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    11-03-2026 : “भारतीय सैन्य अधिकारी – राष्ट्र निर्माता के रूप में” विषय पर माननीय राज्यपाल महोदय का संबोधन

    प्रकाशित तिथि : मार्च 11, 2026

    “भारतीय सैन्य अधिकारी – राष्ट्र निर्माता के रूप में” विषय पर माननीय राज्यपाल महोदय का संबोधन

    (तिथिः 11 मार्च, 2026)

    जय हिन्द!

    माननीय कमांडेंट, प्रतिष्ठित अधिकारीगण, प्रशिक्षकगण, और मेरे प्रिय जेंटलमैन कैडेट्स,

    भारतीय सैन्य अकादमी की इस पवित्र और गौरवशाली भूमि पर आकर मन स्वाभाविक रूप से भावुक हो उठता है। यह केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं है, बल्कि यह वह भूमि है जहाँ युवा कैडेट केवल युद्ध की कला ही नहीं सीखते, बल्कि वे राष्ट्र सेवा के उस पवित्र संकल्प को आत्मसात करते हैं, जो एक सैनिक को जीवन भर मार्गदर्शन देता है।

    देवभूमि उत्तराखण्ड की इस पावन धरती पर स्थित यह ऐतिहासिक अकादमी दशकों से भारतीय सेना को ऐसे अधिकारी देती रही है जिन्होंने विश्व के अनेक युद्ध क्षेत्रों में साहस, नेतृत्व और बलिदान की अद्वितीय मिसालें प्रस्तुत की हैं। मुझे यह कहते हुए विशेष गर्व का अनुभव होता है कि मैं स्वयं भी एक सैनिक रहा हूँ और आज उत्तराखण्ड के राज्यपाल के रूप में यहाँ आपके बीच उपस्थित हूँ। यह भी एक प्रेरणादायक तथ्य है कि आज देश में पाँच राज्यपाल ऐसे हैं जो भारतीय सशस्त्र सेनाओं से आए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि सैनिक जीवन केवल युद्ध भूमि तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह राष्ट्र निर्माण के अनेक क्षेत्रों में अपनी अमिट छाप छोड़ता है।

    आज मैं आपसे एक ऐसे विषय पर बात करना चाहता हूँ जो केवल रणनीति, प्रशिक्षण या ऑपरेशनल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे कहीं अधिक व्यापक है। इस अवसर पर मैं “भारतीय सैन्य अधिकारी को राष्ट्र निर्माता के रूप में” देखने के विचार पर आपसे चर्चा करना चाहता हूँ।

    सैनिक जीवन का सबसे पहला और सबसे पवित्र मंत्र है- श्छंजपवद थ्पतेजश्। जब भी जीवन में निर्णय का क्षण आए, जब व्यक्तिगत सुविधा और राष्ट्रीय कर्तव्य के बीच चुनाव करना पड़े, तब आपके मन में केवल एक ही आवाज गूंजनी चाहिए – राष्ट्र सर्वाेपरि। आपकी वर्दी केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं है, यह उस विश्वास का प्रतीक है जो 140 करोड़ भारतीयों ने आप पर रखा है। जब देश का नागरिक रात को निश्चिंत होकर सोता है, तो उसके मन में यह विश्वास होता है कि उसकी सीमाओं पर भारतीय सेना के जवान और अधिकारी जाग रहे हैं।

    प्रिय जेंटलमैन कैडेट्स

    आज आप यहाँ प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन यह समझ लीजिए कि शिक्षा यहाँ समाप्त नहीं होती। स्मंतदपदह पे ं बवदजपदनवने चतवबमेेण् सेना में हर दिन एक नई सीख लेकर आता है। जब आप अपनी-अपनी पलटनों में जाएंगे, तब आपको अपने जेसीओ और सैनिकों से भी बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। एक सच्चा लीडर वही होता है जो सीखने में कभी संकोच नहीं करता।

    युद्ध की प्रकृति बदलती रहती है। तकनीक बदलती है, रणनीतियाँ बदलती हैं। इसलिए अपने भीतर हमेशा एक जीवनभर विद्यार्थी बने रहने की भावना बनाए रखिए और नित नया सीखते रहिए।

    साथियों,

    भारतीय इतिहास हमें नेतृत्व के अद्भुत उदाहरण देता है। आपको गुरु गोबिंद सिंह जी, महाराणा प्रताप जी और छत्रपति शिवाजी महाराज जी से प्रेरणा लेनी चाहिए। इन महान विभूतियों में एक अद्भुत समन्वय था कि वे संत भी थे, विद्वान भी थे और महान योद्धा भी थे। संत इसलिए कि उनके भीतर करुणा और नैतिकता थी। विद्वान इसलिए कि उनकी रणनीति और दृष्टि गहरी थी। और योद्धा इसलिए कि वे कठिनतम परिस्थितियों में भी साहस के साथ खड़े रहे। आज के अधिकारी को भी चरित्र की ऊँचाई, ज्ञान की गहराई और साहस की दृढ़ता, यही संतुलन अपने अंदर समाहित करना चाहिए।

    मैं आपसे पूछना चाहता हूँ- एक अधिकारी की सबसे बड़ी पूँजी क्या होती है? न पद, न अधिकार और न सुविधाएँ। उसकी सबसे बड़ी पूँजी होती है उसकी तमचनजंजपवद। आपकी प्रतिष्ठा आपके शब्दों से नहीं, बल्कि आपके कर्मों से बनती है। आपके जवान आपको बहुत ध्यान से देखते हैं। आप कैसे निर्णय लेते हैं, संकट में कैसे खड़े रहते हैं और अपने सैनिकों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। यदि आपके जवानों को यह विश्वास हो जाए कि “हमारा अधिकारी न्यायप्रिय है, साहसी है और हमारे साथ खड़ा रहेगा,” तो समझिए आपने नेतृत्व की पहली परीक्षा पास कर ली। याद रखिए! एक अधिकारी का चरित्र ही उसकी असली पहचान होती है।

    आज के युग में ब्वउउनदपबंजपवद पे जीम ामल। एक अच्छा अधिकारी केवल आदेश देने वाला नहीं होता, बल्कि वह सुनने वाला भी होता है। जवानों के मन को समझना, उनकी समस्याओं को सुनना और उन्हें सही दिशा देना ही वास्तविक नेतृत्व है। स्पष्ट संवाद भ्रम को समाप्त करता है, विश्वास पैदा करता है और टीम को मजबूत बनाता है। आपकी संवाद क्षमता ऐसी होनी चाहिए कि आपकी हर बात आपके जवानों के मन और आत्मा तक पहुँचे।

    एक अधिकारी के लिए अपने क्षेत्र में महारत हासिल करना अत्यंत आवश्यक है। आपको अपने क्षेत्र में इतना दक्ष बनना होगा कि संकट के समय आपका निर्णय स्पष्ट, तेज और प्रभावी हो। निर्णय क्षमता अभ्यास, ज्ञान और अनुभव से आती है। युद्ध के मैदान में कई बार आपके पास सोचने के लिए बहुत कम समय होता है। ऐसे समय में वही अधिकारी सफल होता है जिसने अपने क्षेत्र में पूर्ण दक्षता प्राप्त की हो।

    प्रिय जेंटलमैन कैडेट्स,

    हमेशा याद रखिए! एकता में शक्ति है। आज के युग में युद्ध केवल एक सेवा की लड़ाई नहीं रह गया है। आधुनिक युद्धभूमि में व्दमदमेेए श्रवपदजदमेे और प्दजमहतंजपवद अत्यंत आवश्यक हैं। सैनिक जीवन में एक मूल मूल्य है- सवलंसजल जव जीम वतहंदपेंजपवद। जब आप वर्दी पहनते हैं, तो आपका व्यक्तिगत जीवन भी उस संगठन की प्रतिष्ठा से जुड़ जाता है। आपकी निष्ठा, आपका अनुशासन और आपका आचरण ही उस संस्था की गरिमा को बनाए रखता है।

    आज हमारी सशस्त्र सेनाएँ एक बड़े जतंदेवितउंजपवद के दौर से गुजर रही हैं। युद्ध का स्वरूप बदल रहा है। साइबर स्पेस, स्पेस डोमेन, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक- ये सब युद्ध के नए आयाम बन चुके हैं। इसलिए आपको केवल पारंपरिक युद्ध ही नहीं, बल्कि आधुनिक जमबीदवसवहल कतपअमद ूंतंितम को भी समझना होगा।

    राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति से नहीं बनती। आधुनिक रणनीति में क्प्डम्दृक्पचसवउंबलए प्दवितउंजपवदए डपसपजंतल और म्बवदवउल चारों आयाम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। समय के साथ इसमें तकनीक, ज्ञान और नवाचार जैसे कई नए आयाम भी जुड़ गए हैं। एक सैन्य अधिकारी को इन सभी आयामों को समझते हुए व्यापक दृष्टिकोण विकसित करना होगा।

    21वीं सदी तकनीक की सदी है। भविष्य का युद्ध केवल सीमाओं पर ही नहीं लड़ा जाएगा, बल्कि साइबर स्पेस, स्पेस डोमेन और सूचना के क्षेत्र में भी लड़ा जाएगा। इसलिए आपको स्वयं को निरंतर अपग्रेड करना होगा। नवाचार को अपनाना होगा और नई तकनीकों को समझना होगा।

    भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं है, यह एक महान सभ्यता है जिसकी हजारों वर्षों की ज्ञान परंपरा है। जब आप सीमाओं की रक्षा करते हैं, तब आप केवल भूमि की रक्षा नहीं करते, बल्कि उस सभ्यता की रक्षा करते हैं जिसने दुनिया को योग, अध्यात्म, ज्ञान और मानवता का मार्ग दिखाया है। विकसित और पुनः विश्व गुरु भारत के निर्माण में आपकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    आज भारतीय सशस्त्र सेनाएँ एक नए युग में प्रवेश कर रही हैं जहाँ महिला सशक्तीकरण एक महत्वपूर्ण आयाम बन चुका है। आज इस अकादमी से 13 महिला अधिकारी भी पास आउट हो रही हैं। यह केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह भारत की प्रगति का प्रतीक है। हमारे देश की माननीय राष्ट्रपति महोदया, जो सशस्त्र सेनाओं की सर्वाेच्च कमांडर हैं, इस परिवर्तन का प्रेरक प्रतीक हैं। उन्होंने कहा है कि भारतीय सेना की सबसे बड़ी शक्ति उसका अनुशासन, साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण है। महिलाएँ आज सेना के अनेक क्षेत्रों में उत्कृष्ट नेतृत्व दे रही हैं और यह परिवर्तन भारतीय समाज की प्रगति का संकेत है।

    प्रिय जेंटलमैन कैडेट्स,

    आज हमारे सामने सबसे बड़ी सामरिक चुनौती चीन से है। इसलिए उसके इतिहास, उसकी रणनीति और उसकी भाषा को समझना भी आवश्यक है। इसके साथ ही पाकिस्तान से उत्पन्न आतंकवाद, प्रॉक्सी युद्ध, हाइब्रिड युद्ध और साइबर युद्ध जैसी चुनौतियाँ भी हमारे सामने हैं। एक अधिकारी को इन सभी आयामों को समझते हुए स्वयं को तैयार करना होगा।

    एक अधिकारी के भीतर कुछ आंतरिक गुणों का होना अत्यंत आवश्यक है- ैमस.िजंसाए ैमस.िउवजपअंजपवदए प्ददमत बवदपिकमदबमए च्वेपजपअम ंजजपजनकम और च्ेलबीवसवहपबंस ेजतमदहजी। यही गुण कठिन परिस्थितियों में आपको मानसिक दृढ़ता प्रदान करते हैं और नेतृत्व को स्थिरता देते हैं। अपने जीवन में ीवइइपमे भी विकसित कीजिए। वे आपके व्यक्तित्व को संतुलित बनाती हैं। और सबसे महत्वपूर्ण है कि हमेशा इंसान बने रहिए।

    एक अधिकारी के लिए आत्मविश्वास, आत्मानुशासन और आत्मनियंत्रण अत्यंत आवश्यक हैं। जब एक अधिकारी स्वयं पर नियंत्रण रखता है, तभी वह दूसरों का नेतृत्व करने का नैतिक अधिकार प्राप्त करता है। जिस भी ईश्वर में आपकी आस्था हो, उसमें पूर्ण विश्वास रखिए। आस्था मन को स्थिर करती है और कठिन परिस्थितियों में आपको शक्ति देती है।

    आईएमए का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। यहाँ से निकले अधिकारी विश्व के अनेक युद्ध क्षेत्रों में अपनी वीरता का परिचय दे चुके हैं। मुझे यह कहते हुए गर्व है कि यह महान संस्थान देवभूमि उत्तराखण्ड में स्थित है, एक ऐसी भूमि जिसने भारत को असंख्य वीर सैनिक दिए हैं।

    हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा है- “भारत की सशस्त्र सेनाएँ केवल हमारी सीमाओं की सुरक्षा ही नहीं करतीं, बल्कि वे भारत की शक्ति, साहस और संकल्प का प्रतीक हैं।” हमारा राष्ट्र आज एक बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। माननीय प्रधानमंत्री जी ने जो दृष्टि सामने रखी है कि वर्ष 2047 तक भारत विश्व गुरु के रूप में स्थापित हो इस कार्य में सशस्त्र सेनाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक मजबूत, आत्मविश्वासी और तकनीकी रूप से सक्षम सेना ही उस भारत की रक्षा कर सकती है।

    भारतीय सैन्य अकादमी का आदर्श वाक्य है- “वीरता और विवेक”। वीरता आपको युद्ध भूमि में निर्भीक बनाती है और विवेक आपको सही निर्णय लेने की क्षमता देता है। एक महान अधिकारी वही होता है जिसमें साहस और बुद्धि दोनों का संतुलन हो। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है-
    “शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम्।” अर्थात् शौर्य, धैर्य, दक्षता और युद्ध से न पीछे हटना- ये ही एक सच्चे योद्धा के गुण हैं। यही गुण एक भारतीय सैन्य अधिकारी के व्यक्तित्व की पहचान हैं।

    प्रिय युवा अधिकारियों,

    जब आप इस अकादमी से निकलेंगे, तो आपके कंधों पर सितारे होंगे। लेकिन याद रखिए! ये सितारे केवल पद के प्रतीक नहीं हैं। ये उन करोड़ों भारतीयों की आशा, विश्वास और गौरव के प्रतीक हैं जो आप पर विश्वास करते हैं। इसलिए अपने जीवन का एक मंत्र बना लीजिए- राष्ट्र प्रथम। कर्तव्य सर्वाेपरि।

    हमारे महान गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी की अमर वाणी आज भी प्रत्येक सैनिक को प्रेरणा देती है- “देह सिवा बरु मोहि इहै सुभ करमन ते कबहूँ न टरों।
    न डरों अरि सो जब जाइ लरों निसचौ करि अपनी जीत करों॥”

    अर्थात् ईश्वर से यही प्रार्थना है कि हम सदैव शुभ कर्मों के मार्ग पर चलें और कर्तव्य से कभी पीछे न हटें। यही भावना एक सैनिक के जीवन की आत्मा है।

    यदि आपने यह मंत्र अपने जीवन में उतार लिया, तो आप केवल एक उत्कृष्ट सैन्य अधिकारी ही नहीं बनेंगे, बल्कि इस महान राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास में अपना अमिट योगदान भी देंगे।

    याद रखिए! इतिहास केवल उन लोगों को याद रखता है जिन्होंने अपने जीवन को किसी महान उद्देश्य के लिए समर्पित किया हो। भारतीय सैन्य अधिकारी के रूप में आपको भी वही अवसर प्राप्त हो रहा है।

    अंत में आप सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

    वंदेमातरम! भारत माता की जय! जय हिन्द!