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    26-02-2026 : लोक भवन, उत्तराखण्ड में होली मिलन समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि : फ़रवरी 26, 2026

    जय हिन्द!

    देवभूमि उत्तराखण्ड की इस पावन वसुंधरा पर, लोक भवन में आयोजित होली मिलन समारोह के मंगल अवसर पर आप सभी के मध्य उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता और आत्मिक संतोष की अनुभूति हो रही है। होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि हृदयों के मिलन, मनों के सामंजस्य और आत्मा की प्रसन्नता का पर्व है।

    उत्तराखण्ड की धरती पर प्रत्येक पर्व अध्यात्म से जुड़ा होता है। यहाँ उत्सव केवल बाह्य उल्लास नहीं, बल्कि भीतरी जागरण का माध्यम होते हैं। होली हमें सिखाती है कि जीवन में विविधता ही सौंदर्य है, जैसे अनेक रंग मिलकर एक मनोहर छवि बनाते हैं, वैसे ही समाज के विविध वर्ग मिलकर एक समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करते हैं।

    होलिका दहन हमें स्मरण कराता है कि सत्य की ज्वाला में असत्य और अहंकार स्वयं भस्म हो जाते हैं। यह पर्व हमें अपने भीतर की नकारात्मकता, कटुता और अहंभाव को त्यागकर प्रेम, करुणा और समरसता को अपनाने का संदेश देता है।

    कुमाऊँ की बैठकी और खड़ी होली हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अद्भुत उदाहरण है, जहाँ शास्त्रीय रागों में भक्ति और लोकजीवन की आत्मा झलकती है। गढ़वाल की लोक होली में ढोल-दमाऊँ की थाप और सामूहिक गान सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण है। हमारी यह परंपराएँ हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखती हैं।

    वसंत ऋतु का आगमन, बुरांश की लालिमा, हिमालय की शीतलता और गंगा-यमुना की पवित्रता, इन सबके मध्य होली प्रकृति के नवजीवन का उत्सव भी है। यह हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और संरक्षण का संदेश देती है।

    प्रिय साथियों,

    आज इस अवसर पर मैं विशेष रूप से लोक भवन के उन अधिकारीगण एवं कर्मचारियों का उल्लेख करना चाहता हूँ, जो निष्ठा, समर्पण और अनुशासन के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए इस संस्था की गरिमा को निरंतर ऊँचाइयों तक ले जा रहे हैं। किसी भी संस्थान की प्रतिष्ठा केवल उसकी भव्य इमारतों से नहीं, बल्कि उसके कर्मठ और समर्पित मानव संसाधन से निर्मित होती है। आप सभी ने अपने उत्कृष्ट कार्यों, पारदर्शिता और प्रतिबद्धता से लोक भवन को एक आदर्श कार्य संस्कृति का केंद्र बनाया है।

    आज जिन अधिकारी-कर्मचारियों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया जा रहा है, वे केवल व्यक्तिगत उपलब्धि के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह संदेश देते हैं कि कर्तव्यनिष्ठा और परिश्रम सदैव सम्मान के अधिकारी होते हैं। यह सम्मान केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है कि हम सब अपने कार्य को राष्ट्रसेवा का माध्यम मानते हुए और अधिक समर्पण के साथ आगे बढ़ें। मैं आप सभी को हृदय से बधाई देता हूँ और अपेक्षा करता हूँ कि आप इसी ऊर्जा और उत्कृष्टता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे।

    उत्तराखण्ड की यह धरा वीरभूमि भी है। यहाँ के सैनिकों के त्याग और पराक्रम के कारण ही हम शांति और उल्लास के साथ अपने पर्व मना पाते हैं, इसलिए प्रत्येक उत्सव के साथ हमें राष्ट्रधर्म और कर्तव्यबोध को भी स्मरण रखना चाहिए।

    प्रिय युवाओं,

    हमारी सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण और संवर्धन आपका दायित्व है। आधुनिकता के साथ परंपरा का संतुलन ही हमारी वास्तविक शक्ति है। जब हम अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं, तभी हम भविष्य की ओर आत्मविश्वास से बढ़ सकते हैं।

    अंत में, मैं आप सभी से आह्वान करता हूँ, आइए! इस होली पर हम केवल एक-दूसरे को रंग न लगाएँ, बल्कि अपने जीवन को कर्तव्य, समर्पण और राष्ट्र प्रथम के रंग में रंगें।

    हम संकल्प लें कि जिस प्रकार रंग आपस में घुलकर एक सुंदर छवि बनाते हैं, उसी प्रकार हम भी मिलकर समरस, सशक्त और विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण में अपना योगदान देंगे। हम अपने भीतर के अहंकार को होलिका की अग्नि में समर्पित करें और प्रेम, सद्भाव, अनुशासन तथा राष्ट्रभक्ति को अपने जीवन का स्थायी रंग बनाएं।

    आइए! रंगों के इस पावन पर्व को केवल उत्सव नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड और भारत के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प पर्व बनाएं।

    जय हिन्द! जय उत्तराखण्ड! जय भारत!