंत्र को आत्मसात करते हुए गति, गुणवत्ता, सुरक्षा और नवाचार के नए प्रतिमान स्थापित कर रही है। रेलवे स्टेशनों का यह कायाकल्प विकसित भारत की उसी निरंतर गतिशील यात्रा का प्रतीक है।

    देवभूमि उत्तराखण्ड आध्यात्मिक चेतना, प्राकृतिक सौन्दर्य, वीरता, संस्कृति और पर्यटन की भूमि है। माननीय प्रधानमंत्री जी ने विश्वास व्यक्त किया है कि ‘‘इक्कीसवीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक है।’’ आधुनिक रेलवे अवसंरचना उस विश्वास को नई शक्ति और नई गति प्रदान करेगी।

    हर्रावाला रेलवे स्टेशन देहरादून आने वाले पर्यटकों, तीर्थयात्रियों, विद्यार्थियों, सैनिक परिवारों तथा देश-विदेश से आने वाले यात्रियों के लिए उत्तराखण्ड का आधुनिक, आकर्षक और गरिमामय प्रवेश-द्वार बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ आने वाला प्रत्येक यात्री आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक आत्मीयता और ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना का भी अनुभव करेगा।

    मुझे विशेष प्रसन्नता है कि इस कार्यक्रम को जनभागीदारी का उत्सव बनाया गया है। स्थानीय विद्यालयों में ‘‘मेरे शहर का स्टेशन विकसित भारत में कैसा होगा?’’ विषय पर आयोजित निबंध, चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी कल्पनाशीलता और रचनात्मकता व्यक्त करने का अवसर मिला। यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण में नई पीढ़ी की सहभागिता का प्रेरणादायी प्रयास है।

    मैं सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों, उनके शिक्षकों और अभिभावकों को हार्दिक बधाई देता हूँ तथा आज सम्मानित होने वाले सभी विजेताओं को शुभकामनाएँ देता हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यही युवा शक्ति वर्ष 2047 के विकसित भारत की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति बनेगी।

    रेलवे किसी भी प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रगति की जीवनरेखा होती है। बेहतर रेल संपर्क पर्यटन, व्यापार, कृषि, स्थानीय उत्पादों, निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को नई गति प्रदान करता है।

    उत्तराखण्ड आज वर्षभर पर्यटन, होम-स्टे, जैविक कृषि, स्थानीय उत्पादों, योग, आयुर्वेद, आध्यात्मिक पर्यटन और साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। ऐसे समय में आधुनिक रेलवे स्टेशन इन सभी संभावनाओं को साकार करने वाले सशक्त विकास केन्द्र सिद्ध होंगे।

    मैं यहाँ उपस्थित सभी नागरिकों से आग्रह करता हूँ कि इस आधुनिक स्टेशन को केवल रेलवे की सम्पत्ति न मानें, बल्कि अपनी साझा धरोहर समझें। इसकी स्वच्छता, सुंदरता, अनुशासन और सुव्यवस्था बनाए रखना हम सभी का दायित्व है। जब नागरिक और शासन समान भाव से विकास के सहभागी बनते हैं, तभी राष्ट्र की प्रगति स्थायी, समावेशी और जनकल्याणकारी बनती है।

    आइए! इस प्रेरणादायी अवसर पर हम सब मिलकर संकल्प लें कि आधुनिक अधोसंरचना के साथ-साथ उत्कृष्ट जनसेवा, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व, स्वच्छता, अनुशासन और जनभागीदारी को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएँगे तथा विकसित भारत और विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण में सक्रिय सहयोगी बनेंगे।

    एक बार पुनः इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए भारत सरकार, रेल मंत्रालय, भारतीय रेलवे, उत्तर रेलवे, मुरादाबाद मंडल तथा इस परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों, अभियंताओं, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ।

    मुझे पूर्ण विश्वास है कि पुनर्विकसित हर्रावाला रेलवे स्टेशन आने वाले वर्षों में केवल एक उत्कृष्ट परिवहन केन्द्र ही नहीं, बल्कि विकास, सुशासन, सांस्कृतिक गौरव और जनविश्वास का प्रेरणास्रोत बनकर उत्तराखण्ड की प्रगति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसी मंगल कामना के साथ अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

    वन्दे मातरम्! भारत माता की जय! जय हिन्द!