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    23-02-2026 : उत्तराखण्ड राज्य विश्वविद्यालय खेल एवं क्रीड़ा महोत्सव उद्घाटन समारोह में माननीय राज्यपाल महोदय का संबोधन

    प्रकाशित तिथि : फ़रवरी 23, 2026

    जय हिन्द!

    आज इस पावन अवसर पर, उत्तराखण्ड राज्य विश्वविद्यालय खेल एवं क्रीड़ा महोत्सव के उद्घाटन समारोह में देवभूमि उत्तराखण्ड की उज्ज्वल युवा शक्ति के मध्य उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत हर्ष और आत्मगौरव का विषय है। यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवा शक्ति, अनुशासन, संकल्प और राष्ट्रभावना का उत्सव है।

    उत्तराखण्ड को हम देवभूमि कहते हैं- यह आस्था की भूमि है, तप की भूमि है, त्याग और पराक्रम की भूमि है। परंतु आज मैं इसे युवा शक्ति की भूमि के रूप में देख रहा हूँ। हिमालय की ऊँचाइयाँ हमें ऊँचा लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा देती हैं, गंगा-यमुना की धारा हमें निरंतर गतिशील रहने का संदेश देती है। यह महोत्सव उसी ऊर्जा का प्रतीक है।

    हमारी मूल भावना है- “राष्ट्र सर्वाेपरि”। खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त साधन हैं। मैदान में जो अनुशासन, समर्पण और टीम भावना विकसित होती है, वही आगे चलकर राष्ट्र प्रथम की चेतना को सुदृढ़ करती है। जब कोई खिलाड़ी मैदान में उतरता है, तो वह केवल स्वयं का नहीं, बल्कि अपने राज्य और अपने राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है।

    विश्वविद्यालय जीवन केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिक्षा और खेल- दोनों का संतुलित विकास ही संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण का आधार है। जो विद्यार्थी पढ़ाई में उत्कृष्ट है और खेल में सक्रिय है, वही आत्मविश्वासी, संतुलित और नेतृत्व क्षमता से युक्त नागरिक बनता है।

    शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि समग्र विकास करना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने स्पष्ट रूप से खेल और सह-पाठ्य गतिविधियों को मुख्यधारा में स्थान देकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व को विकसित करने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। यह महोत्सव उसी भावना का सशक्त उदाहरण है।

    यह भूमि वीरता की प्रतीक है। कुमाऊँ रेजिमेंट और गढ़वाल राइफल्स जैसी गौरवशाली सैन्य परंपराएँ हमें रणभूमि का साहस और अनुशासन सिखाती हैं। उनकी यही परंपरा हमें खेल भूमि में भी अदम्य जज्बे के साथ संघर्ष करने की प्रेरणा देती है।

    “फिट युवा, सशक्त भारत” का संकल्प तभी साकार होगा जब हमारे विश्वविद्यालय खेलों को प्राथमिकता देंगे। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में फिट इंडिया मूवमेंट और खेलो इंडिया जैसे अभियानों ने देश में जनभागीदारी से खेल संस्कृति को नई दिशा दी है।

    जो युवा खेल के मैदान में पसीना बहाता है, वह जीवन में कभी गलत दिशा की ओर नहीं जाता। आज समाज के समक्ष एक

    बड़ी चुनौती नशे की प्रवृत्ति है। युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम खेल है। खेल ऊर्जा देता है, आत्मविश्वास देता है और जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाता है। मैं अपेक्षा करता हूँ कि यह महोत्सव युवाओं को नशामुक्त, स्वस्थ और अनुशासित जीवन की प्रेरणा देगा।

    उत्तराखण्ड का भौगोलिक स्वरूप चुनौतीपूर्ण है। पहाड़ की कठिन परिस्थितियाँ यहाँ के युवाओं को स्वाभाविक रूप से साहसी, सहनशील और संघर्षशील बनाती हैं। यदि इस प्राकृतिक सामर्थ्य को वैज्ञानिक प्रशिक्षण और उचित अवसरों से जोड़ा जाए, तो हमारे खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।

    आज हमारे बीच बड़ी संख्या में महिला खिलाड़ी भी भाग ले रही हैं। यह अत्यंत हर्ष का विषय है। “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” केवल एक विचार नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का आधार है। जब बेटियाँ खेल में आगे बढ़ती हैं, तब समाज की सोच नहीं, राष्ट्र की दिशा बदलती है।

    राज्य में खेल मैदानों, स्पोर्ट्स अकादमियों और प्रशिक्षण सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर पर ऐसे आयोजन खिलाड़ियों को मंच प्रदान करते हैं, जहाँ उनकी प्रतिभा निखरती है और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।

    विश्वविद्यालय स्तर से ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच की तैयारी प्रारंभ होती है। मैं आप सभी खिलाड़ियों से आह्वान करता हूँ कि आप केवल इस प्रतियोगिता तक सीमित न रहें, बल्कि ओलंपिक जैसे वैश्विक मंचों को अपना लक्ष्य बनाएँ।

    उत्तराखण्ड की धरती से भी ऐसे खिलाड़ी निकलें जो विश्व पटल पर भारत का तिरंगा ऊंचा करें। जब तिरंगा विश्व मंच पर लहराता है, तो वह केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, 140 करोड़ भारतवासियों का गौरव होता है। वह क्षण पूरे राष्ट्र की सामूहिक चेतना और गर्व का क्षण बन जाता है।

    जीत और हार दोनों जीवन का हिस्सा हैं। सच्ची विजय पदक में नहीं, बल्कि आपके प्रयास में है। खेल हमें सिखाते हैं कि सफलता में विनम्र और असफलता में धैर्यवान कैसे रहें। यही गुण जीवन में नेतृत्व और उत्कृष्टता का आधार बनते हैं।

    प्रिय खिलाड़ियों, याद रखिए! आज का खिलाड़ी, कल का नेतृत्वकर्ता है। आज आपके हाथों में खेल उपकरण हैं, कल आपके हाथों में राष्ट्र का भविष्य होगा। आपकी प्रतिभा केवल आपके विश्वविद्यालय का गौरव नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड और भारत की पहचान है।

    आपका परिश्रम, आपका अनुशासन और आपका संकल्प, विकसित भारत 2047 की आधारशिला है। जब युवा सशक्त होगा, तभी राष्ट्र सशक्त होगा, जब राष्ट्र सशक्त होगा, तभी विश्व में भारत की प्रतिष्ठा और ऊँची होगी।

    इन्हीं भावनाओं के साथ, मैं उत्तराखण्ड राज्य विश्वविद्यालय खेल एवं क्रीड़ा महोत्सव के सफल आयोजन की शुभकामनाएँ देता हूँ और आप सभी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।

    हमारे लिए राष्ट्र केवल शब्द नहीं, राष्ट्र ही हमारा धर्म है, राष्ट्र ही हमारा कर्म है, राष्ट्र ही हमारा गौरव है!

    आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें- स्वस्थ तन की शक्ति के साथ, दृढ़ मन की अडिगता के साथ, और अटूट राष्ट्रभक्ति की ज्योति के साथ, हम फिट उत्तराखण्ड का निर्माण करेंगे, सशक्त भारत का सृजन करेंगे, और विकसित भारत 2047 के स्वप्न को साकार करेंगे।

    इस विश्वास के साथ मैं उत्तराखण्ड राज्य विश्वविद्यालय खेल एवं क्रीड़ा महोत्सव के औपचारिक उद्घाटन की घोषणा करता हूँ।

    जय हिन्द!
    जय उत्तराखण्ड!