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    22-08-2026:एजुकेशन कॉन्क्लेव एवं गढ़वाल पोस्ट अवॉड्र्स समारोह में माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि : अगस्त 22, 2026

    (तिथिः 22 अगस्त, 2026)

    जय हिन्द!

    मंच पर उपस्थित पद्म भूषण श्री भगत सिंह कोश्यारी जी, सम्मानित अतिथिगण, शिक्षाविद्, वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञ, मीडिया जगत के प्रतिनिधिगण, गढ़वाल पोस्ट परिवार, सम्मानित पुरस्कार प्राप्तकर्ता, देवियों एवं सज्जनों!

    आज एजुकेशन कॉन्क्लेव एवं गढ़वाल पोस्ट अवॉड्र्स जैसे सार्थक और प्रेरणादायी आयोजन का हिस्सा बनकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। इस अवसर की विशेषता यह है कि यहाँ शिक्षा, विज्ञान और एआई जैसे भविष्य को दिशा देने वाले विषय पर सार्थक विमर्श हो रहा है, उत्कृष्ट योगदान देने वाली प्रतिभाओं का सम्मान हो रहा है और मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से अत्यंत आत्मीय क्षण है कि मेरे जीवन की यात्रा पर आधारित ‘वातायन-राष्ट्रवादी सिख की जीवन यात्रा’ के काव्य रूपांतरण का लोकार्पण भी हो रहा है।

    मेरे लिए ये तीनों अवसर अलग-अलग नहीं, बल्कि ज्ञान, उपलब्धि और जीवन-अनुभव के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की एक ही भावना के तीन महत्वपूर्ण आयाम हैं।

    सबसे पहले, मैं गढ़वाल पोस्ट को 30 वर्ष की गौरवपूर्ण यात्रा पूरी करने पर हार्दिक बधाई देता हूँ। तीन दशक किसी भी समाचार पत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव होते हैं। इन वर्षों में गढ़वाल पोस्ट ने केवल समाचारों को दर्ज नहीं किया, बल्कि उत्तराखण्ड के निर्माण, उसकी उपलब्धियों, चुनौतियों, आकांक्षाओं और बदलते सामाजिक परिवेश की यात्रा को भी शब्द दिए हैं।

    मैं संपादक श्री सतीश शर्मा और उनकी पूरी टीम को इस निरंतर और सार्थक यात्रा के लिए बधाई देता हूँ। तीन दशकों तक किसी समाचार पत्र को निरंतर आगे बढ़ाना विश्वास, प्रतिबद्धता, निरंतरता और जनसरोकार की मांग करता है। बदलते समय और बदलती तकनीक के साथ गढ़वाल पोस्ट ने स्वयं को आगे बढ़ाया है, लेकिन उत्तराखण्ड और उसके लोगों से अपना आत्मीय जुड़ाव और संवाद बनाए रखा है।

    मेरा मानना है कि मीडिया लोकतंत्र की केवल सूचना व्यवस्था नहीं, बल्कि जनसंवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उसकी जिम्मेदारी है कि वह समाज की आवाज को सामने लाए, महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता पैदा करे और तथ्यों के आधार पर स्वस्थ एवं सार्थक सार्वजनिक विमर्श को आगे बढ़ाए। आज जब सूचना का प्रवाह अत्यंत तेज है और डिजिटल माध्यम तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता नई संभावनाओं के साथ नई दिशाएँ भी खोल रहे हैं, तब पत्रकारिता में सत्य, तथ्य, विश्वसनीयता और जिम्मेदारी का महत्व और बढ़ गया है।

    मुझे प्रसन्नता है कि गढ़वाल पोस्ट ने समाचारों से आगे बढ़कर जनहित और विकास से जुड़े अभियानों को भी स्थान दिया है। उत्तराखण्ड को फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में बढ़ावा देने, पर्यटन की संभावनाओं को सामने लाने तथा शिक्षा और उच्च शिक्षा को विमर्श का विषय बनाने के प्रयास स्वागत योग्य हैं। यह वही भूमिका है, जिसमें मीडिया केवल घटनाओं का दर्पण नहीं रहता, बल्कि सकारात्मक परिवर्तन और विचारपूर्ण संवाद का सहभागी बनता है।

    आज इस मंच पर उत्कृष्ट योगदान देने वाली प्रतिभाओं का सम्मान भी हो रहा है। मैं सभी सम्मानित व्यक्तित्वों को हृदय से बधाई देता हूँ। ऐसे सम्मान केवल उपलब्धियों का अभिनंदन नहीं होते, बल्कि नई पीढ़ी के सामने सेवा, समर्पण और उत्कृष्टता के प्रेरक उदाहरण भी रखते हैं।

    विशेष रूप से पद्म भूषण श्री भगत सिंह कोश्यारी जी का सम्मान किया जाना प्रसन्नता का विषय है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री, सांसद और महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में उनका लंबा सार्वजनिक जीवन उत्तराखण्ड के सामाजिक और सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। मैं उन्हें तथा आज सम्मानित होने वाले सभी व्यक्तित्वों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।

    आज हम जिस विषय पर विचार कर रहे हैं-‘एजुकेशन, साइंस और एआई’-वह केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि भविष्य के भारत की दिशा तय करने वाला विषय है। आने वाले समय में हमारी प्रगति इन तीनों के सशक्त समन्वय पर निर्भर करेगी।

    शिक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला है। शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान, विवेक, जिज्ञासा, रचनात्मकता और नेतृत्व की क्षमता विकसित करने का माध्यम है। हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जो हमारे युवाओं को बदलती दुनिया के लिए तैयार करे, उनमें प्रश्न पूछने, प्रयोग करने और नए विचारों को साकार करने का साहस पैदा करे। हमारे विश्वविद्यालय केवल ज्ञान देने वाले संस्थान न रहें, बल्कि शोध, नवाचार और समाधान के केंद्र बनें।

    इसी के साथ विज्ञान हमें खोज, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रमाण आधारित समाधान की शक्ति देता है। भारत आज अंतरिक्ष विज्ञान, स्वास्थ्य, कृषि, रक्षा, ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी और पर्यावरण जैसे अनेक क्षेत्रों में नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। हमें युवाओं में वैज्ञानिक सोच और शोध की संस्कृति को और मजबूत करना होगा। जिज्ञासा प्रश्न पैदा करती है, प्रश्न शोध को जन्म देता है, शोध नवाचार को और नवाचार राष्ट्र की प्रगति को नई गति देता है।

    उत्तराखण्ड के लिए शिक्षा और विज्ञान की भूमिका और भी महत्वपूर्ण है। हिमालयी पर्यावरण, जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन, जैव विविधता, कृषि, स्वास्थ्य और दूरस्थ क्षेत्रों तक सेवाओं की पहुँच जैसी हमारी चुनौतियाँ शोध और नवाचार के अवसर भी हैं। हमारे विश्वविद्यालय और शोध संस्थान स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित कर सकते हैं और उत्तराखण्ड को ज्ञान आधारित विकास का मॉडल बना सकते हैं।

    जब शिक्षा और विज्ञान के साथ एआई जुड़ता है, तो संभावनाओं का क्षितिज और व्यापक हो जाता है। मैं एआई को केवल नई तकनीक नहीं, बल्कि ज्ञान, शोध, नवाचार और मानव क्षमता को नई गति देने वाले शक्तिशाली माध्यम के रूप में देखता हूँ। शिक्षा में एआई सीखने को अधिक प्रभावी और सुलभ बना सकता है; विज्ञान और शोध में जटिल समस्याओं के विश्लेषण और नई खोजों को गति दे सकता है; स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, मौसम, पर्यटन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में नए समाधान दे सकता है।

    उत्तराखण्ड जैसे हिमालयी राज्य में एआई की संभावनाएँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ और विशेषज्ञ ज्ञान पहुँचाने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हमारी भौगोलिक दूरी को तकनीक ज्ञान और अवसर की निकटता में बदल सकती है।

    हमें अपने युवाओं को एआई के केवल उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि निर्माता, शोधकर्ता, नवाचारक और नेतृत्वकर्ता बनाना है। उन्हें अपनी प्रतिभा को तकनीक से जोड़कर ऐसे समाधान विकसित करने होंगे, जो उत्तराखण्ड की आवश्यकताओं के साथ-साथ देश की विकास यात्रा को भी नई दिशा दें।

    शिक्षा हमारी नींव होगी, विज्ञान हमारी खोज और समझ की शक्ति होगा और एआई उस ज्ञान तथा प्रतिभा को नई गति देने वाला माध्यम बनेगा। यही समन्वय भारत की नई शक्ति बन सकता है।

    प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखण्ड का दशक बताया है। हमें इस दशक को शिक्षा, शोध, विज्ञान, तकनीक और नवाचार की नई ऊँचाइयों का दशक बनाना है और उत्तराखण्ड की प्रतिभा, सामथ्र्य और नवाचार को विकसित भारत की शक्ति बनाना है।

    मेरा विश्वास है कि विकसित भारत की यात्रा में विकसित उत्तराखण्ड की महत्वपूर्ण भूमिका है। हमें ऐसा उत्तराखण्ड बनाना है, जहाँ शिक्षा अवसरों का विस्तार करे, विज्ञान नए समाधान दे, एआई नवाचार को गति दे और हमारे युवा अपनी प्रतिभा व ज्ञान के बल पर वैश्विक पहचान बनाते हुए अपने राज्य की विशिष्ट चुनौतियों के समाधान में अग्रणी भूमिका निभाएँ।

    आज मेरे जीवन की यात्रा पर आधारित ‘वातायन-राष्ट्रवादी सिख की जीवन यात्रा’ के काव्य रूपांतरण का लोकार्पण मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से अत्यंत आत्मीय क्षण है। एक सैनिक से लेकर सेना के विभिन्न दायित्वों और आज उत्तराखण्ड के राज्यपाल के रूप में संवैधानिक दायित्व तक की यह यात्रा मेरे लिए पदों की नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा, अनुशासन, संघर्ष और सीख की यात्रा रही है।

    मेरे जीवन को आकार देने वाले परिवार, गुरुजनों, सैनिक साथियों और अनगिनत शुभचिंतकों के प्रति यह यात्रा सदैव कृतज्ञता का भाव रखती है। ‘वातायन’ मेरे जीवन के अनुभवों और मूल्यों का प्रतिबिंब है। मुझे विश्वास है कि यह कृति युवाओं को संकल्प, समर्पण और राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी। मैं इस रचनात्मक प्रयास के लिए लेखक श्री रविन्द्र सैनी जी को हृदय से बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।

    आज के इस आयोजन में मीडिया की भूमिका पर भी एक बात कहना चाहूँगा। तकनीक और संचार के माध्यम तेजी से बदल रहे हैं। प्रिंट से डिजिटल और अब एआई तक की यह यात्रा पत्रकारिता के सामने नए अवसर लेकर आई है। माध्यम बदल सकता है, लेकिन सत्य, सटीकता, विश्वसनीयता और जनसेवा के मूल मूल्य कभी नहीं बदलने चाहिए।

    अंत में, मैं एक बार फिर गढ़वाल पोस्ट को 30 वर्ष की यात्रा के लिए, आज सम्मानित होने वाले सभी व्यक्तित्वों को, ‘वातायन’ के लेखक श्री रविन्द्र सैनी जी को तथा ‘एजुकेशन, साइंस और एआई’ पर विचार-विमर्श करने वाले सभी विशेषज्ञों को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।

    आइए, हम ऐसा ज्ञान-परिसर और ऐसा नवाचार-तंत्र विकसित करें, जहाँ शिक्षा में संस्कार हों, विज्ञान में जिज्ञासा हो, तकनीक में सृजनशीलता हो और एआई में मानवता के कल्याण की नई संभावनाएँ हों।

    यही हमारी युवा शक्ति को सामथ्र्य देगा, उत्तराखण्ड को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा और विकसित भारत के संकल्प को और गति प्रदान करेगा।

    जय हिन्द! जय उत्तराखण्ड!