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    23-04-2026 : एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह में माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि : अप्रैल 23, 2026

    जय हिन्द!

    अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ऋषिकेश के इस गौरवपूर्ण छठे दीक्षांत समारोह में उपस्थित भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन जी, उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी, माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल जी, संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राजबहादुर जी, कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह जी, संस्था निकाय एवं शासी निकाय के सम्मानित सदस्य, आदरणीय संकायगण, अभिभावकगण, मीडिया के प्रतिनिधिगण तथा आज उपाधि प्राप्त कर रहे मेरे प्रिय विद्यार्थियों- आप सभी को मेरा सादर अभिवादन!

    सर्वप्रथम मैं इस महत्वपूर्ण अवसर पर उपस्थित माननीय उपराष्ट्रपति महोदय का देवभूमि उत्तराखण्ड में हार्दिक स्वागत करता हूँ। आपका सान्निध्य हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। आपके मार्गदर्शन से निश्चय ही यहाँ उपस्थित युवा चिकित्सकों को राष्ट्रसेवा की नई ऊर्जा और दिशा प्राप्त होगी।

    आज दीक्षांत का यह पावन अवसर आप सभी की साधना, समर्पण और सेवा के भाव का उत्सव है, साथ ही समाज और राष्ट्र के लिए भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण है। यह वह क्षण है, जब वर्षों की कठिन मेहनत एक नई जिम्मेदारी में परिवर्तित होती है। दीक्षांत आपके जीवन की एक नई दिशा, एक नए दायित्व और एक बड़े उद्देश्य की शुरुआत है।

    इस पावन देवभूमि, जहाँ गंगा की अविरल धारा हमें निरंतर प्रवाहमान रहने और हिमालय की अडिगता हमें अपने कर्तव्यों पर अटल रहने की प्रेरणा देती है। मैं आज उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को हृदय से बधाई देता हूँ। यह सफलता केवल आपकी नहीं है, बल्कि आपके माता-पिता के त्याग, आपके गुरुजनों के मार्गदर्शन और राष्ट्र की अपेक्षाओं का परिणाम है।

    उपस्थितजनों,

    यह प्रसन्नता का विषय है कि एम्स ऋषिकेश ने बहुत ही कम समय में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में जो ऊँचाइयाँ प्राप्त की हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। यह संस्थान आज पूरे देश के लिए विश्वास और उत्कृष्टता का केंद्र बन चुका है। जिन रोगियों को पहले बेहतर उपचार के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था, आज उन्हें वही सुविधाएँ अपने ही राज्य में उपलब्ध हो रही हैं, जिससे न केवल समय और संसाधनों की बचत हुई है, बल्कि लोगों के मन में यह विश्वास भी सुदृढ़ हुआ है कि गुणवत्तापूर्ण उपचार अब उनके अपने राज्य में ही उपलब्ध है।

    विशेष रूप से, पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए प्रारंभ की गई निःशुल्क एयर एम्बुलेंस सेवा ने स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति दी है। ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा तक पहुँचाना किसी जीवनदान से कम नहीं है। इसी प्रकार, ड्रोन तकनीक के माध्यम से दवाओं की आपूर्ति यह दर्शाती है कि जब तकनीक को सेवा के भाव से जोड़ा जाता है, तो वह समाज के लिए वरदान बन जाती है।

    आज चिकित्सा का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक अनुसंधान पद्धतियाँ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सटीक और प्रभावी बना रही हैं। एम्स ऋषिकेश का एआई उत्कृष्टता केंद्र इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो हमारे स्वास्थ्य तंत्र को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है।

    मेरे युवा साथियों,

    आप ऐसे पेशे में प्रवेश कर रहे हैं, जहाँ ज्ञान के साथ-साथ संवेदनशीलता की भी उतनी ही आवश्यकता है। जब कोई मरीज आपके पास आता है, तो वह केवल उपचार ही नहीं, बल्कि विश्वास और आशा भी लेकर आता है। आपकी मुस्कान, आपका व्यवहार और आपकी सहानुभूति ही उसे यह भरोसा दिलाती है कि वह सुरक्षित हाथों में है।

    उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच आज भी एक चुनौती है। आप जैसे ऊर्जावान और समर्पित चिकित्सकों से यह अपेक्षा है कि आप इन चुनौतियों को अवसर में परिवर्तित करें। जब आप किसी दूरस्थ गाँव में जाकर सेवा देंगे, तो वहाँ केवल उपचार ही नहीं होगा, बल्कि एक नए विश्वास का दीप भी प्रज्वलित होगा।

    हमारी संस्कृति में स्वास्थ्य का अर्थ केवल शारीरिक स्वस्थता नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक संतुलन भी है। योग और आयुर्वेद जैसी हमारी परंपराएँ आज पूरे विश्व में सम्मान प्राप्त कर रही हैं। यदि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और इन परंपराओं का समन्वय किया जाए, तो हम एक ऐसा समग्र स्वास्थ्य मॉडल विकसित कर सकते हैं, जो न केवल भारत, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए मार्गदर्शक बन सकता है।

    प्रिय विद्यार्थियों,

    आज आप केवल एक पेशेवर के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के सशक्त स्तंभ के रूप में आगे बढ़ रहे हैं। ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्पना है। और इसकी सबसे मजबूत आधारशिला एक स्वस्थ, सक्षम और जागरूक समाज ही है। इस दिशा में आपका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

    मैं आपसे अपेक्षा करता हूँ कि आप अपने जीवन में नैतिकता, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों को सदैव सर्वाेपरि रखें। रोगी का विश्वास आपकी सबसे बड़ी पूंजी है- इसे बनाए रखना आपका कर्तव्य है। यही विश्वास आपकी सबसे बड़ी पहचान बनेगा। कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से कभी समझौता न करें।

    प्रिय विद्यार्थियों! जब आप आज इस परिसर से बाहर कदम रखेंगे, तो आपके हाथ में केवल एक डिग्री नहीं, बल्कि समाज के विश्वास की एक अमूल्य धरोहर होगी। आप जहाँ भी जाएँ, अपने ज्ञान और सेवा-भाव से केवल रोग ही नहीं, बल्कि निराशा को भी दूर करें और आशा का प्रकाश फैलाएँ।

    एक बार पुनः मैं इस आयोजन में माननीय उपराष्ट्रपति महोदय की गरिमामायी उपस्थिति के लिए सम्पूर्ण उत्तराखण्ड की ओर से आभार व्यक्त करता हूँ।

    इस विश्वास के साथ कि आप सभी “राष्ट्र प्रथम” की भावना से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे और विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत तथा विश्व गुरु भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, मैं आप सभी के उज्ज्वल, सफल और सार्थक भविष्य की हृदय से कामना करते हुए अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

    वन्दे मातरम्! भारत माता की जय! जय हिन्द!