04-07-2026:‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के अंतर्गत ‘सेवा पखवाड़ा’ के शुभारंभ अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन
जय हिन्द!
देवभूमि उत्तराखण्ड की पुण्य धरा, माँ गंगा के पावन तट पर आयोजित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के अंतर्गत ‘सेवा पखवाड़ा’ के शुभारंभ के इस पावन अवसर पर आप सभी के मध्य उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।
यह अभियान लोकसेवा, सुशासन और जनकल्याण के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का सशक्त संकल्प है। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति तभी सिद्ध होती है, जब शासन का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े प्रत्येक नागरिक तक सम्मान, संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पहुँचे। ‘सेवा, सुशासन एवं समर्पण’ की भावना से आयोजित ‘सेवा पखवाड़ा’ निश्चित ही शासन और जनता के बीच विश्वास को और सुदृढ़ करेगा तथा जनभागीदारी को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
आज का यह अवसर एक और दृष्टि से भी ऐतिहासिक है। प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी उत्तराखण्ड के इतिहास में सर्वाधिक अवधि तक मुख्यमंत्री के रूप में दायित्व निभाने का नया कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। यह उपलब्धि जनता के विश्वास, लोकतांत्रिक स्थिरता और विकास की निरंतरता का प्रतीक है। मैं उन्हें इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ।
भारतीय संस्कृति में ‘सेवा परमो धर्मः’ केवल एक सूक्ति नहीं, बल्कि हमारे जीवन का शाश्वत दर्शन है। हमारे ऋषियों ने ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ का संदेश देकर लोकमंगल को सर्वाेच्च साधना माना है। जब सेवा शासन की कार्यसंस्कृति और जनकल्याण प्रत्येक नीति का उद्देश्य बनता है, तभी लोकतंत्र अपनी वास्तविक सार्थकता प्राप्त करता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा दिया गया ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का मंत्र आज सुशासन का मूल आधार बन चुका है। उत्तराखण्ड ने इसी भावना को आत्मसात करते हुए सेवा, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और जनभागीदारी को शासन की कार्यसंस्कृति का अभिन्न अंग बनाया है। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ जैसे अभियान इसी जनोन्मुखी सोच के सशक्त उदाहरण हैं।
भाइयों और बहनों,
राज्यपाल के रूप में अपने पिछले पाँच वर्षों के कार्यकाल के दौरान मैंने उत्तराखण्ड को अनेक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय लेते हुए देखा है। समान नागरिक संहिता (न्ब्ब्) लागू करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना। इस ऐतिहासिक निर्णय ने संविधान में निहित समानता, न्याय और सामाजिक समरसता की भावना को और अधिक सुदृढ़ करते हुए पूरे देश के समक्ष सुशासन का एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है।
युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए देश का सबसे सशक्त नकल विरोधी कानून, जबरन धर्मांतरण तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी प्रावधान तथा राज्यहित में प्रभावी भू-कानून लागू किया गया। इन सभी निर्णयों का मूल उद्देश्य स्पष्ट है-जनहित सर्वाेपरि, सुशासन सर्वाेपरि और राष्ट्रहित सर्वाेपरि।
किसी भी राज्य की प्रगति का वास्तविक माप केवल आर्थिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि इस बात से होता है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक कितनी प्रभावशीलता से पहुँचा है। जब शासन की योजनाओं के केंद्र में गरीब, किसान, महिला, युवा, वरिष्ठ नागरिक और सीमांत क्षेत्रों का नागरिक होता है, तभी अंत्योदय का आदर्श साकार होता है।
उत्तराखण्ड की मातृशक्ति ने राज्य निर्माण से लेकर विकास यात्रा तक सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है। महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, स्वयं सहायता समूहों का विस्तार तथा ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाएँ महिला सशक्तीकरण की दिशा में उल्लेखनीय कदम हैं। आज हमारी मातृशक्ति राज्य के विकास की सशक्त भागीदार बन रही है।
भाइयों और बहनों,
देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान उसकी आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और लोकमंगल की परंपरा है। आज श्री केदारनाथ तथा श्री बदरीनाथ धाम में संचालित पुनर्विकास कार्य हमारी सनातन आस्था और आधुनिक विकास के सुंदर समन्वय के प्रतीक हैं। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ मिल रही हैं और उत्तराखण्ड की वैश्विक पहचान भी सुदृढ़ हुई है।
आज उत्तराखण्ड आध्यात्मिक पर्यटन के साथ-साथ साहसिक, ग्रामीण, वेलनेस और इको-टूरिज्म के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर रहा है। होमस्टे योजना ने हजारों स्थानीय परिवारों और युवाओं के लिए सम्मानजनक आजीविका के अवसर सृजित किए हैं तथा पलायन की चुनौती के समाधान में भी सकारात्मक भूमिका निभाई है।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, जी-20 की बैठकों, विश्वस्तरीय सम्मेलनों तथा राष्ट्रीय खेलों जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों के सफल संचालन ने राज्य की प्रशासनिक क्षमता, निवेश की संभावनाओं और वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊँचाई प्रदान की है। आज उत्तराखण्ड विकास, निवेश और नवाचार का उभरता हुआ केंद्र बन रहा है।
आधारभूत संरचना के क्षेत्र में भी राज्य निरंतर नई उपलब्धियाँ अर्जित कर रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, ऑल वेदर रोड, रोपवे परियोजनाएँ तथा हवाई संपर्क का विस्तार राज्य के विकास को नई गति दे रहे हैं। इससे पर्यटन, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय रोजगार के नए अवसर विकसित हो रहे हैं तथा सीमांत क्षेत्रों तक विकास की मुख्यधारा पहुँच रही है।
स्टार्टअप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (।प्) केवल नई तकनीक नहीं, बल्कि विकसित भारत के नए विकास इंजन हैं। उत्तराखण्ड की युवा शक्ति यदि नवाचार और उद्यमिता को अपनाए तो हमारा राज्य ज्ञान, प्रौद्योगिकी और रोजगार सृजन का अग्रणी केंद्र बन सकता है। यही भविष्य के उत्तराखण्ड की दिशा है।
उत्तराखण्ड के दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों में जाने पर मुझे वहाँ हो रहे सकारात्मक परिवर्तन को निकट से देखने का अवसर मिलता है। जहाँ कभी पहुँचना कठिन था, वहाँ आज सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल सेवाओं और संचार सुविधाओं का विस्तार हुआ है। यह केवल आधारभूत संरचना का विकास नहीं, बल्कि जनविश्वास और सुशासन का सशक्त प्रमाण है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने बाबा केदार की पावन भूमि से कहा था कि ‘‘21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा।’’ यह उत्तराखण्ड की क्षमता, उसकी आध्यात्मिक विरासत, युवा शक्ति और मातृशक्ति पर व्यक्त उनका अटूट विश्वास है। हमारा दायित्व है कि सेवा, सुशासन और जनभागीदारी के माध्यम से इस विश्वास को साकार करें।
मैं सदैव कहता हूँ कि ‘‘राष्ट्र प्रथम’’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन का मूल मंत्र होना चाहिए। जब राष्ट्र सर्वाेपरि होता है, तब सेवा संस्कार बनती है, कर्तव्य पहचान बनता है और विकास हमारी सामूहिक साधना बन जाता है। मुझे विश्वास है कि देवभूमि उत्तराखण्ड की युवा शक्ति, मातृशक्ति और कर्मठ नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से हम विकसित उत्तराखण्ड और विकसित भारत के लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेंगे।
आज ‘सेवा पखवाड़ा’ के शुभारंभ पर मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि सेवा को केवल दायित्व नहीं, बल्कि अपना सर्वाेच्च धर्म मानें। प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पहुँचाना ही इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता होगी।
आइए! हम सब मिलकर ऐसा उत्तराखण्ड बनाने का संकल्प लें जो विकास में अग्रणी, सुशासन में आदर्श, महिला सशक्तीकरण में उदाहरण, पर्यावरण संरक्षण में विश्व के लिए प्रेरणा तथा राष्ट्रीय एकता का सशक्त प्रतीक बने। यही विकसित उत्तराखण्ड, विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में हमारी सबसे बड़ी भूमिका होगी।
अंत में, मैं एक बार पुनः माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी को उत्तराखण्ड के इतिहास में सर्वाधिक अवधि तक मुख्यमंत्री के रूप में सेवा देने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ। साथ ही, ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान तथा ‘सेवा पखवाड़ा’ की सफलता के लिए अपनी मंगलकामनाएँ व्यक्त करता हूँ।
आइए! हम सब सेवा को संस्कार, सुशासन को दायित्व और ‘राष्ट्र प्रथम’ को जीवन का मूल मंत्र मानते हुए विकसित उत्तराखण्ड एवं विकसित भारत के निर्माण में अपना सर्वाेत्तम योगदान देने का संकल्प लें।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
जय हिन्द! जय उत्तराखण्ड!