12-01-2026 : उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के दशम दीक्षांत समारोह में माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन
जय हिन्द!
उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के दशम दीक्षांत समारोह में आप सभी के मध्य उपस्थित होकर मुझे अत्यंत हर्ष, गौरव एवं आत्मिक संतोष की अनुभूति हो रही है।
आज का यह सुअवसर उपाधियाँ प्रदान करने के साथ ही ज्ञान, संस्कार, संकल्प और राष्ट्र-निर्माण की दीक्षा का भी पावन क्षण है। मैं इस गरिमामय अवसर पर उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, उनके गौरवशाली अभिभावकों, समर्पित शिक्षकों तथा विश्वविद्यालय परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ।
इस विश्वविद्यालय के शिक्षण-कार्यक्रमों में सिमगपइपसपजल की सहायता से, अनेक विद्यार्थियों ने अपने काम-काज, परिवार के भरण-पोषण तथा अन्य जिम्मेदारियों को निभाते हुए उच्च-शिक्षा प्राप्त की है। मुझे प्रसन्नता है कि दूर-दराज के इलाकों, ग्रामीण क्षेत्रों एवं आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों, और कार्यरत वर्गों तक उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय ने शिक्षा पहुँचाकर “उच्च शिक्षा आपके द्वार” के अपने ध्येय वाक्य को साकार किया है।
यह गर्व का विषय है कि उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय न केवल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (छम्च्) को लागू करने वाला राज्य का प्रथम विश्वविद्यालय है, बल्कि छब्टम्ज् की मान्यता और ‘12-बी’ की दिशा में इसकी प्रगति इसे एक सशक्त एवं पूर्ण संस्थान के रूप में स्थापित करती है।
आज के डिजिटल युग में, यह विश्वविद्यालय सीमाओं को लांघ चुका है। ैॅ।ल्।ड मंच के माध्यम से अब तक 60 से अधिक देशों के 2 लाख 6 हजार से अधिक शिक्षार्थी हमसे जुड़ चुके हैं। इस विश्वविद्यालय में साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक और वेब टेक्नोलॉजी जैसे हमारे अत्याधुनिक पाठ्यक्रम इस बात का प्रमाण हैं कि हम भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हैं।
साथियों,
वर्तमान में बहुत से विद्यार्थियों को, अपनी ‘जिम्मेदारियों’ और ‘परिस्थितियों’ की वजह से हायर एजुकेशन को जारी रखने में कठिनाई होती है। ऐसे व्यक्ति जो अभी नौकरी या स्व-रोजगार में व्यस्त हैं, वे भी स्किल अपग्रेड करने तथा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए मुक्त विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा जारी रख सकते हैं। ऐसे ‘मंतदमत और समंतदमत’, डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करके ‘नदकमत-मउचसवलउमदज’ से बाहर आकर प्रगति के नए स्तर प्राप्त कर सकते हैं।
मुक्त शिक्षा प्रणाली, विशेषकर दूरस्थ शिक्षा, यह समय की मांग भी है और सामाजिक न्याय की सशक्त अभिव्यक्ति भी। यह प्रणाली शिक्षा के क्षेत्र में एक मौन क्रांति का नेतृत्व कर रही है। इसने यह सिद्ध कर दिया है कि सीखने की कोई आयु नहीं होती, कोई सीमा नहीं होती और कोई भौगोलिक बाधा नहीं होती है।
मुक्त शिक्षा प्रणाली ने शिक्षा को उन लोगों तक पहुँचाया है, जो अब तक किसी न किसी कारण से मुख्यधारा की शिक्षा से वंचित रह गए थे। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवक-युवतियाँ, कामकाजी वर्ग, सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग, महिलाएँ, दिव्यांगजन और सैनिक- सभी के लिए यह प्रणाली आशा का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। जो लोग अपने परिवार की जिम्मेदारियों, आर्थिक परिस्थितियों या रोजगार के कारण नियमित शिक्षा नहीं ले सके, उनके लिए मुक्त शिक्षा एक नया जीवन अवसर प्रदान करती है।
विशेष रूप से हमारे पर्वतीय और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में, जहाँ आज भी शिक्षा संस्थानों तक पहुँच एक चुनौती है, वहाँ दूरस्थ शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन सकती है। यदि हम इन क्षेत्रों में प्रभावी ैजनकल ब्मदजतम एवं म्गंउ ब्मदजतम स्थापित करें, तो विशेषकर ग्रामीण महिलाओं और बालिकाओं तक शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित की जा सकती है, ताकि पूरे परिवार और समाज को दिशा देने वाली हमारी मातृशक्ति राष्ट्र-निर्माण में और अधिक योगदान दे सके।
कोविड-19 महामारी के कठिन दौर ने हमें यह सिखाया कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, शिक्षा रुकनी नहीं चाहिए। उस संकट काल में ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा ने न केवल शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखी, बल्कि हमारे सोचने के तरीके को भी बदल दिया। यह अनुभव अस्थायी नहीं था, बल्कि भविष्य की शिक्षा प्रणाली की नींव साबित हुआ। उसी कालखण्ड ने यह स्पष्ट कर दिया कि दूरस्थ और डिजिटल शिक्षा अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है।
साथियों,
किसी भी राष्ट्र की प्रगति इस बात से तय होती है कि उसकी शिक्षा व्यवस्था कितनी समावेशी, लचीली और भविष्यदृष्टा है। वर्तमान में प्रौद्योगिकी ही समानता का नया साधन है। हमें नवाचार के माध्यम से अपनी आबादी, विशेषकर समाज के सबसे निचले तबके के लोगों को सशक्त बनाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षा उन तक भी पहुंचे जो इससे वंचित हैं। डिजिटल विश्वविद्यालय और अन्य ई-लर्निंग पहलें इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
यदि हम भारत को ज्ञान आधारित आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करना चाहते हैं, तो हमें अपनी शिक्षा व्यवस्था में एक मौलिक परिवर्तन सुनिश्चित करना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 हमारी शिक्षा और कौशल व्यवस्था को बदलने की दिशा में एक अहम कदम है। इस एनईपी में, भारत को ‘ळसवइंस ज्ञदवूसमकहम ैनचमतचवूमत’ के रूप में प्रतिष्ठित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का ‘‘विकसित भारत /2047’’ का संकल्प हम सभी के लिए एक महान प्रेरणापुंज है। इस गौरवशाली लक्ष्य की प्राप्ति में हमारे युवाओं की मेधा, शिक्षण संस्थानों की प्रतिबद्धता और इनोवेशन की भूमिका अहम है।
आज आवश्यकता है कि हम रिसर्च को अपनी संस्कृति का हिस्सा बनाएं, ताकि हमारे विद्यार्थी केवल नौकरी पाने वाले ही नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले ‘सॉल्यूशन प्रोवाइडर’ बनें। जब ज्ञान, तकनीक और युवा शक्ति का संगम होगा, तभी भारत वैश्विक मंच पर पुनः ‘विश्व गुरु’ के रूप में प्रतिष्ठित होगा।
आज जब हम एआई जैसे अत्याधुनिक तकनीकी साधनों के युग में प्रवेश कर चुके हैं, तब मुक्त शिक्षा प्रणाली शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन ला सकती है। एआई आधारित शिक्षण पद्धतियाँ विद्यार्थियों की व्यक्तिगत क्षमताओं के अनुरूप सीखने का अवसर प्रदान कर सकती हैं। बहुभाषी अध्ययन सामग्री, वर्चुअल कक्षाएँ, स्मार्ट मूल्यांकन प्रणाली और डिजिटल संसाधन- ये सभी मिलकर शिक्षा को अधिक प्रभावी, सुलभ और परिणामोन्मुख बना सकते हैं।
मेरा दृढ़ विश्वास है कि यदि हम मुक्त शिक्षा प्रणाली को नवाचार, तकनीक और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़ाएँ, तो यह शिक्षा के क्षेत्र में वास्तविक क्रांति ला सकती है। यह प्रणाली न केवल आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त बनाएगी, बल्कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र को भी साकार करेगी।
इस अवसर पर मैं नव-नियुक्त कुलपति महोदय को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ। हिन्दी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनके द्वारा किया गया उल्लेखनीय योगदान प्रशंसनीय है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि उनके नेतृत्व में यह संस्थान मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करेगा और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक शिक्षा की रोशनी पहुँचेगी।
यह दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि निरंतर सीखने की शुरुआत है। आप जहाँ भी रहें, जो भी करें- राष्ट्र प्रथम को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाइए। अपने ज्ञान, कौशल और मूल्यों से आप विकसित उत्तराखण्ड एवं विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनेंगे, मुझे पूर्ण विश्वास है।
आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि शिक्षा को अधिकार से अवसर और अवसर से सशक्तीकरण तक पहुँचाएँगे। जब शिक्षा हर व्यक्ति तक पहुँचेगी, तभी भारत वास्तव में ज्ञान महाशक्ति बनेगा।
इन्हीं शुभकामनाओं के साथ मैं आप सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।
जय हिन्द!