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    01-04-2026 : “एक भारत श्रेष्ठ भारत” अभियान के तहत राजस्थान और ओडीसा राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर उक्त दोनों राज्यवासियों को माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि : अप्रैल 1, 2026

    जय हिन्द!

    आज का यह आयोजन भारत की उस आत्मा का उत्सव है, जो विविधताओं के बीच भी एकता का अद्भुत संदेश देती है। मैं इस अवसर पर राजस्थान और ओडिशा के समस्त नागरिकों को हृदय से बधाई देता हूँ और उनके उज्ज्वल, समृद्ध एवं गौरवशाली भविष्य की कामना करता हूँ।

    यह पावन अवसर केवल दो राज्यों के स्थापना दिवस का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उस विराट राष्ट्रीय चेतना का उत्सव है, जिसे हम “एक भारत श्रेष्ठ भारत” के रूप में आत्मसात करते हैं। यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक एकात्मता का जीवंत दर्शन है।

    यह पहल हमें यह अनुभव कराती है कि भारत केवल भौगोलिक सीमाओं में बँधा राष्ट्र नहीं, बल्कि यह विविध संस्कृतियों, भाषाओं, परंपराओं और भावनाओं का एक विशाल परिवार है। जब एक राज्य दूसरे राज्य की संस्कृति को अपनाता है, उसे समझता है, उसका उत्सव मनाता है, तभी सच्चे अर्थों में ‘राष्ट्र’ का निर्माण होता है।

    इस महान विचार को जन-जन तक पहुँचाने का श्रेय माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शी सोच को जाता है। उनके नेतृत्व में आज देश के हर प्रदेश में विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस मनाए जा रहे हैं। यह परंपरा केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह भावनात्मक एकता का सशक्त माध्यम है, जो भारत को ‘साझी विरासत-साझी पहचान’ के सूत्र में बाँधता है।

    जब हम राष्ट्रीय एकता की बात करते हैं, तो हमें उस महापुरुष को नमन करना ही चाहिए, जिनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और दूरदृष्टि ने आधुनिक भारत की नींव रखी। सरदार वल्लभभाई पटेल जी ने 500 से अधिक रियासतों का एकीकरण कर भारत की अखंडता को सुदृढ़ किया। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि यदि संकल्प अडिग हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। आज का यह आयोजन उनके ‘अखंड भारत’ के स्वप्न को साकार करने की दिशा में एक विनम्र प्रयास है।

    आज हम उस वीरभूमि को नमन करते हैं, जिसे हम राजस्थान के नाम से जानते हैं। यह केवल एक राज्य नहीं, बल्कि यह शौर्य, त्याग और स्वाभिमान की अमर गाथा है। महाराणा प्रताप का अदम्य साहस, पन्नाधाय का अनुपम बलिदान, और राजपूताना परंपराओं की गरिमा- ये सब केवल इतिहास की कथाएँ नहीं, बल्कि आज भी हमारे जीवन को दिशा देने वाली प्रेरणाएँ हैं। राजस्थान की रंग-बिरंगी संस्कृति, लोकनृत्य, संगीत, स्थापत्य कला और अतिथि सत्कार की परंपरा पूरे विश्व को आकर्षित करती है।

    इसी प्रकार, ओडीसा आध्यात्मिकता, संस्कृति और परंपरा का अनुपम संगम है। भगवान जगन्नाथ की पावन परंपरा, कोणार्क का सूर्य मंदिर, ओडिसी नृत्य की भाव-भंगिमाएँ और यहाँ की समृद्ध लोकसंस्कृति भारत की सांस्कृतिक विरासत को गौरवान्वित करती हैं। ओडिशा हमें यह संदेश देता है कि अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए भी आधुनिकता के साथ कैसे आगे बढ़ा जा सकता है।

    भारत की सबसे बड़ी विशेषता उसकी “विविधता में एकता” है। यहाँ भाषा बदलती है, वेशभूषा बदलती है, खान-पान बदलता है, परंतु भारत के प्रति समर्पण की भावना नहीं बदलती। यही हमारी शक्ति है, यही हमारी पहचान है। यही वह आधार है, जिस पर भारत की महानता टिकी हुई है।

    आज के वैश्विक परिवेश में राष्ट्रीय एकता का महत्व और भी बढ़ गया है। एकता ही वह शक्ति है, जो किसी भी राष्ट्र को स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि प्रदान करती है। जब हम एकजुट होते हैं, तो हमारी सामूहिक शक्ति असीमित हो जाती है और हम किसी भी चुनौती का सामना दृढ़ता के साथ कर सकते हैं।

    मैं इस अवसर पर विशेष रूप से राजस्थान और ओडिशा के युवाओं से कहना चाहूँगा- आप दोनों राज्यों की युवा शक्ति भारत के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है। आपके भीतर परंपरा का गौरव भी है और आधुनिकता का उत्साह भी। आप डिजिटल युग के वाहक हैं, नवाचार के निर्माता हैं और विकसित भारत के सशक्त आधार हैं।

    मैं आपसे आह्वान करता हूँ कि आप अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए, विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और उद्यमिता के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करें। आप ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाकर, देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएँ। आपका प्रत्येक प्रयास भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम होगा।

    ‘राष्ट्र प्रथम, राष्ट्र सर्वाेपरि’- यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि यह जीवन जीने का एक आदर्श है। जब प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का निर्वहन राष्ट्रहित को सर्वाेपरि मानकर करता है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है। हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राष्ट्र के हित को प्राथमिकता देंगे।

    हमारा देश राज्यों का संघ है, और प्रत्येक राज्य अपनी विशिष्टताओं के साथ भारत के विकास में योगदान देता है। राजस्थान का पर्यटन, ओडिशा का औद्योगिक विकास, उत्तराखण्ड की आध्यात्मिकता- ये सभी मिलकर भारत को समृद्ध बनाते हैं। जब सभी राज्य एक साथ आगे बढ़ते हैं, तभी भारत तीव्र गति से प्रगति करता है।

    आज हम “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। यह लक्ष्य केवल सरकार का नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का लक्ष्य है। जब हर राज्य, हर समाज और हर व्यक्ति इस दिशा में योगदान देगा, तभी यह सपना साकार होगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारा विकास समावेशी, संतुलित और सतत हो।

    देवभूमि उत्तराखण्ड, जो अपनी आध्यात्मिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और वीरता के लिए विश्वविख्यात है, भी इस राष्ट्रीय संकल्प में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। यहाँ की पवित्र भूमि हमें त्याग, सेवा और समर्पण की प्रेरणा देती है।

    अंत में, मैं आप सभी से आह्वान करता हूँ कि “एक भारत श्रेष्ठ भारत” के इस महान संकल्प को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। हम एक-दूसरे की संस्कृतियों का सम्मान करें, उनसे सीखें और मिलकर भारत को एक नई ऊँचाई पर ले जाएँ।

    आइए! हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपनी एकता, अखंडता और समृद्धि को बनाए रखते हुए एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।

    वन्देमातरम! भारत माता की जय! जय हिन्द!