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    02-10-2026:हायर कमांड कोर्स के अधिकारियों को माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि : अक्टूबर 2, 2026

    जय हिन्द!

    मंच पर उपस्थित भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारीगण, हायर कमांड कोर्स सीरियल नंबर-55 के सभी प्रतिभागी अधिकारीगण, प्रशिक्षकगण तथा देवभूमि, वीरभूमि और सैन्यभूमि उत्तराखण्ड में पधारे मेरे सभी सैन्य साथियों!

    सबसे पहले मैं आप सभी का देवभूमि, वीरभूमि और सैन्यभूमि उत्तराखण्ड में हार्दिक स्वागत करता हूँ।

    आज का यह शुभ दिन मेरे लिए अपने सैन्य परिवार के साथ आत्मीय संवाद का सुअवसर है। आप सभी ने अपने सैन्य जीवन में अनेक चुनौतियों का सामना किया है, कठिन परिस्थितियों में नेतृत्व किया है और अब हायर कमांड कोर्स के माध्यम से अपने अनुभव और ज्ञान को व्यापक, दूरदर्शी तथा रणनीतिक नेतृत्व-दृष्टि में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    आज 2 अक्टूबर है- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती। गांधी जी ने हमें सत्य, अहिंसा और नैतिक शक्ति का मार्ग दिखाया, वहीं शास्त्री जी ने सादगी, अनुशासन, कर्तव्य और राष्ट्र के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। इन दोनों महान व्यक्तित्वों की स्मृति में आज का दिन हमें यह याद दिलाता है कि राष्ट्र निर्माण केवल शक्ति से नहीं, बल्कि शक्ति के साथ चरित्र, अनुशासन और नैतिकता से होता है।

    मेरे सैन्य जीवन के अनुभव ने मुझे एक बात बहुत गहराई से सिखाई है- सैनिक केवल हथियार नहीं संभालता, वह राष्ट्र का विश्वास संभालता है। वर्दी केवल पहचान नहीं है; यह जिम्मेदारी, त्याग और भरोसे का प्रतीक है। जब देश का नागरिक निश्चिंत होकर अपने घर में सोता है, तो उसके पीछे सीमा पर खड़ा सैनिक जाग रहा होता है।

    आज युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। युद्ध अब केवल भूमि, समुद्र और आकाश तक सीमित नहीं है। साइबर स्पेस, अंतरिक्ष, सूचना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियाँ आधुनिक युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा के नए आयाम बन चुके हैं। ऐसे समय में सैन्य नेतृत्व के सामने चुनौती केवल नई तकनीक को समझने की नहीं, बल्कि तकनीक और मानवीय विवेक के बीच सही संतुलन स्थापित करने की भी है।

    आज के सैन्य नेतृत्व की सबसे बड़ी आवश्यकता है- तकनीकी जागरूकता के साथ मानवीय समझ, डेटा के साथ विवेक और गति के साथ सही निर्णय।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमें बहुत कुछ बता सकती है, लेकिन सही निर्णय की जिम्मेदारी अंततः नेतृत्व की ही होती है। मशीनें डेटा का विश्लेषण कर सकती हैं, लेकिन सैनिक के मनोबल को समझना, उसके परिवार की चिंता को महसूस करना और कठिन समय में उसके साथ खड़े रहना-यह नेतृत्व की मानवीय शक्ति है।

    यही कारण है कि हायर कमांड का वास्तविक अर्थ केवल उच्च पद नहीं है। इसका अर्थ है- बड़ी जिम्मेदारी, व्यापक दृष्टि और अधिक गहरा उत्तरदायित्व।

    आप जब भविष्य में उच्च कमान की जिम्मेदारी संभालेंगे, तो आपके निर्णयों का प्रभाव केवल आपकी यूनिट या सैन्य संगठन तक सीमित नहीं रहेगा। आपके निर्णय सैनिकों, उनके परिवारों, संगठन और अंततः राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करेंगे। इसलिए एक कमांडर की सबसे बड़ी शक्ति उसका पद नहीं, बल्कि उसके अधीन कार्य करने वाले सैनिकों का उस पर विश्वास होता है।

    मैंने अपने सैन्य जीवन में यह अनुभव किया है कि सैनिक अपने कमांडर से केवल आदेश नहीं चाहता। वह चाहता है कि उसका कमांडर कठिन समय में उसके साथ खड़ा हो। वह चाहता है कि उसकी आवाज सुनी जाए। वह चाहता है कि उसकी मेहनत और उसके परिवार के त्याग को सम्मान मिले।

    इसलिए मैं आप सभी से कहना चाहूँगा- अपने सैनिकों को केवल आदेश मत दीजिए, उन्हें समझिए। केवल उनका नेतृत्व मत कीजिए, उनके साथ खड़े रहिए। क्योंकि जिस नेतृत्व में विश्वास होता है, वही नेतृत्व कठिन से कठिन परिस्थिति में असंभव को संभव बनाने का सामर्थ्य रखता है।

    भारत की सुरक्षा के संदर्भ में उत्तराखण्ड का विशेष महत्व है। यह केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि और सैन्यभूमि भी है। इस प्रदेश के हजारों परिवारों का किसी न किसी रूप में सेना से जुड़ाव रहा है। हमारी पर्वतीय सीमाएँ, सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र और कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ इस प्रदेश को राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती हैं।

    लेकिन आज सीमा सुरक्षा का अर्थ केवल सीमा पर सैनिक की उपस्थिति नहीं है। सीमांत क्षेत्रों में सड़क, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्थानीय लोगों का विश्वास भी राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। सीमांत गाँवों में जीवन की मजबूती ही सीमा की मजबूती है।

    सीमा पर तैनात सैनिक और सीमा से लगे गाँवों में रहने वाला नागरिक- दोनों मिलकर हमारी सीमाओं की सुरक्षा के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। इसलिए सैन्य और नागरिक प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय तथा सीमांत क्षेत्रों के विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानना आवश्यक है।

    मैं यह भी मानता हूँ कि भारत की वास्तविक शक्ति केवल हमारी सैन्य क्षमता में नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय एकता, सामाजिक विश्वास, युवा शक्ति, वैज्ञानिक क्षमता और हमारी सभ्यता के मूल्यों में निहित है।

    हमारी भारतीय परंपरा ने हजारों वर्षों पहले कहा है-

    “संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।”

    अर्थात् साथ चलें, साथ संवाद करें और हमारे मन एक दिशा में हों।

    आज जब दुनिया जटिल सुरक्षा चुनौतियों के दौर से गुजर रही है, यह विचार पहले से अधिक प्रासंगिक है। हमें राष्ट्र की सुरक्षा के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाना होगा- जहाँ सेना, वैज्ञानिक संस्थान, विश्वविद्यालय, उद्योग, प्रशासन और समाज मिलकर कार्य करें। राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमा की रक्षा का विषय नहीं है; यह ज्ञान, तकनीक, अर्थव्यवस्था, सामाजिक एकता और नागरिक चेतना से भी जुड़ी हुई है।

    आप सभी देश के ऐसे अधिकारी हैं जिनके पास व्यापक सैन्य अनुभव भी है और निरंतर सीखने की क्षमता भी। मैं हायर कमांड कोर्स को केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के रूप में नहीं देखता। यह अपने अनुभव को नए ज्ञान से जोड़ने, अपने निर्णयों की समीक्षा करने और भविष्य की चुनौतियों के लिए स्वयं को तैयार करने का अवसर है।

    आज मैं आपसे एक छोटा-सा आग्रह करना चाहता हूँ- सीखना कभी बंद मत कीजिए।

    एक सैन्य अधिकारी के लिए व्यावसायिक उत्कृष्टता जितनी आवश्यक है, उतनी ही आवश्यक है बौद्धिक जिज्ञासा। दुनिया बदल रही है। युद्ध की तकनीक बदल रही है। समाज बदल रहा है। इसलिए नेतृत्व की सोच भी निरंतर विकसित होनी चाहिए।

    और जब भी आप किसी कठिन निर्णय के सामने खड़े हों, अपने आप से तीन प्रश्न अवश्य पूछिए-क्या यह राष्ट्रहित में है? क्या यह मेरे सैनिकों के हित में है? और क्या मैं अपने निर्णय की पूरी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हूँ? यदि इन प्रश्नों का उत्तर आपके अंतर्मन से सकारात्मक आता है, तो राष्ट्र को अपने निर्णय का केंद्र बनाइए, अपने सैनिक को अपनी जिम्मेदारी का केंद्र बनाइए और अपने विवेक को अपना मार्गदर्शक बनाइए।

    मुझे विश्वास है कि हायर कमांड कोर्स सीरियल नंबर-55 से आप केवल बेहतर कमांडर बनकर नहीं, बल्कि अधिक संवेदनशील, अधिक दूरदर्शी, अधिक तकनीक-सक्षम और अधिक राष्ट्र समर्पित नेतृत्वकर्ता के रूप में आगे बढ़ेंगे।

    आपका नेतृत्व मजबूत हो, आपकी दृष्टि व्यापक हो, आपका निर्णय राष्ट्रहित से प्रेरित हो और आपके नेतृत्व में प्रत्येक सैनिक का मनोबल तथा विश्वास और ऊँचा हो।

    देवभूमि उत्तराखण्ड की इस पवित्र धरती से आप सभी को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
    वंदे मातरम्!
    भारत माता की जय!
    जय हिन्द!