Close

    04-05-2024 : स्पिक मैके द्वारा आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि: मई 5, 2024

    आज आप सभी युवाआंे के साथ जो दिल को छू देने वाली शानदार प्रस्तुति हमने देखी उसे देखकर मुझे वास्तव में अपार खुशी हुई है। इस बेहतरीन प्रदर्शन से, मैं बहुत प्रभावित भी हुआ हूं। आज की शाम को यादगार बनाने के लिए सभी कला के पुजारियों को हृदय तल से बधाई।

    मेरा मानना है कि भारतीय कला और संस्कृति की विरासत को संरक्षित करना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि हमारी यह विरासत ही देश की पहचान और गौरव को बनाए रखती है। कला के ज़रिए लोग अपने पूर्वजों से जुड़ाव महसूस करते हैं और उनकी कलात्मक उपलब्धियों से प्रेरित भी होते हैं।

    देश का युवा अपनी जड़ों से जुड़े और उस पर गर्व महसूस करें इसके लिए भारत के युवाओं को भी देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है।

    भारतीय शास्त्रीय धरोहर में, संगीत, नृत्य, नाट्य, वास्तु, स्थापत्य और हर एक शास्त्रीय कला में एक समृद्ध विरासत देखने को मिलती है। ये हमारे पूर्वजों की सोच को बतलाते हैं, उनके महान विचारों का ज्ञान कराते हैं। उनके दृढ़ परिश्रम और लगन की अनोखी मिसाल के बारे में बताते हैं। भारतीय शास्त्रीय धरोहरों में ऐसी अनगिनत कलाएं हैं जिनमें रहस्य, रोमांच, दिव्य आनंद और जीवन की गहन विद्याएं छिपी हुई हैं।

    आज के नए भारत में, शास्त्रीय नृत्य और संगीत की इन विधाओं को लोगों के सामने लाना बेहद जरूरी है। तकनीकी, इनोवेशन, उद्यमिता और अन्य कौशलों के साथ-साथ हमें इन प्राचीन कलाओं को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा।

    मैं मानता हूं कि ये विधाएं जीवन की खुशहाली के लिए एक वरदान हैं। आज समय की आवश्यकता है कि हमें कलाओं के माध्यम से जीवन को गुणवत्तापूर्ण और समृद्ध बनाना होगा। साथ ही भारत की कलाओं के साथ युवाओं को प्रेरित करने के लिए ऐसे प्रयास जारी रखने होंगे।

    भारत की कलाएं और उनका सौंदर्य, उनका ज्ञान आलौकिक है। ये कलाएं हमें हमारी अन्तर आत्मा की गहराई तक एक बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करती हैं।

    भारत की इन महान कलाओं में मूल्य-आधारित शिक्षा, सौंदर्य शास्त्र और आध्यात्मिकता का गहरा समावेश है। वह सब कुछ जो सुंदर, उन्नत और हितकर है, संवेदनशील, दयालु और सौम्य है वह हमारी संस्कृति का अनूठा वरदान है।

    मुझे लगता है कि मृदमगम और वायलिन जैसे वाद्ययंत्रों के साथ कलाकार के सजीव प्रदर्शन से बेहतर कुछ भी नहीं है जो हमने आज देखा।

    केरल की डॉ. नीना प्रसाद, जो एक प्रशंसित मोहिनीअट्टम नृत्यांगना हैं, उसने अपने संगीतकार के साथ मिलकर एक ऐसा माहौल तैयार कर दिया जिसने हमें मंत्रमुग्ध कर दिया है। एक कलाकार जो कला के क्षेत्र में गहरी रुचि रखती है, उनके ज्ञान की गहराई वास्तव में उनके प्रदर्शन में प्रतिबिंबित होती है।

    आपमें से प्रत्येक कलाकार ने कलात्मकता और सांस्कृतिक उत्सव की यात्रा में नृत्य प्रदर्शन को अद्भुत बनाया है। उनके प्रदर्शन ने गायक श्री माधवन नामपूथिरी द्वारा गाए गए प्रसिद्ध शास्त्रीय गीत के साथ-साथ मोहिनीअट्टम की आकर्षक गतिविधियों के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    आज हम सभी को महान कोडियाटम कला के एक अत्यंत साहसिक प्रदर्शन का गौरव अनुभव करने का अवसर मिला है। यह भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो केरल के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विशेषज्ञता का प्रतीक है।

    मुझे बताया गया है कि उन्होंने इस अनूठी कला के माध्यम से देहरादून के विभिन्न स्कूलों में प्रदर्शन किया है। मुझे यकीन है कि यह युवा मन को, देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागृत करेगा।

    मुझे यकीन है कि छात्रों को जटिल वेशभूषा, समृद्ध पौराणिक कथाओं और मोहिनीअट्टम की विशिष्ट विशेषताओं के बारे में जानकारी मिली है जो इसे अन्य शास्त्रीय नृत्य रूपों से अलग करती है।

    युवाओं के बीच भारतीय शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने वाली सोसायटी स्पिक मैके ने 47 साल की बहुत ही कम अवधि में एक लंबा सफर तय किया है और पूरे देश में सराहनीय काम किया है।

    उत्तराखंड में संस्था 500 से अधिक कार्यक्रमों के साथ राज्य के दूरदराज के कोनों तक पहुंच चुकी हैं, जो देश की समृद्ध कला के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही हैं, जो कि सराहनीय कार्य है।

    स्पिक मैके युवाओं के बीच भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है, जो निश्चित रूप से सराहनीय है।

    मुझे खुशी है कि भारत की 5000 साल की विरासत और धरोहर को आगे बढ़ाने के लिए, समाज और देश को वापस लौटाने के लिए दिग्गज कलाकार और इस संस्था के स्वयं सेवक अथक प्रयास कर रहे हैं।

    यह आंदोलन उन स्वयंसेवकों के कंधों पर खड़ा है, जो इन आयोजनांे में निस्वार्थ भाव से काम करते हैं क्योंकि उन्हें देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महत्व का एहसास है। इन्होंने ही इस संस्था को आज इस मुकाम पर पहुंचाया है, जिसे देश के एक बड़े स्वयंसेवी संगठन के रूप में पहचाना और सराहा जा रहा है।

    मैं इस संस्था द्वारा अपनाई जाने वाली ‘निष्काम सेवा’ की भावना और हर बच्चे को हमारी सांस्कृतिक विविधता के जादू का अनुभव कराने की भावना से गहराई से प्रभावित हूं।

    मैं आपको सभी भविष्य के प्रयासों और विशेष रूप से 20-26 मई तक आईआईटी मद्रास में आयोजित होने वाले 9वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

    मुझे बताया गया है कि इस राष्ट्रव्यापी, स्वैच्छिक आंदोलन की स्थापना 1977 में प्रोफेसर-एमेरिटस, प्रोफेसर डॉ. किरण सेठ ने की थी, जिन्हें ‘2009 में कला में उनके योगदान के लिए पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया था।

    पिछले 47 वर्षों से, स्पिक मैके ने प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा संगीत कार्यक्रमों, व्याख्यान प्रदर्शनों के माध्यम से स्कूलों, कॉलेजों और पेशेवर संस्थानों में भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य, लोक कला, शिल्प और लोक रंगमंच के विभिन्न रूपों से हजारों छात्रों को परिचित कराया है, जिसकी मैं सराहना करता हूं।

    मैं राजभवन की ओर से आप सबके इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूँ।

    मैं आपको और आपकी पूरी टीम को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ, आपके द्वारा भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जो कार्य किए जा रहे हैं वे सराहनीय है।

    इस आयोजन में शामिल होने के लिए मैं युवाओं, कलाकारों, आप सभी को शुभकामनाएं देता हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि अपनी कला, संकृति और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के आपके नेक प्रयास अवश्य फलीभूत होंगे।

    जय हिन्द।
    ……….0………..