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    21-03-2026:“एक पहाड़ी ऐसा भी” सम्मान समारोह में माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि : मार्च 21, 2026

    जय हिन्द!

    देवभूमि उत्तराखण्ड की इस पावन धरती पर आयोजित प्रेरक पहल “एक पहाड़ी ऐसा भी” के सम्मान समारोह में आज उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत हर्ष, गर्व और आत्मीयता का विषय है। आज का यह समारोह उन अनकहे, अनदेखे और अनसुने नायकों को पहचान देने का एक सशक्त प्रयास है, जिन्होंने अपने जीवन के संघर्षों को सफलता की कहानी में बदल दिया।

    यह पहल केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि समाज के भीतर छिपी सकारात्मक ऊर्जा को पहचानने और उसे नई दिशा देने का एक प्रेरक मंच है। मैं इस अनूठे आयोजन के लिए रेडएफएम को हृदय से बधाई देता हूँ, जिसने समाज के उन अनमोल रत्नों को मंच प्रदान किया है, जो सामान्य जीवन जीते हुए भी असाधारण कार्य कर रहे हैं।

    प्रिय साथियों,

    उत्तराखण्ड की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता में नहीं, बल्कि यहाँ के लोगों के चरित्र में निहित है। यहाँ के पहाड़ जितने ऊँचे हैं, यहाँ के लोगों के हौसले उससे कहीं अधिक ऊँचे हैं। यहाँ की नदियाँ जितनी निर्मल हैं, यहाँ के लोगों का मन उतना ही पवित्र है।

    यहाँ का प्रत्येक पहाड़ी व्यक्ति अपने भीतर संघर्ष, साहस और संकल्प की एक जीवंत गाथा समेटे हुए है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ, सीमित संसाधन, और अनेक चुनौतियाँ- इन सबके बावजूद यहाँ के लोगों ने कभी हार नहीं मानी है। उन्होंने हर कठिनाई को अवसर में बदला है और यही उत्तराखण्ड की असली पहचान है।

    आज इस मंच पर जिन 13 जनपदों की 13 विभूतियों को सम्मानित किया गया है, ये केवल पुरस्कार प्राप्तकर्ता नहीं हैं, ये हमारे समाज के प्रकाश स्तंभ हैं। जो यह संदेश देते हैं कि असाधारण बनने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े संकल्प की आवश्यकता होती है।

    आज जब हम ‘एक पहाड़ी ऐसा भी’ की बात कर रहे हैं, तो हम उन व्यक्तियों का सम्मान कर रहे हैं जिनका कार्य समाज को प्रेरित करता है। नैनीताल के जीवन चंद जोशी से लेकर टिहरी के विजय जरधारी और पिथौरागढ़ के मनीष काशनियाल तक- ये सभी व्यक्तित्व इस बात के प्रतीक हैं कि उत्तराखण्ड की आत्मा हर क्षेत्र में जीवित है।

    जीवन चन्द जोशी ने अपनी उत्कृष्ट लकड़ी की कृतियों के माध्यम से पारंपरिक शिल्प को जीवित रखा, विजय जरधारी का “बीज बचाओ आंदोलन” हमारी जैव विविधता की रक्षा का सशक्त उदाहरण है, और मनीष काशनियाल की एवरेस्ट विजय उत्तराखण्ड के युवाओं के साहस और ऊँचे सपनों का प्रतीक है।

    ये कहानियाँ दर्शाती हैं कि उत्तराखण्ड की भावना हर गांव, हर घाटी और हर उस युवा स्वप्न-द्रष्टा में जीवित है जो हार मानने से इनकार करता है।

    “एक पहाड़ी ऐसा भी” जैसी पहलें इन प्रेरक कहानियों को सामने लाकर समाज में आशा, उत्साह और आत्मविश्वास का संचार करती हैं। जब एक सामान्य व्यक्ति असाधारण कार्य करता है, तो वह केवल अपने जीवन को नहीं बदलता, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। आज जिन व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जा रहा है, वे इस बात के सजीव उदाहरण हैं कि सच्ची सफलता साधनों से नहीं, बल्कि संकल्प और समर्पण से प्राप्त होती है।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में भी समय-समय पर ऐसे ही सामान्य नागरिकों की असाधारण कहानियों का उल्लेख किया जाता है। यह कार्यक्रम हमें यह सिखाता है कि परिवर्तन की शुरुआत छोटे-छोटे प्रयासों से होती है, और जब ये प्रयास जनभागीदारी का रूप लेते हैं, तो वे एक जनआंदोलन बनकर देश की दिशा बदल देते हैं। आज “एक पहाड़ी ऐसा भी” के मंच पर हम उसी भावना को साकार होते हुए देख रहे हैं।

    साथियों,

    हमारा उत्तराखण्ड सदियों से “देवभूमि” के रूप में प्रसिद्ध रहा है, जहाँ अध्यात्म, योग और संस्कृति का अद्भुत संगम है। यह भूमि “वीरभूमि” भी है, जहाँ के युवा देश की सीमाओं की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। यहाँ की मातृशक्ति, यहाँ के किसान, यहाँ के युवा- सभी मिलकर इस राज्य की प्रगति की आधारशिला हैं। विशेष रूप से हमारी मातृशक्ति ने विपरीत परिस्थितियों में भी परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    आज का यह अवसर हमें यह भी याद दिलाता है कि हमें अपने मूल्यों, अपनी संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़े रहना है। आधुनिकता के इस युग में, जहाँ तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं हमें अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को भी सहेजकर रखना होगा। उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति, लोकगीत, लोकपर्व- ये सब हमारी पहचान हैं, और इन्हें संरक्षित करना हम सभी का कर्तव्य है।

    हमारे सामने कुछ चुनौतियाँ भी हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है- पलायन। पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहा पलायन केवल जनसंख्या का स्थानांतरण नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना पर भी प्रभाव डालता है। इस दिशा में हमें मिलकर प्रयास करने होंगे, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा सके। पर्यटन, कृषि, हस्तशिल्प और स्वरोजगार के माध्यम से हम अपने युवाओं को अपने ही प्रदेश में अवसर प्रदान कर सकते हैं।

    मैं विशेष रूप से युवाओं से कहना चाहूँगा कि वे अपने सपनों को ऊँचाइयों तक ले जाएँ, बड़े लक्ष्य निर्धारित करें, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहें। आज का युवा ही कल का भारत है, और उसका प्रत्येक प्रयास राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    साथियों,

    किसी भी राष्ट्र की प्रगति का मूल आधार उसके नागरिकों की सोच और संकल्प होता है। हमें यह सदैव स्मरण रखना होगा कि “राष्ट्र प्रथम” की भावना ही हमें आगे बढ़ने की सही दिशा दिखाती है। जब हम अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते हैं, तभी एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव होता है।

    हम सभी का लक्ष्य होना चाहिए- “विकसित उत्तराखण्ड, विकसित भारत”। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक संकल्प है, एक दृष्टि है, जिसे हमें मिलकर साकार करना है। जब उत्तराखण्ड का प्रत्येक गाँव, प्रत्येक शहर विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा, जब यहाँ का प्रत्येक नागरिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनेगा, तभी हम एक विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।

    यह भी अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हम अपने समाज में सकारात्मकता और प्रेरणा के ऐसे स्रोतों को निरंतर प्रोत्साहित करते रहें। जब हम अच्छे कार्यों की सराहना करते हैं, तो हम केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं करते, बल्कि समाज में अच्छाई के बीज बोते हैं। यह बीज आगे चलकर एक सशक्त और सकारात्मक समाज का निर्माण करते हैं।

    मैं एक बार फिर ‘‘एक पहाड़ी ऐसा भी’’ की रेडएफएम टीम को ऐसी प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाने के लिए बधाई देता हूँ। इन व्यक्तियों को सम्मानित करके, आप उत्तराखण्ड के जनमानस के गौरव, पहचान और आत्मविश्वास को मजबूत कर रहे हैं।

    आज सम्मानित होने वाले सभी व्यक्तित्वों को मैं हृदय से बधाई देता हूँ। आप सभी ने अपने कार्यों से यह सिद्ध किया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। आप सभी इस राज्य की प्रेरणा हैं, और आपके कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेंगे।

    अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा कि उत्तराखण्ड का प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर एक विशेष क्षमता और एक अनूठी कहानी लिए हुए है। आवश्यकता केवल उसे पहचानने और उसे सही दिशा देने की है। आइए! इस अवसर पर हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपने राज्य, अपने समाज और अपने राष्ट्र के विकास में अपनी पूरी क्षमता से योगदान देंगे।

    “राष्ट्र प्रथम” की भावना को आत्मसात करते हुए, “विकसित उत्तराखण्ड- विकसित भारत” के संकल्प के साथ, हम सब एक नई ऊर्जा, एक नए उत्साह और एक अटूट विश्वास के साथ आगे बढ़ें। यही हमारी शक्ति है। यही हमारा संकल्प है। और यही हमारा भविष्य है। इसी अटूट विश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ, मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

    आप सभी को इस प्रेरणादायी आयोजन के लिए पुनः हार्दिक शुभकामनाएँ।

    वंदेमातरम! जय हिन्द! जय उत्तराखण्ड!