04-07-2026:ईट राइट यूथ हैकाथॉन-उत्तराखण्ड 2026 के सम्मान समारोह कार्यक्रम के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन
जय हिन्द!
देवभूमि उत्तराखण्ड में आयोजित आज का यह समारोह केवल विजेता टीमों के सम्मान का अवसर नहीं है, बल्कि सुरक्षित भोजन-स्वस्थ भारत, जागरूक युवा और विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प का उत्सव है। ‘‘ईट राइट यूथ हैकाथॉन-उत्तराखण्ड 2026’’ के इस गरिमामय सम्मान समारोह में, मैं आप सभी का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ।
यह अत्यन्त प्रसन्नता का विषय है कि उत्तराखण्ड इस अभिनव ‘‘ईट राइट यूथ हैकाथॉन’’ का आयोजन करने वाला देश का प्रथम राज्य बना है। इसके लिए मैं स्वास्थ्य विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग, ळ।प्छ तथा इस आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों को हार्दिक बधाई देता हूँ। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखण्ड नवाचार, जनभागीदारी और स्वस्थ भविष्य के निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
हिमालय, पावन नदियों और प्राकृतिक सौन्दर्य की धरा देवभूमि उत्तराखण्ड भारत की सनातन संस्कृति, योग, आयुर्वेद, तप, त्याग और संतुलित जीवन-दर्शन की पावन भूमि भी है। हमारी संस्कृति ने सदैव भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि जीवन, स्वास्थ्य और साधना का आधार माना है।
हमारी संस्कृति में कहा गया है-‘‘जैसा खाओ अन्न, वैसा होगा मन।’’ इसलिए भारतीय जीवन-दर्शन में भोजन को केवल शरीर का नहीं, बल्कि विचारों, संस्कारों और चरित्र निर्माण का भी आधार माना गया है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते है-
‘‘युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु।
युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा॥’’
अर्थात् जो व्यक्ति संतुलित आहार, संतुलित व्यवहार और संयमित जीवनशैली अपनाता है, वही स्वस्थ, सफल और सुखी जीवन प्राप्त करता है। आज आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी उसी सत्य की पुष्टि कर रहा है, जिसे हमारी ऋषि परम्परा हजारों वर्ष पूर्व स्थापित कर चुकी थी।
प्रिय साथियों,
आज विश्व जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनमें जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ, कुपोषण, असुरक्षित भोजन तथा फास्ट-फूड संस्कृति प्रमुख हैं। ऐसे समय में ‘‘ईट राइट’’ केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आवश्यकता है, क्योंकि स्वस्थ नागरिक ही किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं और स्वस्थ समाज ही विकसित राष्ट्र का आधार बनता है।
यह जानकर प्रसन्नता हुई कि राज्यभर के विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों, तकनीकी संस्थानों, नर्सिंग कॉलेजों, आईआईएम तथा अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों की 387 युवा टीमों ने खाद्य सुरक्षा, पोषण तथा स्वस्थ भोजन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अपने नवाचारी विचार प्रस्तुत किए। विशेष रूप से यह तथ्य अत्यन्त प्रेरणादायक है कि 74 प्रतिशत प्रतिभागी हमारी बेटियाँ हैं। यह उत्तराखण्ड की नारी शक्ति की प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता और नवाचार की भावना का सशक्त प्रमाण है।
मेरे युवा साथियों,
भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाला देश है और यही युवाशक्ति विकसित भारत-2047 की सबसे बड़ी पूंजी है। हमारे युवा केवल भविष्य के नागरिक नहीं हैं, बल्कि वर्तमान के परिवर्तनकारी नेतृत्वकर्ता भी हैं। नवाचार केवल नई तकनीक विकसित करना नहीं है, बल्कि समाज की चुनौतियों का व्यवहारिक और स्थायी समाधान प्रस्तुत करना है। आपने खाद्य सुरक्षा जैसे अत्यन्त महत्वपूर्ण विषय पर जिस गंभीरता, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक संवेदनशीलता के साथ कार्य किया है, वह अत्यन्त सराहनीय है।
मैं प्रतियोगिता में सम्मिलित सभी टीमों को विजेता मानता हूँ। पुरस्कार केवल छह टीमों को प्राप्त हुए हैं, किन्तु समाज के हित में सकारात्मक चिंतन करने वाला प्रत्येक युवा राष्ट्र निर्माण का सहभागी होता है। आज जिन छह टीमों को सम्मानित किया गया है, मैं उन्हें विशेष बधाई देता हूँ।
मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आपके ये विचार केवल प्रतियोगिता तक सीमित न रहें, बल्कि अनुसंधान, स्टार्टअप, उद्योग, शासन और समाज के सहयोग से व्यवहारिक स्वरूप प्राप्त करें। यदि आपके किसी एक नवाचार से भी किसी परिवार का भोजन सुरक्षित होता है, किसी बच्चे का पोषण बेहतर होता है अथवा समाज स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित होता है, तो वही इस हैकाथॉन की सबसे बड़ी सफलता होगी।
प्रिय साथियों,
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी स्वस्थ भारत को विकसित भारत की आधारशिला मानते हैं। उन्होंने श्च्तमअमदजपअम भ्मंसजीबंतमश् अर्थात् रोग होने से पहले स्वास्थ्य संरक्षण की संस्कृति को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया है। उनका स्पष्ट संदेश है कि रोग होने के बाद उपचार से अधिक महत्वपूर्ण है- रोग होने से पहले बचाव। यह हमारी प्राचीन भारतीय जीवन-पद्धति का भी मूल दर्शन रहा है।
उनके नेतृत्व में ‘‘ईट राइट इंडिया’’, ‘‘फिट इंडिया मूवमेंट’’, ‘‘पोषण अभियान’’, ‘‘आयुष्मान भारत’’, ‘‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’’, ‘‘राष्ट्रीय पोषण माह’’ तथा श्री अन्न (मिलेट्स) को वैश्विक पहचान दिलाने जैसे अनेक ऐतिहासिक प्रयास किए गए हैं।
उत्तराखण्ड ‘श्रीअन्न’ की दृष्टि से अत्यन्त समृद्ध है। हमारे पारम्परिक खाद्यान्न-मंडुवा, झंगोरा, चैलाई, गहत, भट्ट, राजमा आदि आज विश्वभर में ‘सुपरफूड’ के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। यह हमारे पूर्वजों की दूरदर्शिता, प्रकृति के प्रति सम्मान और संतुलित जीवनशैली का प्रमाण है। हमें अपने इस गौरवशाली खाद्य वैभव पर गर्व होना चाहिए तथा नई पीढ़ी को भी इससे जोड़ना चाहिए।
यह हैकाथॉन शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के उत्कृष्ट समन्वय का प्रेरक उदाहरण है। मैं विश्वविद्यालयों से आग्रह करता हूँ कि वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप खाद्य सुरक्षा, पोषण, जैविक कृषि, स्थानीय उत्पादों तथा पारम्परिक खाद्य प्रणालियों पर अनुसंधान को और अधिक प्रोत्साहित करें। मुझे विश्वास है कि उत्तराखण्ड इस क्षेत्र में पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
मीडिया के सम्मानित साथियों से भी मेरा आग्रह है कि वे ‘‘ईट राइट’’ के संदेश तथा आज युवाओं द्वारा प्रस्तुत नवाचारी विचारों को जन-जन तक पहुँचाएँ। जागरूकता ही व्यवहार परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है।
प्रिय साथियों,
आज जब हम विकसित भारत-2047 की यात्रा में आगे बढ़ रहे हैं, तब हमें स्मरण रखना होगा कि विकसित राष्ट्र केवल आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल तकनीक या आर्थिक समृद्धि से नहीं बनते, वे स्वस्थ, अनुशासित, जागरूक, संस्कारित और उत्तरदायी नागरिकों से निर्मित होते हैं।
आइए! हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि स्वस्थ भोजन को अपनी आदत, सुरक्षित भोजन को अपनी संस्कृति, स्थानीय पौष्टिक आहार को अपनी पहचान तथा नियमित योग और संतुलित जीवनशैली को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएँगे। यही स्वस्थ उत्तराखण्ड, समर्थ भारत और विकसित भारत-2047 की सुदृढ़ आधारशिला बनेगा।
मैं पुनः सभी प्रतिभागियों, विजेता टीमों, आयोजकों, निर्णायक मंडल तथा सहयोगी संस्थाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ। अंत में, मैं अपनी बात ऋग्वेद की इस मंगलकामना के साथ समाप्त करना चाहूँगा-
‘‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः।’’
अर्थात्-हमारे पास विश्व के सभी श्रेष्ठ, कल्याणकारी और प्रेरणादायक विचार आते रहें।
इसी भावना के साथ हम सब मिलकर ‘‘सही भोजन -सशक्त युवा, स्वस्थ उत्तराखण्ड-विकसित भारत’’ का संकल्प लें। आप सभी के स्वस्थ, सुखी एवं मंगलमय जीवन की कामना करते हुए मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
जय उत्तराखण्ड! जय भारत! जय हिन्द!