“एआई थीम रूम” एवं “एआई ऑन व्हील्स” पहल के उद्घाटन अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन
जय हिन्द!
आज का यह सुअवसर देवभूमि वासियों के लिए गौरव, संकल्प और प्रेरणा का एक अनुपम पर्व है। आज का यह सूर्याेदय उत्तराखण्ड के लिए केवल एक नई तिथि लेकर नहीं आया है, बल्कि यह हमारे प्रदेश के उज्ज्वल और तकनीकी रूप से सशक्त भविष्य के ‘नूतन अध्याय’ का साक्षी बन रहा है।
लोक भवन के इस प्रांगण में ‘एआई थीम रूम’ का उद्घाटन और ‘एआई ऑन व्हील्स’ पहल का यह शंखनाद, केवल एक तकनीकी परियोजना का औपचारिक शुभारंभ मात्र नहीं है। वास्तव में, यह हमारे युवाओं के सामर्थ्य, आधुनिक शिक्षा के विजन और नवाचार के उस नए युग का ‘प्रवेश द्वार’ है, जहाँ अमृतकाल की हमारी अमृत पीढ़ी पूरी दुनिया के साथ कदम ताल के लिए तैयार है। आज हम केवल मशीनों का नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड के सशक्त और आत्मनिर्भर भविष्य का सूत्रपात कर रहे हैं।
आज पूरी दुनिया ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के माध्यम से एक युगांतरकारी परिवर्तन की साक्षी बन रही है। एआई अब भविष्य की कल्पना नहीं, अपितु हमारे वर्तमान की सबसे बड़ी वैश्विक शक्ति और विकास का मुख्य इंजन है। ऐसे निर्णायक समय में, यह आवश्यक है कि हमारे युवा तकनीक के केवल ‘उपभोक्ता’ बनकर न रुकें, बल्कि अपनी मेधा और नवाचार से इसके ‘निर्माता’ बनें। हमें केवल दूसरों की बनाई तकनीक पर निर्भर न रहकर अपनी मौलिक सोच से ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए नए तकनीकी प्रतिमान स्थापित करने हैं।
साथियों,
आज उद्घाटित यह ‘एआई थीम रूम’ केवल एक कक्ष नहीं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान और जनभागीदारी का जीवंत केंद्र है। यह स्थान शिक्षा, विज्ञान और समाज के बीच एक सशक्त ‘सेतु’ का कार्य करेगा। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह ‘नवाचार केंद्र’ हमारे युवाओं के लिए एक ऐसी कर्मस्थली बनेगा, जहाँ वे केवल तकनीक का उपयोग करना ही नहीं सीखेंगे, बल्कि भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के समाधान का निर्माण करेंगे। यहाँ से उपजे स्टार्टअप्स और शोध कार्य न केवल उत्तराखण्ड, बल्कि पूरे राष्ट्र को एक नई तकनीकी दिशा प्रदान करेंगे।
मुझे विशेष प्रसन्नता ‘एआई ऑन व्हील्स’ पहल को लेकर है। मेरा अटूट विश्वास है कि विकास की सार्थकता तभी है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचे। यह चलता-फिरता एआई केंद्र हमारे उन दुर्गम पहाड़ी अंचलों और सुदूर गांवों के बच्चों के लिए ‘ज्ञान का रथ’ बनेगा, जो मुख्यधारा से कटे हुए थे।
यह अभिनव प्रयास यह सुनिश्चित करेगा कि आधुनिक तकनीकी शिक्षा केवल शहरों की ऊंची इमारतों तक सीमित न रहकर उत्तराखण्ड के हर गाँव और हर विद्यालय की चौखट तक पहुँचे। वास्तव में, ‘एआई ऑन व्हील्स’ केवल एक बस नहीं, बल्कि डिजिटल अंतराल (क्पहपजंस क्पअपकम) को समाप्त करने वाला एक सशक्त सेतु है।
साथियों,
मेरा यह अटूट विश्वास रहा है कि प्रतिभा कभी किसी बड़े शहर या महँगे संसाधनों की मोहताज नहीं होती। हमारी देवभूमि के दुर्गम पर्वतीय अंचलों, कंदराओं और छोटे-छोटे गाँवों के विद्यालयों में ऐसी अद्भुत क्षमता और नवाचार की ऊर्जा छिपी है, जो दुनिया को चकित कर सकती है। समस्या संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि अवसरों की उपलब्धता है। हमारे इन प्रतिभावान बच्चों को केवल एक सही मंच और सही मार्गदर्शन की प्रतीक्षा थी। इसी सोच को धरातल पर उतारने का संकल्प है- ‘ऑपरेशन कल्कि’ (व्चमतंजपवद ज्ञंसाप)।
कल्कि, भगवान विष्णु का अंतिम अवतार हैं। जिसका अर्थ है-अंधकार को नष्ट करने वाला।
‘ऑपरेशन कल्कि’ उत्तराखण्ड के युवाओं को तकनीक से जोड़ने का एक विराट ‘जन-आंदोलन’ है। इसके माध्यम से टीमों ने प्रदेश के सभी 13 जनपदों के दुर्गम क्षेत्रों और सरकारी विद्यालयों तक पहुँच बनाकर न केवल एआई सिखाया, बल्कि उन मासूम आँखों में भविष्य के प्रति एक नया आत्मविश्वास जगाया है। आज इस अभियान से जुड़ा हर बच्चा गर्व से कह सकता है कि-‘तकनीक मेरा अधिकार है और नवाचार मेरा भविष्य!’
अभियान की इस यात्रा में हजारों विद्यार्थियों से अद्भुत नवाचार प्राप्त हुए, और गौरव की बात यह है कि ये विचार केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहे, बल्कि 100 से अधिक व्यावहारिक एआई एप्लिकेशन्स में परिवर्तित हुए। यह इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि सही अवसर मिले, तो हमारे सरकारी विद्यालयों के छात्र भी वैश्विक स्तर के समाधान दे सकते हैं।
मैं इस सफलता के सारथी, सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, जिला समन्वयकों और मार्गदर्शकों को हृदय से बधाई देता हूँ। साथ ही, मैं ‘ज्मबीदव भ्नइ स्ंइवतंजवतपमे’ और उनके समर्पित युवा इंजीनियरों व शोधकर्ताओं की विशेष सराहना करता हूँ। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में तकनीक को जन-जन तक पहुँचाने का आपका यह प्रयास अत्यंत प्रशंसनीय और राष्ट्र-निर्माण में मील का पत्थर है।
साथियों,
हमारी भारतीय संस्कृति का उद्घोष है- ‘प्रज्ञानम् ब्रह्म’ अर्थात् ‘ज्ञान ही ब्रह्म है’। हमारी यह धरा वह पावन स्थली है जहाँ के ऋषियों ने सहस्रों वर्ष पूर्व शून्य की अवधारणा से लेकर नक्षत्रों की सटीक गणना तक का अद्भुत ज्ञान संसार को दिया। आज समय की मांग है कि हम अपनी उसी ‘प्राचीन मेधा’ को ‘आधुनिक माध्यम’ यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ जोड़ें।
जब हमारी प्राचीन ‘आयुर्वेद’ की शक्ति और एआई का ‘प्रेडिक्टिव एनालिसिस’ मिलेंगे, तो वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व क्रांति आएगी। एआई के माध्यम से हम अपनी दुर्लभ पाण्डुलिपियों और लुप्त होती भाषाओं को संरक्षित कर उन्हें नई पीढ़ी के लिए समझने योग्य बना सकते हैं। हमें ऐसी तकनीक विकसित करनी है जो हमारे ‘मूल्यों’ पर आधारित हो। विरासत भी, विकास भी के मंत्र के साथ, हमें सिद्ध करना है कि प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का यह संगम ही मानवता के कल्याण का वास्तविक मार्ग है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण का जो विराट संकल्प लिया है, वह केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि हर भारतीय का साझा स्वप्न है। इस अमृत काल में, उस संकल्प की सिद्धि के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारा सबसे अचूक और शक्तिशाली अस्त्र है।
‘डाटा’ और ‘डिजिटलाइजेशन’ के इस युग में जब हमारी ऊर्जावान युवा शक्ति एआई जैसी अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगी, तभी हम न केवल समस्याओं का समाधान करेंगे, बल्कि नवाचार के नए प्रतिमान भी स्थापित करेंगे। जब हमारे युवा अपने पारंपरिक कौशल को इस वैश्विक तकनीक के साथ जोड़ेंगे, तभी हमारा प्रदेश और देश सही मायनों में वैश्विक पटल पर एक ‘टेक्नोलॉजी लीडर’ के रूप में नेतृत्व कर सकेगा।
साथियों,
हमारा उत्तराखण्ड अपनी विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है, लेकिन यही परिस्थितियाँ हमारे लिए चुनौतियाँ भी खड़ी करती हैं। आज मैं अपने मेधावी युवाओं का आह्वान करता हूँ कि वे एआई का उपयोग कर इन चुनौतियों को अवसरों में बदलें। हमें ऐसी तकनीक विकसित करनी है जो सटीक आपदा प्रबंधन में जीवन बचा सके, स्मार्ट कृषि के माध्यम से किसानों की आय बढ़ा सके और रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देकर पलायन जैसी गंभीर समस्या का स्थायी समाधान दे सके।
हमें देवभूमि की पवित्र ‘ज्ञान-भूमि’ की छवि को अब ‘टेक-भूमि’ के गौरव के साथ जोड़ना है। आज जब भारत विश्व स्तर पर तकनीकी नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है, तब उत्तराखण्ड पीछे नहीं रह सकता। मैं राज्य के सभी विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप्स से आग्रह करता हूँ कि वे एक ऐसा ‘इकोसिस्टम’ तैयार करें जहाँ नवाचार केवल चर्चा का विषय न हो, बल्कि धरातल पर उतरे। हम सब मिलकर एक ऐसा सशक्त मार्ग प्रशस्त करें जहाँ तकनीक और विकास के इस महायज्ञ में हमारा हर युवा अपनी आहुति दे सके और उत्तराखण्ड इस डिजिटल क्रांति का ध्वजवाहक बने।
मैं अपने गुरुजनों से यह कहना चाहता हूँ, तकनीक से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है, इसे अपना ‘सहयोगी’ बनाइए। याद रखिए! तकनीक कभी गुरु का स्थान नहीं ले सकती, क्योंकि मशीन ‘सूचना’ तो दे सकती है पर ‘संस्कार’ और ‘विवेक’ केवल गुरु ही दे सकता है। लेकिन जब एक संस्कारवान गुरु तकनीक की शक्ति से युक्त हो जाता है, तो वह आने वाली पीढ़ी को ‘अजेय’ बना देता है। आप केवल पढ़ाएँ नहीं, बल्कि तकनीक के माध्यम से अपने शिष्यों में नवाचार की ज्योति जलाएँ।
मेरे प्रिय विद्यार्थियों,
एआई आपके सपनों की उड़ान के लिए ‘पंख’ की तरह है। इसे केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि अपनी रचनात्मकता को विस्तार देने का माध्यम बनाइए। अपने संकल्पों की परिधि को कभी छोटा मत समझिए।
मेरा मंत्र याद रखिए! जिज्ञासु बनें और निरंतर सीखते रहें। तकनीक का उपयोग केवल व्यक्तिगत ऊंचाइयों के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र-निर्माण के लिए कीजिए। याद रखिए, भविष्य उनका नहीं है जो केवल तकनीक का उपयोग जानते हैं, बल्कि उनका है जो तकनीक से समस्याओं का समाधान खोजते हैं। आपकी हर छोटी सफलता में ही ‘विकसित भारत’ का विराट लक्ष्य समाहित है।
मेरा दृढ़ विश्वास है कि जब देवभूमि के दुर्गम पथों पर यह तकनीक का रथ (।प् वद ॅीममसे) दौड़ेगा, तभी हमारा उत्तराखण्ड नवाचार के शिखर पर अपनी विजय पताका फहराएगा।
मैं एक बार पुनः ‘एआई थीम रूम’, ‘एआई ऑन व्हील्स’ और ‘ऑपरेशन कल्कि’ के उन सभी कर्मयोगियों को हृदय से बधाई देता हूँ, जिन्होंने धरातल पर उतरकर इस स्वप्न को साकार किया है। आपकी यह मेहनत केवल कोड और सर्किट तक सीमित नहीं है, यह उत्तराखण्ड के लाखों युवाओं के भाग्य को बदलने का महायज्ञ है।
आइए! हम सब एक ऐसे उत्तराखण्ड के निर्माण में सहभागी बनें जो तकनीक-युक्त हो, प्रगतिशील हो और पूरी तरह आत्मनिर्भर हो। मुझे पूर्ण विश्वास है कि नवाचार की यह मशाल देवभूमि को तकनीक के वैश्विक मानचित्र पर नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।
इसी आशा और विश्वास के साथ अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
जय हिन्द! जय उत्तराखण्ड!