10-10-2026: “उत्तराखण्ड डीप-टेक 2030: पहाड़ के लिए तकनीक का निर्माण” कार्यक्रम में माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड का उद्बोधन
जय हिन्द!
उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी, माननीय कैबिनेट मंत्री श्री प्रदीप बत्रा जी, मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन जी, पुलिस महानिदेशक श्री दीपम सेठ जी, विशिष्ट अतिथिगण श्री दिलीप ताहिल जी, सुश्री विदुषी निशंक जी और श्री जयंत श्रीनिवास जी, मेरे साथी पूर्व सैनिकों, आदरणीय कुलपतिगण, शिक्षाविदों, उद्यमियों, कलाकारों, नवाचारकर्ताओं और मेरे प्रिय युवा साथियों!
आप सभी का लोक भवन में हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है।
आज का यह आयोजन केवल तकनीक पर चर्चा करने का अवसर नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड के भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास है। “उत्तराखण्ड डीप-टेक 2030: पहाड़ के लिए तकनीक का निर्माण” का मूल विचार स्पष्ट है- ऐसी तकनीक विकसित करना, जो पहाड़ की वास्तविक चुनौतियों का समाधान करे और विकास के अवसर अंतिम गाँव तक पहुँचाए।
उत्तराखण्ड देवभूमि है, वीरभूमि है और अब हमें इसे ज्ञान, अनुसंधान तथा नवाचार की भूमि भी बनाना है। भारतीय सेना में चार दशकों की सेवा ने मुझे सिखाया है कि आधुनिक तकनीक तभी सार्थक है, जब वह मानवीय विवेक, अनुशासन और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करे।
हमारे पहाड़ों में दूर-दराज के गाँव, कठिन रास्ते, प्राकृतिक आपदाओं का खतरा और युवाओं के पलायन जैसी चुनौतियाँ हैं। भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी परिस्थितियों में समय पर चेतावनी जीवन बचा सकती है। सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा, दूरस्थ गाँवों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करना भी हमारी प्रमुख आवश्यकताएँ हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अर्थात् एआई, इन चुनौतियों के समाधान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मौसम और भौगोलिक आँकड़ों का विश्लेषण आपदा प्रबंधन में सहायक हो सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं में यह प्रारंभिक जाँच और विशेषज्ञ परामर्श की पहुँच बढ़ा सकता है। शिक्षा में विद्यार्थियों को सीखने के नए अवसर दे सकता है और कृषि में फसल तथा मौसम संबंधी बेहतर सलाह उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।
हमारे मंडुवा, झंगोरा, चैलाई, औषधीय पौधों और अन्य स्थानीय उत्पादों को तकनीक तथा डिजिटल बाजारों से जोड़कर किसानों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इस प्रकार एआई का उपयोग स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, युवाओं के लिए रोजगार बढ़ाने और पलायन की चुनौती का समाधान खोजने में किया जा सकता है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा है कि “इक्कीसवीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा।” इस संकल्प को साकार करने के लिए हमें तकनीक को शिक्षा, अनुसंधान, उद्यमिता और जनसेवा से जोड़ना होगा।
आज ‘उत्तराखण्ड डीप-टेक 2030’ परियोजना का शुभारंभ इसी दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। यह हमारी उस सोच को आगे बढ़ाता है, जिसमें तकनीक केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि पहाड़ की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित हो और उसका लाभ दूरस्थ गाँवों तक पहुँचे।
इसी उद्देश्य से लोक भवन में एआई थीम रूम की स्थापना की गई है। दून विश्वविद्यालय और आईआईटी मद्रास के सहयोग से उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए ‘एआई फॉर ऑल’ पाठ्यक्रम शुरू किए गए। आज दून विश्वविद्यालय के सप्लाई चेन मैनेजमेंट एवं लॉजिस्टिक्स उत्कृष्टता केंद्र के सहयोग से ‘एआई फॉर एवरीवन’ पाठ्यक्रम का शुभारंभ इसी प्रयास को आगे बढ़ाता है।
हमारी दूसरी महत्त्वपूर्ण पहल ‘एआई ऑन व्हील्स 2.0’ है, जिसे आज रवाना किया गया है। इसके माध्यम से एआई थीम रूम की गतिविधियों को उत्तराखण्ड के सभी 13 जनपदों तक पहुँचाया जाएगा। यह विद्यालयों, महाविद्यालयों और समुदायों में तकनीकी जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बनेगा। मेरा सपना है कि पहाड़ के किसी भी गाँव का बच्चा अवसरों की कमी के कारण पीछे न रहे। हर विद्यार्थी आत्मविश्वास से कह सके- “एआई मेरे लिए भी है और मैं इसका उपयोग अपने समाज की समस्याओं के समाधान के लिए कर सकता हूँ।”
आज की चर्चाओं ने यह विश्वास और मजबूत किया है कि तकनीक का वास्तविक महत्त्व तभी है, जब वह मानवीय क्षमताओं को बढ़ाए और जीवन की वास्तविक चुनौतियों का समाधान करे।
सैन्य एवं रक्षा क्षेत्र से जुड़े विचारों ने यह स्पष्ट किया कि ड्रोन, उपग्रह और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में नई संभावनाएँ खोल रहे हैं। लेकिन तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, सैनिक का साहस, नेतृत्व, विवेक और राष्ट्र के प्रति समर्पण सदैव महत्त्वपूर्ण रहेंगे। मुझे विशेष प्रसन्नता है कि इस चर्चा में कारगिल युद्ध की वीरांगना कैप्टन यशिका हटवाल त्यागी के अनुभव सुनने को मिले। उनका साहस और सेवा भाव हमारी बेटियों के लिए प्रेरणा है। यह हमें याद दिलाता है कि अवसर, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प मिलें, तो हमारी बेटियाँ प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का परिचय दे सकती हैं।
यही दूरदृष्टि हमें शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनानी होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना या उत्तर याद कराना नहीं हो सकता। हमें विद्यार्थियों में प्रश्न पूछने, तर्क करने, प्रयोग करने और नए समाधान खोजने की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी। हमारे विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल डिग्रियाँ प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसा शोध करना भी है, जो उत्तराखण्ड की वास्तविक समस्याओं का समाधान खोज सके। इसी भावना से “वन यूनिवर्सिटी, वन रिसर्च” का विचार महत्त्वपूर्ण बनता है। जब विश्वविद्यालय अपने आसपास के समाज, स्थानीय संसाधनों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अनुसंधान करेंगे, तब ज्ञान का लाभ सीधे जनजीवन तक पहुँचेगा।
ज्ञान को उपयोगी समाधान और समाधान को रोजगार में बदलने की दिशा भी उतनी ही आवश्यक है। कला, सिनेमा, डिजिटल सृजन और उद्यमिता से जुड़ी चर्चाओं ने इस बात को रेखांकित किया कि तकनीक नई संभावनाएँ खोल सकती है, लेकिन मौलिक कल्पना, संवेदना और मानवीय रचनात्मकता का अपना विशिष्ट महत्त्व है। उत्तराखण्ड के युवाओं को इन क्षमताओं का उपयोग नए विचारों को उद्यम में बदलने के लिए करना चाहिए। हमारे स्टार्टअप, होम-स्टे, जैविक खेती, पर्यटन, डिजिटल सेवाएँ और स्थानीय उत्पाद रोजगार तथा आर्थिक विकास के नए आधार बन सकते हैं। मेरा विश्वास है कि हमारे युवा केवल रोजगार पाने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने ज्ञान और नवाचार से दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करें।
इन तीनों क्षेत्रों का संदेश एक ही है-सुरक्षा में तकनीक को मानवीय विवेक का सहयोगी बनना है, शिक्षा में ज्ञान को शोध और समाधान से जोड़ना है, और रचनात्मकता को उद्यम तथा रोजगार के अवसरों में बदलना है। इसी समन्वित दृष्टि से उत्तराखण्ड को तकनीक, नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।
साथियों,
तकनीकी प्रगति के साथ अपनी ज्ञान परंपरा से जुड़े रहना भी आवश्यक है। भारत ने भाषा, गणित, तर्क और दर्शन के क्षेत्रों में समृद्ध ज्ञान विकसित किया है। महर्षि पाणिनि की अष्टाध्यायी भाषा की संरचना और नियमबद्धता का अद्भुत उदाहरण है। आज भाषा प्रौद्योगिकी और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग के क्षेत्र में भारतीय भाषाओं के अध्ययन, प्राचीन ग्रंथों के डिजिटल संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान की व्यापक संभावनाएँ हैं। हमारी परंपरा हमें ज्ञान और मूल्य देती है, जबकि आधुनिक विज्ञान तथ्यों को परखने और नए समाधान विकसित करने के साधन देता है।
मैं हमेशा कहता हूँ कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ हमें “एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस”, अर्थात् मूल्यों, अनुशासन, चरित्र और अंतरात्मा से जुड़ी बुद्धिमत्ता भी विकसित करनी होगी। एआई मानव बुद्धि का विकल्प नहीं, बल्कि मानवीय क्षमताओं का विस्तार है। तकनीक सूचना दे सकती है, लेकिन उसकी सत्यता परखना और उसका उचित उपयोग सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है।
डीपफेक, भ्रामक सूचनाएँ और निजी आँकड़ों का दुरुपयोग गंभीर चुनौतियाँ हैं। इसलिए एआई का विकास और उपयोग मानवीय गरिमा, गोपनीयता, न्याय तथा पारदर्शिता को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। मूल्यों के बिना तकनीक जोखिम बन सकती है, लेकिन मानवीय मूल्यों के साथ वही तकनीक मानवता के लिए वरदान बन सकती है।
मेरे प्रिय युवा साथियांे, वर्ष 2047 में जब भारत स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे करेगा, तब आप विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहे होंगे। मैं आपसे तीन आग्रह करता हूँ- सीखिए, निर्माण कीजिए और सेवा कीजिए। एआई को सीखिए, उससे प्रश्न कीजिए और वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजिए। पहाड़ के किसानों, सैनिकों, विद्यार्थियों और गाँवों के लिए उपयोगी तकनीकी समाधान विकसित कीजिए। और जो भी निर्माण करें, उसे ईमानदारी, जिम्मेदारी तथा समाज के हित को ध्यान में रखकर करें।
इच्छाशक्ति, आत्म-अनुशासन और आत्म-संयम सफलता के आधार हैं। इन गुणों के साथ उत्तराखण्ड के युवा नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर सकते हैं।
आइए, हम सब मिलकर ऐसा उत्तराखण्ड बनाएँ, जहाँ तकनीक बड़े शहरों तक सीमित न रहे, दूरस्थ गाँवों तक ज्ञान पहुँचे, युवाओं को अपने प्रदेश में अवसर मिलें और विज्ञान, नवाचार तथा मानवीय मूल्य साथ-साथ आगे बढ़ें। हमारा उद्देश्य केवल नई तकनीक अपनाना नहीं, बल्कि उसका उपयोग जनकल्याण और राष्ट्र निर्माण के लिए करना होना चाहिए।
मैं एआई थीम रूम की टीम, दून विश्वविद्यालय, इस आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों, माननीय मुख्यमंत्री जी, तीनों पैनलों के प्रतिभागियों और सभी विशिष्ट अतिथियों को इस महत्त्वपूर्ण पहल के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ।
कठोपनिषद् का संदेश है-
“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।”
अर्थात् उठो, जागो और श्रेष्ठ ज्ञानी जनों के पास जाकर ज्ञान प्राप्त करो।
इसी प्रेरणा के साथ हम उत्तराखण्ड को ज्ञान, नवाचार और जिम्मेदार तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी बनाने का संकल्प लें। तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और हमारा प्रत्येक प्रयास “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की भावना से प्रेरित हो।
वंदे मातरम्!
जय हिन्द!
जय उत्तराखण्ड!