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    25-04-2026:लोक भवन में फिल्म “मिस्टी” के विशेष प्रदर्शन के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि : अप्रैल 25, 2026

    जय हिन्द!

    आज का यह सुअवसर कला, संस्कृति और प्रकृति के अद्भुत संगम का प्रतीक है। लोक भवन, उत्तराखण्ड की इस गरिमामयी धरती पर आज फिल्म ‘मिस्टी’ के विशेष प्रदर्शन के इस महत्वपूर्ण अवसर पर आप सभी विशिष्ट अतिथियों, कलाकारों, फिल्म निर्माताओं, बुद्धिजीवियों एवं उपस्थित जनसमूह के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत हर्ष और गर्व की अनुभूति हो रही है। मैं इस अवसर पर आप सभी का हृदय से अभिनंदन करता हूँ।

    आज का यह क्षण केवल एक फिल्म के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की आत्मा, उसकी प्रकृति, संस्कृति और संवेदनाओं के उत्सव का अवसर है। बड़े पर्दे पर जब हमारी देवभूमि के मनोहारी दृश्य, हिमालय की विराटता, नदियों की निर्मलता और वनों की हरियाली सजीव रूप में उभरती है, तो यह केवल दृश्य आनंद ही नहीं देती, बल्कि हमारे भीतर गर्व, आत्मीयता और अपनेपन की भावना को भी जागृत करती है।

    फिल्म ‘मिस्टी’ ने जिस भावपूर्ण और सौंदर्यपूर्ण ढंग से उत्तराखण्ड की प्राकृतिक छटा को प्रस्तुत किया है, वह वास्तव में सराहनीय है। यह फिल्म एक कहानी से आगे बढ़कर हमारे राज्य की आत्मा को स्पर्श करती है। इसमें निहित भावनाएं, दृश्य और संदेश दर्शकों को एक अद्वितीय अनुभूति प्रदान करते हैं।

    ‘मिस्टी’- अर्थात हल्की धुंध, जो दृश्य को ढकती नहीं, बल्कि उसे और अधिक रहस्यमय और आकर्षक बना देती है। यही ‘मिस्टी’ उत्तराखण्ड की पहचान है, जहाँ धुंध में लिपटी प्रकृति मन को शांति, संवेदना और प्रेरणा से आलोकित करती है। यह केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि एक आत्मिक अनुभव है, जो हमें प्रकृति से गहराई से जोड़ता है।

    मैं इस अवसर पर फिल्म के मुख्य अभिनेता श्री सतीश शर्मा जी, निर्देशक श्री राजा चटर्जी जी तथा निर्माता श्रीमती साक्षी शैल चटर्जी जी को हृदय से बधाई देता हूँ। आप सभी ने अपने रचनात्मक कौशल, समर्पण और दृष्टिकोण के माध्यम से एक ऐसी कृति का निर्माण किया है, जो न केवल मनोरंजन प्रदान करती है, बल्कि समाज को एक सकारात्मक संदेश भी देती है। यह आपके प्रयासों का ही परिणाम है कि उत्तराखण्ड की सुंदरता आज इस माध्यम से व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँच रही है।

    मैं विशेष रूप से श्री सतीश शर्मा जी के योगदान का उल्लेख करना चाहूँगा। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका कार्य सराहनीय है। साथ ही, सिनेमा के क्षेत्र में उनकी सक्रियता यह दर्शाती है कि वे एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं, जो समाज के विभिन्न क्षेत्रों में समान रूप से योगदान दे रहे हैं। ऐसे व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत होते हैं।
    उत्तराखण्ड, जिसे हम ‘देवभूमि’ के नाम से जानते हैं, केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक समृद्धि और प्राकृतिक वैभव का अद्वितीय संगम है। यहाँ का प्रत्येक पर्वत, प्रत्येक नदी और प्रत्येक धारा अपने भीतर एक कहानी समेटे हुए है। यहाँ की संस्कृति, परंपराएं और लोक जीवन हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और हमें एक गहन आत्मिक अनुभव प्रदान करते हैं।

    ऐसे में, जब सिनेमा जैसे सशक्त माध्यम के द्वारा इन सभी आयामों को एक साथ प्रस्तुत किया जाता है, तो यह प्रयास और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज का दर्पण भी है और समाज को दिशा देने वाली एक सशक्त चेतना भी है। यह हमारी संस्कृति को संरक्षित करने, उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने और विश्व मंच पर प्रस्तुत करने का एक प्रभावी माध्यम है।

    फिल्म ‘मिस्टी’ जैसे प्रयास सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के साथ-साथ राज्य के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से पर्यटन के क्षेत्र में ऐसे प्रयास अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं। जब लोग फिल्मों के माध्यम से किसी स्थान की सुंदरता को देखते हैं, तो उनके मन में वहाँ जाने की इच्छा उत्पन्न होती है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होते हैं।

    उत्तराखण्ड में फिल्म निर्माण की अपार संभावनाएं हैं। यहाँ की विविध भौगोलिक संरचना, शांत वातावरण, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता इसे फिल्म शूटिंग के लिए एक आदर्श स्थान बनाती है। राज्य सरकार द्वारा बनाई गई फिल्म नीति भी अत्यंत प्रोत्साहनकारी है, जो फिल्म निर्माताओं को सरल प्रक्रियाओं और सशक्त सहयोगात्मक तंत्र प्रदान करती है। यही कारण है कि उत्तराखण्ड आज ‘फिल्म फ्रेंडली स्टेट’ के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है।

    मैं फिल्म जगत से जुड़े सभी कलाकारों, निर्देशकों और निर्माताओं को यह आमंत्रण देता हूँ कि वे उत्तराखण्ड आएं, यहाँ की विविधता को समझें, इसकी संस्कृति को आत्मसात करें और ऐसी रचनाएं प्रस्तुत करें, जो न केवल मनोरंजक हों, बल्कि समाज को एक सकारात्मक दिशा भी दें। हमें ऐसी कहानियों की आवश्यकता है, जो मानवता, प्रकृति और मूल्यों को केंद्र में रखकर समाज को जोड़ने का कार्य करें।

    आज का युवा केवल दर्शक नहीं, बल्कि सृजनकर्ता बनने की क्षमता रखता है। वह अत्यंत प्रतिभाशाली और रचनात्मक है। फिल्म ‘मिस्टी’ जैसी कृतियाँ उन्हें यह संदेश देती हैं कि यदि संकल्प और समर्पण हो, तो किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है। यह फिल्म उन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो सिनेमा और रचनात्मक क्षेत्रों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।

    मैं इस फिल्म के निर्माण में जुड़े सभी तकनीकी विशेषज्ञों, कलाकारों और स्थानीय समुदायों के सहयोग की भी सराहना करता हूँ। किसी भी सफल कृति के पीछे एक पूरी टीम का सामूहिक प्रयास होता है, और यह फिल्म उसी सामूहिकता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

    अंत में, मैं एक बार पुनः फिल्म ‘मिस्टी’ की पूरी टीम को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ। मेरी कामना है कि यह फिल्म अपार सफलता प्राप्त करे, अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे और उत्तराखण्ड की सुंदरता तथा संस्कृति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाए।

    आइए! हम सभी मिलकर इस देवभूमि के गौरव को और अधिक ऊँचाइयों तक पहुँचाने का संकल्प लें। उत्तराखण्ड की यह पावन धरती सृजन, संस्कृति और संवेदना की नई ऊँचाइयों को छूती रहे, इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

    जय हिन्द!
    जय उत्तराखण्ड!