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    06-02-2026 : “परीक्षा पे चर्चा-2026” कार्यक्रम में माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि : फ़रवरी 6, 2026

    जय हिन्द!

    मेरे प्यारे छात्र-छात्राओं, प्रबुद्ध शिक्षकगण, स्नेही अभिभावकगण!

    अभी कुछ ही क्षण पूर्व हम सभी ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के बहुत ही प्रेरणादायक कार्यक्रम “परीक्षा पे चर्चा-2026” को एक साथ देखा और सुना।

    हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने अत्यंत सरल शब्दों में बच्चों के मन की बात कही, परीक्षा के तनाव को दूर करने के व्यावहारिक उपाय बताए और यह संदेश दिया कि परीक्षा जीवन का अंत नहीं, बल्कि आत्म-मूल्यांकन का अवसर है।

    प्रधानमंत्री जी की बातें केवल मार्गदर्शन नहीं थीं, वे तो हर विद्यार्थी के आत्मविश्वास को मजबूत करने वाली ऊर्जा थीं। उसी प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए आज मैं भी आप सभी से एक मित्र की तरह संवाद करना चाहता हूँ।

    प्यारे बच्चों! सबसे पहले यह समझ लीजिए! परीक्षा कोई डर नहीं, यह एक अवसर है। परीक्षा बोझ नहीं, जीवन का एक अनुभव है। और परीक्षा जीवन नहीं, यह तो आगामी जीवन की तैयारी है।

    प्रिय विद्यार्थियों,

    आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में, परीक्षा को लेकर तनाव होना स्वाभाविक है। लेकिन याद रखिए! तनाव तब पैदा होता है, जब हम परिणाम के बारे में अधिक सोचने लगते हैं और प्रक्रिया को भूल जाते हैं। यदि आप नियमित पढ़ाई करें, समय का सही प्रबंधन करें और पूरे मनोयोग से प्रयास करें, तो परिणाम अवश्य ही अपने आप आपके पक्ष में आएगा।

    याद रखिए! समय अनमोल है, उसका सदुपयोग कीजिए। अपना समय छोटे-छोटे लक्ष्यों में बाँटिए। पढ़ाई के साथ थोड़ा विश्राम भी जरूरी है। देर रात तक जागने के बजाय नियमित दिनचर्या बनाइए। यह आपकी स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास दोनों को मजबूत करेगा।

    बच्चों! आपकी पहचान केवल अंकों से नहीं होती। आपकी पहचान तो आपके विचारों, आपके संस्कारों और आपके साहस से होती है। इसलिए असफलता से कभी डरिए मत। असफलता शिक्षक होती है, वह हमें सिखाती है कि हमें कहाँ सुधार करना है।

    इतिहास गवाह है कि दुनिया के महान वैज्ञानिक, खिलाड़ी और नेता- इन सभी ने कभी न कभी असफलता का सामना किया है, लेकिन उन्होंने अंत तक हार नहीं मानी। बिजली के बल्ब का आविष्कार करने वाले थॉमस एडिसन सैकड़ों असफल प्रयोगों के बाद ही सफल हुए।

    हमारे देश के महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी का पहला रॉकेट मिशन असफल रहा, फिर भी वे भारत के मिसाइल मैन बने। क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भी शुरुआती दौर में कई बार असफल रहे, पर निरंतर अभ्यास ने उन्हें क्रिकेट का भगवान बना दिया। इसलिए निरंतर परिश्रम करते रहिए! फल स्वयं आपके परिश्रम का अनुसरण करेगा।

    प्यारे बच्चों,

    हर बच्चा अलग है। हर बच्चे की सोच, विचार और धारणा अलग है। हर मन में अलग प्रतिभा है। हर बच्चा किसी न किसी क्षेत्र में अच्छा होता है। इसलिए स्वयं की तुलना कभी किसी और से न करें। दूसरों से आगे निकलने की नहीं- खुद से बेहतर बनने की कोशिश कीजिए। यही सच्ची सफलता का आधार है।

    आज शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। नई शिक्षा नीति हमें रटने की संस्कृति से बाहर निकालकर समझ-आधारित शिक्षा, कौशल विकास और रचनात्मक सोच की ओर ले जा रही है। सीखने की जिज्ञासा विकसित करें। प्रश्न पूछें। प्रयोग करें। यही आपको जीवन में आगे बढ़ाएगा।

    स्वस्थ मन के लिए स्वस्थ शरीर आवश्यक है। आप जिस खेल में रुचि रखते हैं, वह खेल खेलिए। प्रतिदिन थोड़ा समय योग, प्राणायाम और प्रकृति के साथ बिताइए। इससे एकाग्रता बढ़ती है और तनाव कम होता है।

    मेरी आपसे विशेष अपील है कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग करें। आज तकनीक ज्ञान का सशक्त माध्यम है, लेकिन तभी, जब हम उसे नियंत्रित करें। यदि तकनीक हमारे समय, ध्यान और सोच को नियंत्रित करने लगे, तो वह सहायक नहीं, बाधा बन जाती है।

    आप मोबाइल का उपयोग सीखने, जानकारी बढ़ाने और सकारात्मक संवाद के लिए करें, न कि अनावश्यक तुलना और भटकाव के लिए। याद रखिए! तकनीक आपका साधन है, स्वामी नहीं। आप उसके मालिक हैं, वह आपका नहीं।

    साथ ही, मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि किसी भी प्रकार के नशे और दुर्व्यसनों से स्वयं को दूर रखें। नशा क्षणिक आकर्षण है, लेकिन उसका परिणाम दीर्घकालिक पीड़ा होता है। मैं अपने अनुभव से कह रहा हूँ, सच्ची शक्ति आत्मसंयम में है। खेल, योग, संगीत, अध्ययन और सेवा को अपना नशा बनाइए- यही स्वस्थ शरीर, स्थिर मन और उज्ज्वल भविष्य का आधार है।

    मैं आपको सलाह देता हूँ कि माता-पिता और शिक्षकों से खुलकर संवाद करें। अपनी परेशानी साझा करें। याद रखिए! वे ही आपके सबसे बड़े शुभचिंतक हैं। अभिभावकों से भी मेरा आग्रह है कि बच्चों पर अपेक्षाओं का बोझ न डालें, बल्कि उनका मनोबल बढ़ाएँ।

    प्रिय बच्चों,

    आप देवभूमि उत्तराखण्ड की जीवट संतान हैं। यह भूमि योग, साधना और संस्कार की भूमि है। यह वीरों की भी जननी है। आप उसी गौरवशाली परंपरा के उत्तराधिकारी हैं। आपके भीतर साहस भी है और संवेदनशीलता भी।

    आप केवल विद्यार्थी नहीं हैं, आप तो विकसित भारत के शिल्पी हैं। आज भारत आत्मनिर्भरता, नवाचार और तकनीकी प्रगति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाला भारत युवाओं का भारत है। आपको इस परिवर्तन यात्रा का सहभागी बनना है।

    बच्चों! आप पढ़ाई को केवल करियर का साधन न मानें, आप इसे राष्ट्र सेवा का माध्यम बनाइए। यदि आप डॉक्टर बनें तो सेवा भाव रखें। यदि आप इंजीनियर बनें तो देश को मजबूत करें। और यदि आप शिक्षक बनें तो पीढ़ियों का निर्माण करें।

    आप सदैव अपने हर कार्य में ‘राष्ट्र प्रथम’ का भाव रखें। आपकी पढ़ाई, आपका चरित्र और आपके सपने, ये सब राष्ट्र निर्माण की नींव हैं। जब युवा अपने कर्तव्य को देशसेवा समझ लेंगे, तभी भारत सशक्त, आत्मनिर्भर और विश्व गुरु बनेगा।

    प्रिय बच्चों,

    आज का युग डिजिटल क्रांति और नई तकनीकों का युग है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप संस्कृति, ऑनलाइन शिक्षा और नवाचार हमारे भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं। आप तकनीक के केवल उपभोक्ता न बनें, बल्कि उसके रचनाकार बनें। नई टेक्नोलॉजी सीखिए, कौशल विकसित कीजिए और अपनी प्रतिभा को वैश्विक मंच तक पहुँचाइए।

    साथ ही, तकनीक को केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाज और राष्ट्रहित में प्रयोग करें। स्थानीय समस्याओं के समाधान से लेकर आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के निर्माण तक- आपकी सोच और नवाचार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

    पर्वतीय क्षेत्रों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी चुनौतियों में भी आपकी तकनीकी सोच बड़ा परिवर्तन ला सकती है। जब आप युवा विज्ञान, कौशल और संस्कार को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे, तभी विकसित भारत-2047 का सपना साकार होगा।

    प्रिय बच्चों,

    सपने देखिए! बड़े सपने देखिए, लेकिन खुली आँखों से सपने देखिए। ऐसे सपने जो आपको हर दिन बेहतर बनने की प्रेरणा दें। सपनों को केवल कल्पना तक सीमित न रखें, उन्हें लक्ष्य में बदलिए।

    और उन लक्ष्यों को पाने के लिए अनुशासन, निरंतर परिश्रम और धैर्य को अपना स्थायी साथी बनाइए। याद रखिए! सफलता अचानक नहीं मिलती, वह रोज की छोटी-छोटी कोशिशों से बनती है।

    प्यारे बच्चों,

    कुछ दिनों बाद आप परीक्षा दे रहे हैं- कल यही हाथ देश की दिशा तय करेंगे, और उज्ज्वल भारत के निर्माण में सहभागी बनेंगे। इसलिए स्वयं को केवल विद्यार्थी नहीं, राष्ट्र-निर्माता समझिए। परीक्षा के दिन शांत रहें। समय से पहले केंद्र पहुँचें। प्रश्नपत्र ध्यान से पढ़ें। पहले वही प्रश्न हल करें जिन पर आपको पूरा विश्वास हो। सकारात्मक सोच बनाए रखें।

    आज मैं आप सभी से यही आग्रह करता हूँ- डर को दूर रखिए। आत्मविश्वास बनाए रखिए। परिश्रम को अपना मित्र बनाइए, और अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचानिए।

    अंत में, मैं आप सभी विद्यार्थियों से हृदय से कहना चाहता हूँ- आप अनमोल हैं। आपमें असीम संभावनाएँ हैं। आप अपने ऊपर विश्वास रखिए। परीक्षा केवल एक पड़ाव है, लेकिन मंजिल नहीं। मुस्कान के साथ परीक्षा दीजिए। शांत मन से प्रश्न पढ़िए और पूरे मनोयोग से उत्तर लिखिए।

    याद रखिए! जो स्वयं पर विश्वास करता है, वही इतिहास बनाता है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी अपने परिश्रम, संस्कार और संकल्प से नया इतिहास रचेंगे, और अपने प्रदेश व देश को आगे बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका निभाएंगे।

    ईश्वर आपको सदबुद्धि, साहस और सफलता प्रदान करें। आप सभी उज्ज्वल भविष्य के पथ पर अग्रसर हों, यही मेरी हृदय से मंगलकामना है।

    जय हिन्द!