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    25-05-2026:“एक शाम सैनिकों के नाम” समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का संबोधन

    प्रकाशित तिथि : मई 25, 2026

    जय हिन्द!

    सेना, नौसेना एवं वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारीगण, अर्द्धसैनिक बलों एवं पुलिस प्रशासन के अधिकारीगण, वीरता पदकों से अलंकृत हमारे गौरवशाली सैनिकगण, पूर्व सैनिक, वीर नारियाँ तथा सैनिक परिवारों के सम्मानित सदस्यगण!

    लोक भवन, नैनीताल की इस ऐतिहासिक, गरिमामयी और गौरवपूर्ण संध्या में, मैं आप सभी का हृदय की गहराइयों से हार्दिक स्वागत और अभिनंदन करता हूँ।

    साथियों, आज की यह संध्या केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि उन राष्ट्ररक्षकों के अदम्य साहस, अद्वितीय त्याग, अनुशासन और मातृभूमि के प्रति उनके समर्पण को नमन करने का पावन अवसर है, जिन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण भारत माता की रक्षा और तिरंगे की आन-बान-शान के लिए समर्पित कर दिया।

    आज इस मंच पर राज्यपाल के रूप में नहीं, बल्कि एक सैनिक के रूप में अपने सैनिक परिवार के मध्य उपस्थित होकर मेरा अंतर्मन विशेष भावनाओं से भर उठा है। वर्दी भले ही जीवन का एक अध्याय हो, लेकिन “राष्ट्र सर्वाेपरि” का संस्कार कभी समाप्त नहीं होता।

    सैनिक जीवन व्यक्ति को केवल युद्धभूमि का योद्धा नहीं बनाता, बल्कि उसे अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और देशधर्म के प्रति आजीवन समर्पित व्यक्तित्व में परिवर्तित करता है।

    एक सैनिक और कमांडर के रूप में सीमाओं पर बिताए अनेक क्षण आज भी मेरी स्मृतियों में जीवंत हैं। दुर्गम पर्वतों, बर्फीली चौकियों और विषम परिस्थितियों में हमारे जवान जिस अद्भुत साहस, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा के साथ देश की सुरक्षा में डटे रहते हैं, वह सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है। पूरा देश आपके त्याग, समर्पण और अदम्य शौर्य को श्रद्धापूर्वक नमन करता है।

    आज लोक भवन की इन वादियों में आप सबकी उपस्थिति ने इस परिसर को सैनिक परिवार के आत्मीय मिलन में परिवर्तित कर दिया है। आज राष्ट्ररक्षक सैनिकों की उपस्थिति से यह लोक भवन गौरव, सम्मान और राष्ट्रभक्ति की ऊर्जा से आलोकित हो उठा है। जब तक सीमाओं पर हमारे जवान सजग प्रहरी बनकर खड़े हैं, तब तक देश की एकता, अखंडता और लोकतंत्र सुरक्षित है।

    देवभूमि उत्तराखण्ड सदैव से वीरता, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति की पवित्र भूमि रही है। चाहे कुमाऊँ रेजीमेंट हो या गढ़वाल राइफल्स, उत्तराखण्ड के वीर सपूतों ने सीमाओं पर अपने साहस और बलिदान से भारत माता का मस्तक सदैव ऊँचा किया है। यहाँ की गौरवगाथाएँ आने वाली पीढ़ियों को निरंतर मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करती रहेंगी।

    आज मैं विशेष रूप से हमारी वीर नारियों और सैनिक परिवारों को नमन करना चाहता हूँ। जब एक सैनिक सीमा पर डटा होता है, तब उसके पीछे खड़ा उसका परिवार भी उतनी ही दृढ़ता, धैर्य और साहस के साथ देशसेवा में सहभागी होता है। सैनिकों का त्याग यदि सीमाओं पर दिखाई देता है, तो सैनिक परिवारों का मौन समर्पण राष्ट्र की आंतरिक शक्ति को सुदृढ़ बनाता है। राष्ट्र आप सभी का सदैव ऋणी रहेगा।

    “एक शाम सैनिकों के नाम” कार्यक्रम आज एक सशक्त परंपरा और राष्ट्रभाव के जीवंत उत्सव के रूप में स्थापित हो चुका है। उत्तराखण्ड सैनिक पुनर्वास संस्था द्वारा आयोजित यह चतुर्थ आयोजन उन सैनिकों और पूर्व सैनिकों के प्रति सम्पूर्ण समाज की सामूहिक कृतज्ञता का भावपूर्ण अभिनंदन है, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा, सम्मान और अखंडता हेतु अपना सर्वस्व समर्पित किया है।

    आज का यह अवसर विशेष रूप से उन गौरवशाली सैनिकों के सम्मान का पावन क्षण है, जिन्हें भारत सरकार द्वारा वीरता पदकों से अलंकृत किया गया है। उनकी साहसगाथाएँ केवल सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए देशभक्ति, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा की अमिट प्रेरणा हैं।

    यह अत्यन्त गर्व का विषय है कि हमारे पूर्व सैनिक सेवानिवृत्ति के पश्चात भी शिक्षा, समाज सेवा, ग्रामीण विकास और राष्ट्र निर्माण के विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर समाज को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।

    उत्तराखण्ड सैनिक पुनर्वास संस्था के अध्यक्ष के रूप में मैं अपने पूर्व सैनिक भाइयों से कहना चाहता हूँ- आप कभी “पूर्व” नहीं होते। आप सदैव राष्ट्रनिर्माण की प्रेरक शक्ति और राष्ट्रचेतना के सशक्त प्रतीक बने रहते हैं।

    सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों का सम्मान और कल्याण केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि सम्पूर्ण समाज की नैतिक जिम्मेदारी भी है। इसी भावना के साथ उत्तराखण्ड सैनिक पुनर्वास संस्था सैनिक परिवारों को सम्मानजनक, आत्मनिर्भर और सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराने हेतु निरंतर सराहनीय कार्य कर रही है।

    मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि सैनिक पुनर्वास संस्था द्वारा संचालित योजनाओं का समय-समय पर पुनरीक्षण एवं उच्चीकरण किया जा रहा है, ताकि सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं वीर नारियों को अधिक प्रभावी सहायता प्रदान की जा सके।

    शहीदों एवं पूर्व सैनिक परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और सहयोग हेतु अनेक संवेदनशील सहायता व्यवस्थाएँ लागू की गई हैं, जो हमारी कृतज्ञता, संवेदनशीलता और राष्ट्रीय दायित्व के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण हैं।

    आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश आज “विकसित भारत /2047” के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इस राष्ट्रीय अभियान में हमारे सैनिकों, पूर्व सैनिकों और सैनिक परिवारों की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

    आज इस प्रेरणादायी अवसर पर मैं प्रदेश के युवाओं से विशेष आह्वान करना चाहता हूँ कि वे हमारे सैनिकों के अनुशासन, साहस, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा को अपने जीवन में आत्मसात करें।

    हमारे जवान केवल सीमाओं के रक्षक नहीं, बल्कि चरित्र, कर्तव्य और देशसेवा के जीवंत आदर्श हैं। यदि युवा पीढ़ी इन मूल्यों को अपनाकर आगे बढ़ेगी, तो विकसित भारत का संकल्प और अधिक सशक्त होगा।

    इस भावपूर्ण संध्या के समापन पर मैं यही कहना चाहूँगा कि “एक शाम सैनिकों के नाम” केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र की ओर से अपने वीरों के प्रति व्यक्त की गई श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता का एक विनम्र प्रयास है।

    हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि अपने सैनिकों के सम्मान, राष्ट्र की एकता और अखंडता को सदैव सर्वाेपरि रखेंगे। जब तक भारत माता के ऐसे वीर सपूत हमारे बीच हैं, तब तक राष्ट्र की अस्मिता सदैव अक्षुण्ण और सुरक्षित रहेगी।

    राष्ट्रसेवा और राष्ट्रीय एकता के इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ें-

    “निश्चय कर अपनी जीत करूँ!”

    वंदे मातरम्! भारत माता की जय! जय हिन्द!