19-06-2026:जे.के. लाइफकेयर सेंटर्स की नई फार्मास्युटिकल एपीआई एवं इंटरमीडिएट्स विनिर्माण सुविधा के उद्घाटन के अवसर पर माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड का उद्बोधन
जय हिन्द!
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन में आज जे.के. लाइफकेयर सेंटर्स की नई फार्मास्युटिकल एपीआई एवं इंटरमीडिएट्स विनिर्माण सुविधा के उद्घाटन के अवसर पर उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मैं मिश्रा परिवार और जे.के. लाइफकेयर की पूरी टीम को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ।
उज्जैन भारत की उस महान परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ आस्था के साथ ज्ञान और साधना के साथ विज्ञान की चेतना भी विकसित हुई है। आज इसी धरती पर आधुनिक विज्ञान, अनुसंधान और फार्मास्युटिकल विनिर्माण की नई क्षमता का विकसित होना विकास की उसी निरंतर यात्रा का हिस्सा है। हमारी प्राचीन ज्ञान-परंपरा और आधुनिक विज्ञान, दोनों का अंतिम उद्देश्य मानव कल्याण ही है।
जे.के. लाइफकेयर की अब तक की यात्रा स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी रही है। जे.के. हॉस्पिटल और महाकालेश्वर आईवीएफ सेंटर के माध्यम से मरीजों की सेवा करते हुए संस्था ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी भूमिका बनाई है। अब यह यात्रा दवा निर्माण की उस महत्वपूर्ण कड़ी तक पहुँच रही है, जहाँ गुणवत्ता की शुरुआत मरीज तक दवा पहुँचने से बहुत पहले होती है।
अस्पताल में मरीज का उपचार दिखाई देता है, लेकिन उसके पीछे सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय दवा की पूरी आपूर्ति-श्रृंखला काम करती है। इसलिए एपीआई और इंटरमीडिएट्स के निर्माण की यह पहल स्वास्थ्य सेवा की इस पूरी श्रृंखला को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
एपीआई अर्थात् सक्रिय औषधीय घटक दवा का वह प्रमुख हिस्सा है, जो उसके औषधीय प्रभाव के लिए जिम्मेदार होता है। इसलिए एपीआई का निर्माण केवल एक औद्योगिक प्रक्रिया नहीं है। इसका सीधा संबंध दवा की गुणवत्ता, उसकी विश्वसनीयता और मरीज की सुरक्षा से है।
मुझे प्रसन्नता है कि जे.के. लाइफकेयर ने इस सुविधा की परिकल्पना प्रक्रिया विकास, गुणवत्ता व्यवस्था, सुरक्षा, जिम्मेदार संचालन और विश्वसनीय आपूर्ति को ध्यान में रखकर की है। साथ ही अनुसंधान एवं विकास को भी इस विनिर्माण क्षमता से जोड़ा गया है।
भारतीय सेना में लंबे समय तक सेवा के दौरान मैंने अनुभव किया है कि किसी भी मिशन की सफलता का आधार अनुशासन, निर्धारित मानकों का पालन और जिम्मेदारी है। फार्मास्युटिकल क्षेत्र में इन मूल्यों का महत्व और भी अधिक है, क्योंकि यहाँ किसी प्रक्रिया का अंतिम प्रभाव मानव जीवन और स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसलिए दवा निर्माण में गुणवत्ता और सुरक्षा केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि संस्थागत संस्कृति का हिस्सा होनी चाहिए।
आज भारत के लिए फार्मास्युटिकल क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हमारे सामने रखा है। विकसित भारत की यात्रा में मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और आत्मनिर्भर फार्मास्युटिकल क्षमता महत्वपूर्ण आधार हैं।
हमें दवाओं के साथ-साथ उनके आवश्यक घटकों के घरेलू विनिर्माण की क्षमता को भी निरंतर मजबूत करना होगा। मजबूत घरेलू उत्पादन क्षमता हमारी स्वास्थ्य सुरक्षा और विश्वसनीय आपूर्ति का आधार बनेगी तथा वैश्विक फार्मास्युटिकल आपूर्ति-श्रृंखला में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगी।
इसी दृष्टि से उज्जैन में इस सुविधा की स्थापना महत्वपूर्ण है। यह परियोजना अनुसंधान समर्थित विनिर्माण क्षमता विकसित करने, आवश्यक फार्मास्युटिकल इनपुट उपलब्ध कराने और कुशल रोजगार को समर्थन देने से जुड़ी है।
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पक्ष युवा और कौशल विकास भी है। फार्मेसी, रसायन विज्ञान, जैव-विज्ञान, इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं के लिए ऐसे उद्योग ज्ञान और रोजगार के बीच मजबूत सेतु बन सकते हैं।
किसी भी आधुनिक फार्मास्युटिकल इकाई की वास्तविक शक्ति केवल उसकी मशीनों और उत्पादन क्षमता में नहीं होती। उसकी शक्ति उसके वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और प्रशिक्षित कर्मचारियों में होती है। इसलिए निरंतर प्रशिक्षण, कौशल विकास और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना इस क्षेत्र की दीर्घकालिक सफलता का महत्वपूर्ण आधार है।
इसके साथ ही औद्योगिक विकास की हमारी दृष्टि जिम्मेदार भी होनी चाहिए। उत्पादन और पर्यावरण के बीच संतुलन, संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और सुरक्षित प्रक्रियाएँ आधुनिक उद्योग की अनिवार्य आवश्यकताएँ हैं। जे.के. लाइफकेयर की संस्थागत प्रतिबद्धता में वैज्ञानिक अनुशासन, प्रशिक्षित मानव संसाधन, पारदर्शी दस्तावेजीकरण, डेटा आधारित सुधार और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को भी महत्व दिया गया है।
मेरा मानना है कि किसी उद्योग की सफलता तब अधिक सार्थक होती है, जब उसका लाभ उसके आसपास के समाज तक भी पहुँचे। स्थानीय युवाओं को अवसर मिले, तकनीकी कौशल विकसित हो और सहायक उद्योगों के लिए नई संभावनाएँ पैदा हों, तो औद्योगिक विकास का प्रभाव कहीं व्यापक हो जाता है। मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास में फार्मास्युटिकल क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और उज्जैन में यह सुविधा इस दिशा में नई संभावनाएँ खोल सकती है।
मैं इस अवसर पर उन सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों, कर्मचारियों, परियोजना भागीदारों और संस्थाओं को भी बधाई देता हूँ, जिनके सामूहिक प्रयास से यह सुविधा आकार ले सकी है। किसी भी बड़ी परियोजना की सफलता के पीछे अनेक लोगों का परिश्रम, समर्पण और सहयोग होता है।
आज इस सुविधा का उद्घाटन केवल एक औद्योगिक इकाई की शुरुआत नहीं है। यह गुणवत्ता, वैज्ञानिक अनुशासन, मरीजों की सुरक्षा और आत्मनिर्भर फार्मास्युटिकल क्षमता के प्रति एक नई प्रतिबद्धता का शुभारंभ भी है।
मेरी कामना है कि महाकाल की इस नगरी से शुरू हुई यह यात्रा उच्च गुणवत्ता वाले फार्मास्युटिकल विनिर्माण, अनुसंधान एवं नवाचार, युवाओं के कौशल और रोजगार तथा विश्वसनीय आपूर्ति के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करे और उज्जैन, मध्य प्रदेश तथा राष्ट्र के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे।
इसी शुभकामना के साथ मैं डॉ. कात्यायन मिश्रा जी, डॉ. जया मिश्रा जी, डॉ. अनन्य मिश्रा जी और जे.के. लाइफकेयर की पूरी टीम को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए पुनः हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ।
स्वस्थ भारत, सक्षम भारत और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ जे.के. लाइफकेयर की इस यात्रा के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिन्द!