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    21-08-2026 : ‘वरिष्ठ नागरिक दिवस’ के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड का सम्बोधन

    प्रकाशित तिथि : अगस्त 21, 2026

    जय हिन्द!

    ‘ट्रैवी क्लब 60’ के सभी सम्मानित सदस्यों, प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों, वरिष्ठ नागरिकों, देवियों एवं सज्जनों, आप सभी को हृदय से मेरा अभिवादन।

    आज वरिष्ठ नागरिक दिवस के इस गरिमामय अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। सबसे पहले मैं ‘ट्रैवी क्लब 60’ को इस सुंदर और सार्थक आयोजन के लिए हृदय से बधाई देता हूँ। वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, उनके अनुभवों की सराहना और उनके योगदान को समाज के सामने रखने का आपका यह प्रयास वास्तव में अनुकरणीय है।

    आज का दिन केवल एक समारोह का दिन नहीं है। यह कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है, अनुभवों को नमन करने का दिन है और उन जीवन-यात्राओं को सम्मान देने का दिन है, जिन्होंने परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है।

    हमारे वरिष्ठ नागरिक समाज का केवल एक हिस्सा नहीं हैं। वे हमारी जीवंत धरोहर, अनुभव की पूंजी और संस्कारों की अमूल्य विरासत हैं। उनके जीवन में संघर्ष की कहानी है, सफलता के अनुभव हैं, कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता है और आने वाली पीढ़ियों को दिशा देने वाला जीवन-ज्ञान है। कोई पुस्तक हमें जितना नहीं सिखा सकती, उतना एक अनुभवी जीवन हमें सिखा सकता है।

    हमारी भारतीय संस्कृति ने सदैव वरिष्ठजनों को विशेष सम्मान दिया है। हमारी परंपरा कहती है- “मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्यदेवो भव।” यह केवल एक श्लोक नहीं, बल्कि हमारे जीवन-मूल्यों का आधार है। हमारे यहाँ परिवार की सबसे बड़ी शक्ति केवल उसकी संपन्नता नहीं, बल्कि उसके बुजुर्गों का आशीर्वाद और उनका अनुभव माना गया है।

    भारतीय संस्कृति की आत्मा हमारी परिवार व्यवस्था में निहित है। परिवार संस्कारों, संवेदनाओं और जीवन-मूल्यों की पहली पाठशाला है। इसी परिवार व्यवस्था की इस अमूल्य धरोहर को अक्षुण्ण रखने का ‘कुटुंब प्रबोधन’ एक सार्थक और भगीरथ प्रयास है।

    आज डिजिटल युग में, जब तकनीक ने हमें एक-दूसरे से जोड़ने के साथ-साथ कई बार एक ही घर में रहते हुए भी दूरियाँ बढ़ा दी हैं, तब परिवार में साप्ताहिक सहभोज, भजन, सामूहिक संवाद और साथ बैठने की परंपरा को पुनर्जीवित करना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे छोटे-छोटे प्रयास परिवार में अपनत्व बढ़ाते हैं, पीढ़ियों को करीब लाते हैं और बच्चों के मन में बड़ों के प्रति श्रद्धा तथा अपनी सनातन संस्कृति और संस्कारों के प्रति गौरव की भावना को मजबूत करते हैं।

    इस दिशा में हमारे वरिष्ठ नागरिकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। वे परिवार की स्मृति, संस्कार और अनुभव की जीवंत कड़ी हैं। उनके साथ बैठना, उनकी बातें सुनना और उनके अनुभवों से सीखना अपनी आने वाली पीढ़ी को समृद्ध करना भी है।

    युवाओं के पास नई ऊर्जा और नए विचार हैं, लेकिन वरिष्ठ पीढ़ी के पास अनुभव, धैर्य, विवेक और जीवन की गहरी समझ है। इसलिए हमें पीढ़ियों के बीच दूरी नहीं, बल्कि संवाद और सहभागिता बढ़ानी चाहिए।

    युवा ऊर्जा और वरिष्ठ अनुभव जब साथ चलते हैं, तब समाज की प्रगति अधिक संतुलित और राष्ट्र की शक्ति अधिक सुदृढ़ होती है।

    मैं यह भी मानता हूँ कि सेवानिवृत्ति जीवन का पूर्णविराम नहीं है। यह जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है। नौकरी से निवृत्ति हो सकती है, लेकिन अनुभव से कभी निवृत्ति नहीं होती। वरिष्ठ नागरिकों के पास समाज को देने के लिए बहुत कुछ है- अपनी विशेषज्ञता, अपने विचार, अपनी संवेदनशीलता और अपना मार्गदर्शन।

    आज आवश्यकता है कि हम वरिष्ठ नागरिकों को केवल सम्मान और देखभाल के पात्र के रूप में न देखें, बल्कि उन्हें समाज की सक्रिय शक्ति और मार्गदर्शक शक्ति के रूप में देखें। शिक्षा हो, संस्कृति हो, सामाजिक सेवा हो, पर्यावरण संरक्षण हो, युवाओं का मार्गदर्शन हो या स्थानीय ज्ञान का संरक्षण- हर क्षेत्र में वरिष्ठ नागरिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    उत्तराखण्ड की बात करें तो यहाँ वरिष्ठजनों का महत्व और भी विशिष्ट है। देवभूमि उत्तराखण्ड केवल अपनी पर्वत-श्रृंखलाओं और तीर्थस्थलों के कारण महान नहीं है, बल्कि यहाँ की संस्कृति, लोकपरंपराएँ, संस्कार और जीवन-मूल्य भी इसकी पहचान हैं। हमारे गाँवों और पहाड़ों के बुजुर्ग लोकज्ञान, लोकभाषा, लोकगीत, परंपरागत कृषि, औषधीय ज्ञान और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन के अनुभवों के जीवंत संरक्षक हैं।

    उनके पास हिमालय को देखने की एक ऐसी दृष्टि है, जो केवल आँखों से नहीं, बल्कि अनुभव से बनी है। इसलिए उनके ज्ञान और अनुभव को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना हमारी जिम्मेदारी है। जो जीवन स्वयं एक पुस्तक है, उसके अनुभव आने वाली पीढ़ी तक पहुँचने चाहिए। उनके जीवन-अनुभवों, संघर्षों और उपलब्धियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, ताकि यह अमूल्य विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन बन सके।

    मेरा यह भी मानना है कि वरिष्ठ जीवन केवल दीर्घायु होने का नाम नहीं है। स्वस्थ, सक्रिय, सम्मानजनक और प्रसन्न जीवन ही वास्तव में सार्थक वरिष्ठ जीवन है। योग, आयुर्वेद, संतुलित दिनचर्या, सकारात्मक सोच और सामाजिक सहभागिता वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में नई ऊर्जा भर सकते हैं। आज इस समारोह में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम और विभिन्न प्रतियोगिताएँ इसी सक्रियता और उत्साह का सुंदर उदाहरण हैं।

    मैं सभी वरिष्ठ नागरिकों से कहना चाहता हूँ- आपका जीवन-अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक प्रकाश है। अपने अनुभवों को साझा कीजिए, युवाओं से संवाद कीजिए, समाज से जुड़े रहिए और अपने ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुँचाइए। आपका अनुभव जितना अधिक समाज के साथ साझा होगा, समाज उतना ही समृद्ध होगा।

    साथ ही, हमारी युवा पीढ़ी से भी मेरा आग्रह है कि अपने माता-पिता और वरिष्ठजनों के लिए समय निकालें। उन्हें केवल सुविधाएँ नहीं, समय, संवाद और अपनापन भी चाहिए। कभी उनके पास बैठकर उनके जीवन की कहानी सुनिए। संभव है, आपको अपने ही परिवार के इतिहास में संघर्ष, साहस और प्रेरणा की ऐसी कहानियाँ मिलें, जिनसे आपका जीवन बदल जाए।

    हमारे शास्त्रों में कहा गया है-

    “अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।
    चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्॥”

    अर्थात जो व्यक्ति अपने से बड़े और वरिष्ठजनों का सम्मान करता है, उसके जीवन में आयु, ज्ञान, यश और शक्ति की वृद्धि होती है। यह हमारी संस्कृति की महानता है कि उसने वरिष्ठों के सम्मान को केवल सामाजिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि जीवन की शक्ति माना है।

    आज इस अवसर पर मैं सभी सम्मानित वरिष्ठ नागरिकों को हृदय से नमन करता हूँ। आपने अपने जीवन के बहुमूल्य वर्ष परिवार, समाज और राष्ट्र को दिए हैं। आपका परिश्रम हमारे वर्तमान की नींव है और आपका अनुभव हमारे भविष्य की दिशा।

    मैं पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी विजेताओं को भी हार्दिक बधाई देता हूँ। आइए, हम ऐसा समाज बनाएँ जहाँ परिवार मजबूत हों, वरिष्ठ नागरिक सम्मानित और सक्रिय हों, युवाओं को मार्गदर्शन मिले, संस्कार पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ें और अनुभव तथा ऊर्जा का सुंदर सेतु निरंतर मजबूत होता रहे।

    वरिष्ठों का आशीर्वाद हमारी शक्ति है, उनका अनुभव हमारी दिशा है, उनका स्नेह हमारी विरासत है, और उनका सम्मान हमारी सनातन संस्कृति की पहचान है।

    इसी भावना के साथ आप सभी को वरिष्ठ नागरिक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    आप सभी स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें, सक्रिय रहें और अपना अनुभव आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रदान करते रहें- इसी मंगलकामना के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

    वंदे मातरम्! भारत माता की जय!
    जय हिन्द! जय उत्तराखण्ड!