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    प्रोफ़ाइल-माननीय राज्यपाल

    डॉ. ढाल सिंह बिसेन, राज्यपाल, उत्तराखण्ड

    पूर्व सांसद, लोकसभा क्षेत्र 15 बालाघाट–सिवनी, मध्य प्रदेश

    पूर्व कैबिनेट मंत्री, मध्य प्रदेश शासन, निर्वाचन क्षेत्र बरघाट (122), जिला सिवनी, मध्य प्रदेश।

    पिता का नाम: स्वर्गीय श्री सेवाराम बिसेन

    माता का नाम: स्वर्गीय श्रीमती सोना बाई बिसेन

    जन्म तिथि: 14 मई, 1952

    जन्म स्थान: ग्राम पिपरिया, तहसील बरघाट, जिला सिवनी

    पत्नी: श्रीमती भानुमती बिसेन

    संतान: 1 पुत्र (डॉ. लोकेश बिसेन, एम.एस. ऑर्थो) तथा 2 पुत्रियाँ (विवाहित)

    शैक्षणिक योग्यता: ए.वी.एम.एस. (आयुर्वेद विज्ञानाचार्य, विद मॉडर्न मेडिसिन एंड सर्जरी), डी.एच.बी.

    व्यवसाय: कृषि और चिकित्सा

    अभिरुचि: समाज सेवा, ग्रामीण विकास, कृषि, पर्यावरण एवं जल संरक्षण।

    सार्वजनिक एवं राजनीतिक जीवन का संक्षिप्त विवरण

    वर्ष 1975 से 1990: चिकित्सकीय कार्य। वर्ष 1975 से 1990 तक ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सा कार्य ग्राम गंगेरुआ, धापारा, विकासखंड बरघाट, जिला सिवनी में किया।

    वर्ष 1990 में मध्य प्रदेश की नौवीं विधानसभा के लिए बरघाट विधानसभा क्षेत्र से प्रथम बार निर्वाचित हुए।

    वर्ष 1993 में मध्य प्रदेश की दसवीं विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए।

    वर्ष 1998 में मध्य प्रदेश की ग्यारहवीं विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। इस दौरान विधानसभा की सरकारी उपक्रम, आश्वासन, नियम तथा प्राक्कलन समिति, जल संसाधन विभाग एवं लोक निर्माण विभाग की परामर्शदात्री समिति के सदस्य तथा भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के सचेतक रहे।

    वर्ष 2003 में लगातार चौथी बार बरघाट विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित होकर कैबिनेट में वन, परिवहन एवं खनिज साधन मंत्री का दायित्व निर्वहन किया तथा वन विकास निगम, लघु वनोपज संघ, राज्य परिवहन निगम एवं खनिज विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

    वर्ष 2004 में स्कूल शिक्षा एवं जेल विभाग के कैबिनेट मंत्री का दायित्व संभाला।

    वर्ष 2012 से 2013 में चतुर्थ राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष पद के दायित्व का निर्वहन किया।

    वर्ष 2019 में लोकसभा क्षेत्र 15 बालाघाट–सिवनी के लिए निर्वाचित हुए।

    संसद की विभिन्न समितियों में सदस्य के रूप में

    स्थायी समिति: शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी समिति; वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन संबंधी समिति; विज्ञान और प्रौद्योगिकी संबंधी समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया।

    संयुक्त संसदीय समिति: बहु-राज्य सहकारी समितियों की संयुक्त संसदीय समिति अधिनियम, 2022 के सदस्य के रूप में कार्य किया। वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया।

    परामर्शदात्री समिति: खाद्य, उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया।

    मंत्रित्व कार्यकाल के दौरान

    वन मंत्री के रूप में

    तेंदूपत्ता नीति का वर्ष 2003–04 में निर्धारण किया, जो वर्तमान में अनेक राज्यों में क्रियान्वित है। पूर्व में जहाँ मात्र 1 करोड़ रुपये से भी कम का राजस्व प्राप्त होता था, नीति परिवर्तन के बाद बिना किसी अतिरिक्त खर्च के शुद्ध आमदनी पहले वर्ष 16 करोड़, दूसरे वर्ष 35 करोड़, तीसरे वर्ष 65 करोड़ रुपये हुई और नीति के प्रभावी होने के उपरांत आज आमदनी 1200 करोड़ रुपये से अधिक है।

    वन विभाग में इको-टूरिज्म प्रारंभ करवाया। वन प्रबंधन नीति में परिवर्तन करवाया।

    शिक्षा मंत्री के रूप में

    कार्य करते हुए गाँव की बेटी योजना, बच्चियों को साइकिल प्रदाय योजना (पूरे देश में केवल मध्य प्रदेश में साइकिल प्रदाय किया जाना प्रारंभ किया), मुफ्त गणवेश वितरण योजना, प्रत्येक विकासखंड में उत्कृष्ट विद्यालय प्रारंभ, छात्रों के लिए करियर गाइडेंस प्रारंभ तथा व्यापम के माध्यम से पारदर्शी तरीके से शिक्षकों की नियुक्ति करवाई।

    हर 5 किलोमीटर में हाई स्कूल एवं 8 किलोमीटर पर हायर सेकेंडरी स्कूल प्रारंभ किए।

    अपने कार्यकाल में डॉ. सिंह ने मध्य प्रदेश शासन द्वारा किए जाने वाले मोगली उत्सव की शुरुआत वर्ष 2004 में प्रारंभ की, जो प्रतिवर्ष मनाया जाता है। यह सिवनी के पेंच नेशनल पार्क में स्थायी रूप से प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है, जिसमें बच्चों को पर्यावरण की जानकारी दी जाती है।

    प्रदेश में नकल माफियाओं पर प्रतिबंध लगाने के लिए कठोर कदम उठाए गए। प्रदेश के समस्त 313 विकासखंडों में गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए पहली बार उत्कृष्ट विद्यालय प्रारंभ करवाए। छात्रों के लिए करियर गाइडेंस प्रदान किया जाना प्रारंभ करवाया।

    खनिज एवं परिवहन मंत्री के रूप में

    खनिज मंत्री एवं परिवहन मंत्री के रूप में क्रमशः खनिज नीति एवं परिवहन नीति को सुचारु रूप से संचालित करवाया, जिससे प्रदेश के राजस्व में अत्यधिक वृद्धि हुई।

    जेल मंत्री के रूप में

    जेल मंत्री रहते हुए प्रदेश में संचालित जेलों की दशा सुधारने का कार्य किया। जेलों में कैदियों के लिए गायत्री परिवार द्वारा पुरोहिती प्रशिक्षण मध्य प्रदेश की समस्त सेंट्रल जेलों में प्रारंभ करवाया।

    मध्य प्रदेश की जेलों में गौशाला प्रारंभ करवाई, वाटर हार्वेस्टिंग, सर्व शिक्षा अभियान से शिक्षण कार्य प्रारंभ करवाया। सजा समाप्ति के बाद कैदी सम्मानजनक जीवनयापन कर सकें, इसके लिए जेल में मोटर वाइंडिंग, कंप्यूटर टीचिंग, प्रबंधन प्रशिक्षण एवं मोटर मैकेनिक प्रशिक्षण की व्यवस्था बनाई। जेलों का आधुनिकीकरण करवाया।

    संसदीय कार्यकाल के दौरान

    संसदीय कार्यकाल में सिवनी एवं बालाघाट जिले में ब्रॉडगेज रेल परियोजनाओं को पूर्ण करवाया। जिले को देश-प्रदेश की राजधानी से जोड़ने हेतु रेलों का विस्तार करवाया।

    सिवनी रेलवे स्टेशन को मॉडल रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित करवाने का कार्य तथा रैक पॉइंट का निर्माण करवाया।

    बालाघाट जिले के नक्सली क्षेत्र में 260 करोड़ रुपये की योजना बनाकर 33 सड़कें एवं 17 पुलों का निर्माण करवाया।

    सिवनी नगर से गुजरने वाले पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग को 4 लेन करने तथा नागपुर रोड स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर रेल ओवरब्रिज के निर्माण की स्वीकृति केंद्र सरकार द्वारा दिलाई गई।

    सिवनी में पासपोर्ट कार्यालय प्रारंभ करवाया।

    सिवनी में एफ.एम. बैंड की शुरुआत करवाई।

    सिवनी जिले के बरघाट एवं बालाघाट जिले के तिरोड़ी में केंद्रीय विद्यालय की शुरुआत करवाई।

    बालाघाट में 5 रेल ओवरब्रिज की स्वीकृति दिलाई।

    महाराष्ट्र के गोंदिया से बालाघाट होकर नैनपुर मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने से संबंधित कार्य किया।

    भारतमाला-1 के अंतर्गत सिवनी–बालाघाट मार्ग के ग्राम लवादा से महाराष्ट्र की सीमा तक वैनगंगा नदी पर पुल सहित 4 लेन सड़क का निर्माण करवाया।

    सिवनी जिले के सुकतरा एयर स्ट्रिप पर प्रशिक्षण प्रारंभ करवाया।