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    02-04-2025 : राष्ट्रीय सैनिक संस्था के कार्यक्रम में माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन

    प्रकाशित तिथि: अप्रैल 2, 2025

    जय हिन्द!

    शहीद सैनिकों के परिवार जनों, आप सभी देश भक्त नागरिकों, अपने परिवार के सदस्यों के बीच इस कार्यक्रम में शामिल होने पर मुझे अपार प्रसन्नता और गर्व की अनुभूति हो रही रही है।

    हमें गर्व है कि राष्ट्रीय सैनिक संस्था राष्ट्रीय एकीकरण और चरित्र निर्माण, समाज से बुराइयों के उन्मूलन, शहीद परिवारों के कल्याण, पूर्व सैनिकों के सशक्तीकरण, नशे और ड्रग्स जैसी बुराइयों को मिटाने, शिक्षा के जरिए नैतिक मूल्यों का विकास और राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।

    हम सभी जानते हैं कि राष्ट्रीय सैनिक संस्था एक गैर-राजनीतिक, देशभक्त और अनूठी संस्था है। इसमें भूतपूर्व सैनिक और देशभक्त नागरिक शामिल हैं। हमें खुशी है कि देश के 23 राज्यों में इसकी कार्यात्मक इकाइयां हैं। जो गौरव सेनानियों और देशभक्त नागरिकों को एकता के सूत्र में बांधने के लिए निरंतर प्रयत्नशील है। इस परिवार का सदस्य होना हर एक के लिए गौरव की बात है।

    साथियों,
    त्योहार पर भी हमारे सैनिक परिवार से दूर रहकर देश की सुरक्षा करते हैं। सैनिकों की पत्नियों को अकेले ही घर की सभी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। इसलिए सही मायने देश की सुरक्षा सैनिक ही नहीं बल्कि सैनिक का परिवार भी करता है। सीमा पर सैनिक तैनात हैं तो हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं। सैनिक देश की सुरक्षा का प्रहरी होता है, जो अपने जीवन को संकट में डालकर देश की अखंडता की सुरक्षा करता है।

    समाज सेवा व राष्ट्रीय सेवा दो अलग-अलग चीजें हैं। बाॅर्डर पर रहकर भी सैनिक समाज की सेवा करता है। जब वह घर आता है तो तब भी वह राष्ट्र के लिए जीता है। उसके समाज में जीने और रहने का तरीका लोगों को प्रेरित करता है। इसलिए मेरी अपील है कि समाज को सैनिक व बलिदानियों का हमेशा सम्मान करना चाहिए।

    मित्रों,
    भारत की सरहद पर तैनात सिपाहियों के शौर्य की कहानी आप रोज सुनते होंगे और देखते भी होंगे। भारत की समुद्री सीमा करीब 8 हजार किमी है और करीब-करीब इतनी ही जमीनी सीमा है। पाकिस्तान और चीन से हमें अक्सर चुनौतियां मिलती रहती है।

    चीन ने 1962 में भारत पर आक्रमण किया। परन्तु उसके बाद भी चीन हमारी सीमा में घुसपैठ करने का लगातार प्रयत्न करता रहता है। अभी पिछले कुछ वर्षों में चीन ने डॉकलाम में, गलवान में और तवांग में घुसपैठ करने का प्रयत्न किया। पाकिस्तान भी लगातार विभिन्न माध्यमों से भारत में आतंकी भेजता रहता है। हमारे सैनिकों ने हमेशा ही दुश्मनों की नापाक हरकतों का मुंह तोड़ जवाब दिया है।

    हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमारे देश में ही एक वर्ग ऐसा है जो देश के विरुद्ध आवाज उठाता है और दुश्मनों का गुणगान करता है। जो कि भारत की एकता और अखंडता के लिए बहुत ही घातक है। इस प्रकार के बयानों से आम जन के साथ ही हमारे सैनिकों का मनोबल कम होता है। मेरा सभी नागरिकों से विनम्र आग्रह है कि आप सभी इस प्रकार के बयानों का पुरजोर तरीके से प्रतिकार करें।

    हमारे पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल विपिन रावत इसे आधा फ्रंट कहते थे। कुछ लोग देश को तोड़ने जैसे बयान देते रहते हैं, इसलिए आज हमें देश की एकता अथवा राष्ट्रीय एकीकरण को स्थापित करने की आवश्यकता है। इस मिशन को पूरा करने के लिए ही राष्ट्रीय सैनिक संस्था युवाओं को प्रारम्भिक सैनिक प्रशिक्षण देने पर फोकस कर रही है।

    विशाखापटनम का रहने वाला सिपाही जम्मू एंड कश्मीर में अपना बलिदान दे देता है। आखिर क्यों? वह इसलिए कि देश की अखंडता और एकता कायम रहे। इसलिए शहीद सिपाही किसी एक गाँव या शहर का नहीं होता बल्कि पूरे देश का होता है। और, यही कारण है की शहीदों के सम्मान से राष्ट्रीय एकता स्थापित होती है। सैनिकों के प्रति सम्मान का भाव जाग्रत हो और राष्ट्रीय एकता कायम रहे, इसके लिए युवाओं को प्रारम्भिक सैनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    यह प्रसन्नता का विषय है कि राष्ट्रीय सैनिक संस्था और अखंड हिन्द फौज लगातार युवाओं को प्रारम्भिक सैनिक प्रशिक्षण देने में जुटे हुए हैं। जानकारी के मुताबिक करीब 200 स्थानों पर 20 हजार युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

    मैं फौज में देश का पूर्व उप सेनापति भी रह चुका हूँ। मेरा मानना है कि प्रत्येक सिपाही अनुशासन, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और प्रशिक्षण का एक जीता जागता प्रतिबिंब है। ये सभी बातें एक फौजी को सिखलाई जाती है। इन्हीं बातों को सिविल सोसाइटी को अवगत कराने के उद्देश्य से प्रारम्भिक सैनिक प्रशिक्षण दिया जाता है। आज इस प्रारम्भिक सैनिक प्रशिक्षण का जमीनी प्रदर्शन देखकर मुझे बेहद प्रसन्नता हुई है।

    साथियों,
    ‘जय हिन्द’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि हर भारतीय के हृदय में राष्ट्रभक्ति की अग्नि प्रज्वलित करने वाला मंत्र है। जब यह नारा गूंजता है, तो हृदय में गर्व की लहर दौड़ती है, रक्त में ऊर्जा का संचार होता है और मन में मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण जागृत होता है। यह शब्द हमें भारत की गौरवशाली विरासत, वीर शहीदों के बलिदान और देश की एकता का स्मरण कराता है।

    वीरों की इस भूमि उत्तराखण्ड, ने असंख्य सैनिकों को देश की सेवा में अर्पित किया है। जब हमारे सैनिक ‘जय हिन्द’ का उद्घोष करते हैं, तो यह उनके भीतर असीम साहस और कर्तव्यनिष्ठा का संचार करता है। ‘जय हिन्द’ का उच्चारण हमें यह स्मरण कराता है कि हम केवल एक भू-भाग पर रहने वाले लोग नहीं, बल्कि एक महान संस्कृति और परंपरा के संवाहक हैं। यह नारा हमें अपने कर्तव्यों की याद दिलाता है और प्रेरित करता है कि हम भारत को और अधिक सशक्त, आत्मनिर्भर और गौरवान्वित राष्ट्र बनाने में योगदान दें।

    साथियों,
    मेरा दृढ़ विश्वास है कि राष्ट्र की प्रगति और समृद्धि का आधार उसकी एकता और अखंडता में निहित है। हमारी विविधता हमारी शक्ति है, और जब हम सभी एक सूत्र में बंधकर ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को अपनाते हैं, तो देश को अजेय बना सकते हैं और तभी विकसित भारत के संकल्प को पूरा कर सकते हैं।

    उत्तराखण्ड, जिसे देवभूमि और वीरभूमि के नाम से जाना जाता है, जिसने सदैव राष्ट्रभक्ति और त्याग का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। हमारे जवान सीमा पर देश की रक्षा करते हैं, तो हमारे संत आध्यात्मिक चेतना से देश को मार्गदर्शन देते हैं। हमारी संस्कृति, परंपराएँ और संस्कार हमें जोड़ते हैं और राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करते हैं।

    मेरा मानना है कि ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है, जहां जाति, धर्म, भाषा से ऊपर उठकर हम देश को सर्वाेपरि रखते हैं। देश के सभी नागरिकों का कर्तव्य है कि हम अपनी एकता को और मजबूत करें, समाज में समरसता और सौहार्द बनाए रखें तथा देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं। जब पूरा राष्ट्र एकजुट होकर आगे बढ़ेगा, तभी हम ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को साकार कर सकेंगे।

    भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र का सपना केवल आर्थिक उन्नति या तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं है। यह सपना तभी साकार होगा जब देश का प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवा, राष्ट्रभक्ति, देशप्रेम और राष्ट्रीय एकता की भावना से प्रेरित होकर कार्य करेगा।

    साथियों,
    युवा शक्ति किसी भी देश की सबसे बड़ी संपत्ति होती है। हमारे युवाओं के विचार, उनके प्रयास और उनके संकल्प ही भारत को विश्व मंच पर शीर्ष स्थान दिला सकते हैं। लेकिन यह तभी संभव होगा जब वे अपने कर्तव्यों को समझें, देशहित को सर्वाेपरि रखें और समाज की भलाई के लिए समर्पित हों।

    राष्ट्रभक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में दिखनी चाहिए। हमें जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए एकजुट होना होगा। युवा जब शिक्षा, नवाचार, विज्ञान, तकनीक और सामाजिक सेवा मेंउत्कृष्टता प्राप्त करेंगे, तब भारत एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।

    मुझे विश्वास है कि भारत के युवा अपने कर्तव्यों को निभाते हुए राष्ट्र निर्माण में पूरे सामथ्र्य से योगदान देंगे और 2047 तक भारत को एक सशक्त और विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में अपनी महति भूमिका निभाएंगे।

    आज इस सुअवसर पर जिन लोगों को आज सम्मानित किया गया है, मैं उन्हें हार्दिक बधाई देता हूँ और जो अन्य है उन्हे भी सम्मान का अवसर प्राप्त हो ऐसी वाहे गुरु से अरदास करता हूँ। राष्ट्रीय सैनिक संस्था की हरिद्वार इकाई और अखंड हिन्द फौज की पूरी टीम को हृदय से बधाई देते हुए अपनी वाणी को विराम देता हूँ।

    जय हिन्द!