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    06-07-2024 : राजभवन परिवार मिलन समारोह के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि: जुलाई 6, 2024

    जय हिन्द!

    राजभवन परिसर में आहुत ‘‘राजभवन परिवार मिलन’’ कार्यक्रम में, इस वृहद परिवार, संयुक्त परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर मुझे बेहद प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है।

    मुझे लगता है कि कोई भी तीज-त्योहार या समारोह हो, वह समाज और परिवार के मिलन के बीच की कड़ी होते हैं। यदि यूँ कहें कि मिलन समारोह से पारिवारिक और सामाजिक सामंजस्य बढ़ता है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

    मेरी सोच और धारणा है कि राजभवन का यह पूरा परिवार, संयुक्त परिवार ही तो है। राजभवन द्वारा की गई यह पहल, राजभवन के पूरे परिवारों को एक मंच से जोड़कर सामाजिक एवं पारिवारिक रिश्तों को और अधिक मजबूत कर एक वृहद परिवार का निर्माण करती है। साथ ही यह आयोजन हमारे पुरातन संयुक्त परिवारों की प्रथा को भी बल देता है।

    सच बताऊँ तो राजभवन के सभी परिवारों को मैं अपना ही परिवार मानता हूँ, इसे एक संयुक्त परिवार मानता हूँ।
    परिवार, किसी भी सामाजिक ढांचे की रीढ़ की तरह काम करता है। पश्चिम हो या पूर्व, दुनिया के प्रत्येक देश में परिवार की मौजूदगी, वहाँ के सामाजिक निर्माण की प्रमुख इकाई है। यही कारण है कि हर दौर में परिवार की अहमियत हमेशा बनी रही है।

    आधुनिक समाज में यह आम धारणा हो गई है कि ‘‘छोटा परिवार-सुखी परिवार’’। लेकिन हाल ही के दिनों में, समय और परिस्थितियों ने इस धारणा को नकारते हुए ‘‘संयुक्त परिवार-खुशहाल परिवार’’ का नारा बुलंद और सार्थक किया है। उदाहरण के तौर पर कोरोना काल ने तो परिवार की इस जरूरत को सार्थक सिद्ध कर दिया।

    मेरा मानना है कि सशक्त देश के निर्माण में परिवार एक अभूतपूर्व संस्था है, नींव का पत्थर है। प्राचीन समय से ही अपने देश में तो रिश्ते और परिवार को बहुत ही सम्मान दिया जाता है।

    परिवार हमारे देश की प्राचीन सभ्यता का मूल भी है। हमारा तो पूरे विश्व को भी एक ही संदेश है, एक ही मूल मंत्र है- वह है वसुधैव कुटुम्बकम। हमारे लिए तो पूरा विश्व ही परिवार है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की सीख देने की प्राथमिक पाठशाला भी तो संयुक्त परिवार ही है।

    जीवन कभी-कभी चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है, लेकिन अगर आपके पास परिवार हो तो आप भाग्यशाली होते हैं। मुझे खुशी है कि मेरा परिवार इतना विशाल है।

    आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी के कारण व्यक्तिवादी प्रवृति बढ़ रही है। ऐसी प्रवृति के कारण लोगों में अपने व अपने परिवार के बीच ही सिमटकर रहने की भावना बढ़ी है। आलम यह है कि परिवार में ही एक-दूसरे सदस्यों के प्रति दूरियां बढ़ रही हैं, जो सामाजिक सरोकार के लिहाज से सही नहीं है। इससे हमारा सामाजिक तानाबाना और संस्कार भी खंडित हो रहे हैं।

    ऐसे में जरूरी है कि हम अपने समाज में रहने वाले दूसरे लोगों के भी गम व खुशी में सहभागी बने। यह इस पारिवारिक मंगल मिलन समारोह के आयोजन का महत्वपूर्ण मकसद है। इस परिवार के मुखिया के नाते मेरी आप सभी के प्रति जिम्मेदारियाँ भी हैं।

    राज्यपाल के रूप में विगत पौने तीन साल के दौरान अधिकांश कार्मिक मेरे आचार-विचार, भावनाओं एवं व्यवहार से भली-भांति परिचित हैं। मेरी कोशिश रहती है कि मैं आप सभी राजभवन के समस्त कार्मिकों एवं आपके परिजनों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करूं, और आप सभी के सुख-दुःख का सहभागी बन सकूं।

    मेरी भरसक कोशिश रहती है कि जितना भी संभव हो सके, अपने परिजनों के काम आ सकूं। समय-समय पर परिवार मिलन कार्यक्रमों का आयोजन करके आपके और आपके परिजनों की व्यक्तिगत एवं कार्यालय संबंधी समस्याओं के बारे में जानूं, साथ ही उनका हर संभव निस्तारण कर सकूं।
    मेरा तो मानना है कि कोई भी खुशी का समय हो, हमें परिवार के रूप में एक साथ मनाना चाहिए और यदि कोई भी दिक्कत हो, परेशानी हो तो भी, चुनौती का सामना मिलकर ही करना चाहिए तभी तो परिवार की सार्थकता सिद्ध होती है।

    ईमानदारी से कहूं तो मैंने अपने इस कार्यकाल के दौरान देखा है कि राजभवन के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा हमेशा राजभवन की गरिमा के अनुरूप पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य किया जा रहा है।

    फिर भी आपसे अपेक्षा है कि सभी कार्मिक इसी भावना के साथ अपने कार्य पूरी श्रद्धा और निष्ठा से करते हुए अपने कार्यों में निरंतर उत्कृष्टता प्राप्त करने का प्रयास करते रहें। इससे निश्चित ही राजभवन की प्रतिष्ठा एवं गरिमा और भी बढ़ेगी। हम इस संयुक्त परिवार में ‘‘मैं’’ नहीं ‘‘हम’’ की भावना से कार्य करें और एक परिवार की तरह ही एक-दूसरे का सहयोग भी अवश्य करें।

    परिवार में भी दूसरों के लिए कुछ करना और उनके जीवन में आशा की नई किरण लाना ही हमारा असली उद्देश्य होना चाहिए।

    मेरी हमेशा यही सोच रही है कि राजभवन में कार्य करने वाले सभी अधिकारी एवं कर्मचारी एक परिवार के सदस्य हैं। इसलिए मैं मानता हूँ कि परिवार के किसी भी सदस्य की समस्या मेरी अपनी समस्या है, जिनका निदान करना हर-हमेशा मेरी प्राथमिकता रहेगी।

    आधुनिक जीवन शैली तथा आपाधापी की दौड़ में संयुक्त परिवार विघटित हो रहे हैं। पुरानी पीढ़ियां संयुक्त परिवारों में रहकर जो सुरक्षा अनुभव करती थीं, उससे व्यक्ति मानसिक स्तर पर शांति का अनुभव करता था। लेकिन एकल परिवार के साथ ही आज समाज में फैले अवसाद, तनाव से सामाजिक असुरक्षा बढ़ी है। इसलिए सहकर्मियों के साथ पारिवारिक रिश्ते आज समय की मांग हैं। हमें इन रिश्तों को सजोंकर रखना चाहिए।

    पारिवारिक मिलन समारोह में परिवार के सभी सदस्यों को एक छत के नीचे फिर से इकट्ठा होने, मेल-मुलाकात करने, उपलब्धियों का जश्न मनाने, नए सदस्यों से मिलने और बातचीत करने का अवसर मिलता है। आशा है आप इन पलों को इंजॉय करेंगे। इस अवसर पर मैं सभी उपस्थित परिवार जनों का आभार व्यक्त करता हूँ। आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ ज्ञापित करता हूँ। इस आशा उमंग के साथ कि बहुत जल्द फिर से इसी तरह मुलाकात करेंगे।

    जय हिन्द!