31-07-2026 : उत्तराखण्ड के उच्च शिक्षा संस्थानों के विद्यार्थियों के लिए ‘‘एआई फॉर ऑल’’ पाठ्यक्रमों के शुभारम्भ के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन
जय हिन्द!
आदरणीय प्रो. वी. कामकोटी जी, डायरेक्टर, आईआईटी मद्रास, प्रो. सुरेखा डंगवाल जी, कुलपति, दून विश्वविद्यालय, प्रो. आर. सारथी जी, SWAYAM Plus के राष्ट्रीय संयोजक, सभी विशिष्ट अतिथि, शिक्षाविद्, प्राध्यापकगण, शोधार्थी तथा मेरे प्रिय विद्यार्थियों!
आज का यह अवसर केवल ‘‘एआई फॉर ऑल’’ पाठ्यक्रमों के शुभारम्भ का नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की उच्च शिक्षा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इनोवेशन और वैश्विक ज्ञान-आधारित भविष्य से जोड़ने वाले एक नए युग का शुभारम्भ है।
यह अभिनव पहल विकसित उत्तराखण्ड और विकसित भारत के संकल्प को नई गति प्रदान करेगी तथा हमारे युवाओं को भविष्य की तकनीकों का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि उनका सृजनकर्ता बनने की प्रेरणा देगी।
आज मुझे अत्यन्त प्रसन्नता है कि दून विश्वविद्यालय की पहल तथा आईआईटी मद्रास, प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन और SWAYAM Plus के सहयोग से उत्तराखण्ड के विद्यार्थियों के लिए ‘‘एआई फॉर ऑल’’ पाठ्यक्रमों का शुभारम्भ हो रहा है।
यह SWAYAM Plus, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका संचालन आईआईटी मद्रास द्वारा किया जा रहा है। गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुख और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा को देश के प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुँचाना इसका सराहनीय उद्देश्य है। शिक्षा तभी सार्थक होती है, जब वह ज्ञान के साथ आत्मविश्वास, कौशल, नवाचार और आत्मनिर्भरता का भी विकास करे।
मैं प्रो. सुरेखा डंगवाल जी के सतत प्रयासों तथा प्रो. वी. कामकोटी जी के प्रेरक सहयोग का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ। यह साझेदारी उत्तराखण्ड के युवाओं को देश के सर्वाेत्तम ज्ञान-संसाधनों से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। मुझे विश्वास है कि यह सहयोग आने वाले समय में उच्च शिक्षा के नए मानदण्ड स्थापित करेगा।
प्रिय साथियांे,
मेरा मानना है कि एआई केवल एक नई तकनीक नहीं, बल्कि 21वीं सदी के परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति है। जिस प्रकार औद्योगिक क्रान्ति ने उत्पादन की दिशा बदली और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने विश्व को जोड़ा, उसी प्रकार एआई शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, रक्षा, प्रशासन, न्याय व्यवस्था, रिसर्च और इनोवेशन – हर क्षेत्र की कार्यशैली को बदलने जा रहा है।
मेरा दृढ़ विश्वास है कि आने वाले समय में एआई केवल तकनीकी परिवर्तन का माध्यम नहीं होगा, बल्कि ज्ञान, अर्थव्यवस्था, सुशासन, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानव विकास की दिशा निर्धारित करने वाली परिवर्तनकारी शक्ति सिद्ध होगा। इसलिए जो समाज एआई को समझेगा, अपनाएगा और उसका उत्तरदायित्वपूर्ण तथा नैतिक उपयोग करेगा, वही भविष्य का नेतृत्व करेगा।
हमें यह भी स्मरण रखना होगा कि तकनीक का वास्तविक मूल्य तभी है, जब उसके केन्द्र में मानवीय संवेदनाएँ, नैतिकता, पारदर्शिता और राष्ट्रहित हो। यदि तकनीक संवेदनाओं से जुड़ी होगी तो विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी, और यदि वह केवल शक्ति का साधन बन जाएगी तो असंतुलन भी उत्पन्न कर सकती है। इसलिए हमारा एआई भी मानव-केंद्रित, उत्तरदायी और लोककल्याणकारी होना चाहिए।
मेरी सोच है कि ‘‘एआई मानव बुद्धि का विकल्प नहीं, बल्कि मानव क्षमता का विस्तार है।’’ इसका उद्देश्य मनुष्य का स्थान लेना नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा, सृजनशीलता, निर्णय क्षमता और कार्यकुशलता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाना है। हमें ऐसी तकनीक विकसित करनी है जो मानवता की सेवा करे, समाज की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करे और राष्ट्र निर्माण की गति को और अधिक सशक्त बनाए।
देवभूमि उत्तराखण्ड के युवा केवल प्रतिभाशाली ही नहीं, बल्कि अनुशासित, परिश्रमी, साहसी और चुनौतियों में अवसर खोजने वाले युवा हैं। हिमालय ने उन्हें धैर्य दिया है, प्रकृति ने संवेदनशीलता और हमारी संस्कृति ने जीवन मूल्यों का बोध कराया है। यदि इस युवा शक्ति को आधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय शिक्षा का अवसर मिले, तो वह वैश्विक मंच पर नई पहचान स्थापित कर सकती है।
उत्तराखण्ड एक सीमांत एवं सामरिक दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण राज्य भी है। इसलिए एआई जैसी उन्नत तकनीकों में हमारे युवाओं की दक्षता आपदा प्रबंधन, सीमांत विकास, सुशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगी।
‘‘एआई फॉर ऑल’’ अभियान इसी दूरदर्शी सोच का सशक्त उदाहरण है। इसके अंतर्गत पाइथन आधारित एआई एवं मशीन लर्निंग, शिक्षकों के लिए एआई, भौतिकी, रसायन विज्ञान, अकाउंटिंग तथा इंजीनियरिंग जैसे विविध विषयों में एआई आधारित पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ये केवल पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य के भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप नई पीढ़ी को तैयार करने वाले परिवर्तनकारी अभियान हैं।
मुझे प्रसन्नता है कि इस पहल के माध्यम से हमारे विद्यार्थी एआई के साथ-साथ डेटा विज्ञान, साइबर सुरक्षा, फिनटेक, सेमीकंडक्टर, सतत विकास तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण अध्ययन कर सकेंगे।
आने वाले वर्षों में यही क्षेत्र वैश्विक अर्थव्यवस्था और रोजगार के प्रमुख आधार बनने वाले हैं। आज का विद्यार्थी यदि इन क्षेत्रों में दक्ष होगा, तो वह केवल रोजगार प्राप्त करने वाला नहीं, बल्कि रोजगार के नए अवसरों का सृजन करने वाला भी बनेगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य शिक्षा को ज्ञान के साथ स्किल, रिसर्च, इनोवेशन, स्टार्टअप और प्रॉब्लम सॉल्विंग की क्षमता से जोड़ना है। आज केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। डिग्री अवसर देती है, किन्तु नेतृत्व के लिए स्किल आवश्यक है। इसलिए भविष्य उसी का होगा, जो निरन्तर सीखने, स्वयं को अद्यतन रखने और नवाचार करने की क्षमता विकसित करेगा।
इस पहल का सबसे बड़ा सामाजिक पक्ष यह है कि यह शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करती है। अब पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली, बागेश्वर, चम्पावत अथवा रुद्रप्रयाग का विद्यार्थी भी वही गुणवत्तापूर्ण अध्ययन कर सकेगा, जो देश के अग्रणी संस्थानों में उपलब्ध है। डिजिटल शिक्षा ने भौगोलिक दूरियों को समाप्त कर दिया है। अब प्रतिभा का मूल्यांकन स्थान से नहीं, बल्कि क्षमता, परिश्रम और नवाचार से होगा।
आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया तथा विकसित भारत-2047 के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री जी ने विश्वास व्यक्त किया है कि 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक है। यह केवल प्रेरक कथन नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की असीम संभावनाओं में व्यक्त राष्ट्रीय विश्वास है।
आज हमारे युवाओं का दायित्व है कि वे इस विश्वास को अपनी उपलब्धियों में परिवर्तित करें। मुझे पूर्ण विश्वास है कि एआई, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उत्तराखण्ड देश का अग्रणी राज्य बन सकता है।
लोक भवन भी निरन्तर इस दिशा में कार्य कर रहा है। हमने विश्वविद्यालयों में रिसर्च, इनोवेशन एवं स्टार्टअप की संस्कृति तथा एआई आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के अनेक प्रयास किए हैं। मेरा सपना है कि देवभूमि उत्तराखण्ड ज्ञानभूमि, अनुसंधानभूमि, नवाचारभूमि और एआई आधारित उत्कृष्टता की भूमि के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करे।
प्रिय विद्यार्थियों,
मैं आप सभी से विशेष आग्रह करता हूँ कि इन पाठ्यक्रमों को केवल प्रमाणपत्र प्राप्त करने का माध्यम न समझें। इन्हें सीखने, प्रयोग करने, अनुसंधान करने और समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने का अवसर मानें।
कृषि की उत्पादकता बढ़ाने से लेकर आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सुशासन तक हर क्षेत्र में एआई नई संभावनाएँ लेकर आया है। तकनीक का श्रेष्ठ उपयोग वही है, जो मानव जीवन को अधिक सरल, सुरक्षित, समृद्ध और मानवीय बनाए। मैं चाहता हूँ कि उत्तराखण्ड का प्रत्येक विद्यार्थी इन संभावनाओं का नेतृत्व करे।
मैं उत्तराखण्ड के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, महाविद्यालयों के प्राचार्यों तथा शिक्षकों से भी आग्रह करता हूँ कि वे अधिकाधिक विद्यार्थियों को इन पाठ्यक्रमों से जोड़ें। लोक भवन की ओर से भी सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को आवश्यक परामर्श जारी किया जाएगा, ताकि इस महत्त्वपूर्ण पहल का लाभ राज्य के प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुँच सके।
मैं आईआईटी मद्रास, प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन तथा SWAYAM Plus की पूरी टीम का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ। आपने उत्तराखण्ड के युवाओं की प्रतिभा पर विश्वास व्यक्त किया है। मुझे विश्वास है कि यह सहयोग भविष्य में और अधिक व्यापक होगा तथा हमारे विश्वविद्यालय राष्ट्रीय उत्कृष्टता के नए प्रतिमान स्थापित करेंगे।
मैं अपने उद्बोधन का समापन कठोपनिषद् के इस प्रेरक मंत्र से करना चाहूँगा-
‘‘उत्तिष्ठत। जाग्रत। प्राप्य वरान्निबोधत।’’
अर्थात् उठो, जागो और श्रेष्ठता प्राप्त होने तक निरन्तर आगे बढ़ते रहो। आज एआई के इस युग में यही मंत्र हमारे युवाओं का जीवन मंत्र होना चाहिए।
आइए, हम संकल्प लें कि ज्ञान को नवाचार से, नवाचार को राष्ट्र निर्माण से और राष्ट्र निर्माण को मानव कल्याण से जोड़ेंगे। उत्तराखण्ड का प्रत्येक युवा तकनीक का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसका सृजनकर्ता बने तथा एआई का उपयोग केवल अपने विकास के लिए नहीं, बल्कि मानवता, राष्ट्र और विश्व के कल्याण के लिए करे।
यही ‘‘एआई फॉर ऑल’’ की वास्तविक भावना है और यही विकसित उत्तराखण्ड तथा विकसित भारत की दिशा में हमारी सार्थक भागीदारी होगी।
इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ मैं उत्तराखण्ड के उच्च शिक्षा संस्थानों के विद्यार्थियों के लिए ‘‘एआई फॉर ऑल’’ पाठ्यक्रमों का औपचारिक शुभारम्भ करता हूँ।
वन्दे मातरम्! भारत माता की जय! जय हिन्द!