07-06-2026 : मुनस्यारी में आयोजित आईटीबीपी सैनिक सम्मेलन के अवसर पर माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड का उद्बोधन।
जय हिन्द!
आज देवभूमि उत्तराखण्ड के सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी की इस पावन धरती पर आप सभी वीर जवानों के मध्य उपस्थित होकर मैं स्वयं को अत्यंत गौरवान्वित अनुभव कर रहा हूँ।
यह देवभूमि केवल अध्यात्म की भूमि नहीं, बल्कि शौर्य, तप, त्याग और राष्ट्रभक्ति की अनादि धारा है। हिमालय की अडिग चोटियाँ हमें अटल संकल्प का संदेश देती हैं, वहीं इस पावन भूमि ने ऐसे असंख्य वीर सपूतों को जन्म दिया है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर इतिहास में अमिट स्वर्णिम अध्याय लिखे हैं।
उत्तराखण्ड का प्रत्येक गाँव वीरता की गाथाएँ सुनाता है और प्रत्येक परिवार देशभक्ति एवं बलिदान की गौरवशाली परंपरा से जुड़ा हुआ है। इसी महान विरासत को आगे बढ़ाने में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी है।
मेरे वीर साथियों,
एक सैनिक के रूप में मैंने भी सीमाओं की चुनौतियों को निकट से देखा है, कठिन परिस्थितियों का सामना किया है और यह अनुभव किया है कि सैनिक का जीवन केवल एक पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सम्पूर्ण समर्पण का व्रत होता है।
हमारे सैनिकों का जीवन हमें यह संदेश देता है कि व्यक्ति से बड़ा संगठन, संगठन से बड़ा राष्ट्र और राष्ट्र से बढ़कर कुछ भी नहीं होता। यही भावना भारतीय सैनिक की सबसे बड़ी शक्ति है।
जब कोई जवान सीमा पर खड़ा होता है, तब उसके सामने न मौसम की कठोरता मायने रखती है, न दुर्गम भूभाग और न ही व्यक्तिगत सुख-सुविधाएँ। उसके मन में केवल एक ही संकल्प होता है-मेरा राष्ट्र सुरक्षित रहे, मेरी मातृभूमि का सम्मान अक्षुण्ण रहे और तिरंगा सदैव शान से लहराता रहे।
मैं इस सम्मेलन के माध्यम से आप सभी हिमवीरों को नमन करता हूँ। देश के करोड़ों नागरिक निश्चिंत होकर अपने सपनों को इसलिए साकार कर पाते हैं, क्योंकि हमारे सैनिक सीमाओं पर सजग प्रहरी बनकर अटल खड़े रहते हैं।
मेरे जांबाज हिमवीरों,
राष्ट्र की सीमाओं की सुरक्षा केवल भौगोलिक सीमाओं की रक्षा नहीं है, बल्कि देश के विकास, समृद्धि और भविष्य की सुरक्षा भी है। जब सीमाएँ सुरक्षित होती हैं, तब विद्यालयों में ज्ञान का दीप प्रज्ज्वलित होता है, उद्योगों में उत्पादन बढ़ता है, किसान निश्चिंत होकर खेतों में श्रम करता है और वैज्ञानिक नवाचार में जुटते हैं। इसलिए विकसित भारत के भव्य निर्माण की आधारशिला हमारे सैनिकों का त्याग, पराक्रम और सतत जागरूकता है।
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल ने सदैव अपने कर्तव्यों का निर्वहन असाधारण साहस, अनुशासन और समर्पण के साथ किया है। सीमा सुरक्षा हो, प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य, पर्वतीय बचाव अभियान अथवा स्थानीय नागरिकों की सहायता, इस बल ने हर परिस्थिति में अपनी उत्कृष्ट क्षमता का परिचय दिया है।
मुझे अत्यंत प्रसन्नता है कि 14वीं वाहिनी ने सीमा सुरक्षा के साथ-साथ साहसिक रेस्क्यू अभियानों, उत्कृष्ट लॉन्ग रेंज पेट्रोलिंग, हिमाद्री अभियान के सफल नेतृत्व तथा ‘वाइब्रेंट विलेज’ जैसी पहलों के माध्यम से राष्ट्र सेवा और राष्ट्र निर्माण का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
यह वाहिनी केवल सीमा की प्रहरी नहीं, बल्कि साहस, अनुशासन और राष्ट्र समर्पण का सजीव प्रतीक बनकर देश का गौरव बढ़ा रही है। मैं इसके प्रत्येक अधिकारी एवं जवान को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए हृदय से बधाई देता हूँ।
साथियों,
आज का नया भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ विश्व मंच पर आगे बढ़ रहा है। विश्व भारत की ओर आशा, विश्वास और सम्मान की दृष्टि से देख रहा है। इसके पीछे हमारे वैज्ञानिकों, किसानों, युवाओं, उद्यमियों और कर्मयोगियों के साथ-साथ हमारी सशक्त सेनाओं का भी अमूल्य योगदान है।
वर्तमान समय में भारतीय सेनाएँ विश्व की सबसे सक्षम, अनुशासित और पेशेवर सेनाओं में गिनी जाती हैं। हमारा प्रशिक्षण, मनोबल, युद्धक क्षमता और राष्ट्रभक्ति हमें विशिष्ट बनाते हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की सुरक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को अभूतपूर्व गति मिली है। आधुनिक हथियार प्रणालियाँ, उन्नत निगरानी तंत्र, अत्याधुनिक तकनीक, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और डिजिटल युद्ध क्षमता भारत की सैन्य शक्ति को निरंतर नई ऊँचाइयों तक पहुँचा रही हैं।
आज भारत केवल रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ रक्षा निर्यातक राष्ट्र भी बन रहा है। यह आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का सशक्त प्रमाण है।
प्रिय वीर जवानों,
आधुनिक युग में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़े जाते। साइबर सुरक्षा, सूचना सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन तकनीक और उभरती प्रौद्योगिकियाँ भी राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। भविष्य का युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीक, सूचना और नवाचार की श्रेष्ठता से भी जीता जाएगा। मुझे पूर्ण विश्वास है कि भारतीय सेनाएँ और अर्द्धसैनिक बल इन सभी चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने में पूर्णतः सक्षम हैं।
मैं सैनिक परिवारों को भी विशेष रूप से नमन करता हूँ। जब एक जवान सीमा पर तैनात होता है, तब उसका परिवार भी उसी राष्ट्रधर्म का सहभागी बन जाता है। माता-पिता का धैर्य, पत्नी का त्याग और बच्चों का संयम राष्ट्र रक्षा के इस महान यज्ञ में समान रूप से महत्वपूर्ण है। वास्तव में, सैनिक की शक्ति उसके परिवार के त्याग और विश्वास से ही और अधिक सुदृढ़ होती है।
मेरे युवा वीर साथियों,
आप केवल सीमा के प्रहरी नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रेरणास्रोत भी हैं। आपका अनुशासन, साहस, चरित्र और राष्ट्रभक्ति युवाओं के लिए जीवन का सर्वाेत्तम आदर्श है।
आज देश विकसित भारत-2047 के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इस महान यात्रा में आपकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सुरक्षित सीमाएँ, सशक्त सेनाएँ और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा ही विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने का मार्ग प्रशस्त करेंगी।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आईटीबीपी के सभी अधिकारी और जवान अपने अदम्य साहस, उत्कृष्ट पेशेवर क्षमता और अटूट राष्ट्रभक्ति के बल पर भारत माता की सेवा का यह गौरवशाली अध्याय निरंतर आगे बढ़ाते रहेंगे।
अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा कि सैनिक का जीवन केवल एक कर्तव्य नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सर्वाेच्च साधना है। आपकी वर्दी केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास, सम्मान और सुरक्षा का जीवंत प्रतीक है।
जब तक हिमालय अडिग खड़ा है और हमारे वीर जवान उसकी चोटियों पर सजग प्रहरी बनकर तैनात हैं, तब तक भारत की संप्रभुता, सम्मान और अखंडता को कोई चुनौती नहीं दे सकता।
मैं इस अवसर पर भारत माता के उन ज्ञात-अज्ञात अमर वीरों को शत-शत नमन करता हूँ, जिन्होंने अपने प्राणों का सर्वाेच्च बलिदान देकर इस राष्ट्र की आन, बान और शान को अक्षुण्ण रखा है।
आइए, हम सब राष्ट्रहित को सर्वाेपरि मानते हुए एक सुरक्षित, समर्थ, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प दोहराएँ।
इसी संकल्प और विश्वास के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
वन्दे मातरम्! भारत माता की जय! जय हिन्द!