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    19-08-2026 : भारतीय वन सेवा (IFS) प्रोबेशनर्स और PSUC अधिकारियों को माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड का सम्बोधन

    प्रकाशित तिथि : अगस्त 19, 2026

    जय हिन्द!

    आदरणीय उपराष्ट्रपति जी, उपस्थित सभी सम्मानित अतिथिगण, भारतीय वन सेवा के युवा प्रोबेशनरी ऑफिसर्स, प्रोफेशनल स्किल अपग्रेडेशन कोर्स के वरिष्ठ अधिकारीगण तथा उपस्थित सभी महानुभावों!

    आप सभी को मेरा सादर अभिवादन।

    प्रकृति की अनुपम धरोहर, देवभूमि उत्तराखण्ड में, देश की वन एवं प्राकृतिक संपदा की रक्षा और राष्ट्र सेवा के लिए तैयार हो रहे युवा अधिकारियों के बीच उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता और गौरव का विषय है।

    इस अवसर पर सर्वप्रथम मैं आदरणीय उपराष्ट्रपति जी का देवभूमि उत्तराखण्ड में हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत करता हूँ। आपके गरिमामय सान्निध्य में देश की प्राकृतिक संपदा के भावी संरक्षकों के साथ यह संवाद हम सभी के लिए गौरव और प्रेरणा का अवसर है।

    मैं भारतीय वन सेवा के 2025 बैच के युवा प्रोबेशनर ऑफिसर्स तथा प्रोफेशनल स्किल अपग्रेडेशन कोर्स में प्रशिक्षण ले रहे वरिष्ठ अधिकारियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।

    आपने इस गौरवशाली सेवा का चयन करके भारत की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी स्वीकार की है। आपके कंधों पर वन, वन्यजीव, जैव विविधता, जल और पर्यावरण के संरक्षण का महत्वपूर्ण दायित्व है।

    साथियों,

    अपने सैन्य सेवा के अनुभव से मैंने सीखा है कि राष्ट्र की शक्ति केवल उसकी सीमाओं की सुरक्षा में नहीं, बल्कि उसके प्राकृतिक संसाधनों, मानव शक्ति और मूल्यों की मजबूती में भी निहित होती है। सीमा पर सैनिक देश की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा करता है और आप देश की प्राकृतिक संपदा के प्रहरी होंगे। इसलिए आपकी सेवा भी राष्ट्रीय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आयाम है।

    आज जलवायु परिवर्तन, जल संकट, जैव विविधता का क्षरण और प्राकृतिक आपदाएँ गंभीर चुनौतियाँ हैं। ऐसे समय में भारतीय वन सेवा की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

    वन केवल पेड़ों का समूह नहीं हैं। वन जल के स्रोत हैं, जीवन के आधार हैं, जैव विविधता के प्रहरी हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी अनमोल धरोहर हैं।

    विशेष रूप से हिमालय के संदर्भ में आपकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। हिमालय हमारी नदियों, जल स्रोतों और जैव विविधता का आधार है तथा करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ा है। इसलिए हिमालय का संरक्षण केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि भारत के भविष्य और राष्ट्रीय हित की रक्षा भी है।

    मेरे युवा साथियों,

    एक अच्छा अधिकारी केवल आदेश नहीं देता। वह अपनी टीम को साथ लेकर चलता है, लोगों की बात सुनता है और कठिन परिस्थितियों में समाधान का रास्ता दिखाता है।

    नेतृत्व पद से नहीं, विश्वास से मिलता है। आपका पद आपको अधिकार देगा, लेकिन आपका चरित्र आपको सम्मान दिलाएगा। इसलिए ईमानदारी, अनुशासन, संवेदनशीलता और निष्पक्षता को अपनी कार्यशैली का आधार बनाइए।

    वन संरक्षण का सबसे मजबूत आधार उन लोगों का विश्वास और सहयोग है, जिनका जंगलों से पीढ़ियों पुराना संबंध है। उनके अनुभव और पारंपरिक ज्ञान को समझना आवश्यक है। गैर-इमारती वन उत्पाद, औषधीय पौधे, स्थानीय उत्पाद, इको-टूरिज्म और वन आधारित छोटे उद्योग ग्रामीण आजीविका को मजबूत कर सकते हैं।

    जब स्थानीय समुदाय को वन से सम्मानजनक आजीविका और विकास का अवसर मिलेगा, तो वह स्वयं वन का सबसे मजबूत प्रहरी बनेगा।

    मेरे युवा साथियों,

    वन प्रशासन भी तेजी से बदल रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, उपग्रह तकनीक, रिमोट सेंसिंग और डेटा आधारित निर्णय वन प्रबंधन को नई दिशा दे सकते हैं। इसलिए नई तकनीक अपनाइए, नवाचार कीजिए और पुरानी चुनौतियों के लिए नए समाधान खोजिए।

    आज के वन अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के साथ राष्ट्रीय और वैश्विक पर्यावरणीय घटनाक्रमों की भी समझ रखनी होगी। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव सीमाओं से बंधे नहीं हैं। भारत ने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु कार्रवाई और सतत विकास के क्षेत्र में जो संकल्प लिए हैं, उन्हें धरातल पर लागू करने में आपकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

    साथियों,

    आपके सामने अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में अनेक चुनौतियाँ होंगी। स्थान और परिस्थितियाँ बदलेंगी, लेकिन आपकी प्रतिबद्धता नहीं बदलनी चाहिए। आपकी दृष्टि व्यापक हो, सोच वैज्ञानिक हो, निर्णय निष्पक्ष हों और हृदय संवेदनशील हो।

    माननीय उपराष्ट्रपति जी के साथ आज का यह संवाद आपके लिए विशेष अवसर है। खुले मन से सुनिए, सीखिए और इस संवाद से मिली प्रेरणा को अपने सेवाकाल में साथ लेकर जाइए। एक अच्छे अधिकारी का जीवन निरंतर सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने की यात्रा है।

    मुझे विश्वास है कि आप अपनी ऊर्जा, ज्ञान, तकनीकी दक्षता और नेतृत्व से भारतीय वन सेवा की गौरवशाली परंपरा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे।

    प्रकृति सुरक्षित होगी, तो जल सुरक्षित होगा।
    जल सुरक्षित होगा, तो जीवन सुरक्षित होगा।
    और जीवन सुरक्षित होगा, तो भारत का भविष्य सुरक्षित होगा।

    इसीलिए आपके प्रत्येक निर्णय के केंद्र में एक ही भावना होनी चाहिए-राष्ट्र प्रथम। प्रकृति की रक्षा, जनहित की सेवा और भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देना ही आपकी सेवा का सबसे बड़ा उद्देश्य होना चाहिए।

    एक बार पुनः आदरणीय उपराष्ट्रपति जी के प्रेरणादायी सान्निध्य और बहुमूल्य मार्गदर्शन के लिए मैं हृदय से आपका आभार व्यक्त करता हूँ।

    इन्हीं भावनाओं के साथ अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

    जय हिन्द!