16-03-2026 : श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय ने तैयार किया ‘प्रज्ञानम्’ एआई चैटबॉट, जल्द होगा लॉन्च।
लोक भवन सूचना परिसर, उत्तराखण्ड
प्रेस विज्ञप्ति
श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय ने तैयार किया ‘प्रज्ञानम्’ एआई चैटबॉट, जल्द होगा लॉन्च
लोक भवन देहरादून 16 मार्च, 2026
भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘प्रज्ञानम्’ नामक एआई आधारित चैटबॉट तैयार किया है, जिसे जल्द ही सार्वजनिक रूप से लॉन्च किया जाएगा। यह चैटबॉट भारतीय ज्ञान प्रणाली से जुड़े विषयों पर जिज्ञासुओं के प्रश्नों का त्वरित और संदर्भ आधारित उत्तर देने में सक्षम होगा। इस संबंध में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन. के. जोशी ने लोक भवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) के समक्ष ‘प्रज्ञानम्’ चैटबॉट का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया और इसकी कार्यप्रणाली तथा उपयोगिता के बारे में जानकारी साझा की।
कुलपति प्रो. जोशी ने बताया कि ‘प्रज्ञानम्’ प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक अनूठा संगम है। इस चैटबॉट को विशेष रूप से भारतीय ज्ञान प्रणाली से जुड़े विषयों वेद, उपनिषद, पुराण, प्राचीन भारतीय गणित, आयुर्वेद, दर्शन तथा भारतीय विज्ञान पर आधारित विस्तृत डाटाबैक के आधार पर विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम नागरिकों को भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित प्रमाणिक जानकारी डिजिटल माध्यम से सरल और त्वरित रूप में उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत को आधुनिक पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए तकनीक का उपयोग अत्यंत आवश्यक है और ‘प्रज्ञानम्’ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह चैटबॉट विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए एक डिजिटल ज्ञान सहायक के रूप में कार्य करेगा और नई शिक्षा नीति के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा में समाहित करने में भी सहायक सिद्ध होगा।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए इसे ज्ञान और तकनीक के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड, जिसे देवभूमि और ज्ञान की तपोस्थली के रूप में जाना जाता है, वहां से इस प्रकार की नवाचारपूर्ण तकनीक का विकसित होना पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार ‘प्रज्ञानम्’ एआई चैटबॉट को शीघ्र ही आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि देश-विदेश के विद्यार्थी, शोधकर्ता और सामान्य नागरिक भारतीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल माध्यम से आसानी से समझ और सीख सकें।
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