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    24-06-2026:लोक भवन, नैनीताल में आयोजित ‘परिवार मिलन कार्यक्रम’ हेतु माननीय राज्यपाल महोदय का संबोधन

    प्रकाशित तिथि : जून 24, 2026

    जय हिन्द!

    लोक भवन परिवार के सभी अधिकारीगण, कर्मचारीगण, उनके सम्मानित परिजन तथा यहां उपस्थित मेरे सभी प्रिय साथियों!

    आज का यह अवसर मेरे लिए अत्यंत विशेष और हृदय के अत्यंत निकट है। परिवार मिलन का यह कार्यक्रम केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हमारे बीच के आत्मीय संबंधों, पारस्परिक विश्वास, सहयोग और एक परिवार के रूप में हमारी एकजुटता का उत्सव है।

    सबसे पहले मैं लोक भवन परिवार के प्रत्येक सदस्य और उनके परिवारजनों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करता हूँ। मैं विशेष रूप से परिवारजनों का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ, क्योंकि किसी भी संस्था की सफलता के पीछे उसके कर्मचारियों का समर्पण होता है और उस समर्पण के पीछे उनके परिवार का त्याग, धैर्य और सहयोग होता है। आपके सहयोग के बिना हमारे अधिकारी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर सकते।

    मित्रों,

    मैं हमेशा यह मानता हूँ कि लोक भवन में कार्यरत प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी केवल एक कार्मिक नहीं है, बल्कि इस बड़े परिवार का अभिन्न सदस्य है। परिवार केवल साथ काम करने से नहीं बनता, बल्कि एक-दूसरे की चिंता करने, सुख-दुख साझा करने और एक-दूसरे की प्रगति में सहभागी बनने से बनता है।

    मैंने हमेशा प्रयास किया है कि लोक भवन में ऐसा वातावरण बने जहां प्रत्येक व्यक्ति सम्मान, आत्मीयता और अपनत्व का अनुभव करे। परिवार के किसी सदस्य की समस्या मेरी अपनी समस्या है और उसका समाधान मेरी प्राथमिकताओं में शामिल है। यही भावना हमें एक संस्था से आगे बढ़ाकर एक सशक्त परिवार बनाती है।

    साथियों,

    लोक भवन केवल एक भवन नहीं है, बल्कि उत्तराखण्ड की गरिमा, परंपरा, संस्कृति और उत्कृष्ट प्रशासनिक मूल्यों का प्रतीक है। इसकी ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और संस्थागत प्रतिष्ठा हम सभी की साझा धरोहर है। इस धरोहर को सुरक्षित रखना और इसे और अधिक समृद्ध बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    मुझे प्रसन्नता है कि पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी हम सभी ने मिलकर अनेक महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया। इस वर्ष आयोजित गवर्नर्स कप गोल्फ टूर्नामेंट विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इसमें अब तक की सर्वाधिक सहभागिता दर्ज की गई, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता और हमारी टीम के उत्कृष्ट प्रबंधन का प्रमाण है। इस आयोजन की सफलता के पीछे आप सभी का अथक परिश्रम और समर्पण रहा है।

    इसी प्रकार ‘‘एक शाम सैनिकों के नाम’’ कार्यक्रम ने भी समाज और सैनिक परिवारों के प्रति हमारी कृतज्ञता को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान किया। यह कार्यक्रम मात्र एक आयोजन न होकर, उन वीरों के प्रति राष्ट्र की श्रद्धा का प्रतीक था जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया।

    मुझे विशेष संतोष है कि इस वर्ष ‘गवर्नर्स कप गोल्फ टूर्नामेंट’ तथा ‘‘एक शाम सैनिकों के नाम’’ कार्यक्रम को हमने स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूरी जी की पुण्य स्मृति को समर्पित किया। उनका जीवन कर्तव्य, राष्ट्रसेवा, नेतृत्व और जनसेवा का अनुपम उदाहरण रहा है। उनके आदर्श हमें निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।

    प्रिय साथियों,

    गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी लोक भवन में आवश्यकतानुसार अवस्थापना सुधार के अनेक कार्य किए गए हैं और आगे भी किए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि लोक भवन की ऐतिहासिक गरिमा अक्षुण्ण रहे तथा आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाओं का विकास भी होता रहे।

    इसके साथ-साथ हमने यहां के प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरणीय विरासत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया है। लोक भवन की पहचान केवल इसकी इमारतों से नहीं, बल्कि इसकी हरियाली, जैव विविधता, स्वच्छ वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य से भी है। यहां का प्रत्येक वृक्ष, प्रत्येक पौधा और प्रकृति का प्रत्येक स्वर हमारी धरोहर है।

    मित्रों,

    देवभूमि उत्तराखण्ड का आध्यात्मिक वातावरण सदैव मुझे आकर्षित करता रहा है। यहां की पर्वत श्रृंखलाएं, नदियां, वन और तीर्थस्थल केवल पर्यटन के केंद्र नहीं हैं, बल्कि आत्मिक ऊर्जा और जीवन मूल्यों के स्रोत हैं।

    हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मुझे जागेश्वर धाम, काकड़ीघाट, मां नैना देवी मंदिर, कैंची धाम तथा गुरुद्वारा श्री सिंह सभा में मत्था टेकने का अवसर मिला। हाल ही में हनुमानगढ़ी जाकर भी दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त किया।

    इसके अतिरिक्त इस वर्ष मुझे पवित्र वृद्ध जागेश्वर तथा दण्डेश्वर महादेव के दर्शन का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। इन स्थलों का आध्यात्मिक वातावरण मन को भीतर तक स्पर्श करता है।

    मैं जब भी इन पवित्र स्थलों पर जाता हूँ, तो वहां की दिव्यता, शांति और सकारात्मक ऊर्जा मन को नई शक्ति प्रदान करती है। जीवन की व्यस्तताओं के बीच ये क्षण आत्मचिंतन और आत्मबल का स्रोत बन जाते हैं। मुझे विश्वास है कि उत्तराखण्ड की यही आध्यात्मिक चेतना हम सभी को अपने कर्तव्यों के प्रति और अधिक समर्पित बनने की प्रेरणा देती है।

    साथियों,

    आज का भारत अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है। माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में विकसित भारत-2047 का संकल्प हमारे सामने है। इस राष्ट्रीय संकल्प की पूर्ति केवल बड़े निर्णयों से नहीं होगी, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के ईमानदार प्रयास, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र प्रथम की भावना से होगी।

    लोक भवन का प्रत्येक कर्मचारी, चाहे उसका दायित्व कितना ही छोटा या बड़ा क्यों न हो, इस राष्ट्रीय निर्माण यात्रा का महत्वपूर्ण भागीदार है। जब हम अपने कार्य को केवल नौकरी नहीं बल्कि राष्ट्रसेवा का माध्यम मानते हैं, तब हमारा योगदान कई गुना बढ़ जाता है।

    मैं अक्सर कहता हूँ कि उत्कृष्टता कोई घटना नहीं, बल्कि एक निरंतर प्रक्रिया है। हमें हर दिन स्वयं को बेहतर बनाना है। अनुशासन, समयपालन, ईमानदारी, संवेदनशीलता और उत्कृष्ट कार्य संस्कृति ऐसे मूल्य हैं जो किसी भी संस्था को विशिष्ट बनाते हैं। मुझे प्रसन्नता है कि लोक भवन परिवार इन मूल्यों को अपने आचरण में उतारने का सतत प्रयास कर रहा है।

    मैं विशेष रूप से उन कर्मचारियों का अभिनंदन करता हूँ जिन्होंने वर्षों तक समर्पण और निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं प्रदान की हैं। आपकी मेहनत और प्रतिबद्धता ने इस संस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    प्रिय साथियों,

    हम भारतीय संस्कृति में परिवार को केवल सामाजिक इकाई नहीं, बल्कि संस्कारों की प्रथम पाठशाला मानते हैं। परिवार ही हमें सहयोग, संवेदनशीलता, अनुशासन, सम्मान और कर्तव्य का बोध कराता है। यही मूल्य आगे चलकर हमारे कार्यस्थल और समाज में भी परिलक्षित होते हैं।

    इसलिए मेरा आप सभी से आग्रह है कि हम अपने बच्चों में भी राष्ट्रप्रेम, पर्यावरण संरक्षण, अनुशासन, सेवा और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान के संस्कार विकसित करें। यही संस्कार विकसित भारत के मजबूत नागरिक तैयार करेंगे।

    अंत में, मैं लोक भवन परिवार के प्रत्येक सदस्य और उनके परिवारजनों के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ। आपके सहयोग, परिश्रम, निष्ठा और समर्पण के कारण ही हम सभी मिलकर लोक भवन की गरिमा और उत्कृष्टता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा पा रहे हैं।

    ईश्वर से मेरी प्रार्थना है कि आप सभी स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें, आपके परिवारों में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे तथा हम सभी इसी प्रकार एक परिवार की भावना के साथ आगे बढ़ते रहें।

    आप सभी को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

    बहुत-बहुत धन्यवाद।

    जय हिन्द।
    जय उत्तराखण्ड।