05-09-2026 : राष्ट्रीय एकता भ्रमण पर आए लेह के विद्यार्थियों को माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड का संबोधन
जय हिन्द!
लोक भवन, देहरादून में आप सभी विद्यार्थियों का हृदय से स्वागत करते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है। आप लद्दाख की उस धरती से आए हैं, जो ऊँचे पर्वतों, कठिन परिस्थितियों, अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य और साहसी लोगों के लिए जानी जाती है। आप भारत की सीमांत धरती से आते हैं। याद रखिए- आप देश के अंतिम छोर पर नहीं, भारत की अग्रिम पंक्ति में रहते हैं। यह आपके लिए गर्व और गौरव की बात है।
राष्ट्रीय एकता भ्रमण में आप अपने शिक्षकों के साथ भारत के विभिन्न क्षेत्रों को देखने, समझने और उनसे सीखने निकले हैं। मेरी शुभकामना है कि यह यात्रा आपके जीवन को नई दिशा दे।
मेरे प्यारे विद्यार्थियों,
यह यात्रा भारत को जानने और भारत से जुड़ने की यात्रा है। लद्दाख में भारत का एक रूप दिखाई देता है, उत्तराखण्ड में दूसरा और देश के अन्य हिस्सों में अनेक रंग मिलेंगे। भाषाएँ अलग होंगी, भोजन अलग होगा, वेशभूषाएँ और परंपराएँ अलग होंगी, लेकिन हर जगह आपको तिरंगा मिलेगा, राष्ट्रगान सुनाई देगा और ऐसे लोग मिलेंगे जो गर्व से स्वयं को भारतीय कहते हैं। यही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है- विविधता में एकता।
इसलिए केवल पर्यटक बनकर नहीं, सीखने वाले बनकर यात्रा कीजिए। लोगों से मिलिए, उनके जीवन को समझिए और अपने अनुभवों को नोटबुक में दर्ज कीजिए। लेह लौटकर इन्हें परिवार, मित्रों और विद्यालय के साथ साझा कीजिए। राष्ट्रीय एकता के दूत बनकर लौटिए।
मेरे युवा मित्रों,
आप जीवन के उस महत्वपूर्ण पड़ाव पर हैं, जहाँ आपके आज के संकल्प आपके भविष्य की दिशा तय करेंगे। इसलिए अपने सपनों को कभी छोटा मत रखिए। आज ज्ञान की कोई भौगोलिक सीमा नहीं है। आपमें से हर विद्यार्थी अपनी प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प के बल पर अपनी पसंद के किसी भी क्षेत्र में ऊँचाइयाँ छू सकता है। आपका ज्ञान, आपका कर्म और आपकी सफलता भारत की शक्ति बन सकती है।
आपका जन्मस्थान आपको जड़ें देता है, आपकी सीमाएँ तय नहीं करता। अपने सपनों को मेहनत, अनुशासन और दृढ़ता से साकार कीजिए। पर्वत की चोटी पर एक छलांग में नहीं पहुँचा जाता, एक-एक कदम आगे बढ़ाना पड़ता है। जीवन भी ऐसा ही है। प्रतिदिन पढ़ना, नया कौशल सीखना, गलती सुधारना और कमजोरी पर विजय पाना- यही छोटे कदम सफलता की ओर ले जाते हैं।
कठिन दिन आएँगे और असफलताएँ भी मिलेंगी। ऐसे समय में लद्दाख के पर्वतों को याद कीजिए, जो तूफानों और बर्फ के बीच अडिग खड़े रहते हैं। पर्वतों से दृढ़ता सीखिए। धैर्य रखिए। आगे बढ़ते रहिए। याद रखिए- असफलता पूर्णविराम नहीं है, वह सफलता की कहानी में एक अल्पविराम हो सकती है।
प्यारे विद्यार्थियों,
सफलता महत्वपूर्ण है, लेकिन चरित्र उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। एक दिन आपसे यह नहीं पूछा जाएगा कि आपने कितने पुरस्कार पाए, पूछा जाएगा कि आप किस प्रकार के इंसान बने।
ईमानदार बनिए, भरोसेमंद बनिए, साहसी और संवेदनशील बनिए। गलत को गलत कहने का साहस रखिए और अपनी गलती स्वीकार करने की विनम्रता भी। चरित्र की असली परीक्षा तब होती है, जब आपको देखने वाला कोई नहीं होता।
इस यात्रा में आप भारतीय सेना के जवानों से मिलेंगे और भारतीय सैन्य अकादमी का भ्रमण करेंगे। वहाँ केवल वर्दी मत देखिए, उसके पीछे छिपे अनुशासन, समर्पण और कर्तव्य-बोध को देखिए। वे ऐसे जीवन के लिए तैयार हो रहे हैं, जिसमें राष्ट्र व्यक्ति से पहले आता है।
लेकिन राष्ट्रसेवा का अर्थ केवल सैनिक बनना नहीं है। वैज्ञानिक ज्ञान का सृजन करके, डॉक्टर जीवन बचाकर, शिक्षक युवा मनों को दिशा देकर, किसान देश का पेट भरकर और कलाकार संस्कृति को समृद्ध करके भारत की सेवा करता है। राष्ट्र निर्माण हम सभी की जिम्मेदारी है, और इसकी शुरुआत हमसे होती है।
प्यारे विद्यार्थियों,
आप वन अनुसंधान संस्थान भी जाएँगे। लद्दाख के विद्यार्थी प्रकृति का महत्व समझते हैं। हमारे हिमालय केवल सुंदर पर्वत नहीं, राष्ट्रीय धरोहर हैं। वे नदियों, वनों और जैव-विविधता के स्रोत हैं। आपकी पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि आप इनके सजग और जिम्मेदार संरक्षक बनें।
तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य को बदलेंगी। तकनीक को साधन बनाइए, अपना स्वामी नहीं। स्क्रीन पर दिखाई देने वाली हर बात पर तुरंत विश्वास न करें। प्रश्न पूछिए, सत्यापित कीजिए, सोचिए और फिर निर्णय लीजिए। स्वतंत्र रूप से सोचना ही शिक्षित नागरिक की पहचान है।
मेरी प्यारी बेटियों, अपने सपनों पर कभी सीमा मत लगाइए। शिक्षा, आत्मविश्वास और साहस के साथ जीवन में अपनी पहचान बनाइए। आपकी सफलता केवल आपकी उपलब्धि नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
मेरे युवा मित्रों, आत्मविश्वासी बनिए, लेकिन विनम्र रहिए। मजबूत बनिए, लेकिन अपनी शक्ति का सदुपयोग कीजिए। महत्वाकांक्षी बनिए, लेकिन संवेदनशीलता को कभी मत भूलिए। याद रखिए, सच्चा नेतृत्व दूसरों को छोटा करने में नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने और मजबूत बनाने में है।
मेरे युवा मित्रों,
अपनी जड़ों पर गर्व कीजिए। लद्दाख, अपने विद्यालय, परिवार और शिक्षकों पर गर्व कीजिए। साथ ही, जिन लोगों से मिलें, उनसे सीखने के लिए मन खुला रखिए। लद्दाख को अपने हृदय में रखिए और भारत को अपनी आत्मा में।
लेह लौटकर स्वयं से चार प्रश्न अवश्य पूछिए- मैंने क्या सीखा? मुझे किस बात से प्रेरणा मिली? मैंने कौन-सा नया सपना देखा? और सबसे महत्वपूर्ण, मैं अपने देश के लिए क्या कर सकता हूँ?
आज आप विद्यार्थी हैं, कल आप भारत के जिम्मेदार नागरिक और राष्ट्र-निर्माता होंगे। कल का भारत आप बनाएँगे। आपकी शिक्षा, आपका चरित्र, आपका साहस और आपकी संवेदनशीलता भारत के भविष्य को आकार देंगे।
इसलिए उद्देश्य के साथ पढ़िए, अनुशासन के साथ मेहनत कीजिए और दृढ़ता के साथ कठिनाइयों का सामना कीजिए। लोगों का सम्मान कीजिए और विनम्रता के साथ उनकी सेवा कीजिए।
जाने से पहले तीन बातें हमेशा याद रखिए-
आपकी परिस्थितियाँ आपका भविष्य तय नहीं करतीं, आपका प्रयास आपका भविष्य तय करता है। आपकी उपलब्धियाँ आपको सफल बना सकती हैं, लेकिन आपका चरित्र आपको योग्य बनाएगा। और जीवन में जहाँ भी जाएँ, केवल यह मत पूछिए कि भारत आपको क्या दे सकता है; हमेशा यह पूछिए- मैं भारत को क्या दे सकता हूँ?
मुझे विश्वास है कि वर्षों बाद जब आप इस यात्रा को याद करेंगे, तो महसूस करेंगे कि इसने आपको भारत को देखने के साथ-साथ स्वयं को देखने का नया नजरिया भी दिया।
इस यात्रा का आनंद लीजिए, इससे सीखिए, नए मित्र बनाइए और सुंदर यादें संजोइए। लेह लौटते समय केवल तस्वीरें और यादें नहीं, बल्कि एक नया अनुभव, नया संकल्प और भारत के लिए कुछ करने की इच्छा लेकर जाइए।
आप ऐसे नागरिक बनें, जिन पर आपका परिवार, आपका विद्यालय, लद्दाख और हमारा महान राष्ट्र गर्व करे। लद्दाख की ऊँचाइयों से निकले आपके सपने भारत की ऊँचाइयों को छुएँ- यही मेरी शुभकामना है।
आप सभी को मेरा आशीर्वाद और उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।
जय हिन्द!