27-03-2026:पूर्व सैनिक रैली, पिथौरागढ़ः माननीय राज्यपाल महोदय का संबोधन
पूर्व सैनिक रैली, पिथौरागढ़ः माननीय राज्यपाल महोदय का संबोधन
(तिथिः 27 मार्च, 2026)
जय हिन्द!
मंच पर उपस्थित सैन्य अधिकारीगण, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि, सम्माननीय पूर्व सैनिक बंधु, अदम्य साहस की प्रतिमूर्ति हमारी वीर नारियाँ और देवभूमि के गौरवशाली नागरिकों!
आज सोर घाटी की इस पावन धरा पर, जहाँ की हवाओं में शौर्य और बलिदान की गाथाएं रची-बसी हैं, आप सबके बीच उपस्थित होना मेरे लिए एक आध्यात्मिक अनुभव है। मैं इस सीमांत जनपद पिथौरागढ़ की माटी को नमन करता हूँ, जिसने भारत माता की रक्षा के लिए पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने लाल समर्पित किए हैं।
सर्वप्रथम इस पावन अवसर पर आइए, हम उन अमर वीर शहीदों को श्रद्धा से नमन करते हैं, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। उनका बलिदान केवल इतिहास का अध्याय नहीं, बल्कि हमारी चेतना का वह दीप है, जो हमें सदैव राष्ट्र सर्वाेपरि रखने की प्रेरणा देता है।
जोरावर साइकिल रैली केवल एक अभियान नहीं, बल्कि अदम्य साहस, अटूट संकल्प और राष्ट्रभक्ति की जीवंत गाथा है। 750 किलोमीटर के दुर्गम मार्ग को पार करते हुए प्रतिभागियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब हृदय में देश के प्रति समर्पण हो, तो कोई भी चुनौती कठिन नहीं रह जाती। यह रैली महान योद्धा जनरल जोरावर सिंह की वीरता को पुनः जागृत करती है।
उत्तराखण्ड केवल ‘देवभूमि’ नहीं है, यह ‘वीरभूमि’ भी है। देश का शायद ही कोई ऐसा युद्ध हो, जिसमें पिथौरागढ़ के वीर जवानों के रक्त ने भारत माता का अभिषेक न किया हो। कुमाऊं रेजीमेंट से लेकर महार और नागा रेजीमेंट तक, यहाँ के जांबाजों ने दुनिया की सबसे दुर्गम चोटियों पर तिरंगा फहराया है।
सेना की वर्दी केवल कपड़ा नहीं होती, यह भारत माता की रक्षा का पवित्र व्रत होती है। जब मैं आप जैसे दिग्गजों को देखता हूँ, तो मुझे राष्ट्र की उस अटूट दीवार का अहसास होता है जिसने दशकों तक दुश्मन के हर नापाक मंसूबे को धूल चटाई है। आप सेवानिवृत्त हो सकते हैं, लेकिन एक सैनिक कभी ‘पूर्व’ नहीं होता, वह सदैव राष्ट्र का प्रहरी रहता है।
हमारे पूर्व सैनिक इस राष्ट्र की अमूल्य धरोहर ही नहीं, बल्कि उसकी जीवंत आत्मा हैं। पूर्व सैनिक केवल अतीत के गौरव नहीं, बल्कि वर्तमान के पथ-प्रदर्शक और भविष्य के निर्माता हैं। उनका अनुशासन, अनुभव और नेतृत्व ‘विकसित और आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में नई ऊर्जा का संचार कर रहा है। वे समाज के लिए प्रेरणा भी हैं और दिशा भी।
अक्सर पिथौरागढ़ को ‘सीमांत’ या ‘अंतिम जिला’ कहा जाता है, यह सीमांत नहीं, यह भारत की सुरक्षा का प्रारंभ बिंदु है, यहीं से राष्ट्र की शक्ति का उदय होता है। यहाँ का हर घर एक किला है और हर परिवार का सदस्य एक अघोषित सैनिक। आपकी जागरूकता ही हमारी सीमाओं की सबसे बड़ी सुरक्षा है।
आज जब हम ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों का कायाकल्प कर रहे हैं, तो उसमें हमारे पूर्व सैनिकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। आप ही वह सेतु हैं जो शासन की योजनाओं को जन-जन तक पहुँचा सकते हैं और पलायन जैसी चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर सकते हैं।
केंद्र और राज्य सरकार पूर्व सैनिकों के प्रति अपनी कृतज्ञता केवल शब्दों से नहीं, बल्कि ठोस कार्यों से प्रकट कर रही है। ‘वन रैंक वन पेंशन’ के माध्यम से दशकों पुरानी मांग को पूरा करना इस प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
राज्य सरकार ने सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए छात्रवृत्ति, पेंशन और वीरता पदकों की सम्मान राशि में ऐतिहासिक वृद्धि की है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है-जिस सैनिक ने अपने जीवन के सर्वश्रेष्ठ वर्ष राष्ट्र को दिए, उसे सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक और चिंतामुक्त जीवन मिलना ही चाहिए।
मैं जानता हूँ कि स्वास्थ्य सुविधाओं की सुलभता हमारे पूर्व सैनिकों के लिए एक बड़ी प्राथमिकता है। म्ब्भ्ै केंद्रों का सुदृढ़ीकरण और दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल हेल्थ यूनिट्स का विस्तार हमारी प्राथमिकता सूची में है।
डिजिटल इंडिया के युग में ‘स्पर्श’ पोर्टल के माध्यम से पेंशन संबंधी विसंगतियों को दूर किया जा रहा है। यदि किसी भी पूर्व सैनिक को अपनी पेंशन या डॉक्यूमेंटेशन में समस्या आ रही है, तो जिला सैनिक कल्याण बोर्ड को निर्देश दिए गए हैं कि वे उनके पास जाकर समाधान करें, सैनिकों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
आज इस सभा में उपस्थित वीर नारियों के चरणों में मैं अपना शीश झुकाता हूँ। एक सैनिक सीमा पर लड़ता है, लेकिन उसका परिवार घर पर एक मौन तपस्या करता है। आपके धैर्य और बलिदान का ऋण यह राष्ट्र कभी नहीं चुका सकता। राष्ट्र उनके इस अमूल्य योगदान को सदैव कृतज्ञता के साथ स्मरण करेगा।
आज उत्तराखण्ड के सामने नशा एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। देवभूमि की युवा शक्ति को सही दिशा देना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है, और इसमें आपकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मैं आप सभी पूर्व सैनिकों से आह्वान करता हूँ कि आप अपने-अपने गांवों में युवाओं के मार्गदर्शक बनें। आपके द्वारा सिखाया गया अनुशासन और राष्ट्रप्रेम ही हमारी भावी पीढ़ी को भटकने से बचा सकता है।
सेवानिवृत्ति के बाद आपके पास जो तकनीकी कौशल और नेतृत्व क्षमता है, वह राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है। होमस्टे योजना, जैविक खेती और स्थानीय उत्पादों के विपणन में पूर्व सैनिक अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। सरकार आपको उद्यमी बनाने के लिए कम ब्याज पर ऋण और प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही है।
हमारी सरकार देहरादून में भव्य ‘सैनिक धाम’ का निर्माण कर रही है, जो उत्तराखण्ड के पांचवें धाम के रूप में पूजा जाएगा। इस धाम की नींव में पिथौरागढ़ सहित प्रदेश के हर शहीद के आंगन की पवित्र मिट्टी का उपयोग किया गया है। यह धाम आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाता रहेगा कि हमारी आजादी की कीमत कितनी भारी है।
“राष्ट्र प्रथम” की भावना विकसित भारत का मंत्र है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ‘राष्ट्र सर्वाेपरि’ के इस संकल्प को जन-जन का संस्कार बना दिया है। जब हर नागरिक राष्ट्रहित को स्वयं से ऊपर रखेगा, तभी एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा। और हमारे पूर्व सैनिक इस आदर्श के जीवंत प्रतीक हैं, जिन्होंने अपने जीवन से सिद्ध किया है कि राष्ट्र पहले है, और स्वयं बाद में।
अंत में, मैं केवल इतना कहना चाहता हूँ कि लोक भवन के द्वार हमारे पूर्व सैनिकों के लिए सदैव खुले हैं। आपकी हर समस्या, मेरा अपना सरोकार है। हम एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहे हैं जहाँ एक पूर्व सैनिक को अपने जायज काम के लिए किसी की सिफारिश की जरूरत न पड़े।
जो राष्ट्र अपने वीरों का सम्मान करता है, वही इतिहास रचता है। हमें गर्व है कि हमारे पास ऐसे पूर्व सैनिक हैं, जिनकी निष्ठा, त्याग और समर्पण भारत को निरंतर सशक्त, सुरक्षित और समृद्ध बनाने की प्रेरणा देते रहेंगे।
आपकी वीरता हमारा स्वाभिमान है,
आपका सम्मान हमारी संस्कृति है,
और आपका कल्याण हमारा संकल्प है।
और मैं पूर्ण विश्वास के साथ कहता हूँ-
जब तक भारत के सैनिक जागते हैं,
तब तक भारत सुरक्षित है, सशक्त है, और अजेय है।
आइए! हम सब मिलकर इस देवभूमि और वीरभूमि को और अधिक सशक्त, समृद्ध और सुरक्षित बनाने का संकल्प लें। एक बार फिर से, मैं राष्ट्र की अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले उन सभी वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
वंदेमातरम्! भारत माता की जय! जय हिन्द!