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    05-10-2026:“नशामुक्त युवा: विकसित भारत का भविष्य” युवा संवाद कार्यक्रम में माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि : अक्टूबर 5, 2026

    जय हिन्द!

    ऊर्जा, उत्साह, उमंग और असीम संभावनाओं से परिपूर्ण भारत की इस अमृत पीढ़ी के बीच उपस्थित होकर मुझे स्वयं भी अपार ऊर्जा और प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है।

    आप केवल अपने सपनों को आकार देने वाली पीढ़ी नहीं हैं; आप भारत के सपनों को साकार करने वाली पीढ़ी हैं। आपकी आँखों के सपनों में भारत का भविष्य है, आपकी ऊर्जा में भारत की गति है और आपके संकल्प में विकसित भारत की शक्ति है। इसलिए आज का विषय केवल चर्चा का विषय नहीं है; यह भारत के वर्तमान और भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व है।

    मेरे प्रिय युवा साथियों,

    भारत का भविष्य केवल हमारी अर्थव्यवस्था की गति से तय नहीं होगा। भारत का भविष्य हमारे युवाओं की दिशा, सोच, स्वास्थ्य और संकल्प से तय होगा। जिस युवा के पास स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन, स्पष्ट लक्ष्य, मजबूत चरित्र और कुछ नया करने का साहस है, वही विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।

    हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा ने स्वास्थ्य के महत्व को बहुत पहले पहचान लिया था-

    “शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्।”

    अर्थात् स्वस्थ शरीर ही जीवन के सभी दायित्वों को निभाने का पहला साधन है।

    आज का नया भारत, वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत केवल मजबूत अर्थव्यवस्था, आधुनिक बुनियादी ढाँचे और नई तकनीक का नाम नहीं है। विकसित भारत वह भारत है, जहाँ युवा स्वस्थ हों, शिक्षा और कौशल से संपन्न हों, विज्ञान और तकनीक में आगे हों, संस्कारों से जुड़े हों और अपने समाज तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार हों।

    तो प्रश्न यह है कि इस युवा शक्ति को सही दिशा कैसे दी जाए? इसका पहला और सबसे महत्वपूर्ण उत्तर है- अपने जीवन को नशे से मुक्त रखना।

    नशा केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं है। यह उसके स्वास्थ्य, सोच, पढ़ाई, करियर, परिवार और सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है। जब कोई युवा नशे की गिरफ्त में आता है, तो केवल उसका वर्तमान प्रभावित नहीं होता; उसके साथ माता-पिता की उम्मीदें, परिवार के सपने और उसके अपने भविष्य की संभावनाएँ भी कमजोर पड़ने लगती हैं।

    इसलिए नशे के विरुद्ध संघर्ष केवल किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। यह परिवार की जिम्मेदारी है, शिक्षकों की जिम्मेदारी है, शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है, समाज की जिम्मेदारी है और सबसे बढ़कर स्वयं युवा की जिम्मेदारी है।

    लेकिन हमें युवाओं से केवल यह नहीं कहना है कि “नशा मत करो।” हमें उन्हें यह विश्वास भी देना है कि जीवन में नशे से कहीं अधिक सुंदर, सार्थक और ऊँची मंजिलें हैं। शिक्षा चुनिए, खेल चुनिए, योग और ध्यान चुनिए, कौशल चुनिए, नवाचार चुनिए, कला और संस्कृति चुनिए, सेवा चुनिए और सबसे बढ़कर- अपने जीवन का एक बड़ा उद्देश्य चुनिए। क्योंकि जिस युवा के जीवन में लक्ष्य होता है, उसकी ऊर्जा भटकने के बजाय निर्माण की दिशा में आगे बढ़ती है।

    इसी राष्ट्रीय संकल्प को आगे बढ़ाते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 2 अगस्त, 2026 को “नशामुक्त युवा – विकसित भारत संकल्प अभियान” का शुभारंभ किया। मादक पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध 100 सप्ताह का यह राष्ट्रव्यापी जनभागीदारी अभियान युवाओं को नशे से दूर रखते हुए उन्हें परिवार, शिक्षण संस्थान और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का वाहक बनाने पर केंद्रित है।

    प्रधानमंत्री जी ने युवाओं को स्वस्थ, आत्मविश्वासी और नशामुक्त रहने तथा शिक्षकों को युवाओं के साथ नशे के दुष्प्रभावों पर निरंतर संवाद करने का आह्वान किया है। आज का यह युवा संवाद भी इसी राष्ट्रीय संकल्प को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

    मेरे युवा साथियों,

    यदि हमारा कोई साथी नशे की समस्या से जूझ रहा है, तो उसका मजाक मत बनाइए और उससे दूरी मत बनाइए। उससे बात कीजिए, उसे समझिए और आवश्यकता होने पर उचित सहायता लेने के लिए प्रेरित कीजिए।

    किसी एक युवा को नशे से बचाना केवल एक जीवन को बचाना नहीं है; यह एक परिवार की आशा और समाज के भविष्य को बचाना है।

    लेकिन नशामुक्ति को स्थायी बनाने के लिए युवाओं के सामने अवसरों के द्वार भी खोलने होंगे। यहीं नशामुक्ति का संबंध शिक्षा और कौशल से जुड़ता है।

    शिक्षा हमें सोचने की शक्ति देती है और कौशल उस सोच को परिणाम में बदलने की क्षमता देता है। इसलिए युवा को केवल डिग्री नहीं, दिशा चाहिए; केवल ज्ञान नहीं, कौशल चाहिए; और केवल अवसर नहीं, अवसर का सदुपयोग करने का आत्मविश्वास चाहिए।

    मुझे प्रसन्नता है कि सीआईएमएस एवं यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज द्वारा संचालित “सुपर 300 मिशन एजुकेशन” के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
    इसी प्रकार, भारतीय सेना के साथ मिलकर सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों तथा अग्निवीरों के बच्चों की शिक्षा में सहयोग और विशेष सुविधाएँ उपलब्ध कराने की पहल भी सराहनीय है। सैनिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देना राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता की सार्थक अभिव्यक्ति है।

    मेरे युवा साथियों,

    आज शिक्षा के साथ कौशल और नई तकनीक को समझना भी आवश्यक है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अर्थात् कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा, शोध और स्वास्थ्य सहित अनेक क्षेत्रों में नई संभावनाएँ खोल रही है। उत्तराखण्ड के युवाओं को इस परिवर्तन को समझना, सीखना और मानव कल्याण के लिए इसका उपयोग करना चाहिए।

    लेकिन याद रखिए! तकनीक हमारी क्षमता बढ़ा सकती है, हमारी संवेदना का स्थान नहीं ले सकती। और यही विचार हमें स्वास्थ्य सेवा के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र-नर्सिंग एवं पैरामेडिकल सेवाओं की ओर ले जाता है।

    मेरे युवा साथियों,

    स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह केवल रोजगार का क्षेत्र नहीं, बल्कि मानव सेवा का दायित्व है। आज चिकित्सकों के साथ कुशल नर्सिंग और पैरामेडिकल प्रोफेशनल्स स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं।

    आप जिस क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं, वहाँ आपके सामने केवल करियर का अवसर नहीं, बल्कि किसी के जीवन को छूने का अवसर है। बदलती चिकित्सा तकनीक और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के दौर में आपको ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल, तकनीकी दक्षता, संवाद क्षमता, टीम भावना और निरंतर सीखने की आदत विकसित करनी होगी। लेकिन इन सबसे ऊपर एक गुण आवश्यक है- संवेदना।

    मैं कहना चाहूँगा-
    “ज्ञान आपकी शक्ति है, कौशल आपकी पहचान है, लेकिन संवेदना आपकी सबसे बड़ी ताकत है।”

    अस्पताल में आपके सामने आने वाला व्यक्ति केवल एक मरीज नहीं होता। वह आशा लेकर आपके पास आता है और उसके साथ एक परिवार की चिंता, आशा और भावनाएँ जुड़ी होती हैं। इसलिए आपकी दक्षता के साथ आपकी संवेदना भी उसके उपचार का हिस्सा बननी चाहिए।

    मेरे प्रिय युवा साथियों,

    आज के हमारे संवाद का सार बहुत सरल है- अपनी ऊर्जा को व्यर्थ मत जाने दीजिए, उसे अपने जीवन के निर्माण में लगाइए। नशे से दूर रहिए, लक्ष्य के करीब रहिए। सीखते रहिए, कौशल विकसित करते रहिए, नई तकनीक अपनाइए और अपनी संवेदना को जीवित रखिए।

    मेरा दृढ़ विश्वास है कि ऐसा युवा ही अपने परिवार की शक्ति बनेगा, समाज की आशा बनेगा और विकसित भारत की आधारशिला बनेगा।

    आइए! आज हम केवल नशे से दूर रहने का संकल्प न लें, बल्कि अपने जीवन को उद्देश्य, अनुशासन, ज्ञान, कौशल, नवाचार और संवेदना से भरने का संकल्प लें। अपनी ऊर्जा शिक्षा, खेल, योग, कौशल, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में लगाएँ तथा नई तकनीक का उपयोग मानव कल्याण के लिए करें।

    याद रखिए! नशामुक्त युवा स्वस्थ समाज की नींव है। स्वस्थ युवा कुशल भारत की शक्ति है। और कुशल एवं संवेदनशील युवा विकसित भारत का निर्माता है।

    आइए! पूरे विश्वास और सामूहिक संकल्प के साथ हम नशे को ना कहें, जिंदगी को हाँ कहें और नशामुक्त युवा, स्वस्थ समाज तथा विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देने का संकल्प लें।

    मेरे युवा साथियों, आप केवल भारत का भविष्य नहीं हैं- आप आज के भारत की शक्ति और कल के भारत के निर्माता हैं। अपने जीवन को ऐसा बनाइए, जिस पर आपका परिवार गर्व करे, आपका समाज विश्वास करे और आपका राष्ट्र आप पर भरोसा कर सके।

    आप सभी को उज्ज्वल, स्वस्थ, सार्थक और सफल भविष्य के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।

    वंदे मातरम्! भारत माता की जय! जय हिन्द!