20-06-2026:‘‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’’ अभियान के अंतर्गत पश्चिम बंगाल राज्य स्थापना दिवस पर माननीय राज्यपाल का संबोधन
जय हिन्द!
आज का यह पावन अवसर भारत की उस सनातन सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है, जिसने कश्मीर से कन्याकुमारी और अटक से कटक तक फैली असंख्य विविधताओं को एकात्मता के पवित्र सूत्र में पिरोया है।
यह अवसर हमें स्मरण कराता है कि विभिन्नताओं के बावजूद हमारी सांस्कृतिक आत्मा, हमारी राष्ट्रीय चेतना और हमारी साझा विरासत एक ही है। यही भारत की सबसे बड़ी शक्ति और उसकी अमर पहचान है।
पश्चिम बंगाल राज्य स्थापना दिवस के इस गौरवपूर्ण अवसर पर मैं यहाँ उपस्थित सभी महानुभावों तथा पश्चिम बंगाल के सभी भाइयों एवं बहनों को अपनी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई देता हूँ।
भारत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ विविधता विभाजन का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता का आधार बनती है। हमारी भाषाएँ, वेशभूषाएँ और जीवन-पद्धतियाँ भिन्न हो सकती हैं, किन्तु हमारी आत्मा, हमारा संस्कार और हमारा सर्वाेच्च धर्म एक ही है- ‘राष्ट्र प्रथम।’
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की प्रेरणा से प्रारम्भ हुआ ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान इसी राष्ट्रीय भावना का सशक्त प्रतीक है। लोक भवन आज केवल प्रशासनिक संस्थान नहीं रह गए हैं, बल्कि सांस्कृतिक संवाद, भावनात्मक, एकात्मता और राष्ट्रीय समरसता के जीवंत केन्द्र बन चुके हैं। विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवसों का सामूहिक आयोजन इस विश्वास को और सुदृढ़ करता है कि भारत का प्रत्येक राज्य सम्पूर्ण राष्ट्र की साझा धरोहर है।
यह अभियान लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के अखण्ड भारत के स्वप्न को सांस्कृतिक और भावनात्मक धरातल पर साकार करने का प्रेरणादायी प्रयास है। जब हम एक-दूसरे के इतिहास, संस्कृति और परम्पराओं को समझते और सम्मान देते हैं, तभी राष्ट्रीय एकता की भावना और अधिक सुदृढ़ होती है।
पश्चिम बंगाल ऐसी पुण्यभूमि है जिसने आधुनिक भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक नवजागरण का नेतृत्व किया। यह केवल एक राज्य नहीं, बल्कि भारतीय चेतना का एक विराट अध्याय है।
राजा राममोहन राय ने सामाजिक सुधार की मशाल प्रज्वलित की, ईश्वरचन्द्र विद्यासागर ने शिक्षा और नारी उत्थान का मार्ग प्रशस्त किया तथा महर्षि देवेन्द्रनाथ ठाकुर और स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने भारतीय अध्यात्म को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं।
इसी आध्यात्मिक परम्परा को विश्वपटल पर प्रतिष्ठित करने वाले स्वामी विवेकानन्द ने हिमालय की गोद में स्थित उत्तराखण्ड के मायावती आश्रम में साधना कर यह सिद्ध किया कि बंगाल की वैचारिक चेतना और उत्तराखण्ड की आध्यात्मिक ऊर्जा एक-दूसरे की पूरक हैं।
गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने साहित्य और दर्शन के माध्यम से विश्व को भारत की सांस्कृतिक आत्मा से परिचित कराया। उत्तराखण्ड के रमणीय रामगढ़ में उनकी रचनात्मक साधना दोनों राज्यों के गहरे सांस्कृतिक संबंधों की अमूल्य धरोहर है।
विज्ञान के क्षेत्र में आचार्य जगदीश चन्द्र बोस और सत्येन्द्रनाथ बोस ने भारतीय प्रतिभा को वैश्विक प्रतिष्ठा प्रदान की, जबकि सत्यजीत रे ने भारतीय सिनेमा को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास बंगाल के योगदान के बिना अधूरा है। ‘वन्दे मातरम’ ने सम्पूर्ण राष्ट्र में स्वतंत्रता का चेतन मंत्र फूँका और ‘जन-गण-मन’ ने भारत की राष्ट्रीय आत्मा को स्वर दिया। नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने आजाद हिन्द फौज के माध्यम से यह सिद्ध किया कि राष्ट्र के लिए अटूट संकल्प और साहस असम्भव को भी सम्भव बना सकता है। उनका जीवन आज भी प्रत्येक भारतीय के लिए राष्ट्रभक्ति और त्याग की सर्वाेच्च प्रेरणा है।
दोनों राज्यों के संबंध आज भी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और मानवीय स्तर पर निरंतर प्रगाढ़ होते जा रहे हैं। प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु पश्चिम बंगाल से बाबा केदार, बदरीविशाल, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के लिए उत्तराखण्ड आते हैं। उत्तराखण्ड की ‘अतिथि देवो भवः’ की परम्परा और बंगाल की आत्मीय संस्कृति मिलकर राष्ट्रीय एकता का सजीव उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
विश्वविख्यात दुर्गा पूजा और उत्तराखण्ड की नन्दा राजजात यात्रा तथा महाकुम्भ जैसी परम्पराएँ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकात्मता के विराट उत्सव हैं। वे हमें यह अनुभव कराती हैं कि भारत की आत्मा सम्पूर्ण राष्ट्र में समान रूप से स्पंदित होती है।
आर्थिक, सांस्कृतिक और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भी दोनों राज्य एक-दूसरे के पूरक हैं। पश्चिम बंगाल की समृद्ध हथकरघा परम्परा, हस्तशिल्प और उत्कृष्ट वस्त्रकला तथा उत्तराखण्ड के जैविक उत्पाद, औषधीय वनस्पतियाँ और प्राकृतिक संपदा मिलकर आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
मैं विशेष रूप से दोनों राज्यों की युवा शक्ति का आह्वान करता हूँ कि वे शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्रों में मिलकर कार्य करें। जब बंगाल की मेधा और उत्तराखण्ड की कर्मनिष्ठा का संगम होगा, तब विकसित भारत के निर्माण की गति और अधिक तीव्र होगी।
आज विश्व भारत की ओर आशा और विश्वास के साथ देख रहा है। यह समय क्षेत्रीय सीमाओं में बँटने का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शक्ति के रूप में संगठित होकर आगे बढ़ने का है। हमें सदैव स्मरण रखना चाहिए कि राज्यों की सीमाएँ प्रशासनिक व्यवस्था के लिए होती हैं, हृदयों को विभाजित करने के लिए नहीं।
हमारी प्रथम पहचान किसी राज्य, भाषा या क्षेत्र से नहीं, बल्कि भारत माता के गौरवशाली नागरिक के रूप में है, और यही भावना ‘‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’’ की वास्तविक आत्मा है।
आइए! हम सब मिलकर ऐसा भारत निर्मित करें, जहाँ विविधता हमारी शक्ति, एकता हमारी पहचान और राष्ट्र सर्वाेपरि हमारी जीवनशैली बने।
इसी विश्वास और इसी संकल्प के साथ मैं एक बार पुनः पश्चिम बंगाल के सभी नागरिकों को स्थापना दिवस की हृदय से शुभकामनाएँ देते हुए अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
वन्दे मातरम!
जय माँ भारती!
जय हिन्द!