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    02-06-2026:तेलंगाना राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का संबोधन

    प्रकाशित तिथि : जून 2, 2026

    जय हिन्द!

    आज का दिन भारतीय लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता और हमारी साझी सांस्कृतिक चेतना का एक पावन पर्व है। वीरभूमि उत्तराखण्ड की देवभूमि से, हिमालय की ऊँची चोटियों और पवित्र नदियों की ओर से, मैं तेलंगाना के स्थापना दिवस पर आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।

    तेलंगाना केवल एक राज्य नहीं, बल्कि गौरवशाली इतिहास, समृद्ध संस्कृति, अद्भुत प्रतिभा और अथक परिश्रम की जीवंत पहचान है। इसकी भूमि वीरता, ज्ञान और नवाचार की प्रेरणादायी गाथाओं से भरी हुई है। यहाँ की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संपदा और कर्मशील जनशक्ति पूरे राष्ट्र को नई ऊर्जा प्रदान करती है।

    आज का यह अवसर हमें स्मरण कराता है कि भारत केवल राज्यों का समूह नहीं है, बल्कि एक जीवंत राष्ट्रीय चेतना है। हमारे शास्त्रों ने राष्ट्र को माता का स्वरूप माना है। इसलिए हमारा सर्वाेच्च संकल्प सदैव “राष्ट्र सर्वाेपरि” होना चाहिए।

    उत्तराखण्ड और तेलंगाना भौगोलिक रूप से भले ही दूर हों, परन्तु हमारे हृदयों में धड़कने वाला राष्ट्रप्रेम एक ही है। हमारी आकांक्षाएँ एक हैं। हमारे सपने एक हैं। भारत की एकता, अखंडता और समृद्धि ही हमारा साझा लक्ष्य है। जब तक हमारे भीतर राष्ट्र प्रथम का भाव जीवित रहेगा, तब तक भारत की प्रगति को कोई शक्ति रोक नहीं सकती।

    आज का यह आयोजन “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना का सशक्त प्रतीक है। उत्तराखण्ड द्वारा तेलंगाना के स्थापना दिवस का उत्सवपूर्वक आयोजन हमारी सांस्कृतिक एकात्मता का जीवंत प्रमाण है। हमारी भाषाएँ भिन्न हो सकती हैं, वेशभूषाएँ अलग हो सकती हैं, लेकिन हमारी आत्मा एक है। यही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। यही हमारी पहचान है।

    इस ऐतिहासिक अवसर पर हम लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं। उनकी अद्भुत दूरदर्शिता, दृढ़ इच्छाशक्ति और अटूट राष्ट्रभक्ति ने हैदराबाद रियासत के भारतीय संघ में विलय का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने सैकड़ों रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत की नींव रखी। आज भी उनका जीवन हमें राष्ट्र की एकता के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।

    राज्यों के स्थापना दिवस को पूरे देश के लोक भवनों में मनाने की अभिनव परंपरा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। इस पहल ने सहकारी संघवाद को नई शक्ति दी है। इसने राज्यों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत बनाया है। यह पहल हमें सिखाती है कि किसी एक राज्य की उपलब्धि, पूरे भारत की उपलब्धि है।

    यदि हम तेलंगाना और उत्तराखण्ड को देखें, तो दोनों राज्यों की अपनी-अपनी विशिष्ट पहचान है। उत्तराखण्ड आध्यात्मिकता, योग, हिमालय और गंगा-यमुना के उद्गम की भूमि है। वहीं तेलंगाना ऐतिहासिक वैभव, काकतीय संस्कृति, चारमीनार की भव्यता और समृद्ध वन्य जीवन का गौरवशाली केंद्र है। दोनों राज्यों की यह विविधता भारत की शक्ति है। यह हमारी अमूल्य धरोहर है, जिसे हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।

    हमारा संबंध केवल संस्कृति का नहीं, बल्कि वीरता और त्याग का भी है। तेलंगाना की धरती ने अनेक महान योद्धाओं और जननायकों को जन्म दिया है। वहीं उत्तराखण्ड ने सदैव राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा के लिए वीर सैनिक दिए हैं। यह आयोजन दोनों राज्यों की उसी गौरवशाली परंपरा का संगम है। यह शौर्य और संस्कार के मिलन का उत्सव है।

    आज का युग ज्ञान, विज्ञान और तकनीक का युग है। तेलंगाना विशेषकर हैदराबाद ने सूचना प्रौद्योगिकी, नवाचार, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई है। यहाँ के युवा भारत की प्रतिभा का विश्वभर में परचम लहरा रहे हैं।

    मेरा विश्वास है कि उत्तराखण्ड और तेलंगाना के युवाओं के बीच ज्ञान, कौशल और नवाचार का आदान-प्रदान और बढ़ना चाहिए। स्टार्टअप, अनुसंधान और उद्यमिता के क्षेत्र में दोनों राज्य मिलकर नए आयाम स्थापित कर सकते हैं। युवा शक्ति ही विकसित भारत की सबसे बड़ी पूंजी है।

    हमें यह सदैव स्मरण रखना होगा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश का प्रत्येक राज्य सशक्त और समृद्ध बनेगा। तेलंगाना की प्रगति भारत की प्रगति है। उत्तराखण्ड की सफलता भारत की सफलता है। जब देश का हर क्षेत्र आगे बढ़ेगा, तभी भारत पुनः विश्व मंच पर जगद्गुरु के रूप में प्रतिष्ठित होगा।

    तेलंगाना राज्य स्थापना दिवस का यह आयोजन, उस आत्मीय भाव का प्रकटीकरण है जो पूरे देश को एक परिवार मानता है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की यही भावना भारतीय संस्कृति का मूल आधार है। हम सब एक ही भारत माता की संतान हैं। एक-दूसरे की उन्नति में ही हमारी सामूहिक उन्नति निहित है।

    भाइयों और बहनों,

    भौगोलिक दूरियाँ कभी भी हृदयों की निकटता को कम नहीं कर सकतीं। उत्तराखण्ड और तेलंगाना, दोनों अखंड भारत की सुदृढ़ नींव के दो मजबूत स्तंभ हैं। इस नींव को हमारे स्वतंत्रता सेनानियों, महापुरुषों और ऋषियों ने अपने त्याग, तप और बलिदान से निर्मित किया है।

    आइए, इस पावन अवसर पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि अपनी क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करते हुए हम राष्ट्रहित को सर्वाेपरि रखेंगे। हम “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को अपने जीवन में उतारेंगे। हम विकसित भारत के निर्माण में अपना पूर्ण योगदान देंगे।

    मैं तेलंगाना के समस्त भाई-बहनों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करता हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि तेलंगाना आने वाले वर्षों में राष्ट्र निर्माण की यात्रा में नए कीर्तिमान स्थापित करता रहेगा और भारत की प्रगति को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाता रहेगा।

    आप सभी को पुनः स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।

    जय हिन्द! जय उत्तराखण्ड! जय तेलंगाना!