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    02-05-2026:गुजरात एवं महाराष्ट्र राज्य स्थापना दिवस पर माननीय राज्यपाल महोदय का संबोधन

    प्रकाशित तिथि : मई 2, 2026

    जय हिन्द!

    मंच पर उपस्थित महानुभाव, देवभूमि उत्तराखण्ड में निवास कर रहे गुजरात और महाराष्ट्र के प्रिय प्रवासी भाई-बहनों और उपस्थित प्रबुद्ध जनों! आपको हृदय से गुजरात और महाराष्ट्र स्थापना दिवस की बहुत-बहुत बधाई।

    आज का यह दिन भारतीय लोकतंत्र और हमारी संघीय संरचना के गौरवशाली इतिहास का एक स्वर्णिम पृष्ठ है। 01 मई, 1960 को अस्तित्व में आए दो महान राज्यों- गुजरात और महाराष्ट्र के स्थापना दिवस पर आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत करते हुए मुझे अपार हर्ष हो रहा है। आज उत्तराखण्ड का यह लोक भवन ‘लघु भारत’ की जीवंत छवि प्रस्तुत कर रहा है।

    प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से शुरू हुई ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना आज यथार्थ रूप ले चुकी है। आज देश के सभी लोक भवनों में अन्य राज्यों के स्थापना दिवस मनाए जा रहे हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि भौगोलिक दूरियाँ हमारे दिलों के सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव को कम नहीं कर सकतीं।

    विविधता में एकताः सांस्कृतिक संगम

    मित्रों, उत्तराखण्ड की पवित्र पहाड़ियाँ आज पश्चिम के विशाल समुद्र तटों का अभिनंदन कर रही हैं। यह मिलन हिमालय की स्थिरता और अरब सागर की गतिशीलता का अद्भुत संगम है। जब हम गुजरात और महाराष्ट्र का नाम लेते हैं, तो हमारे मानस पटल पर शौर्य, त्याग, उद्यम और संस्कृति की एक विराट तस्वीर उभरती है। उत्तराखण्ड का इन राज्यों के साथ संबंध केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि आत्मिक है। यहाँ का जल और वहाँ का थल मिलकर राष्ट्र की शक्ति बनते हैं।

    गुजरातः गौरव और उद्यम की भूमि

    गुजरात केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि भारत के ‘आत्मगौरव’ का प्रतीक है। यह भगवान श्री कृष्ण की कर्मभूमि, ‘द्वारका’ है। यह वह भूमि है जिसने दुनिया को अहिंसा का अस्त्र देने वाले ‘महात्मा गांधी’ और अखंड भारत के शिल्पी ‘लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल’ जैसा व्यक्तित्व दिया।

    ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो सिंधु घाटी सभ्यता का ‘‘लोथल बंदरगाह’’ गुजरात की प्राचीन व्यापारिक कुशलता का प्रमाण है, और आज का ‘गिफ्ट सिटी’ आधुनिक भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं का केंद्र है। दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ न केवल गुजरात का, बल्कि प्रत्येक भारतीय का मस्तक गर्व से ऊँचा करती है। गुजरात ने अपनी उद्यमशीलता से सिद्ध किया है कि विकास की कोई सीमा नहीं होती।

    महाराष्ट्रः शौर्य और संस्कृति का केंद्र

    वहीं दूसरी ओर, जब हम महाराष्ट्र की ओर देखते हैं, तो ‘‘छत्रपति शिवाजी महाराज’’ का वह अदम्य साहस स्मरण हो आता है, जिन्होंने हिंदवी स्वराज्य की स्थापना कर भारत को स्वाभिमान से जीना सिखाया। महाराष्ट्र संतों की भूमि है, संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और समर्थ गुरु रामदास के विचारों ने समाज को सदैव नई दिशा दी है।

    आधुनिक भारत के निर्माण में ‘डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर’ की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता, जिन्होंने हमें वह संविधान दिया जो आज हमारी एकता का सबसे बड़ा सूत्र है। वर्तमान में, भारत की आर्थिक राजधानी ‘‘मुंबई’’ देश की धड़कन है। देश की जीडीपी में महाराष्ट्र का योगदान और वहाँ का औद्योगिक आधार भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में ‘इंजन’ की भूमिका निभा रहा है।

    सरदार पटेल और राष्ट्रीय एकता का संकल्प

    साथियों, आज का यह आयोजन उस महान व्यक्तित्व को याद किए बिना अधूरा है, जिनके बिना आधुनिक भारत का नक्शा संभव नहीं था। ‘‘लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल’’ ने 562 से अधिक रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर जिस अखंड भारत की रचना की, उसी एकता को आज हम यहाँ उत्सव के रूप में मना रहे हैं।

    सरदार पटेल ने जिस भौगोलिक एकता को सिद्ध किया था, आज ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ अभियान के माध्यम से उसे सांस्कृतिक और भावनात्मक गहराई दी जा रही है। हमारी भाषाएँ अलग हो सकती हैं, खान-पान अलग हो सकता है, वेशभूषा अलग हो सकती है, लेकिन जब बात राष्ट्र की आती है, तो हम सब केवल ‘भारतीय’ होते हैं।

    नीतिगत एकीकरणः ‘एक राष्ट्र-एक दृष्टि’

    प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आज भारत ‘एक राष्ट्र-एक कर’ (ळैज्) और ‘एक राष्ट्र-एक संविधान’ के संकल्प को पूर्ण कर चुका है। अब देश ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ और ‘एक समान नागरिक संहिता’ (न्ब्ब्) की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रहा है। मुझे गर्व है कि उत्तराखण्ड ने समान नागरिक संहिता की दिशा में पहल कर देश को एक नई राह दिखाई है। ये सभी कदम भारत को प्रशासनिक और सामाजिक रूप से एक करने के लिए अनिवार्य हैं।

    उत्तराखण्ड और प्रवासी संबंध

    उत्तराखण्ड के अनेक वीर सैनिक महाराष्ट्र की सीमाओं और तटों की रक्षा में तैनात रहे हैं। वहीं, बड़ी संख्या में उत्तराखण्ड के प्रवासी भाई-बहन गुजरात और महाराष्ट्र की प्रगति में अपनी प्रतिभा और श्रम से योगदान दे रहे हैं। यह ‘श्रम और सुरक्षा’ का रिश्ता अटूट है।

    गुजरात के श्रद्धालु बड़ी संख्या में चारधाम यात्रा और ऋषिकेश-हरिद्वार के आध्यात्मिक दर्शन हेतु देवभूमि आते हैं। यह आध्यात्मिक गलियारा, जो सोमनाथ और त्रयंबकेश्वर को केदारनाथ-बद्रीनाथ से जोड़ता है, हमारे देश की असली ताकत है।

    सहकारी संघवादः एक-दूसरे से सीखने का अवसर

    आज के समय में राज्यों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखना होगा। उत्तराखण्ड गुजरात के ‘सहकारिता मॉडल’ और ‘सौर ऊर्जा’ के क्षेत्र में किए गए कार्यों से प्रेरणा ले सकता है, तो वहीं महाराष्ट्र का ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर’ और ‘मैनेजमेंट’ हमारे शहरी विकास के लिए मॉडल बन सकता है। राज्यों के बीच पर्यटन, शिक्षा और निवेश के क्षेत्र में गहरे संबंधों की आवश्यकता है।

    विकसित भारत /2047 और युवा शक्ति

    हमारा लक्ष्य ‘‘विकसित भारत /2047’’ है। यह केवल एक सरकारी नारा नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सामूहिक संकल्प है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में हमारे युवाओं की भूमिका सर्वाेपरि है। मैं गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तराखण्ड के युवाओं का आह्वान करता हूँ कि वे तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में मिलकर काम करें। आधुनिक भारत की भव्य इमारत केवल ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि आपके सपनों और पुरुषार्थ से निर्मित होगी।

    सांस्कृतिक प्रतीकः हमारी साझा पहचान

    सांस्कृतिक रूप से देखें तो गुजरात का ‘गरबा’ और महाराष्ट्र का ‘गणेश उत्सव’ आज केवल क्षेत्रीय त्योहार नहीं रह गए हैं, बल्कि ये राष्ट्रीय उत्सव बन चुके हैं। जब देवभूमि उत्तराखण्ड की वादियों में गरबा की थाप सुनाई देती है या ‘गणपति बप्पा मोरया’ का जयघोष होता है, तो ‘एक भारत’ की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाती है।

    अंत में, मैं पुनः गुजरात और महाराष्ट्र के स्थापना दिवस पर वहाँ के समस्त नागरिकों और यहाँ उपस्थित प्रवासियों को हृदय से बधाई देता हूँ।

    विविधता हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। हम अलग-अलग राज्यों के वासी होकर भी एक ही राष्ट्र रूपी उपवन के विभिन्न पुष्प हैं। आइए, हम सब मिलकर शपथ लें कि हम अपनी क्षेत्रीय पहचान पर गर्व करते हुए राष्ट्र की एकता और अखंडता को सर्वाेपरि रखेंगे।

    उत्तराखण्ड की इस पावन धरती से मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि गुजरात और महाराष्ट्र सदैव विकास के शिखर पर रहें और भारत को विश्व गुरु बनाने के मार्ग में अपना अग्रणी योगदान देते रहें। इसी आशा और विश्वास के साथ अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

    जय महाराष्ट्र! जय गुजरात! जय उत्तराखण्ड!
    जय हिन्द!