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    25-01-2025 : 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2026 के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में माननीय राज्यपाल महोदय का सम्बोधन

    प्रकाशित तिथि : जनवरी 25, 2026

    जय हिन्द!

    प्रिय नागरिकों,

    देवभूमि उत्तराखण्ड की इस पावन धरती से मैं आप सभी को 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।

    आज का यह दिन भारतीय लोकतंत्र की आत्मा को नमन करने का अवसर है। यह दिन हमें स्मरण कराता है कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति कोई संस्था या व्यवस्था नहीं, बल्कि सजग, जागरूक और सक्रिय नागरिक हैं।

    भारतीय संविधान ने भारत में एक लोकतंत्रात्मक सरकार की स्थापना की है। ऐसी सरकार जनता के प्रतिनिधियों द्वारा संचालित होती है, जिनका निर्वाचन जनता द्वारा किया जाता है।

    इस वर्ष भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित थीम ष्डल प्दकपंए डल टवजमष् (मेरा भारत- मेरा वोट) है। यह विषय हम सबके भीतर छिपे उस भाव को जागृत करता है, जिसमें प्रत्येक नागरिक स्वयं को राष्ट्र का अभिन्न अंग मानता है। हमारा प्रत्येक वोट केवल एक बटन दबाने की क्रिया नहीं है, बल्कि वह उस भारत की दिशा तय करता है, जिसे हम अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों को सौंपना चाहते हैं। जब कोई नागरिक मतदान करता है, तो वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य के लिए निर्णय करता है।

    इस वर्ष की टैगलाइन ष्प्दकपंद ब्पजप्रमद ंज जीम भ्मंतज व िप्दकपंद क्मउवबतंबलष् (भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में नागरिक), यह स्पष्ट संदेश देती है कि लोकतंत्र का वास्तविक आधार नीतियाँ या संस्थाएँ नहीं, बल्कि आप सभी हैं। संविधान ने हमें मताधिकार देकर यह भरोसा जताया है कि भारत का प्रत्येक नागरिक विवेकपूर्ण निर्णय लेने में सक्षम है। यही विश्वास भारतीय लोकतंत्र को विश्व का सबसे बड़ा और सबसे जीवंत लोकतंत्र बनाता है।

    आज का यह दिन “भारत निर्वाचन आयोग” के स्थापना दिवस का भी स्मरण कराता है। 25 जनवरी 1950 को गठित यह आयोग पिछले सात दशकों से अधिक समय से निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव कराने की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का निष्ठापूर्वक निर्वहन कर रहा है।

    इसी के तहत आज संपूर्ण भारत में 16वाँ ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ मनाया जा रहा है। मैं इस अवसर पर निर्वाचन आयोग तथा उससे जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मियों और सुरक्षाबलों को बधाई देता हूँ, जिनके अथक प्रयासों से भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया निर्बाध रूप से आगे बढ़ रही है।

    प्रिय नागरिकों,

    लोकतंत्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को कितनी गंभीरता से निभाते हैं। मतदान केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि एक पवित्र संवैधानिक दायित्व भी है। यह दायित्व हमें अपने पूर्वजों के संघर्षों की विरासत में मिला है। जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, उन्होंने एक ऐसे भारत का सपना देखा था, जहाँ जनता की आवाज सर्वाेपरि हो।

    मैं विशेष रूप से उन युवाओं और नए मतदाताओं का अभिनंदन करना चाहता हूँ, जिन्होंने हाल ही में 18 वर्ष की आयु पूर्ण की है और पहली बार मतदान करने जा रहे हैं। युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूँजी होती है। आपका एक वोट परिवर्तन की वह चिंगारी है, जो समाज को नई दिशा दे सकती है। आपसे मेरा आग्रह है कि आप मतदान को केवल औपचारिकता न समझें, बल्कि इसे अपने भविष्य के निर्माण का अवसर मानें।

    समावेशी लोकतंत्र हमारी पहचान है। “कोई भी मतदाता पीछे न छूटे” का संकल्प केवल एक नारा नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों, दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और हाशिए पर खड़े समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित करना हम सबका कर्तव्य है। जब समाज का हर वर्ग चुनावी प्रक्रिया में भाग लेता है, तभी लोकतंत्र वास्तव में सशक्त बनता है।

    नैतिक और जागरूक मतदान समय की मांग है। मैं आप सभी से अपील करता हूँ कि आप बिना किसी भय, लालच या भेदभाव-चाहे वह जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के आधार पर हो-स्वतंत्र और विवेकपूर्ण निर्णय लें। आपका वोट किसी दबाव या प्रलोभन का परिणाम नहीं, बल्कि आपके आत्मबोध और नैतिक विवेक का प्रतिबिंब होना चाहिए।

    आज के युग में तकनीक ने चुनावी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं सुलभ बनाया है। म.म्च्प्ब् जैसी सुविधाओं ने मतदाता पहचान को डिजिटल रूप में सरल किया है। ऑनलाइन पंजीकरण, मतदाता सूची में सुधार और जागरूकता अभियानों ने नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से और अधिक जोड़ा है। यह प्रगति हमें याद दिलाती है कि तकनीक तभी सार्थक है, जब वह लोकतंत्र को मजबूत बनाए।

    म्टड एवं टटच्।ज् निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्वाचन प्रबंधन में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। प्रत्येक मतदाता टटच्।ज् के माध्यम से उसके द्वारा दिये गये मत की विश्वसनीयता की जांच कर सकता है। लोकतंत्र में निष्पक्ष निर्वाचनों हेतु मतदाताओं का भरोसा कायम रखने एवं उसे मजबूत करने में इस प्रकिया की बड़ी भूमिका है। इसका प्रचार-प्रसार आम जन तक किया जाना अत्यंत आवश्यक है।

    लोकतांत्रिक साक्षरता को बढ़ावा देना हमारी दीर्घकालिक जिम्मेदारी है। स्कूलों और कॉलेजों में चुनावी साक्षरता क्लब (म्स्ब्े) के माध्यम से युवाओं में जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है। जब बच्चे और युवा लोकतंत्र की मूल अवधारणाओं को समझते हैं, तभी वे आगे चलकर जिम्मेदार नागरिक बनते हैं।

    मुझे सचिव, निर्वाचन द्वारा अवगत कराया गया है कि भावी एवं युवा मतदाताओं को जोड़ने हेतु स्कूलों व कॉलेजों में इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब और कैम्पस एम्बेसेडर के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। बूथ स्तर पर चुनाव पाठशालाओं के जरिए स्कूल-कॉलेज न जाने वाले युवाओं को भी मतदाता पंजीकरण एवं मतदान के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

    महिलाओं, दिव्यांगों, वंचित वर्गों, ट्रांसजेंडर एवं जनजातीय समुदायों के लिए विशेष अभियानों के सकारात्मक परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में युवाओं ने मतदाता के रूप में पंजीकरण कराया है। युवा मतदाता राष्ट्र का भविष्य हैं, और मैं उनसे शत-प्रतिशत नैतिक भागीदारी का आह्वान करता हूँ।

    उत्तराखण्ड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, भारी बर्फबारी और वर्षा के बीच पोलिंग पार्टियों द्वारा कठिन रास्तों पर पैदल चलकर निष्पक्ष एवं सुरक्षित मतदान सुनिश्चित किया जाना सराहनीय है। इसके लिए राज्य की निर्वाचन मशीनरी बधाई की पात्र है। राज्य में 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के लगभग 1,000 मतदाता हैं। मैं उनकी दीर्घायु की कामना करता हूँ और निर्वाचन में सक्रिय सहभागिता हेतु उनका आभार व्यक्त करता हूँ।

    निर्वाचन विभाग द्वारा घर-घर निःशुल्क फोटो पहचान पत्र वितरित किए जा रहे हैं, जिसमें बीएलओ का, विशेषकर महिला बीएलओ का, उल्लेखनीय योगदान है। मैं सभी बीएलओ के कठिन परिश्रम की सराहना करता हूँ।

    राज्य की निर्वाचन मशीनरी द्वारा किये जा रहे समस्त प्रयासों को आम मतदाता एवं नागरिकों के मध्य प्रभावी रूप से पहुँचाने का काम सोशल मीडिया, इलैक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिन्ट मीडिया, विभिन्न विभागों तथा सिविल सोसाइटी संस्थाओं इत्यादि द्वारा किया जाता है जिसके लिए वे सभी बधाई के पात्र हैं।

    प्रिय नागरिकों,

    वर्तमान चुनावी परिदृश्य में हम सभी यह अनुभव कर रहे हैं कि लोकतंत्र केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि सतत् संवाद और सहभागिता की प्रक्रिया है। समय-समय पर उठने वाली चुनौतियाँ हमें और अधिक सजग बनने की प्रेरणा देती हैं। हमें यह सुनिश्चित करना है कि हमारी लोकतांत्रिक परंपराएँ सुदृढ़ हों और जनविश्वास निरंतर बना रहे।

    आज इस अवसर पर, मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि हम राष्ट्रीय मतदाता दिवस की शपथ को केवल शब्दों तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। आइए हम संकल्प लें कि हम लोकतांत्रिक मूल्यों की मर्यादा बनाए रखेंगे, निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया का सम्मान करेंगे और राष्ट्रहित को सर्वाेपरि रखेंगे।

    देवभूमि उत्तराखण्ड सदैव से राष्ट्र-निर्माण में अग्रणी रहा है। यहाँ की वीरभूमि, यहाँ की आध्यात्मिक परंपरा और यहाँ की जागरूक जनता हमारे लोकतंत्र की ताकत है। मुझे विश्वास है कि उत्तराखण्ड का प्रत्येक मतदाता अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए देश को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में योगदान देगा।

    इस अवसर पर, मैं कहना चाहूँगा कि एक सशक्त और जीवंत लोकतंत्र के निर्माण के लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। ष्डल प्दकपंए डल टवजमष् (मेरा भारत- मेरा वोट), -केवल एक विषय नहीं, बल्कि हमारी पहचान है। जब हम मतदान करते हैं, तो हम भारत की आत्मा को सशक्त करते हैं।

    अंत में, मैं सभी प्रदेशवासियों से अपील करता हूँ कि वे प्रत्येक निर्वाचन में अनिवार्य रूप से अपने मत का प्रयोग करें और लोकतंत्र को सशक्त बनाएं। आइए! हम सब मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करें, जहाँ हर आवाज सुनी जाए, हर वोट की कद्र हो और हर नागरिक स्वयं को राष्ट्र के भविष्य का निर्माता माने।

    आप सभी को पुनः राष्ट्रीय मतदाता दिवस की शुभकामनाएँ।

    जय हिन्द!