Close

    03-02-2026 : गणतंत्र दिवस परेड में उत्तराखण्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले एनसीसी कैडेट्स के अभिनंदन समारोह में माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि : फ़रवरी 3, 2026

    जय हिन्द!

    आज इस समारोह में ऊर्जा, उत्साह और जोश से भरे अमृत पीढ़ी के एनसीसी कैडेट्स के बीच उपस्थित होकर मैं अत्यंत प्रसन्नता और गौरव की अनुभूति कर रहा हूँ। आप जैसे अनुशासित, संकल्पित और तेजस्वी युवाओं से मिलकर, मैं स्वयं के भीतर भी एक नई ऊर्जा, नया आत्मविश्वास और नया उत्साह महसूस कर रहा हूँ। सर्वप्रथम आप सभी कैडेट्स को आपके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए हृदय से असीम बधाई।

    उत्तराखण्ड की इस पवित्र भूमि के वीर सपूतों और असीम क्षमतावान बेटियों, के साथ संवाद करने पर सच में, मुझे आत्मिक खुशी मिलती है। आप सभी कैडेट्स में मुझे उत्तराखण्ड की वही आत्मा दिखाई देती है, जो सीमाओं पर प्रहरी बनकर राष्ट्र की रक्षा के लिए अडिग खड़ी रहती है, जो हर कार्य राष्ट्र सर्वाेपरि की भावना से करती है। और वही आत्मा जो राष्ट्र के लिए कुछ असाधारण कर गुजरने का साहस रखती है।

    शौर्य और संकल्प की यह पावन भूमि वीर-प्रसूता भूमि है, जो साहस, अनुशासन और बलिदान की अपनी परंपराओं के लिए जानी जाती है। यह वह भूमि है जहाँ देशभक्ति केवल विचार नहीं, बल्कि संस्कार है। यहाँ की हवाओं में साहस है, नदियों में आगे बढ़ते रहने का संकल्प है, और युवाओं की धड़कनों में राष्ट्र के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून है। आज जब मैं आप जैसे अनुशासित, संकल्पित और ऊर्जावान कैडेट्स को देखता हूँ, तो मेरा यह विश्वास और भी दृढ़ हो जाता है कि उत्तराखण्ड की यह गौरवशाली परंपरा सुरक्षित हाथों में है।

    मेरे प्रिय कैडेट्स,

    गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं है। यह उस संकल्प का उत्सव है, जिसमें भारत ने स्वयं को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक और गणराज्य राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर आपने जिस अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति का प्रदर्शन किया, उसने पूरे देश के सामने उत्तराखण्ड की युवा शक्ति का प्रभावशाली परचम लहराया।

    आपकी यह उपलब्धि व्यक्तिगत नहीं है- यह पूरे राज्य का, पूरे समाज का और पूरे राष्ट्र का गौरव है। आप सभी ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब युवा अनुशासन और उद्देश्य के साथ आगे बढ़ता है, तो वह असाधारण उपलब्धियाँ अर्जित कर सकता है।

    मुझे विशेष गर्व है कैडेट मानसी विश्वकर्मा पर, जिन्होंने गर्ल्स कंटिंजेंट की परेड कमांडर बनकर यह सिद्ध कर दिया कि आज की भारतीय नारी केवल सहभागिता नहीं, नेतृत्व कर रही है। यह उपलब्धि केवल एक कैडेट की सफलता नहीं है, बल्कि उत्तराखण्ड की बेटियों की शक्ति, सामर्थ्य और आत्मविश्वास का उद्घोष है। यह संदेश है कि जब अवसर और संस्कार मिलते हैं, तो बेटियाँ इतिहास रचती हैं। और हमारी बेटियाँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, वे नेतृत्व कर प्रेरणा भी बन रही हैं।

    इसी प्रकार, कैडेट प्रिंस सिंह राणा को ड्रोन प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए रक्षा मंत्री पदक से सम्मानित किया जाना, यह दर्शाता है कि हमारे कैडेट न केवल परंपरागत सैन्य अनुशासन में दक्ष हैं, बल्कि आधुनिक तकनीक, नवाचार और भविष्य की चुनौतियों के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं। आज का युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि तकनीक, सूचना और नवाचार के क्षेत्र में भी लड़ा जा रहा है, और हमारे युवा इसके लिए सक्षम हैं।

    गणतंत्र दिवस परेड में उत्तराखण्ड की ‘वाइब्रेंट विलेज’ झांकी ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। यह झांकी केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि यह सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, आत्मनिर्भर भारत और समावेशी राष्ट्र निर्माण के संकल्प का जीवंत प्रतीक थी। यह संदेश था कि भारत का अंतिम गाँव भी राष्ट्र की प्रगति की मुख्यधारा में है।

    जब मैंने आपके सांस्कृतिक कार्यक्रम, विशेषकर सूफी थीम पर आधारित समूह गान को देखा, तो मैं गहराई से प्रभावित हुआ। उस प्रस्तुति में केवल कला नहीं थी, बल्कि भारत की आत्मा थी। सद्भाव, सह-अस्तित्व और एकता का भाव- यह स्पष्ट करता है कि एनसीसी केवल शारीरिक अनुशासन नहीं सिखाती, बल्कि संवेदनशीलता, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का भी निर्माण करती है।

    मेरे प्रिय युवाओं,

    राष्ट्र प्रथम का भाव केवल एक नारा नहीं, बल्कि हमारी कार्य संस्कृति बननी चाहिए। हमें पहले राष्ट्र और समाज के हित में सोचना चाहिए, और फिर स्वयं के लिए। जब व्यक्ति राष्ट्र के लिए जीता है, तो राष्ट्र स्वयं उसके जीवन को सार्थक बना देता है। यही भाव भारतीय सेना, एनसीसी और हमारी महान परंपरा की आत्मा है।

    मैं आप सबसे विशेष रूप से कहना चाहता हूँ- बड़े सपने देखिए लेकिन खुली आँखों से देखिए। इतिहास उन्हीं युवाओं ने बदला है और वही राष्ट्र की दिशा बदल सके, जिन्होंने सीमाओं से आगे सोचा, और राष्ट्र को स्वयं से पहले रखा। याद रखिए! सपने तभी साकार होते हैं जब उनके पीछे अनुशासन, परिश्रम और समर्पण का आधार हो। इसलिए कठोर परिश्रम कीजिए, तब आपको लक्ष्य प्राप्त करने से कोई ताकत रोक नहीं सकती।

    वर्तमान युग तकनीक का युग है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, ड्रोन तकनीक, डिजिटल प्रणालियाँ, ये आने वाले समय की शक्ति हैं। मेरी अपेक्षा है कि आप इन क्षेत्रों में कौशल प्राप्त करें, स्वयं को सतत अद्यतन रखें। यह तय है कि तकनीकी दक्ष युवा ही देश की प्रगति, सुरक्षा और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का आधार बनेंगे।

    मैं सभी युवाओं से विशेष अपील करता हूँ कि हर प्रकार के दुर्व्यसनों से दूर रहें। नशा और अन्य कुरीतियाँ व्यक्ति की क्षमता को कमजोर करती हैं और परिवार, समाज तथा राष्ट्र तीनों के विकास में बाधा बनती हैं। सशक्त राष्ट्र का निर्माण केवल सशक्त और स्वस्थ युवाओं से ही संभव है।

    आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। यह नया भारत हर क्षेत्र- शिक्षा, विज्ञान, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और नवाचार हर क्षेत्र में प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर है। आज के नए भारत में आप सभी युवाओं के लिए अवसरों की भरमार है। इस राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति आप जैसे ऊर्जावान, अनुशासित और राष्ट्रनिष्ठ युवा हैं। आप केवल परिवर्तन के साक्षी नहीं, बल्कि परिवर्तन के वाहक हैं।

    आज भारत की सैन्य शक्ति आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। स्वदेशी रक्षा उत्पादन, अत्याधुनिक तकनीक, ड्रोन, साइबर क्षमताएँ और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती साख, यह सब हमारे सामर्थ्य का प्रमाण है। यह आत्मनिर्भरता केवल सुरक्षा की नहीं, बल्कि स्वाभिमान और संप्रभुता की भी है, जिसमें युवाओं की भूमिका निर्णायक है।

    राष्ट्र निर्माण में हमारी सेना और अर्धसैनिक बलों का योगदान केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है। आपदा प्रबंधन, मानवीय सहायता, आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में उनका योगदान अतुलनीय है। संकट की हर घड़ी में वे निस्वार्थ भाव से राष्ट्र की ढाल बनकर खड़े रहते हैं। यही उनका समर्पण और यही भारत की शक्ति है।

    याद रखिए! विकसित भारत का संकल्प युवाओं के परिश्रम, जुनून और सामर्थ्य से ही संभव होगा। वर्ष 2047 का भारत आपके संकल्प से आकार लेगा, आपके श्रम से सशक्त होगा और आपके चरित्र से विश्व में प्रतिष्ठित होगा। राष्ट्र का भविष्य किसी नीति-पत्र में नहीं, बल्कि आपके विचारों, आचरण और कर्मों में निहित है। जब युवा जाग्रत होता है, तो राष्ट्र स्वतः प्रगति की ओर अग्रसर हो जाता है।

    आप केवल छात्र नहीं, बल्कि राष्ट्र के शौर्य और संकल्प के प्रतीक हैं। जब आप यह वर्दी धारण करते हैं, तो आप एनसीसी के ध्येय वाक्य “एकता और अनुशासन” के प्रति स्वयं को समर्पित करते हैं। अनुशासन ही वह संस्कार है जो सामान्य नागरिक को राष्ट्र-सेवक बनाता है। आपका चरित्र, सेवा भावना और साहस ही सशक्त एवं अखंड भारत की आधारशिला बनेगा।

    मेरे प्यारे कैडेट्स,

    आप न केवल देश का भविष्य हैं, बल्कि आप वर्तमान भारत की शक्ति भी हैं। मेरा अटल विश्वास है कि आप अपनी मेहनत और निष्ठा से न केवल एनसीसी के गौरव को बढ़ाएंगे, बल्कि माँ भारती की सेवा में सदैव तत्पर रहेंगे, और आप जहाँ भी जाएंगे और जिस भी क्षेत्र में सेवा करेंगे, आप उत्तराखण्ड और भारत का नाम गर्व और सम्मान के साथ ऊँचा करेंगे।

    अंत में, एक बार फिर से, मैं आप सभी कैडेट्स को आपके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए हृदय से बधाई देता हूँ। आपका अनुशासन, आपका साहस और आपकी राष्ट्र-निष्ठा भारत की सबसे बड़ी पूँजी है। ईश्वर आपको सदैव राष्ट्र-सेवा के पथ पर अग्रसर रखे, आपको उज्ज्वल, सशक्त, और गौरवशाली भविष्य की शुभकामना देते हुए मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

    जय हिन्द! वंदे मातरम्! भारत माता की जय!