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    14-03-2026:महिला उद्यमी परिसंघ- (COWE) द्वारा आयोजित “महिला उद्यमी – उभरते सितारे” सम्मान समारोह में माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि : मार्च 14, 2026

    जय हिन्द!

    नारी शक्ति को समर्पित इस गरिमामय सम्मान समारोह में आप सभी के मध्य उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत हर्ष, गर्व और प्रेरणा का विषय है। आज का यह अवसर केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि अपने कर्म, प्रतिभा और नेतृत्व से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई दिशा प्रदान करने वाली नारी सृजनशीलता, सामर्थ्य, साहस और नेतृत्व का उत्सव है।

    भारतीय सभ्यता और संस्कृति में नारी को सदैव सृजन, शक्ति और प्रेरणा का स्रोत माना गया है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है- “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता।” अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ समृद्धि, सौहार्द और दिव्यता का वास होता है। यह केवल एक आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि भारतीय समाज की गहरी सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।

    आज का यह समारोह उसी भावना का सजीव उदाहरण है, जहाँ हम उन प्रेरणादायी महिलाओं का सम्मान कर रहे हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा, नवाचार और उद्यमिता से न केवल स्वयं को स्थापित किया है, बल्कि समाज के लिए भी नए अवसरों और संभावनाओं के द्वार खोले हैं।

    महिला उद्यमी परिसंघ- Confederation of Women Entrepreneurs (COWE) द्वारा आयोजित “Fem Preneur Rising Stars Felicitation Ceremony 2026” यह समारोह उन महिलाओं के अदम्य साहस, संघर्ष और नेतृत्व क्षमता का उत्सव है, जिन्होंने अपने संकल्प और आत्मविश्वास से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई दिशा प्रदान की है।

    आज का भारत तेजी से परिवर्तन और प्रगति के मार्ग पर अग्रसर है। इस विकास यात्रा में भारत की महिलाएँ नई ऊर्जा, नई चेतना और नए नेतृत्व के साथ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आज की भारतीय महिला केवल परिवार की धुरी ही नहीं है, बल्कि वह राष्ट्र की आर्थिक प्रगति और सामाजिक परिवर्तन की सशक्त वाहक भी बन चुकी है।

    इसी संदर्भ में स्वामी विवेकानन्द का एक अत्यंत सारगर्भित विचार स्मरण आता है- “किसी भी राष्ट्र की प्रगति का सर्वाेत्तम मापदंड वहाँ की महिलाओं की स्थिति से लगाया जा सकता है।” यह विचार हमें स्मरण कराता है कि जब महिलाओं को अवसर, सम्मान और समान भागीदारी मिलती है, तभी समाज और राष्ट्र का वास्तविक विकास संभव होता है।

    शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, प्रशासन, खेल, कला, उद्योग और उद्यमिता- जीवन का कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जहाँ महिलाओं ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प से नई ऊँचाइयाँ प्राप्त न की हों। उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों और पारंपरिक बाधाओं को तोड़ते हुए यह सिद्ध कर दिया है कि यदि अवसर और विश्वास मिले, तो महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान कर सकती हैं।

    महिला उद्यमिता आज आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की एक सशक्त आधारशिला बनकर उभर रही है। जब महिलाएँ उद्यम स्थापित करती हैं, तो वे केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि अनेक परिवारों के लिए रोजगार, कौशल और आर्थिक अवसरों का सृजन करती हैं। उनका प्रयास नवाचार, आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास की भावना को आगे बढ़ाता है तथा राष्ट्र की आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान करता है।

    आज भारत जिस विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, उसमें नारी शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वास्तव में विकसित भारत का निर्माण नारी शक्ति के सामर्थ्य, प्रतिभा और नेतृत्व के बल पर ही संभव है। जब महिलाएँ शिक्षा, नवाचार, उद्यमिता और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ती हैं, तब राष्ट्र की प्रगति को नई गति और नई दिशा मिलती है। इसलिए महिलाओं का सशक्तीकरण केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है।

    मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि Confederation of Women Entrepreneurs– COWE जैसी संस्थाएँ महिलाओं को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर प्रदान कर रही हैं। वर्ष 2004 में स्थापित यह संस्था आज एक सशक्त राष्ट्रीय मंच बन चुकी है, जिससे देशभर की हजारों महिला उद्यमी जुड़ी हुई हैं।

    देवभूमि उत्तराखण्ड की मातृ शक्ति ने सदैव प्रकृति, संस्कृति और समाज के बीच संतुलन बनाए रखते हुए विकास की प्रेरक भूमिका निभाई है। यहाँ की मातृ शक्ति ने सदैव अपने परिश्रम, धैर्य और अदम्य साहस से समाज को दिशा दी है। पर्वतीय जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने परिवार, समाज और प्रकृति के साथ संतुलन बनाते हुए अपनी अद्भुत कार्य क्षमता का परिचय दिया है। कृषि, हस्तशिल्प, स्वयं सहायता समूह, लघु उद्योग और स्थानीय उत्पादों के संवर्धन में यहाँ की महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।

    आज उत्तराखण्ड की महिलाएँ “वोकल फॉर लोकल” के माध्यम से जैविक उत्पादों, हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाओं को नई पहचान दिला रही हैं। यह प्रयास न केवल महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान कर रहा है।

    आज हम जिन प्रेरणादायी महिलाओं को सम्मानित कर रहे हैं, वे अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता, नवाचार और समाजोपयोगी योगदान की अद्भुत मिसाल हैं। इन सभी महिलाओं ने अपने परिश्रम, संकल्प और नेतृत्व से यह सिद्ध किया है कि जब नारी अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती है, तो वह केवल अपनी सफलता की कहानी नहीं लिखती, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का एक नया अध्याय भी रचती है।

    इन सभी महिलाओं की उपलब्धियाँ यह सिद्ध करती हैं कि जब नारी अपने संकल्प, प्रतिभा और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती है, तो वह केवल स्वयं नहीं, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाने की शक्ति बन जाती है।

    आज जिन उदीयमान महिला उद्यमियों को सम्मानित किया जा रहा है, वे केवल सफल उद्यमी ही नहीं हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरक शक्ति भी हैं। उनका समर्पण, नवाचार और नेतृत्व आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

    मैं महिला उद्यमी परिसंघ- COWE उत्तराखण्ड चैप्टर की इस सराहनीय पहल के लिए विशेष रूप से श्रीमती मीतू पुरी जी को हार्दिक बधाई देता हूँ। उनके नेतृत्व और प्रयासों से यह मंच महिलाओं को अवसर, मार्गदर्शन और पहचान प्रदान कर रहा है तथा उन्हें उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।

    मेरा दृढ़ विश्वास है कि महिला सशक्तीकरण केवल महिलाओं का विषय नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब परिवार, समाज, उद्योग, शिक्षा जगत और शासन-प्रशासन मिलकर महिलाओं को अवसर, संसाधन और प्रोत्साहन प्रदान करते हैं, तभी वास्तविक सशक्तीकरण संभव होता है।

    माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में महिला सशक्तीकरण को राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ाया गया है। मुद्रा योजना, स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया और स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने जैसी पहलों ने लाखों महिलाओं को उद्यमिता के अवसर प्रदान किए हैं। इसके साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स और तकनीकी नवाचार ने महिलाओं को घर से ही वैश्विक बाजार तक पहुँचने की नई संभावनाएँ प्रदान की हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

    आज आवश्यकता है कि अधिक से अधिक उद्योगपति, नीति-निर्माता, शिक्षाविद् और सामाजिक नेता इस मिशन से जुड़ें। यदि हम मिलकर महिलाओं की प्रतिभा और क्षमता को आगे बढ़ने का अवसर देंगे, तो निश्चय ही एक सशक्त, समावेशी और प्रगतिशील समाज का निर्माण होगा।

    अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि जब महिलाएँ सशक्त होती हैं, तो केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरा परिवार, पूरा समाज और पूरा राष्ट्र सशक्त होता है। नारी केवल सृजन की शक्ति ही नहीं, बल्कि परिवर्तन और प्रगति की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति भी है। एक सशक्त नारी ही सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र की वास्तविक आधारशिला होती है।

    आज आवश्यकता है कि हम सभी मिलकर ऐसा वातावरण निर्मित करें जहाँ प्रत्येक बेटी को शिक्षा के समान अवसर मिलें, प्रत्येक महिला को सम्मान और सुरक्षा का विश्वास मिले, और प्रत्येक नारी को अपने सपनों को साकार करने के लिए आवश्यक संसाधन और मंच उपलब्ध हों।

    आइए! हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि नारी सम्मान, नारी स्वावलंबन और नारी नेतृत्व को प्रोत्साहित करते हुए हम एक ऐसे भारत का निर्माण करेंगे जो समावेशी, संवेदनशील और प्रगतिशील हो। यही मार्ग हमें एक सशक्त समाज, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुँचाएगा।

    इसी आशा और विश्वास के साथ आज सम्मानित होने वाली सभी महिलाओं को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देते हुए मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

    नारी शक्ति जिंदबाद! वंदेमातरम! जय हिन्द!