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    01-05-2026 : लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), मसूरी में 32वें संयुक्त नागरिक-सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम समापन समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि : मई 1, 2026

    जय हिन्द!

    मंचासीन लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के निदेशक श्री श्रीराम तरणीकांति जी, अकादमी के कोर्स मेंटर्स, उपस्थित सभी अधिकारीगण, इस 32वें संयुक्त नागरिक-सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम के ऊर्जावान और प्रतिभाशाली प्रतिभागियों! आप सभी को मेरा सादर अभिवादन।

    आज इस गरिमामय अवसर पर राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित देश के दो सबसे मजबूत स्तंभों- हमारी ब्यूरोक्रेसी और हमारी सेना को एक साथ इस प्रांगण में देखकर, मुझे एक आत्मिक प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है।

    आध्यात्मिक चेतना और वीर सैनिकों की कर्मभूमि देवभूमि उत्तराखण्ड की इस पवित्र तपोभूमि और माँ भारती के सच्चे सपूत श्रद्धेय लाल बहादुर शास्त्री जी के नाम से सुशोभित इस गौरवशाली अकादमी में, मैं आप सभी का हृदय से अभिनंदन करता हूँ।

    एक सैनिक का अदम्य साहस और एक प्रशासक की रणनीतिक सूझबूझ, जब ये दोनों एक साथ मिलते हैं, तो राष्ट्र की सुरक्षा और प्रगति का एक ऐसा अभेद्य कवच तैयार होता है जिसे दुनिया की कोई ताकत भेद नहीं सकती। मैं आप सभी को इस गहन और अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पार करने पर हार्दिक बधाई देता हूँ। यही ‘नागरिक-सैन्य समन्वय’ शक्ति का संतुलन और सफलता का सूत्र है जो आज के इस कार्यक्रम की आत्मा है।

    सेना में बिताए मेरे चार दशक इस बात के साक्षी हैं कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि नेतृत्व और अटूट समन्वय से जीते जाते हैं। दुर्गम सीमाओं पर मैंने अनुभव किया है कि बिना समन्वय के बड़े से बड़ा सामर्थ्य भी अधूरा है, जबकि साझा संकल्प से सीमित संसाधनों में भी असाधारण विजय संभव है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी साझा उद्देश्य और संस्थागत समन्वय को राष्ट्रशक्ति में बदलने का एक दूरदर्शी प्रयास है।

    21वीं सदी की जटिल चुनौतियाँ किसी एक संस्था या सेवा से हल नहीं हो सकतीं। सशस्त्र बल अनुशासन, पराक्रम और त्वरित निर्णय क्षमता के प्रतीक हैं, और सिविल सेवाएँ संवेदनशीलता, नीति-निर्माण और जन-उत्तरदायित्व की धुरी हैं। जब ये दोनों एक साथ कार्य करते हैं, तो एक ऐसी संतुलित, प्रभावी और उत्तरदायी शासन प्रणाली का निर्माण होता है, जो राष्ट्र को सुरक्षा, स्थायित्व और प्रगति प्रदान करती है। यह कार्यक्रम एक मानसिकता-एक दृष्टिकोण का निर्माण है, जो आपको जीवन भर मार्गदर्शन देगा।

    आज राष्ट्रीय सुरक्षा केवल भौगोलिक सीमाओं की पहरेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साइबर स्पेस, डेटा और हाइब्रिड वॉरफेयर जैसी अदृश्य चुनौतियों के बीच एक बहुआयामी महासमर है। युद्ध की परिभाषाएँ बदल चुकी हैं, इसलिए ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole-of-Government) का दृष्टिकोण अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि जमीनी अनिवार्यता है। नागरिक और सैन्य बलों के बीच का निर्बाध समन्वय ही वह धुरी है, जिस पर हमारे सशक्त राष्ट्र का भविष्य टिका है। आज युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि डेटा, विचार और तकनीक के क्षेत्र में भी लड़े जा रहे हैं।

    आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आज हमारा देश ‘विकसित भारत 2047’ के विराट संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमें यह समझना होगा कि एक सुरक्षित, स्थिर और सुदृढ़ राष्ट्र ही विकास के इस गगनचुंबी महल की नींव रख सकता है। जब आंतरिक और बाह्य सुरक्षा चाक-चौबंद होती है, तभी आर्थिक नीतियां फलती-फूलती हैं, तभी समाज का अंतिम व्यक्ति सशक्त होता है। समाज के हाशिए पर खड़े व्यक्ति तक विकास और कल्याणकारी योजनाएं पहुंचाना, समावेशी विकास सुनिश्चित करना- यही राष्ट्र-विरोधी और विघटनकारी ताकतों की जड़ों पर प्रहार करने का सबसे सटीक उपाय है।

    समग्र सुरक्षा के दृष्टिकोण से हमारे सीमावर्ती क्षेत्रों की भूमिका सर्वाेपरि है। ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के माध्यम से इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी का विस्तार केवल विकास का माध्यम नहीं, बल्कि जन-भागीदारी से राष्ट्रीय सुरक्षा की पहली पंक्ति को मजबूत करने का एक सामरिक कदम है। सीमांत क्षेत्रों में बसावट को सुरक्षित रखना और वहां के नागरिकों को सशक्त बनाना, नागरिक प्रशासन और सैन्य नेतृत्व, दोनों की साझी और गंभीर जिम्मेदारी है।

    आज हमारा क्षेत्रीय परिवेश हाइब्रिड चुनौतियों और सामरिक सजगता की परीक्षा ले रहा है। चाहे सीमा पार पाक प्रायोजित आतंकवाद हो, या उत्तरी सीमाओं पर बदलती चीन के साथ सामरिक परिस्थितियाँ, भारत की नीति स्पष्ट हैः ‘संयम और संकल्प’। हम शांति के पक्षधर हैं, किंतु अपनी संप्रभुता की रक्षा हेतु हमारी शक्ति अभेद्य है। ‘शक्ति के साथ शांति’ के सिद्धांत पर चलते हुए हमने बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर को अभूतपूर्व गति देते हुए सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण से वैश्विक मंच पर भारत की सामरिक प्रतिष्ठा को एक नई ऊँचाई भी प्रदान की है। ऐसे परिवेश में नागरिक और सैन्य समन्वय केवल आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अनिवार्यता है।

    आज राष्ट्रीय सुरक्षा के परिदृश्य में तकनीक सबसे बड़ा गेम-चेंजर है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, स्पेस-टेक्नोलॉजी और आधुनिक डेटा प्रणालियों के बिना भविष्य की सुरक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती। जो राष्ट्र इन तकनीकों को समझेगा, अपनाएगा और नियंत्रित करेगा- वही भविष्य का नेतृत्व करेगा। हमें राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र में ऐसी स्वदेशी तकनीक और एआई को अपनाना होगा जो आधुनिक होने के साथ-साथ नैतिक मूल्यों पर आधारित हो।

    आज के डिजिटल युग में ‘डेटा संप्रभुता’ हमारी सीमाओं की संप्रभुता जितनी ही महत्वपूर्ण है। हमारे क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले साइबर हमले एक साइलेंट वॉरफेयर का हिस्सा हैं। इनका मुकाबला करने के लिए नागरिक और सैन्य तंत्र को एक ही फ्रीक्वेंसी पर काम करना होगा। इन तकनीकी परिवर्तनों के साथ ही भारत एक व्यापक सामरिक परिवर्तन के दौर से भी गुजर रहा है।

    किसी भी स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना उसकी सामरिक स्वायत्तता के लिए अपरिहार्य है। आज भारत आत्मनिर्भरता के मार्ग पर तेजी से अग्रसर है। हमारी सैन्य शक्ति आधुनिक हो रही है, हमारी तकनीकी क्षमता बढ़ रही है, और हमारी रणनीतिक सोच परिपक्व हो रही है। भारत अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला राष्ट्र नहीं, बल्कि दिशा देने वाला राष्ट्र बन रहा है।

    ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण को बल देते हुए हम एक आयातक देश से निर्यातक देश बन रहे हैं। आज जब दुनिया अस्थिरता और भू-राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रही है, भारत एक मजबूत, शांतिप्रिय और ‘विश्व-मित्र’ के रूप में ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर उभरा है। विश्व पटल पर भारत के इस बढ़ते कद के पीछे हमारी मजबूत अर्थव्यवस्था, हमारा सुदृढ़ नेतृत्व और आप जैसे अनुशासित और समर्पित अधिकारियों द्वारा संचालित हमारा सुरक्षा तंत्र है।

    उत्तराखण्ड जैसे हिमालयी राज्यों के संदर्भ में बात करें तो जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक नई और गंभीर चुनौती बनकर उभरी हैं। आपदा के समय में नागरिक प्रशासन की नीतियां और सैन्य बलों की त्वरित कार्यक्षमता का जो उत्कृष्ट संगम देवभूमि में देखने को मिलता है, वह पूरे देश के लिए एक मॉडल है। इस संयुक्त तंत्र को और अधिक वैज्ञानिक, पूर्वानुमान आधारित और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

    आप सभी केवल अधिकारी नहीं हैं, आप राष्ट्र के भविष्य के नेतृत्वकर्ता हैं। नेतृत्व का अर्थ केवल आदेश देना नहीं, बल्कि प्रेरित करना है, केवल निर्णय लेना नहीं, बल्कि सही निर्णय लेना है। और यह तभी संभव है जब आपका आचरण नैतिकता, पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा पर आधारित हो।

    मैं इस अवसर पर आप सभी से तीन संकल्प लेने का आग्रह करता हूँ- पहलाः समन्वय को अपनी कार्यशैली का अभिन्न अंग बनाइए, साझा सफलता को स्वीकारिए और श्रेय बाँटिए। दूसराः मतभेदों को संवाद और परिपक्वता से सुलझाइए, सार्वजनिक असहमति को संयमित रखिए। तीसराः इस कार्यक्रम में बने संबंधों को जीवित रखिए! ये संबंध ही भविष्य में आपके सबसे बड़े रणनीतिक साधन सिद्ध होंगे।

    मेरे युवा साथियों, आप उस देश के अधिकारी हैं जिसके कण-कण में शौर्य और त्याग की गाथाएं रची बसी हैं। हमारी प्रेरणा वे अमर बलिदानी हैं जिन्होंने मातृभूमि के एक-एक इंच की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आपका हर निर्णय, आपका हर कदम केवल एक फाइल का हिस्सा या एक सामरिक आदेश मात्र नहीं होता, वह 140 करोड़ भारतीयों के सुरक्षित भविष्य का दस्तावेज होता है। आपके निर्णयों में केवल तर्क नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण की धड़कन भी होनी चाहिए।

    हम “विकसित भारत 2047” के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यह एक राष्ट्रीय चेतना है, एक सामूहिक जिम्मेदारी है। इस संकल्प को साकार करने का दायित्व आप जैसे सक्षम, समर्पित और राष्ट्रनिष्ठ अधिकारियों के कंधों पर है। आप अपने कार्यक्षेत्रों में जहां भी जाएं, जिस भी मोर्चे पर तैनात हों, बस एक मूल मंत्र ‘‘राष्ट्र प्रथम और राष्ट्र ही सर्वाेपरि’’ को अपने हृदय में सदैव प्रज्वलित रखिएगा।

    मुझे पूर्ण विश्वास है कि लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी से प्राप्त यह ज्ञान और यह साझा दृष्टिकोण, आपको माँ भारती की सेवा में और अधिक सशक्त, संवेदनशील और संकल्पवान बनाएगा। आपके संकल्प, आपका समन्वय और आपकी राष्ट्रनिष्ठा ही उस सशक्त भारत की आधारशिला है, जिसकी परिकल्पना हम ‘विकसित भारत 2047’ के रूप में कर रहे हैं। आइए! हम सब मिलकर एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें, जो सुरक्षित भी हो, समृद्ध भी हो, और विश्व का मार्गदर्शक भी हो।

    आप सभी के उज्ज्वल भविष्य, यशस्वी जीवन और राष्ट्र सेवा के इस महान पथ पर आपकी निरंतर सफलता के लिए मेरी ओर से अनंत शुभकामनाएं!

    वन्देमातरम्! जय हिन्द! जय भारत!