06-03-2026 : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित समारोह में माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन
जय हिन्द!
आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के निमित्त आयोजित इस गरिमामयी समारोह में, मैं देवभूमि उत्तराखण्ड की समस्त मातृशक्ति और इस सभागार में उपस्थित विदुषी महिलाओं, कर्मठ कार्यकर्ताओं और भविष्य की पथ-प्रदर्शक बेटियों का हृदय की गहराइयों से अभिनंदन करता हूँ।
आज का यह अवसर नारी शक्ति के उस शाश्वत गौरव का उत्सव है, जिसने मानव सभ्यता को दिशा दी है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हमें इस सत्य का स्मरण कराता है कि राष्ट्र की प्रगति और नारी सम्मान एक-दूसरे के पूरक हैं।
आज कार्यक्रम का शुभारंभ मातृ आंचल संस्था, हरिद्वार की बेटियों द्वारा प्रस्तुत अत्यंत भावपूर्ण सरस्वती वंदना ने संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय कर दिया। बालिका निकेतन, अल्मोड़ा की बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने हमारी देवभूमि की समृद्ध लोक-कला को जीवंत कर दिया है। इन बेटियों के आत्मविश्वास और प्रतिभा को देखकर मन अत्यंत हर्षित है। मैं इन सभी लाडली बेटियों के उज्ज्वल और यशस्वी भविष्य की मंगलकामना करता हूँ।
‘महिला कल्याण उत्कृष्ट सेवा सम्मान 2026’ से सम्मानित सभी मातृशक्ति को मैं हार्दिक बधाई देता हूँ। आपका सेवा भाव समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। साथ ही प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्राप्त करने वाले सभी किशोर-किशोरियों को भी मेरी शुभकामनाएँ। आपकी उपलब्धियाँ विकसित भारत के निर्माण में नई ऊर्जा प्रदान करेंगी।
हमारी संस्कृति का एक अमर सूत्र है- “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः” अर्थात् जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवताओं का वास होता है। यह केवल एक श्लोक नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन का मूल आधार है। नारी सृजन की जननी ही नहीं, बल्कि संस्कारों की प्रथम गुरु और समाज की नैतिक दिशा की संरक्षिका भी है।
हमारी सनातन संस्कृति का यह शाश्वत सत्य रहा है कि नारी केवल समाज की एक इकाई नहीं, बल्कि सृष्टि की चेतना और शक्ति का प्रतीक है। भारतीय दर्शन में स्त्री को ‘शक्ति’ के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। ज्ञान के लिए हम माँ सरस्वती का स्मरण करते हैं, समृद्धि के लिए माँ लक्ष्मी की आराधना करते हैं और अधर्म के विनाश के लिए माँ दुर्गा का आह्वान करते हैं।
इतिहास साक्षी है कि भारत की धरती ने ऐसी विलक्षण नारियों को जन्म दिया है, जिन्होंने अपनी मेधा और साहस से कालखंड को नई दिशा दी। हमारे पास गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषियां रहीं, जिन्होंने शास्त्रार्थ में बड़े-बड़े विद्वानों को निरुत्तर किया। हमारे पास लोपामुद्रा और अरुंधति जैसी ऋषिकाएं रहीं, जिन्होंने वेदों की ऋचाओं की रचना की।
इतना ही नहीं, जब देश की आन-बान पर संकट आया, तो झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, रानी चेन्नम्मा और अक्का महादेवी जैसी वीरांगनाओं ने तलवार थामकर अदम्य साहस का परिचय दिया। अहिल्याबाई होल्कर जैसी कुशल प्रशासिका ने सुशासन और न्याय की जो मिसाल पेश की, वह आज भी आधुनिक लोकतंत्र के लिए मार्गदर्शक है।
जब मैं अपनी देवभूमि उत्तराखण्ड की बात करता हूँ, तो यहाँ की महिलाओं का संघर्ष और समर्पण देख मेरा मस्तक श्रद्धा से झुक जाता है। यहाँ की पहाड़ियों जैसी अटलता और नदियों जैसी अविरल धारा यहाँ की महिलाओं के व्यक्तित्व में झलकती है। खेती-बाड़ी से लेकर घर की चहारदीवारी संभालने तक, और अब स्वरोजगार से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने तक, हमारी माताएं और बहनें इस राज्य की असली ‘रीढ़’ हैं।
आज का दिन तीलू रौतेली के उस साहस को नमन करने का है जिसने किशोरावस्था में ही सात युद्ध लड़े। आज का दिन गौरा देवी के उस ‘चिपको आंदोलन’ को याद करने का है, जिसने विश्व को पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ाया। आज का दिन बचेंद्री पाल की उस बुलंदी को सलाम करने का है, जिसने एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर बेटियों के सपनों को नए पंख दिए। इन विभूतियों ने सिद्ध किया है कि जब नारी संकल्प लेती है, तो वह केवल अपना भविष्य नहीं बदलती, बल्कि इतिहास की दिशा भी बदल देती है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, आज भारत ‘वुमेन डेवलपमेंट’ से आगे बढ़कर ‘वुमेन लेड डेवलपमेंट’ की ओर अग्रसर है। केंद्र सरकार की योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए हैं। यह केवल नीतिगत परिवर्तन नहीं है, बल्कि भारत की विकास यात्रा का एक नया अध्याय है, जिसमें नारी केवल भागीदार नहीं, बल्कि विकास की अग्रदूत बन रही है।
उज्ज्वला योजना ने करोड़ों माताओं-बहनों को धुएँ से मुक्ति दिलाकर उनके स्वास्थ्य और गरिमा की रक्षा की है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान ने समाज की सोच बदली और लिंगानुपात में सकारात्मक सुधार लाया। मुद्रा योजना के तहत दिए गए ऋणों में से लगभग 70 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं, जो आज छोटे-बड़े उद्योगों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत संसद और विधानसभाओं में आरक्षण सुनिश्चित कर प्रधानमंत्री जी ने राजनीतिक नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी को एक नया संवैधानिक आधार दिया है। जल जीवन मिशन के तहत ‘हर घर नल से जल’ ने हमारी ग्रामीण बहनों के उस कष्ट को दूर किया है, जिसमें उन्हें पानी के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता था।
नारी केवल परिवार की आधारशिला नहीं है, वह समाज की चेतना और राष्ट्र की शक्ति है। इस दृष्टि से हमारी प्रदेश सरकार उत्तराखण्ड की महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रही है। राज्य सरकार की नीतियाँ महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सुदृढ़ बना रही हैं।
लखपति दीदी योजना के अंतर्गत उत्तराखण्ड की ढाई लाख से अधिक बहनें वार्षिक एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो चुकी हैं। बेटियों के जन्म पर उत्साह और सम्मान का वातावरण बनाने तथा उनके पोषण और देखभाल को सुनिश्चित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना’ एक वरदान सिद्ध हो रही है।
स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आज उत्तराखण्ड के दूरस्थ गांवों में हमारी बहनें ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को साकार कर रही हैं। पहाड़ के जैविक उत्पादों, हस्तशिल्प और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों में उनका योगदान प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे रहा है। राज्य की सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देकर सरकार ने उनके करियर और सुरक्षा को नई मजबूती दी है।
मेरा मानना है कि शिक्षा ही वह अस्त्र है जो समाज की बेड़ियों को काट सकता है। एक पुरुष को शिक्षित करने पर एक व्यक्ति शिक्षित होता है, लेकिन एक महिला को शिक्षित करने पर पूरा परिवार और आने वाली कई पीढ़ियाँ शिक्षित होती हैं। हमें खुशी है कि आज की बेटियाँ हर क्षेत्र में देश का नेतृत्व कर रही हैं।
आज का भारत बदल रहा है। अब कोई भी क्षेत्र महिलाओं के लिए दुर्गम नहीं रहा। आज हमारी बेटियाँ फाइटर जेट्स उड़ा रही हैं, सीमाओं की रक्षा कर रही हैं और अंतरिक्ष की ऊँचाइयों को भी छू रही हैं। कॉरपोरेट जगत से लेकर खेल के मैदान तक, ओलंपिक पदकों से लेकर स्टार्टअप्स के यूनिकॉर्न तक, हर जगह नारी शक्ति का परचम लहरा रहा है।
भाइयों और बहनों,
माननीय प्रधानमंत्री जी ने वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ का जो संकल्प लिया है, वह नारी शक्ति के बिना संभव नहीं है। यदि भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ बनना है, तो हमें अपनी आधी आबादी की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण के केंद्र में लाना ही होगा।
एक आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न तभी साकार होगा, जब भारत की नारी आत्मनिर्भर और सशक्त होगी। जब वह शिक्षित होगी, स्वस्थ होगी और निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबर की भागीदार होगी। हमें एक ऐसा इको सिस्टम बनाना है जहाँ बेटियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए संघर्ष न करना पड़े, बल्कि उन्हें सहज अवसर मिलें।
आज के दिन हमें केवल उत्सव नहीं मनाना है, बल्कि आत्मचिंतन भी करना है। हमें एक ऐसा वातावरण बनाना होगा जहाँ सुरक्षा, सम्मान और समानता केवल नारे न हों, बल्कि धरातल पर सच्चाई हों।
उपस्थित सभी मातृशक्ति से मैं यही कहूँगा, आप स्वयं को कम न आंकें। आप में वह सामथ्र्य है कि आप एक हाथ से पालना झुलाती है और दूसरे हाथ से राष्ट्र की नियति लिखती हैं। आप केवल परिवार की ज्योति नहीं, बल्कि राष्ट्र का मशाल हैं।
यदि हमें भारत को विकसित राष्ट्र और पुनः विश्व गुरु बनाना है, तो नारी शक्ति को राष्ट्र निर्माण के केंद्र में लाना ही होगा। जब नारी सुरक्षित होगी, शिक्षित होगी और सशक्त होगी, तभी समाज समृद्ध होगा, राष्ट्र शक्तिशाली बनेगा।
आइए! इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि उत्तराखण्ड की हर बेटी के सपनों को उड़ान मिले, हर बहन को सम्मान मिले और हर माँ का मस्तक गर्व से ऊँचा रहे।
पुनः आप सभी को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
जय हिन्द! जय उत्तराखण्ड!