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    22-04-2026 : वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह में माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि : अप्रैल 22, 2026

    जय हिन्द!

    आज वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह में आप सभी के मध्य उपस्थित होकर मुझे अत्यंत हर्ष और गर्व का अनुभव हो रहा है। यह अवसर केवल उपाधि प्राप्त करने का नहीं, बल्कि आप सभी के वर्षों के परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के उत्सव का प्रतीक है।

    सबसे पहले, मैं इस दीक्षांत समारोह में उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देता हूँ। यह आपकी प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयासों का प्रतिफल है। इस सफलता के पीछे आपके माता-पिता का त्याग, गुरुजनों का मार्गदर्शन और आपकी अथक साधना निहित है। मैं इन सभी को भी साधुवाद देता हूँ।

    प्रिय विद्यार्थियों,

    आप वास्तव में सौभाग्यशाली हैं कि आप उस विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिसका नाम वीरता, तकनीकी कौशल और जनसेवा के अद्वितीय प्रतीक, वीर माधो सिंह भण्डारी जी के नाम पर है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह समाज के कल्याण और परिवर्तन का माध्यम बने। मलेथा की गूल (नहर) का निर्माण केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि यह इस बात का सशक्त संदेश है कि जब संकल्प, ज्ञान और समाज सेवा एक साथ जुड़ते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है।

    उत्तराखण्ड की यह देवभूमि शौर्य, त्याग और अनुशासन की भूमि रही है। यहाँ का प्रत्येक युवा अपने भीतर राष्ट्रसेवा का भाव लिए आगे बढ़ता है। आज आप भी उसी परंपरा के वाहक बनकर जीवन के एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं।

    दीक्षांत समारोह केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि यह जीवन के एक नए अध्याय का आरंभ है। आज से आप जिम्मेदार नागरिक, नवोन्मेषी विचारक और राष्ट्र निर्माण के सक्रिय सहभागी बन चुके हैं।

    मुझे प्रसन्नता है कि यह विश्वविद्यालय तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। विशेष रूप से नई और उभरती तकनीकों को अपनाने की दिशा में इसके प्रयास सराहनीय हैं। विश्वविद्यालय ने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में जो पहल की हैं, वे इसे एक Dynamic and Forward Looking Institution के रूप में स्थापित कर रही हैं। लोक भवन इस विश्वविद्यालय को हर संभव मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    विश्वविद्यालय द्वारा राज्य के एकमात्र महिला प्रौद्योगिकी संस्थान का संचालन तथा पिथौरागढ़, गोपेश्वर, टिहरी, उत्तरकाशी एवं टनकपुर जैसे दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में अपने परिसरों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा का विस्तार करना, समावेशी और संतुलित विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है।

    आज का युग तकनीकी क्रांति का युग है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और क्वांटम कंप्यूटिंग-ये केवल विषय नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाले प्रमुख स्तंभ हैं। मुझे प्रसन्नता है कि यह विश्वविद्यालय इन आधुनिक तकनीकों को अपने पाठ्यक्रम और अनुसंधान में शामिल कर रहा है। यह संस्थान केवल शिक्षा ही नहीं दे रहा, बल्कि भविष्य का निर्माण भी कर रहा है।

    AI आज केवल उद्योगों को ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, शासन और समाज के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। आने वाले समय में वही राष्ट्र आगे बढ़ेंगे, जिनके युवा इन तकनीकों में दक्ष होंगे और उनका नैतिक एवं जिम्मेदार उपयोग करेंगे।

    मैं आपसे अपेक्षा करता हूँ कि आप केवल Job Seekers नहीं, बल्कि Job Creators बनें; केवल तकनीक के उपभोक्ता नहीं, बल्कि Innovators और Problem Solver बनें, और अपने ज्ञान का उपयोग समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में करें।

    प्रिय विद्यार्थियों,

    आज भारत एक परिवर्तनशील दौर से गुजर रहा है। हमारा देश स्टार्टअप, इनोवेशन और डिजिटल क्रांति के क्षेत्र में विश्व में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। छोटे शहरों और गांवों के युवा भी वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। यह समय आपके लिए अवसरों से भरा हुआ है।

    लेकिन तकनीकी प्रगति के साथ-साथ हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हमारा विकास सतत (sustainable) और समावेशी (inclusive) हो। जलवायु परिवर्तन, संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरण संतुलन ये हमारे समय की बड़ी चुनौतियाँ हैं। इसलिए मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप ऐसी तकनीकों का विकास करें, जो प्रकृति के अनुकूल हों, समाज के हर वर्ग के लिए उपयोगी हों और मानवता के कल्याण को केंद्र में रखें।

    प्रिय विद्यार्थियों,

    आप केवल अपने परिवार की आशाओं का ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की आकांक्षाओं का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। 21वीं सदी की ‘अमृत पीढ़ी’ के रूप में आप भारत को ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। अपने जीवन में एक स्पष्ट उद्देश्य निर्धारित करें, अपनी क्षमताओं को पहचानें और अपने लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ आगे बढ़ें।

    प्रिय उपाधि धारकों,

    तकनीक की दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं-
    एक वे, जो नई तकनीक आने का इंतज़ार करते हैं। और दूसरे वे, जो नई तकनीक बनाते हैं। आपको तय करना है-आप कौन बनेंगे? जब भी जीवन में कोई चुनौती आए, तो उसे समस्या मत समझिए। उसे एक अनसुलझा कोड समझिए। और मुझे विश्वास है, आपमें से हर कोई उस कोड को सुलझाने की क्षमता रखता है।

    लेकिन याद रखिए-
    Great Engineers सिर्फ सिस्टम नहीं बनाते, वे लोगों की ज़िंदगी बदलते हैं। इसलिए जो भी नया बनाएं, ऐसा बनाएं जो सरल हो, उपयोगी हो, और सबसे महत्वपूर्ण मानवता के लिए हो। सफलता आपके पद या पैकेज से नहीं मापी जाएगी, बल्कि इस बात से मापी जाएगी कि आपने कितने लोगों के जीवन को बेहतर बनाया।

    और अंत में जब भी आप किसी ऊँचाई पर पहुँचें, तो यह मत भूलिए कि आपकी जड़ें कहाँ हैं। क्योंकि वही आपको जमीन से जोड़े रखेंगी, और वही आपको और ऊँचा उठाएंगी।

    आप सिर्फ करियर बनाने नहीं जा रहे-आप इतिहास लिखने जा रहे हैं। और मुझे पूरा विश्वास है, आप उसे शानदार बनाएंगे।

    अंत में, मैं पुनः सभी स्नातक एवं उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की असीम शुभकामनाएँ देता हूँ।

    जय हिन्द!