22-01-2026 : राष्ट्रीय बालिका दिवस एवं विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस पर माननीय राज्यपाल महोदय का सम्बोधन
(तिथिः 22 जनवरी, 2026)
जय हिन्द!
माननीय अतिथिगण, सम्मानित जनप्रतिनिधिगण, प्रबुद्धजन और प्रिय छात्र-छात्राओं!
आज का यह शुभ अवसर अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रेरणादायक और राष्ट्र-चिंतन से जुड़ा हुआ है। आज हम एक साथ राष्ट्रीय बालिका दिवस व उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय के स्थापना दिवस मना रहे हैं। यह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह अवसर हमें भारत की आत्मा, उसकी चेतना, उसकी विविधता और उसके भविष्य पर विचार करने का अवसर प्रदान करता है।
राष्ट्रीय बालिका दिवस और विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस का यह संयोग हमें यह संदेश देता है कि राष्ट्र का भविष्य तभी सशक्त होगा, जब उसकी बेटियाँ सशक्त होंगी और जब उसके सभी राज्य समान रूप से आगे बढ़ेंगे।
राष्ट्रीय बालिका दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि बालिका केवल जन्म लेने का अधिकार ही नहीं रखती, बल्कि उसे सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता का भी पूर्ण अधिकार है। एक सभ्य और सशक्त समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपनी बेटियों के साथ कैसा व्यवहार करता है। इतिहास साक्षी है कि जब-जब समाज ने बालिकाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया है, तब-तब उन्होंने नई ऊँचाइयों को छुआ है।
राष्ट्रीय बालिका दिवस हमें केवल उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि आत्ममंथन और यह संकल्प लेने का दिन बनाना चाहिए, कि कोई भी बालिका अवसरों से वंचित न रहे।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, महिला स्वयं सहायता समूहों और डिजिटल साक्षरता जैसे अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं। इन पहलों का उद्देश्य केवल योजनाएँ लागू करना नहीं, बल्कि समाज की सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य में, जहाँ भौगोलिक परिस्थितियाँ कठिन हैं, वहाँ की बेटियाँ असाधारण साहस और संकल्प के साथ आगे बढ़ रही हैं। दुर्गम पहाड़ों से निकलकर हमारी बालिकाएँ शिक्षा, चिकित्सा, प्रशासन, खेल, विज्ञान, सेना और पुलिस जैसी सेवाओं में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों के दीक्षान्त समारोहों के अवसर पर मुझे बेहद खुशी होती है कि मेडल प्राप्त करने वालों में हमारी बेटियों की संख्या 70 प्रतिशत से अधिक होती है। यह दर्शाता है कि उत्तराखण्ड में बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
यह हमारे लिए गर्व की बात है कि उत्तराखण्ड की बेटियाँ न केवल अपने परिवारों का सहारा बन रही हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र-निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर बालिका को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिले, चाहे वह शहर में हो या सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में। बालिका सशक्तीकरण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग का नैतिक दायित्व है।
आज हम उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय के स्थापना दिवस भी मना रहे हैं। ये राज्य भारत की संघीय संरचना के सशक्त स्तंभ हैं और देश की विविधता को जीवंत रूप प्रदान करते हैं।
उत्तर प्रदेश भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रहा है। अयोध्या, काशी, प्रयागराज जैसी पवित्र भूमि से लेकर आधुनिक विकास के नए आयाम तक, उत्तर प्रदेश राष्ट्र को दिशा देने वाला राज्य है। यहाँ की जनसंख्या, संसाधन और सांस्कृतिक विरासत भारत की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
त्रिपुरा, पूर्वाेत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य, अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक समरसता के लिए जाना जाता है। यह राज्य यह संदेश देता है कि विविध भाषाएँ, परंपराएँ और संस्कृतियाँ एक साथ मिलकर राष्ट्र को मजबूत बनाती हैं।
मणिपुर, साहस, वीरता और खेल प्रतिभा की भूमि है। इस राज्य ने देश को अनेक अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं और अपनी सांस्कृतिक पहचान के माध्यम से भारत को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित किया है। मणिपुर यह सिखाता है कि अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।
मेघालय, अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, संगीत, पर्यावरणीय चेतना और सतत विकास के मॉडल के लिए जाना जाता है। यह राज्य हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर विकास करने की प्रेरणा देता है।
इन सभी राज्यों की यात्रा यह प्रमाणित करती है कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित एकता में है।
आज का यह संयुक्त अवसर हमें यह समझने का अवसर देता है कि बालिका सशक्तीकरण और राज्यों का समग्र विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। जब बालिकाएँ शिक्षित और आत्मनिर्भर होंगी, तब राज्य आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत होंगे।
एक सशक्त बेटी एक सशक्त परिवार व समाज बनाती है और एक मजबूत राष्ट्र की नींव रखती है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि नीति निर्माण से लेकर जमीनी स्तर तक, बालिकाओं और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो। शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास, स्वास्थ्य, सुरक्षा और नेतृत्व के अवसरों पर विशेष ध्यान देना समय की आवश्यकता है।
आज, इस पावन अवसर पर, हमें कुछ संकल्प लेने होंगे कि हम बालिकाओं के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव को स्वीकार नहीं करेंगे, शिक्षा को उनका सबसे बड़ा अधिकार बनाएँगे, उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए हर संभव अवसर देंगे, और एक ऐसे भारत का निर्माण करेंगे जहाँ हर बेटी निर्भय होकर अपने सपनों को साकार कर सके।
अंत में, मैं राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर देश और राज्य की सभी बेटियों को शुभकामनाएँ देता हूँ। साथ ही, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय के स्थापना दिवस पर वहाँ के सभी नागरिकों को हार्दिक बधाई एवं शुभेच्छाएँ प्रेषित करता हूँ।
आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि हम अपनी बेटियों के सपनों को पंख देंगे और अपने राज्यों की प्रगति के माध्यम से भारत को विश्व पटल पर और अधिक सशक्त बनाएँगे।
जय हिन्द!