29-05-2026:असम रेजिमेंट के 7वें बैच के अग्निवीरों की पासिंग आउट परेड में, माननीय राज्यपाल महोदय का संबोधन
(तिथिः 29 मई, 2026)
जय हिन्द!
तगड़ा रहो!
मंच पर उपस्थित सभी वरिष्ठ सैन्य अधिकारीगण, जेसीओज, इंस्ट्रक्टर्स तथा देश के कोने-कोने से पधारे गौरवान्वित माता-पिता, आप सभी को मेरा सादर जय हिन्द!
आज के इस ऐतिहासिक अवसर पर अपने शौर्य, अनुशासन और संकल्प का परिचय देने वाले असम रेजिमेंट के 7वें बैच के जांबाज अग्निवीरों को विशेष शुभकामनाएँ। असम रेजिमेंट के मेरे जवानों – तगड़ा रहो!
आज शिलांग की इस खूबसूरत और पावन धरा पर, असम रेजिमेंट की इस भव्य एटेस्टेशन परेड में आपके समक्ष खड़े होकर मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। सच कहूं तो आज उत्तराखण्ड के राज्यपाल के रूप में नहीं, बल्कि इसी मातृ-रेजिमेंट के एक पुराने सैनिक के रूप में आपके बीच आकर मुझे अपनी ‘घर वापसी’ का एहसास हो रहा है।
वर्दी पर सजे इस ‘राइनो’ (त्ीपदव) के प्रतीक चिन्ह को जब भी मैं देखता हूँ, मेरी रगों में वही पुराना जोश दौड़ पड़ता है। मैंने स्वयं इस गौरवशाली रेजिमेंट में सेवाएं दी हैं और उप सेना प्रमुख के पद पर रहकर देश की सुरक्षा को बहुत करीब से देखा है। आज मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि आपका यह जोश, यह अनुशासन और यह शानदार कदमताल इस बात की गवाही है कि भारत माँ की सीमाएँ और भविष्य सुरक्षित हाथों में हैं।
मेरे युवा साथियों,
आज मैं जो कुछ भी हूँ, चाहे सेना में उप सेना प्रमुख के रूप में सेवा का अवसर मिला हो अथवा आज राज्यपाल के रूप में राष्ट्रसेवा का दायित्व, उसका बहुत बड़ा श्रेय मेरी इसी मातृ-रेजिमेंट को जाता है। असम रेजिमेंट ने मुझे केवल एक सैनिक नहीं बनाया, बल्कि इसके कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और उत्कृष्ट परंपराओं ने मेरे व्यक्तित्व को गढ़ा है। मैं पूरे गर्व और विनम्रता के साथ कहता हूँ कि मुझे अपनी इस गौरवशाली पलटन, इसके संस्कारों और इसके अद्वितीय शौर्य पर सदैव असीम गर्व रहेगा।
यह पूरा पूर्वाेत्तर का क्षेत्र केवल अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि अपनी अद्वितीय जनजातीय विरासत, कला, संस्कृति और जीवन मूल्यों के कारण भारत का एक अनमोल रत्न है। यहाँ की संस्कृति में प्रकृति के प्रति सम्मान, सादगी, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति कूट-कूट कर भरी हुई है, जिसे मैंने यहाँ अपनी सैन्य सेवाओं के दौरान निकटता से अनुभव किया है।
असम रेजिमेंट के वीरों ने सदैव इसी मिट्टी की खुशबू, इसकी विविधता और इसकी अस्मिता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया है। इस रेजिमेंट के योद्धाओं का इतिहास गवाह है कि जब भी देश पर संकट आया, इसके वीरों ने अपने अदम्य साहस और पराक्रम से दुश्मन के हौसले पस्त कर दिए। इस गौरवशाली विरासत का हिस्सा बनना आप सभी के लिए सौभाग्य की बात है।
मेरे युवा साथियों,
आज जब आपने पवित्र तिरंगे और अपनी रेजिमेंट के ध्वज को साक्षी मानकर राष्ट्र रक्षा की शपथ ली है, तो वास्तव में आपका एक नया जन्म हुआ है। आज के बाद आपकी कोई क्षेत्रीय या व्यक्तिगत पहचान नहीं है।
अब आपकी केवल एक ही जाति है – “भारतीय”। एक ही धर्म है – “राष्ट्रधर्म”। और एक ही पहचान है “भारतीय सैनिक”।
हमेशा याद रखिएगा! सैन्य जीवन में ‘राष्ट्र प्रथम’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि हमारा मूल मंत्र और हमारी जीवनशैली है। हमारा हर निर्णय और हमारा हर कदम इसी एक कसौटी पर खरा उतरना चाहिए। सैनिक का धर्म क्या है? “देश के लिए जीना और आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्र के लिए सर्वाेच्च बलिदान देना।” हम जिएंगे तो देश की आन-बान-शान के लिए, और यदि हमारी सांसों की डोरी टूटे, तो वह भी इस पावन मातृभूमि का कर्ज चुकाने के लिए।
मेरे वीर जवानों!
आज भारत जो आर्थिक, सामाजिक और वैज्ञानिक प्रगति कर रहा है, उसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि हमारी सीमाओं पर आप जैसे वीर प्रहरी पूरी निष्ठा और सतर्कता के साथ डटे हुए हैं। भारतीय सैन्य बल केवल सीमाओं के रक्षक नहीं हैं, बल्कि वे भारत की अखंडता, एकता और शांति के सबसे मजबूत स्तंभ हैं।
चाहे सीमाओं की सुरक्षा हो, आंतरिक चुनौतियाँ हों या प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत कार्य, भारतीय सेना ने हर परिस्थिति में राष्ट्र की एक अभेद्य ढाल बनकर कार्य किया है। संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों और अंतर्राष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों में भी हमारी सेना ने अपनी पेशेवर क्षमता और मानवीय मूल्यों का उत्कृष्ट परिचय दिया है।
मेरे जांबाज अग्निवीरों,
आपको सदैव याद रखना होगा कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीकी श्रेष्ठता और रणनीतिक कौशल से जीते जाएंगे। आज युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब युद्धभूमि केवल जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि साइबर स्पेस, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्पेस टेक्नोलॉजी तक विस्तारित हो चुकी है। इसलिए आपको निरंतर स्वयं को तकनीकी रूप से दक्ष और आधुनिक बनाना होगा।
सेना मुख्यालय में रणनीतिक स्तर पर कार्य करने के अपने अनुभव से मैं कह सकता हूँ कि आने वाले समय में वही सेना सबसे शक्तिशाली होगी, जो तकनीक और मानव क्षमता का सर्वश्रेष्ठ समन्वय स्थापित करेगी। आपका तकनीकी कौशल ही भारत की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाएगा।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज हमारी सेनाओं का तीव्र गति से आधुनिकीकरण हुआ है। ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ’ की व्यवस्था ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय को नई शक्ति दी है। आज भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। स्वदेशी ‘आईएनएस विक्रांत’, ‘तेजस’ और ‘ब्रह्मोस’ जैसी उपलब्धियाँ नए भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता और आत्मविश्वास का प्रतीक हैं।
आप ‘अग्निवीर’ हैं अर्थात् नए, आधुनिक और आत्मविश्वासी भारत के ‘न्यू-एज वॉरियर्स’। आपकी ऊर्जा, आपका साहस और आधुनिक तकनीक पर आपकी पकड़ आने वाले समय में भारतीय सेना की शक्ति को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।
आज पूर्वाेत्तर की इस पावन धरा पर खड़े होकर मुझे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का वह विजन याद आता है, जिसमें उन्होंने कहा है कि “भारत के समग्र विकास का रास्ता पूर्वाेत्तर के असीम सामर्थ्य से होकर गुजरता है।”
प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में इस क्षेत्र ने अलगाववाद को पीछे छोड़कर शांति, संपर्क और अभूतपूर्व प्रगति के एक नए युग में प्रवेश किया है। यह बदलता हुआ पूर्वाेत्तर नए भारत की उस नई सोच का प्रतीक है, जहाँ विकास की किरणें देश के हर सुदूर कोने तक पहुँच रही हैं।
आज का आत्मविश्वासी और सुरक्षित भारत पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहा है। दुनिया की कोई भी ताकत आज इस सच को नहीं बदल सकती कि ‘‘21वीं सदी भारत की सदी है।’’
वर्ष 2047 तक एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण करना हम सभी का सामूहिक संकल्प है। इस महान संकल्प की सिद्धि में भारतीय सेना की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। देश को सुरक्षित, स्थिर और भयमुक्त वातावरण प्रदान करके आप जैसे वीर सैनिक ही नए भारत की समृद्धि की नींव को मजबूत करेंगे।
और जब असम रेजिमेंट का यह अजेय रणघोष गूंजता है – “असम विक्रम”….
और जब पूरा आसमान इस हुंकार से कांप उठता है –
“बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है, तो हमें उसका राशन मिलता है”….तब दुनिया समझ जाती है कि यह वह जांबाज पलटन है, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराते हुए विजय प्राप्त करना जानती है।
मैं आज इस परेड ग्राउंड में उपस्थित उन सभी वीर माता-पिता और अभिभावकों को भी नमन करता हूँ, जिन्होंने अपने लाडलों को, अपने जिगर के टुकड़ों को इस तिरंगे की आन-बान-शान पर समर्पित करने के लिए भारत माता की गोद में सौंप दिया है। धन्य हैं वे माता-पिता, जो ऐसे वीर सपूतों को जन्म देते हैं।
7वें बैच के सभी पास-आउट होने वाले अग्निवीरों को मैं उनके गौरवशाली और यशस्वी सैन्य जीवन के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं देता हूँ। आप अपनी वीरता, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से असम रेजिमेंट के इतिहास में नए स्वर्णिम अध्याय लिखें। मैं देवभूमि उत्तराखण्ड और बाबा केदारनाथ की असीम ऊर्जा तथा माँ कामाख्या का आशीर्वाद आपके साथ साझा करता हूँ।
जब भी मातृभूमि आपको पुकारे, आप उसी अदम्य साहस, अनुशासन और समर्पण के साथ आगे बढ़ें, जिसकी अपेक्षा भारत माता अपने वीर सपूतों से करती है।
याद रखिए! वर्दी केवल शरीर पर नहीं पहनी जाती, उसे चरित्र, अनुशासन और बलिदान से जिया जाता है। एक सच्चा सैनिक अपने आचरण से ही राष्ट्र का गौरव बनता है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँगे। ईश्वर आप सभी को देश रक्षा हेतु असीम शक्ति प्रदान करें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए मेरी मंगलकामनाएं।
जय हिन्द!