09-09-2026 : ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित ‘एक प्रयास-नशामुक्त समाज’ कार्यक्रम के अवसर पर माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड का संबोधन
जय हिन्द!
लोक भवन के इस पावन प्रांगण में आज हम एक ऐसे गंभीर और समसामयिक विषय पर विचार-विमर्श के लिए एकत्र हुए हैं, जिसका सीधा संबंध हमारे युवाओं के भविष्य, परिवारों की खुशियों और समाज की स्वस्थ दिशा से है। यह विषय केवल नशे से मुक्ति का नहीं, बल्कि हमारी युवा शक्ति को जीवन के प्रकाश, संस्कार, सपनों और राष्ट्र निर्माण की सही राह से जोड़ने का संकल्प है।
हमारी सनातन संस्कृति ने जीवन को उद्देश्य, संयम और आत्मानुशासन के साथ जीने की प्रेरणा दी है। हमारे मनीषियों ने योग और ध्यान के माध्यम से शरीर, मन और विचारों को साधने का मार्ग दिखाया तथा युवा ऊर्जा को समाज और राष्ट्र के कल्याण में लगाने का संदेश दिया।
इसी जीवन-दृष्टि के साथ ‘एक प्रयास-नशामुक्त समाज’ का यह अभियान हमारे सामने एक स्पष्ट आह्वान रखता है-जीवन को नशे पर, संकल्प को भटकाव पर और सपनों को अंधकार पर विजय दिलाने का।
हमारा लक्ष्य केवल नशे से दूर रहने वाला युवा नहीं, बल्कि ऐसा स्वस्थ, संस्कारित, आत्मविश्वासी और संकल्पवान युवा तैयार करना है, जो अपनी प्रतिभा को पहचाने, अपने सपनों को साकार करे और अपनी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण की शक्ति बनाए। क्योंकि जिस युवा की आँखों में सपना, हृदय में संकल्प और जीवन में उद्देश्य होता है, उसे नशे का अंधकार अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सकता।
भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति, आधुनिक तकनीक और मजबूत आधारभूत ढाँचे से पूरा नहीं होगा। इसके केंद्र में होगा-स्वस्थ, शिक्षित, संस्कारित, आत्मविश्वासी और नशामुक्त युवा।
आज का युवा ही 2047 के विकसित भारत की नींव रख रहा है; इसलिए उसका स्वास्थ्य, उसकी सोच, उसके संस्कार और उसका संकल्प सीधे भारत के भविष्य से जुड़े हैं। यही युवा 2047 के विकसित भारत का नेतृत्व करेगा।
साथियों,
हमारे मनीषियों ने कहा है- “शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्।”
अर्थात् यह शरीर ही जीवन के सभी श्रेष्ठ कार्यों का पहला साधन है। इसलिए शरीर और मन को नशे से बचाना केवल स्वास्थ्य का प्रश्न नहीं, बल्कि अपने जीवन, परिवार और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी भी है।
नशा किसी व्यक्ति को अचानक नहीं तोड़ता। वह धीरे-धीरे उसके विवेक और आत्मविश्वास को कमजोर करता है, रिश्तों में दूरी पैदा करता है और उसके सपनों को धुंधला कर देता है। इसकी सबसे गहरी चोट परिवार को लगती है।
एक माँ अपने बच्चे में अपना भविष्य देखती है और एक पिता उसकी सफलता में अपने जीवन की सार्थकता। इसलिए जब कोई युवा नशे की गिरफ्त में आता है, तो केवल एक व्यक्ति प्रभावित नहीं होता-एक परिवार की आशाएँ घायल होती हैं और समाज की शक्ति कमजोर होती है।
हमें यह भी समझना होगा कि कई बार तनाव, असफलता, अकेलापन या साथियों का दबाव युवा को गलत दिशा की ओर धकेल सकता है। ऐसे समय उसे तिरस्कार नहीं, सहारे, संवाद और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।
तनाव आए तो उसका सामना करें। असफलता मिले तो उससे सीखें। चुनौती आए तो उससे लड़ें। क्योंकि असली जीत कठिनाइयों से बचने में नहीं, उनका साहस के साथ सामना करने में है।
मेरे युवा साथियों,
आज भारत के युवा विज्ञान, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुसंधान, खेल, उद्यमिता, शिक्षा और राष्ट्रसेवा के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और क्षमता का परिचय दे रहे हैं। हमारी सेनाओं में युवा सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं और देश के करोड़ों युवा अपने परिश्रम से भारत की विकास यात्रा को गति दे रहे हैं। ऐसी युवा शक्ति को नशे से बचाना केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आवश्यकता भी है।
इसी भावना को राष्ट्रीय संकल्प का स्वरूप देते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया है। प्रधानमंत्री जी ने स्पष्ट संदेश दिया है-
“देश का युवा तन से स्वस्थ हो, मन से स्वस्थ हो, आत्मविश्वास से भरपूर हो और ड्रग्स जैसी घातक आदत से हमेशा दूर रहे।” उन्होंने यह भी आह्वान किया है- “हमें हर एक युवा को नशे के चंगुल में फंसने से बचाना है।”
यह अभियान व्यापक और निरंतर जन-जागरण का माध्यम बनेगा, जिसमें खेल, कला, संस्कृति, योग, ध्यान, सेवा और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा से जोड़ा जाएगा।
और यहाँ एक बात हमें विशेष रूप से समझनी होगी-
नशे का विकल्प केवल ‘नशा मत करो’ कहना नहीं है। नशे का वास्तविक विकल्प है-युवा के जीवन में कोई बड़ा उद्देश्य पैदा करना। उसे खेल से जोड़िए। योग और ध्यान से जोड़िए। शिक्षा, कला और संस्कृति से जोड़िए। विज्ञान, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जोड़िए। राष्ट्रसेवा और रचनात्मक कार्यों से जोड़िए। जिस युवा के जीवन में उद्देश्य होता है, उसके कदम भटकाव से दूर रहते हैं।
मेरे शिक्षक साथियों,
आप विद्यार्थियों को केवल विषय का ज्ञान नहीं देते, जीवन की दिशा भी देते हैं। यदि किसी विद्यार्थी के व्यवहार में बदलाव दिखाई दे, वह अकेला रहने लगे या पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियों से दूर होने लगे, तो उसे केवल अनुशासन का विषय न मानें।
उसके साथ संवाद कीजिए, उसकी समस्या समझिए और आवश्यकता होने पर उचित परामर्श एवं सहायता उपलब्ध कराइए। हमारे विद्यालय और विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण और नशामुक्त जीवन की संस्कृति के केंद्र बनें।
माता-पिता से भी मेरा आग्रह है-अपने बच्चों से संवाद बढ़ाइए। उनकी बात सुनिए, उनकी समस्याओं को समझिए। यदि कोई युवा नशे की समस्या से जूझ रहा है, तो सामाजिक प्रतिष्ठा के भय से उसे छिपाइए नहीं। समस्या को छिपाने से समाधान नहीं मिलता; संवाद, उपचार और पुनर्वास से रास्ता खुलता है।
जो युवा नशे से बाहर आने का प्रयास कर रहा है, उसे तिरस्कार नहीं, विश्वास और दूसरा अवसर चाहिए। ऐसे युवा असली योद्धा हैं। हमें उसे उसके अतीत से नहीं, उसके भविष्य से पहचानना होगा।
सरकार जागरूकता, रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध कार्रवाई के स्तर पर प्रयास कर रही है। फिर भी इस चुनौती का समाधान सरकार अकेले नहीं कर सकती। परिवार, शिक्षक, विश्वविद्यालय, समाज, प्रशासन और स्वयं युवा-सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। हमें नशे के विरुद्ध ऐसी सामाजिक दीवार खड़ी करनी है, जिसमें हर नागरिक की भूमिका हो।
साथियों,
देवभूमि उत्तराखण्ड योग, अध्यात्म, संस्कार, साहस और वीरता की भूमि है। यह सैनिकों की भूमि है, जहाँ पीढ़ियों से युवाओं ने राष्ट्रसेवा को अपने जीवन का गौरव माना है। ऐसी वीरभूमि के युवाओं की पहचान नशे से नहीं, बल्कि प्रतिभा, परिश्रम, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से होनी चाहिए। मुझे विश्वास है कि उत्तराखण्ड का युवा इस अभियान का नेतृत्व करेगा और देश के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करेगा।
मेरे युवा साथियों,
आपका जीवन अनमोल है। आपके भीतर असीम संभावनाएँ हैं और राष्ट्र को आपसे बहुत उम्मीदें हैं। अपनी ऊर्जा को व्यसन में नहीं, नवाचार में लगाइए, अपने समय को भटकाव में नहीं, अपने लक्ष्य और राष्ट्र निर्माण में लगाइए।
आज की यह शपथ केवल शब्दों तक सीमित न रहे, यह हमारे व्यवहार का संकल्प बने। हम स्वयं नशे से दूर रहें, अपने साथियों को प्रेरित करें और जो युवा इसकी गिरफ्त में आ गया है, उसे अकेला न छोड़ें।
नशामुक्त युवा, स्वस्थ परिवार, सशक्त समाज, विकसित उत्तराखण्ड और विकसित भारत- यही हमारा सामूहिक संकल्प और राष्ट्रीय लक्ष्य है। आइए, नशे को नहीं-जीवन को चुनेंगे। भटकाव को नहीं-लक्ष्य को चुनेंगे। निराशा को नहीं-संभावनाओं को चुनेंगे। और अपनी युवा शक्ति को राष्ट्र शक्ति बनाएँगे।
इसी विश्वास के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
जय हिन्द!
जय उत्तराखण्ड!