10-05-2026:गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर, लैंसडाउन में आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन
जय हिन्द!
आदरणीय वरिष्ठ सैन्य अधिकारीगण, वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों एवं वीर माताओं, देवभूमि उत्तराखण्ड की गौरवशाली जनता, उपस्थित सभी सम्मानित अतिथिगण!
आज गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर, लैंसडाउन की इस पुण्यभूमि पर उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत गर्व, सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव का विषय है। यह केवल एक सैन्य संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, त्याग और शौर्य की वह जीवंत परंपरा है जिसने पीढ़ियों से भारत माता की रक्षा हेतु अद्वितीय योगदान दिया है।
गढ़वाल राइफल्स का इतिहास केवल युद्धों का इतिहास नहीं है, यह विश्वास, वीरता और राष्ट्रनिष्ठा की ऐसी अमिट गाथा है जिसने देश की सीमाओं से लेकर अंतर्राष्ट्रीय शांति अभियानों तक अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। वर्ष 1887 से लेकर आज तक इस रेजिमेंट ने हर चुनौती के समय राष्ट्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का कार्य किया है।
साथियों,
एक सैनिक के रूप में मैंने स्वयं यह अनुभव किया है कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते, बल्कि प्रशिक्षण, मनोबल, तकनीकी दक्षता और राष्ट्र के प्रति समर्पण से जीते जाते हैं। आज का युद्धक्षेत्र तेजी से बदल रहा है। डवकमतद ॅंतंितम अब केवल पारंपरिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। ।तजपपिबपंस प्दजमससपहमदबमए क्तवदम ॅंतंितमए ब्वनदजमत.क्तवदम ैलेजमउेए ब्लइमत ैमबनतपजल और त्मंस.ज्पउम ैनतअमपससंदबम जैसे आयाम आधुनिक सैन्य रणनीति का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।
मुझे प्रसन्नता है कि गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर समय की इस आवश्यकता को समझते हुए अपने प्रशिक्षण ढांचे को निरंतर आधुनिक बना रहा है। यहाँ क्तवदम ज्तंपदपदहए ।नजवउंजपब ैबवतपदह ैलेजमउए ब्वउइंज ॅमंचवद ज्तंपदपदह ैपउनसंजवतए ज्मबीदपबंस म्दहंहमउमदज ैपउनसंजवत ैलेजमउ तथा ज्ंबजपबंस ब्वउइंज ब्ंेनंसजल ब्ंतम जैसे अत्याधुनिक प्रशिक्षण माध्यमों का समावेश किया गया है, जो हमारे जवानों को भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए सक्षम और सजग बना रहे हैं।
साथियों,
आज विश्व जिस प्रकार भ्लइतपक ॅंतंितम और ।ेलउउमजतपब ज्ीतमंजे के दौर से गुजर रहा है, उसमें सीमा सुरक्षा के साथ-साथ तकनीकी श्रेष्ठता भी उतनी ही आवश्यक हो गई है। हमारे जवानों को केवल रणभूमि का योद्धा नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी-सक्षम रणनीतिक सैनिक बनना होगा। मुझे विश्वास है कि गढ़वाल राइफल्स इस दिशा में एक आदर्श मॉडल बनकर उभर रहा है।
आज विश्व एक ऐसे संक्रमण काल से गुजर रहा है जहाँ युद्ध की परिभाषा निरंतर बदल रही है। आने वाले समय में केवल सीमाओं पर तैनात सैनिक ही नहीं, बल्कि डेटा, तकनीक, ।तजपपिबपंस प्दजमससपहमदबमए ैचंबम ब्ंचंइपसपजल और क्तवदम क्वउपदंदबम भी किसी राष्ट्र की सामरिक शक्ति तय करेंगे।
भारत ने “आत्मनिर्भर भारत” के संकल्प के साथ रक्षा क्षेत्र में जो तेज प्रगति की है, वह अत्यंत प्रेरणादायी है। स्वदेशी क्तवदम ैलेजमउेए ब्वनदजमत.क्तवदम ज्मबीदवसवहलए ।कअंदबमक ैनतअमपससंदबम च्संजवितउे और प्दकपहमदवने क्ममिदबम डंदनंिबजनतपदह आज भारत को नई सामरिक ऊँचाइयों की ओर ले जा रहे हैं। मुझे विश्वास है कि भारतीय सेना का अनुशासन और भारत की वैज्ञानिक क्षमता मिलकर भविष्य की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करेगी।
मुझे यह जानकर भी अत्यंत संतोष हुआ कि यह केंद्र केवल सैन्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। वर्ष 2003 में इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार, वर्ष 2007 में ठमेज डपसपजंतल ैजंजपवद ।ूंतक तथा हाल के वर्षों में ठमेज ब्समंदए ळतममद ंदक ैनेजंपदंइसम ैजंजपवद जैसे सम्मान इस संस्थान की उत्कृष्ट कार्य संस्कृति को प्रमाणित करते हैं।
लैंसडाउन स्टेशन का सौंदर्यीकरण, शिंगाल क्लॉक टॉवर, ॅंत डमउवतपंसेए भ्पही डंेज थ्संहेए ळंनतंअ ैंपदंदप स्ंाम तथा सैन्य विरासत से जुड़े स्मारकों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का अत्यंत प्रेरणादायी प्रयास है।
साथियों,
किसी भी सेना की वास्तविक शक्ति केवल उसके सैनिक नहीं होते, बल्कि उनके परिवार, पूर्व सैनिक, वीर नारियाँ और वे माताएँ होती हैं जिन्होंने अपने पुत्रों को राष्ट्र रक्षा के लिए समर्पित किया। श्च्तवरमबज ै।ज्।ज् डपसंचश्ए डमहं म्ैड त्ंससलए ब्वउउवद ैमतअपबम ब्मदजतमए ब्ैक् सुविधाओं का विस्तार तथा वीर नारियों एवं पूर्व सैनिकों के कल्याण हेतु किए जा रहे प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं।
किसी राष्ट्र की कृतज्ञता का सबसे बड़ा प्रमाण यह होता है कि वह अपने सैनिकों और उनके परिवारों का कितना सम्मान करता है। हमारे पूर्व सैनिकों ने अपने जीवन के स्वर्णिम वर्ष राष्ट्र की सुरक्षा को समर्पित किए हैं। वहीं वीर नारियों और वीर माताओं ने जिस धैर्य और साहस का परिचय दिया है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर द्वारा उनके कल्याण, संवाद और सम्मान हेतु किए जा रहे प्रयास वास्तव में संवेदनशील और अनुकरणीय हैं।
एक सैनिक का जीवन केवल वर्दी पहनने तक सीमित नहीं होता। वह त्याग, संयम, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण की जीवनशैली है। सेना हमें सिखाती है कि नेतृत्व पद से नहीं, उदाहरण से स्थापित होता है। जब एक अधिकारी कठिन परिस्थितियों में अपने जवानों के साथ खड़ा रहता है, तभी विश्वास जन्म लेता है और वही विश्वास किसी भी सेना की सबसे बड़ी शक्ति बनता है। भारतीय सेना की यही परंपरा उसे विश्व की सबसे सम्मानित सेनाओं में स्थान दिलाती है।
मुझे विशेष प्रसन्नता है कि महिला सशक्तीकरण की दिशा में भी रेजिमेंटल सेंटर प्रभावी कार्य कर रहा है। ।तउल ैापसस ज्तंपदपदह ब्मदजतमए टवबंजपवदंस ज्तंपदपदहए थ्लनदसप ैीवच तथा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने जैसे प्रयास आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूत करते हैं।
इसके साथ ही बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु ब्ीपसकतमद ैीववजपदह ब्सनइए भ्वइइल ब्सनइ तथा ैनचमत-100 जैसी शैक्षणिक पहलें यह सिद्ध करती हैं कि यह संस्थान केवल वर्तमान की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माण का भी कार्य कर रहा है।
उत्तराखण्ड की धरती सदैव से वीरता और राष्ट्रसेवा की तपोभूमि रही है। यहाँ के पर्वतों ने केवल नदियों को जन्म नहीं दिया, बल्कि ऐसे वीर सपूत भी दिए हैं जिन्होंने सीमाओं पर अपने साहस और बलिदान से भारत का गौरव बढ़ाया है। गढ़वाल और कुमाऊँ की सैन्य परंपरा केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यहाँ का युवा जब सेना की वर्दी पहनता है तो उसके साथ केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि पीढ़ियों की गौरवशाली विरासत जुड़ जाती है। गढ़वाल राइफल्स उसी परंपरा का उज्ज्वल प्रतीक है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी सैन्य विरासत को आधुनिक तकनीकी क्षमता के साथ जोड़ें। ध्यान रखें कि ज्तंकपजपवद ंदक ज्मबीदवसवहलए यही भविष्य की सबसे बड़ी सामरिक शक्ति होगी। हमारे सैनिकों का साहस और हमारी तकनीकी क्षमता, दोनों मिलकर भारत को सुरक्षित, सक्षम और आत्मविश्वासी राष्ट्र बनाएँगे।
प्यारे युवा साथियों,
आज भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र है। यह युवा शक्ति यदि अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और तकनीकी दक्षता से जुड़ जाए तो भारत को विश्व नेतृत्व की नई ऊँचाइयों तक पहुँचने से कोई नहीं रोक सकता। सेना केवल सीमाओं की रक्षा नहीं करती, बल्कि युवाओं के चरित्र निर्माण का भी सबसे बड़ा विद्यालय है। गढ़वाल राइफल्स जैसे संस्थान युवाओं में राष्ट्र प्रथम की भावना को मजबूत करने का महान कार्य कर रहे हैं।
अंत में, मैं गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर के सभी अधिकारियों, जवानों, प्रशिक्षकों और कर्मचारियों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। साथ ही यहाँ उपस्थित सभी पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और वीर माताओं को राष्ट्र की ओर से नमन करता हूँ।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि गढ़वाल राइफल्स आने वाले समय में भी अपने आदर्श वाक्य, अपने अनुशासन और अपने शौर्य से देश का मस्तक सदैव ऊँचा रखेगी।
जय हिन्द!
जय उत्तराखण्ड!