Close

    17-09-2026:देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के मेधावी विद्यार्थियों के भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण के अवसर पर माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि : सितम्बर 17, 2026

    जय हिन्द!

    आदरणीय विधायक श्री विनोद कण्डारी जी, सम्मानित जनप्रतिनिधिगण, शिक्षकगण, अभिभावकगण और मेरे प्यारे बच्चों,

    आज लोक भवन में देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के आप सभी 68 मेधावी छात्र-छात्राओं से मिलकर मुझे प्रसन्नता के साथ गर्व की अनुभूति हो रही है। आपके चेहरों पर उत्साह, आँखों में सपने और मन में कुछ नया जानने की जिज्ञासा दिखाई दे रही है। यही जिज्ञासा आपकी सबसे बड़ी शक्ति है। मैं आप सभी को इस भारत दर्शन शैक्षिक यात्रा के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।

    आप जिस भारत दर्शन शैक्षिक यात्रा पर जा रहे हैं, वह केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने की यात्रा नहीं है। यह सीखने, देखने, समझने और अपने सपनों को बड़ा बनाने की यात्रा है। यह आपके लिए कक्षा की सीमाओं से बाहर निकलकर भारत को करीब से जानने और समझने का अवसर है।

    बच्चों, किताबों में हमने भारत का इतिहास, विज्ञान, संविधान, संस्कृति और महान व्यक्तित्वों के बारे में पढ़ा है। लेकिन जब आप स्वयं उन स्थानों को देखेंगे, संस्थानों में जाएंगे और उनके वातावरण को अनुभव करेंगे, तो आपकी सीख और गहरी होगी। इसलिए इस यात्रा पर केवल आँखें खोलकर नहीं, मन और जिज्ञासा खोलकर जाइए।

    आपकी यात्रा अलकनंदा और भागीरथी के पावन संगम देवप्रयाग की पुण्य धरती से शुरू होकर ऋषिकेश, लखनऊ, कानपुर, अयोध्या और रुड़की तक जाएगी। इस यात्रा में आपको आस्था और संस्कृति, इतिहास और विरासत, विज्ञान और तकनीक, लोकतंत्र और विकास-इन सभी को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

    ऋषिकेश में आप हमारी आध्यात्मिक परंपरा और गंगा से जुड़ेंगे। लखनऊ में विज्ञान और ऐतिहासिक विरासत को देखेंगे। कानपुर में आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की प्रयोगशालाओं और तकनीकी वातावरण से परिचित होंगे। अयोध्या में हमारी सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा को समझेंगे और आईआईटी रुड़की में उच्च शिक्षा, विज्ञान और तकनीक की दुनिया को करीब से जानेंगे।

    उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश की विधानसभाओं का भ्रमण आपको हमारे लोकतंत्र और विधायी व्यवस्था को समझने का अवसर देगा। तारामंडल में आप अंतरिक्ष की दुनिया को करीब से जानेंगे। मैं चाहता हूँ कि हर स्थान पर अपने मन में एक प्रश्न जरूर रखिए-“मैं यहाँ से क्या सीख सकता हूँ?” केवल यह मत देखिए कि वहाँ क्या है; यह भी जानने का प्रयास कीजिए कि ऐसा क्यों है, यह कैसे बना और इससे हम क्या सीख सकते हैं।

    प्यारे बच्चों,

    भारत दर्शन की यह यात्रा आपको केवल भारत की विविधता दिखाने वाली यात्रा नहीं है, बल्कि उस विविधता में छिपी हमारी एकता को अनुभव करने वाली यात्रा भी है। अलग-अलग भाषाएँ, वेशभूषाएँ, परंपराएँ और जीवन-पद्धतियाँ होने के बावजूद हम सब एक राष्ट्र हैं। यही भारत की शक्ति है। जब आप देश के अलग-अलग हिस्सों को देखेंगे, तो आपको अनुभव होगा कि विविधताओं के बीच एकता ही हमारी सबसे बड़ी पहचान है।

    इसी भावना को हमें “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के रूप में आगे बढ़ाना है। आप जहाँ जाएँ, वहाँ की संस्कृति का सम्मान कीजिए, लोगों से मिलिए, उनकी जीवन-पद्धति को समझिए और अपने अनुभवों के माध्यम से भारत की इस विविधता को महसूस कीजिए।

    और बच्चों, “राष्ट्र प्रथम” का भाव भी अपने जीवन में उतारिए। राष्ट्र प्रथम का भाव केवल सीमा पर खड़े सैनिक के दायित्व तक सीमित नहीं है। एक विद्यार्थी के लिए राष्ट्र प्रथम का अर्थ है- ईमानदारी से पढ़ना, अनुशासन में रहना, अपनी प्रतिभा को निखारना और आगे चलकर अपनी योग्यता का उपयोग देश और समाज के हित में करना। आप आज विद्यार्थी हैं, लेकिन आने वाले भारत के निर्माण में आपकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी।

    आप सभी मेधावी हैं। आपके अच्छे अंक आपकी मेहनत और क्षमता का प्रमाण हैं, लेकिन जीवन में आगे बढ़ने के लिए केवल अच्छे अंक पर्याप्त नहीं हैं। ज्ञान के साथ विनम्रता, प्रतिभा के साथ अनुशासन, सफलता के साथ संवेदनशीलता और उपलब्धि के साथ जिम्मेदारी भी आवश्यक है।

    आपके सामने आज अवसरों की एक बड़ी दुनिया खुल रही है। इसलिए अपनी परिस्थितियों को अपनी सीमा मत बनने दीजिए। आपका गाँव आपकी पहचान हो सकता है, लेकिन आपकी मंजिल की सीमा नहीं। देवप्रयाग की पहाड़ियों से निकलकर भी कोई बच्चा देश के श्रेष्ठ संस्थानों तक पहुँच सकता है। आवश्यकता है दृढ़ संकल्प, निरंतर मेहनत और स्वयं पर विश्वास की।

    सेना में अपने लंबे सेवाकाल में मैंने सीखा है कि लक्ष्य चाहे कितना भी बड़ा हो, अनुशासन, निरंतर अभ्यास, धैर्य और टीम भावना के साथ उसे प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए आप भी अपने जीवन में लक्ष्य तय कीजिए और हर दिन उस लक्ष्य की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाइए।

    प्यारे बच्चों,

    इस यात्रा को केवल घूमने की यात्रा मत बनाइए। इसे अपने जीवन की सीखने वाली यात्रा बनाइए। यात्रा के दौरान अपने अनुभवों को लिखिए। आपने क्या देखा, क्या सीखा और किस बात ने आपको सबसे अधिक प्रभावित किया- इसे याद रखिए। लौटकर अपने विद्यालय और साथियों के साथ अपने अनुभव साझा कीजिए।

    आप इस यात्रा से बहुत कुछ लेकर लौटेंगे। कोशिश कीजिए कि लौटकर अपने गाँव, अपने विद्यालय और अपने साथियों को भी कुछ दें- अपने अनुभव, अपनी नई सोच और आगे बढ़ने की प्रेरणा। आपकी सफलता तब और सुंदर होगी, जब उससे आपके आसपास के दूसरे बच्चों के सपनों को भी उड़ान मिले।

    आप अपने माता-पिता और गुरुजनों के सपनों को साथ लेकर इस यात्रा पर जा रहे हैं। इसलिए जहाँ भी जाएँ, अपने व्यवहार से देवप्रयाग की पहचान बनाइए। समय का पालन कीजिए, अनुशासन बनाए रखिए, अपने साथियों का ध्यान रखिए और यात्रा की सभी व्यवस्थाओं का पालन कीजिए। यात्रा में आपके लिए निर्धारित व्यवस्थाओं और आवश्यक निर्देशों का पालन भी आपकी जिम्मेदारी है।

    विधायक श्री विनोद कण्डारी जी ने वर्ष 2017 से इस भारत दर्शन पहल को निरंतर आगे बढ़ाया है और आज इस यात्रा का दसवाँ संस्करण आपके सामने है। इस पहल का सबसे सुंदर पक्ष यही है कि पर्वतीय क्षेत्र के प्रतिभाशाली बच्चों को देश को देखने, समझने और अपने भविष्य के सपनों को विस्तार देने का अवसर मिल रहा है।

    प्यारे बच्चों,

    आज यहाँ से निकलते समय मैं चाहता हूँ कि आप एक छोटा-सा संकल्प लेकर जाएँ-

    “मैं इस यात्रा में अनुशासन रखूँगा, हर नई चीज को जिज्ञासा से सीखूँगा, अपने देश की विविधता और संस्कृति का सम्मान करूँगा और लौटकर अपने अनुभवों से दूसरों को भी प्रेरित करूँगा।”

    मैं चाहता हूँ कि इस यात्रा से लौटते समय आपके साथ केवल तस्वीरें और सुंदर स्मृतियाँ न हों, बल्कि नई सोच, नए सपने और कुछ नया करने का संकल्प भी हो। भारत को देखिए, भारत को समझिए, उसकी विविधता में एकता को महसूस कीजिए और अपने भीतर यह विश्वास लेकर लौटिए कि आपकी प्रतिभा और आपकी मेहनत भी भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

    आप देवभूमि के बच्चे हैं। यह वीरों और सैनिकों की भूमि है, ज्ञान और अध्यात्म की भूमि है। इस धरती ने देश को अनेक प्रतिभाएँ दी हैं। अब आपकी बारी है कि अपनी प्रतिभा, परिश्रम और संस्कारों से देवप्रयाग और उत्तराखण्ड का नाम रोशन करें।

    हमेशा याद रखिए!

    बड़ा सपना देखिए, ईमानदारी से मेहनत कीजिए, असफलता से मत डरिए, और अपने सपनों को देश की सेवा से जोड़िए।

    आपकी यह यात्रा आनंदमय और सुरक्षित हो। यह आपके जीवन की ऐसी स्मृति बने, जो आने वाले वर्षों में भी आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहे।

    आप सभी को भारत दर्शन की इस प्रेरणादायी यात्रा के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ और आशीर्वाद।

    जय हिन्द!
    जय उत्तराखण्ड!