17-09-2026:एसएसबी ऑल-वुमन माउंट श्रीकंठ अभियान-2026 के फ्लैग-ऑफ समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड का उद्बोधन
जय हिन्द!
आज के इस गौरवपूर्ण अवसर पर सशस्त्र सीमा बल के महानिदेशक श्री संजय सिंघल जी, महानिरीक्षक (प्रशिक्षण) श्री संजीव शर्मा जी, सशस्त्र सीमा बल के वरिष्ठ अधिकारीगण, अभियान से जुड़े सभी प्रशिक्षक एवं सहयोगीगण तथा माउंट श्रीकंठ अभियान-2026 पर जाने वाली हमारी वीरांगना महिला पर्वतारोहियों का लोक भवन में हार्दिक अभिनंदन।
आज का दिन मेरे लिए विशेष गर्व और प्रसन्नता का दिन है। सशस्त्र सीमा बल की ऑल-वुमन टीम माउंट श्रीकंठ के शिखर को स्पर्श करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। यह अभियान साहस, अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और नारी शक्ति की अदम्य क्षमता का प्रेरणादायी उदाहरण है।
गढ़वाल हिमालय में उत्तरकाशी जनपद में स्थित 6,133 मीटर ऊँचा माउंट श्रीकंठ एक चुनौतीपूर्ण पर्वतारोहण लक्ष्य है। अत्यधिक ऊँचाई, बदलता मौसम, दुर्गम भू-भाग और कठिन परिस्थितियों में निरंतर आगे बढ़ने की क्षमता- इन सबकी परीक्षा इस अभियान में होगी। मुझे विश्वास है कि आपके प्रशिक्षण, अनुभव और दृढ़ संकल्प के सामने ये चुनौतियाँ भी छोटी पड़ेंगी।
एसएसबी के काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर स्कूल, ग्वालदम की पर्वतारोहण गतिविधियों की समृद्ध परंपरा रही है। इस संस्थान से माउंट एवरेस्ट, त्रिशूल, कामेट, गंगोत्री-प्, सतोपंथ और भागीरथी-प्प् जैसे पर्वतारोहण अभियानों में सफलता प्राप्त की गई है। माउंट श्रीकंठ का यह अभियान उसी गौरवपूर्ण परंपरा को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण अध्याय है।
साथियों,
भारत की संस्कृति में पर्वत केवल ऊँची चोटियाँ नहीं हैं। पर्वत हमारे लिए संकल्प, साधना, धैर्य और आत्मबल के प्रतीक हैं। उत्तराखण्ड स्वयं हिमालय की गोद में बसा वह प्रदेश है, जहाँ आध्यात्मिकता, वीरता और राष्ट्रसेवा की परंपराएँ साथ-साथ प्रवाहित होती हैं।
हमारी देवभूमि ने देश को असंख्य वीर सैनिक दिए हैं। यहाँ की माताओं ने अपने बेटों और बेटियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया है। इसलिए जब सशस्त्र सीमा बल की महिला पर्वतारोही देवभूमि के हिमालय में शिखर की ओर बढ़ती हैं, तो यह वीरभूमि उत्तराखण्ड और भारत की नारी शक्ति की साझा गौरव-यात्रा बन जाती है।
इस अभियान की सबसे विशेष बात यह है कि आप सभी वर्दीधारी सेवा से जुड़ी हैं। सशस्त्र सीमा बल केवल सीमाओं की सुरक्षा करने वाला बल नहीं, बल्कि “सेवा, सुरक्षा और बंधुत्व” की भावना का प्रहरी भी है। सेवा का संकल्प आपको आगे बढ़ाएगा, सुरक्षा का दायित्व आपको सजग रखेगा और बंधुत्व की भावना आपको एक-दूसरे का हाथ थामे शिखर तक पहुँचाएगी।
आपकी पहचान केवल पर्वतारोही के रूप में नहीं है। आप सशस्त्र सीमा बल की वर्दी पहनकर राष्ट्र की सेवा करने वाली प्रशिक्षित और समर्पित महिला शक्ति हैं। आपने राष्ट्र की सुरक्षा का दायित्व निभाया है और अनुशासन को अपने जीवन का हिस्सा बनाया है। इसलिए माउंट श्रीकंठ आपके प्रशिक्षण, नेतृत्व, धैर्य और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता की नई परीक्षा भी है।
अपने सैन्य जीवन के अनुभव से मैं कह सकता हूँ कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियाँ व्यक्ति की वास्तविक क्षमता को सामने लाती हैं। प्रशिक्षण हमें चुनौती के लिए तैयार करता है, लेकिन उसके क्षण में धैर्य, सही निर्णय लेने की क्षमता और टीम पर विश्वास ही हमारी वास्तविक शक्ति बनते हैं। सेना हो, सशस्त्र बल हो या पर्वतारोहण अभियान- कठिन परिस्थितियों में लक्ष्य से विचलित न होना और अपने साथी के साथ मजबूती से खड़े रहना ही सफलता की आधारशिला है।
पर्वतारोहण हमें सिखाता है कि शिखर तक पहुँचने में व्यक्तिगत साहस जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही टीम पर विश्वास भी। एक-दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ना ही आपकी सबसे बड़ी शक्ति होगी। क्योंकि शिखर तक पहुँचना उपलब्धि है, लेकिन पूरी टीम के साथ सुरक्षित पहुँचना उससे भी बड़ी सफलता है।
प्रिय पर्वतारोही बहनों,
आपके सामने 6,133 मीटर की ऊँचाई है। लेकिन मैं चाहता हूँ कि आप इसे केवल भौगोलिक ऊँचाई न मानें। इसे अपने आत्मविश्वास, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा के संकल्प की ऊँचाई बनाइए।
आपके लिए एक मंत्र सदैव मार्गदर्शक रहे- वह है “राष्ट्र प्रथम।”
वर्दी हमें केवल पहचान नहीं देती, वह जिम्मेदारी भी देती है। सीमा की सुरक्षा हो, कठिन क्षेत्र में ड्यूटी हो या हिमालय की चुनौती- हर परिस्थिति में कर्तव्य को प्राथमिकता देना ही वर्दी की गरिमा है।
मुझे प्रसन्नता है कि इस अभियान में देश के विभिन्न राज्यों से महिला प्रतिभागी शामिल हैं। अलग-अलग प्रदेशों से आईं ये महिलाएँ आज एक दल, एक लक्ष्य और एक संकल्प के साथ आगे बढ़ रही हैं। यह एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को भी सशक्त करता है।
आप स्वयं इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि अवसर, प्रशिक्षण और विश्वास मिले तो भारतीय महिलाएँ सबसे कठिन दायित्वों को भी पूरी क्षमता और समर्पण के साथ निभा सकती हैं। आपकी यह यात्रा देश की उन बेटियों के लिए भी प्रेरणा है, जो अपने जीवन में किसी शिखर को छूने का सपना देखती हैं। उन्हें यह संदेश अवश्य दीजिए कि ऊँचाई चाहे पर्वत की हो या जिम्मेदारी की, तैयारी, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ हर शिखर तक पहुँचा जा सकता है।
हमारे शास्त्रों में कहा गया है-
“उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।”
अर्थात कार्य केवल इच्छा करने से नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास से सिद्ध होते हैं। आपके अभियान की भावना भी इसी मंत्र में निहित है-संकल्प, प्रयास और सफलता।
वीरांगना पर्वतारोही बहनों,
इस अभियान में साहस आवश्यक है, लेकिन साहस का अर्थ जोखिम को अनदेखा करना नहीं है। साहस का अर्थ है- जोखिम को समझना, सही निर्णय लेना और अनुशासन के साथ आगे बढ़ना। पर्वत का सम्मान कीजिए, परिस्थितियों को समझिए और अपने प्रशिक्षण तथा अभियान नेतृत्व पर विश्वास रखते हुए आगे बढ़िए। आपकी और आपके साथियों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता हो।
मुझे विश्वास है कि यह अभियान उच्च हिमालयी परिस्थितियों में आपकी सहनशक्ति, नेतृत्व क्षमता और पेशेवर दक्षता को और मजबूत करेगा तथा भविष्य के बड़े पर्वतारोहण अभियानों के लिए नई राह तैयार करेगा। यह एसएसबी की महिला शक्ति की क्षमता और उसके बढ़ते नेतृत्व का भी सशक्त उदाहरण बनेगा।
मैं सशस्त्र सीमा बल के नेतृत्व, अधिकारियों, प्रशिक्षकों और इस अभियान से जुड़े प्रत्येक सदस्य को बधाई देता हूँ, जिन्होंने इस महत्वपूर्ण अभियान की योजना और तैयारी में अपना योगदान दिया है।
मेरी वीरांगना पर्वतारोही बहनों,
जब आप माउंट श्रीकंठ की चढ़ाई शुरू करेंगी, तो आपके साथ आपका प्रशिक्षण होगा, आपका अनुभव होगा, आपकी टीम होगी और सबसे बढ़कर तिरंगे का गौरव होगा। जब शिखर सामने हो और परिस्थितियाँ कठिन हों, तब अपने भीतर की उस शक्ति को याद कीजिए, जिसने आपको इस वर्दी तक पहुँचाया है।
मैं उस गौरवपूर्ण क्षण की कल्पना कर सकता हूँ, जब माउंट श्रीकंठ की हिमाच्छादित चोटी पर आप तिरंगा फहराएँगी। उस क्षण वहाँ केवल एक ध्वज नहीं लहराएगा, बल्कि आपके साथ उन सभी भारतीयों का गौरव लहराएगा, जिन्होंने इस तिरंगे के लिए अपना जीवन समर्पित किया है।
आपकी यह सफलता केवल एक पर्वत की विजय नहीं होगी। यह साहस, अनुशासन, नारी शक्ति और राष्ट्रसेवा के संकल्प की विजय होगी।
आप जिस शिखर की ओर बढ़ रही हैं, वह भौगोलिक रूप से माउंट श्रीकंठ है; लेकिन आपकी यात्रा का वास्तविक शिखर इससे कहीं ऊँचा है-कर्तव्य की ऊँचाई, नेतृत्व की ऊँचाई और राष्ट्रभक्ति की ऊँचाई।
आप पूरी ऊर्जा, आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ आगे बढ़ें। सुरक्षित जाएँ, सफल होकर लौटें और भारत का गौरव बढ़ाएँ।
हमेशा याद रखिए! आपके लिए राष्ट्र प्रथम है, कर्तव्य सर्वाेपरि है और तिरंगे की गरिमा सबसे बड़ा गौरव है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि आपका अभियान सफल हो, आप सभी स्वस्थ और सुरक्षित रहें तथा माउंट श्रीकंठ के शिखर पर भारत का तिरंगा और सशस्त्र सीमा बल का ध्वज पूरी शान से लहराए।
आप सभी को माउंट श्रीकंठ अभियान-2026 की सफलता के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
वंदे मातरम्! माँ भारती की जय! जय हिन्द!