03-06-2026 : स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ संवाद कार्यक्रम में माननीय राज्यपाल महोदय का संबोधन
जय हिन्द!
हिमालय की ऊँची चोटियाँ यदि उत्तराखण्ड का मस्तक है, तो यहाँ की मातृशक्ति उसकी आत्मा है। सदियों से हमारे पर्वतों की कठिन चुनौतियों के बीच, उत्तराखण्ड की महिलाओं ने अपने श्रम से विकास की राह बनाई है, अपने त्याग से परिवारों को संबल दिया है और अपने संकल्प से समाज को नई दिशा प्रदान की है।
देवभूमि की यह मातृशक्ति केवल घर-परिवार की संरक्षक नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की संवाहक, प्रकृति की प्रहरी और सामाजिक परिवर्तन की अग्रदूत रही है। आज आप सभी के मध्य उपस्थित होकर मुझे गर्व, आत्मीयता और प्रेरणा की अनुभूति हो रही है।
मैंने अभी आप सभी की सफलता की कहानियाँ सुनीं। इन कहानियों में केवल आर्थिक उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस, आत्मविश्वास और संकल्प की वह शक्ति दिखाई देती है, जो किसी भी समाज के परिवर्तन का आधार बनती है।
इन उपलब्धियों में मुझे उत्तराखण्ड की उस अटूट जीवनशक्ति का दर्शन हुआ है, जो चुनौतियों को अवसर में बदलने की क्षमता रखती है।
उत्तराखण्ड की महिलाओं का जीवन सदैव चुनौतियों से भरा रहा है। दुर्गम पर्वतीय मार्ग, सीमित संसाधन और अनेक जिम्मेदारियों के बावजूद हमारी माताओं और बहनों ने कभी परिस्थितियों को अपने सपनों के मार्ग में बाधा नहीं बनने दिया।
यदि आज उत्तराखण्ड के गाँव जीवंत हैं, हमारी लोक संस्कृति सुरक्षित है और हमारी परम्पराएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही हैं, तो उसके पीछे हमारी मातृशक्ति का अथक परिश्रम, त्याग और समर्पण है।
हमारी सनातन संस्कृति में नारी को केवल सम्मान का नहीं, बल्कि सृजन, करुणा और शक्ति के मूल स्रोत के रूप में देखा गया है। शास्त्रों में कहा गया है-
‘नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः।
नास्ति मातृसमं त्राणं, नास्ति मातृसमा प्रिया॥’
अर्थात् माता के समान न कोई छाया है, न कोई आश्रय, न कोई रक्षक और न ही कोई प्रिय। यही भाव भारतीय संस्कृति में नारी के सर्वाेच्च स्थान को प्रतिष्ठित करता है।
मेरी बहनों और बेटियों,
देवभूमि उत्तराखण्ड की पावन भूमि ने वीरांगना तीलू रौतेली जैसी अद्वितीय शौर्य, साहस और स्वाभिमान की प्रतिमूर्ति को जन्म दिया है। इस वीरप्रसूता भूमि की मातृशक्ति का इतिहास पराक्रम, त्याग और राष्ट्रसमर्पण की गौरवगाथाओं से अनुप्राणित रहा है। उत्तराखण्ड की महिलाओं ने सदैव यह सिद्ध किया है कि वे केवल परिवार की शक्ति नहीं, बल्कि समाज, राज्य और राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी उनके अदम्य साहस, अटूट संकल्प और कर्मनिष्ठा ने विकास, संस्कृति और सामाजिक चेतना को निरन्तर नई दिशा प्रदान की है।
चाहे उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन की बात हो, पर्यावरण संरक्षण की बात हो, जल स्रोतों के संरक्षण की बात हो अथवा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की- हमारी महिलाओं ने हर क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान दिया है। चिपको आंदोलन इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है, जिसने पूरी दुनिया को प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। यह केवल वृक्षों की रक्षा का आंदोलन नहीं था, बल्कि नारी शक्ति, जनभागीदारी और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व का ऐसा प्रेरक अभियान था, जिसने विश्व को पर्यावरण संरक्षण की नई दिशा दिखाई।
आज स्वयं सहायता समूह इसी परिवर्तन की आधुनिक अभिव्यक्ति बनकर उभरे हैं। नैनीताल जनपद में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 5,305 स्वयं सहायता समूहों से 39 हजार से अधिक महिलाएँ जुड़ी हुई हैं। इनके सहयोग के लिए 513 ग्राम संगठन और 45 क्लस्टर लेवल फेडरेशन कार्य कर रहे हैं। ये आँकड़े केवल संख्या नहीं, बल्कि संगठित महिला शक्ति, सामूहिक नेतृत्व और सामाजिक परिवर्तन की सफलता का प्रमाण हैं।
मुझे प्रसन्नता है कि नैनीताल जनपद में 22 हजार से अधिक लखपति दीदी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। भीमताल के बेकरी ग्रोथ सेंटर, कोटाबाग के एलईडी ग्रोथ सेंटर, रामगढ़ के फूड प्रोसेसिंग सेंटर, रामनगर के ऑर्गेनिक एवं सोविनियर सेंटर तथा बेतालघाट के मसाला ग्रोथ सेंटर जैसे प्रयास ग्रामीण उद्यमिता के उत्कृष्ट उदाहरण बन चुके हैं।
नैनीताल की यह सफलता राज्यव्यापी परिवर्तन की एक प्रेरक झलक है। आज उत्तराखण्ड में एक लाख से अधिक लखपति दीदी महिला सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की नई पहचान बन चुकी हैं। वहीं ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ने स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाकर पहाड़ की आजीविका को नई पहचान और नई ऊर्जा प्रदान की है।
यह पहल केवल उत्पादों के विपणन का मंच नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की पहचान, परंपरा और मातृशक्ति के सामर्थ्य को विश्व पटल पर स्थापित करने का सशक्त माध्यम है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने महिला-नेतृत्व आधारित विकास की जो परिकल्पना प्रस्तुत की है, उसकी सजीव झलक आज उत्तराखण्ड के गाँवों में दिखाई दे रही है। आज महिलाएँ विकास की केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की दिशा निर्धारित करने वाली शक्ति बन रही हैं। यही विकसित भारत की वास्तविक शक्ति है।
प्रिय बहनों,
एक सैनिक होने के नाते मैं भली-भाँति जानता हूँ कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल उसकी सीमाओं की सुरक्षा में नहीं, बल्कि उसके समाज की आंतरिक सामर्थ्य में निहित होती है। और उस सामर्थ्य का सबसे सशक्त स्वरूप हमारी मातृशक्ति है।
मुझे विशेष प्रसन्नता है कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित रूरल आउटलेट, मोबाइल आउटलेट, हिलांस किचन और इन्दिरा अम्मा केन्द्र स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के अंतर्गत महिलाओं द्वारा किया गया उल्लेखनीय व्यापार उनकी उद्यमशीलता, संगठन क्षमता और आत्मविश्वास का सशक्त प्रमाण है।
साथ ही, पिरुल संग्रहण जैसे प्रयासों के माध्यम से हमारी बहनों ने आजीविका और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया है। यह दर्शाता है कि उत्तराखण्ड की मातृशक्ति आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण की जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से निभा रही है। यह उत्तराखण्ड मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणा का विषय है।
मेरी कर्मशील बहनों,
विकसित भारत 2047 का संकल्प तभी साकार होगा जब महिलाओं की प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता और उद्यमशीलता को निरंतर प्रोत्साहन मिलेगा। मुझे पूर्ण विश्वास है कि उत्तराखण्ड की मातृशक्ति इस राष्ट्रीय अभियान की अग्रिम पंक्ति में खड़ी दिखाई देगी और अपने परिश्रम, नवाचार तथा संकल्प से विकास की नई ऊँचाइयाँ स्थापित करेगी।
आइए! हम सब मिलकर ऐसा उत्तराखण्ड बनाएं जहाँ प्रत्येक महिला आत्मनिर्भर हो, प्रत्येक बेटी अवसरों से परिपूर्ण हो, प्रत्येक परिवार समृद्ध हो और प्रत्येक गाँव विकास का केन्द्र बने।
याद रखिए! किसी भी राष्ट्र की प्रगति का सबसे विश्वसनीय मापदण्ड उसकी महिलाओं की स्थिति और उनकी भागीदारी होती है।
जब उत्तराखण्ड की मातृशक्ति सशक्त होगी, तब उत्तराखण्ड समृद्ध होगा और जब उत्तराखण्ड समृद्ध होगा, तब विकसित भारत के संकल्प को नई गति मिलेगी।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि उत्तराखण्ड की मातृशक्ति के परिश्रम, संकल्प और नेतृत्व से विकसित उत्तराखण्ड तथा विकसित भारत का स्वप्न अवश्य साकार होगा।
आप सभी उत्तरोत्तर प्रगति करते हुए देश और प्रदेश की प्रगति में अपना अमूल्य योगदान देते रहें, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
जय हिन्द!
जय उत्तराखण्ड!
जय भारत!