23-01-2026 : श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय, बादशाहीथौल के षष्ठम् दीक्षान्त समारोह में माननीय राज्यपाल महोदय का उद्बोधन
जय हिन्द!
हम सभी के लिए, विशेषकर अध्ययन और अध्यापन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के लिए आज का दिन अत्यंत पावन और ऐतिहासिक है। हम सभी को मालूम है- आज वसंत पंचमी का शुभ पर्व है, जो विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की आराधना का उत्सव है। मैं इस पावन अवसर पर आप सभी को हृदय से असीम शुभकामनाएं देता हूँ।
आज का यह दिन एक और दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि आज महान राष्ट्रनायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 128वीं जयंती है। माँ सरस्वती के उपासक विलक्षण प्रतिभा के धनी नेताजी ने 1920 में आई.सी.एस. जैसी कठिन परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। किंतु, जलियाँवाला बाग के नरसंहार और राष्ट्रभक्ति की ज्वाला ने उन्हें ब्रिटिश सत्ता की सुख-सुविधाओं को ठुकराने के लिए प्रेरित किया।
आजाद हिन्द फौज का गठन कर उन्होंने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ के उद्घोष से भारतीय जनमानस में क्रांति का संचार किया। उनका दिया हुआ ‘जय हिन्द’ का नारा आज भी हमारी सेनाओं का गौरव है। मेरा युवाओं से आग्रह है कि उनके अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति समर्पण से प्रेरणा लेकर राष्ट्र-निर्माण का संकल्प लें।
आज इस अत्यंत महत्वपूर्ण दिवस पर, माँ सरस्वती के इस पावन प्रांगण में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अपार हर्ष और आत्मिक संतोष की अनुभूति हो रही है। यह मेरे लिए विशेष गर्व का विषय है कि आज भी हमारी बेटियों ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प से उत्कृष्टता की नई मिसाल कायम की है। 83 स्वर्ण पदकों में से 59 पदक अर्जित कर उन्होंने न केवल विश्वविद्यालय, बल्कि सम्पूर्ण समाज को गौरवान्वित किया है। निश्चय ही, हमारी बेटियाँ आत्मनिर्भर, सशक्त और राष्ट्र-निर्माण की अग्रदूत हैं।
मैं आज उपाधि प्राप्त करने वाले सभी 20,664 विद्यार्थियों को हृदय से बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देता हूँ। इस गौरवपूर्ण सफलता के पीछे जिन माता-पिता, अभिभावकों और विद्वान अध्यापकों का अमूल्य योगदान है, मैं उनके प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता प्रकट करता हूँ। उनका सतत मार्गदर्शन, निःस्वार्थ सहयोग, असीम त्याग और तपस्या ही विद्यार्थियों की उपलब्धियों के रूप में साकार होता है।
साथियों,
हमारा प्यारा उत्तराखण्ड केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और महान ज्ञान-परंपरा की जन्मस्थली है। यह ऋषियों-महर्षियों की पावन तपोभूमि और हमारे चार धामों की पुण्य धरा है। यहाँ के कण-कण में सादगी, शांति और राष्ट्र के लिए सर्वस्व समर्पण की भावना रची-बसी है।
यह भूमि धन्य है, जो गुरु गोबिन्द सिंह जी जैसे महान क्रांतिकारी संत और अतुलनीय योद्धा की भी तपोस्थली रही है। उन्होंने हमें अध्यात्म और शौर्य का वह अद्भुत संगम दिया, जो युगों-युगों तक मानवता का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।
इस विश्वविद्यालय का नाम उस महान विभूति श्री देव सुमन जी के नाम पर अंकित है, जिन्होंने मात्र 28 वर्ष की अल्पायु में अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनका यह सर्वाेच्च बलिदान आज भी हमें लोक-हित और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मैं इस पावन अवसर पर अमर शहीद श्री देव सुमन जी के चरणों में श्रद्धापूर्वक कोटि-कोटि नमन करता हूँ।
मित्रों,
यह जानकर अत्यंत हर्ष होता है कि अल्प समय में ही इस विश्वविद्यालय ने 236 संस्थानों और 80 हजार विद्यार्थियों के साथ सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। शिक्षण और कौशल विकास के साथ-साथ ‘पेटेंट’ के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की उपलब्धि सराहनीय है, अब तक 67 पेटेंट प्रकाशित और 17 ग्रांट होना आपकी बौद्धिक संपदा का प्रमाण है।
अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ हमारे छात्र खेल और राष्ट्र-सेवा में भी अग्रणी हैं। वर्ष 2025 में एन.सी.सी. (छब्ब्) कैडेट्स का आर.डी.सी. परेड और विभिन्न राष्ट्रीय कैंपों में प्रतिनिधित्व, करना गर्व का विषय हैं। खेलों में भी हमारे छात्र सागर कुमार और मोहित जोशी ने राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक जीतकर विश्वविद्यालय का मान बढ़ाया है।
प्यारे विद्यार्थियों,
आत्म-मूल्यांकन हमें निरंतर बेहतर बनने की प्रेरणा देता है, आत्म-विश्वास हमें असंभव को संभव करने का साहस देता है, और आत्म-नियंत्रण हमें मर्यादा व मूल्यों के पथ पर अडिग रखता है। यही तीनों मिलकर जीवन की दिशा और गति तय करते हैं। जब आप युवा इस त्रिसूत्र को अपनाएंगे तो आप निश्चित ही सफलता प्राप्त करेंगे और राष्ट्र के चरित्रवान, समर्थ और प्रेरक निर्माता बनेंगे।
मेरी आपसे अपेक्षा है- इस विश्वविद्यालय से अर्जित आपका ज्ञान, आपकी योग्यता और आपके संस्कार राष्ट्र की चुनौतियों के समाधान और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के सशक्तीकरण का माध्यम बनें। याद रखिए! ड्रग्स क्षणिक सुख का छलावा है, जो भविष्य, स्वास्थ्य और आत्मसम्मान तीनों को नष्ट कर देता है। इसलिए हमेशा दुर्व्यवसनों से दूर रहें। आप केवल राष्ट्र के लाभार्थी नहीं, उसके निर्माता हैं, इसलिए अपनी क्षमता और प्रतिभा का उपयोग ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से करें।
प्यारे युवाओं,
खुली आँखों से बड़े और ऊँचे सपने देखो, और उन्हें साकार करने के लिए कठोर परिश्रम, अनुशासन और अटूट संकल्प को अपना जीवन मंत्र बनाओ। तुम्हारे स्वप्न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। जब युवा जागरूक, कर्मठ और राष्ट्रनिष्ठ बनेंगे, तो भारत विश्व मंच पर नेतृत्व करेगा और इतिहास रचेगा।
आज का युग तीव्र प्रतिस्पर्धा और तकनीक का युग है। इस डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, डेटा विज्ञान और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों में दक्षता समय की अनिवार्यता है। ये केवल शब्द नहीं, आने वाले कल की शक्ति हैं। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए हमें इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। आज की तैयारी से ही, आजादी के शताब्दी 2047 तक भारत विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम होगा।
साथियों,
आज का नया भारत, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में प्रगति के नए शिखरों को स्पर्श कर रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ जैसे अभियानों ने देश को नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी सशक्तीकरण की दिशा में नई गति दी है। यह अमृत काल युवाओं के लिए अभूतपूर्व अवसरों का काल है, जहाँ आपको प्रतिभा, परिश्रम और नवाचार के बल पर विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाने का स्वर्णिम अवसर मिला है।
प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में शिक्षा, स्टार्टअप, अनुसंधान, रक्षा, अंतरिक्ष, खेल और डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में युवाओं के लिए अपार संभावनाएँ सृजित हुई हैं। नई शिक्षा नीति, स्टार्टअप फंडिंग, ड्रोन, सेमीकंडक्टर, स्पेस टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में बढ़ते अवसर यह संकेत देते हैं कि भारत अब अवसरों का नहीं, नेतृत्व का राष्ट्र बन रहा है। मैं युवाओं से आह्वान करता हूँ कि वे इन अवसरों का सदुपयोग कर, स्वयं की प्रगति के साथ राष्ट्र की उन्नति में अग्रणी भूमिका निभाएँ।
क्षणिक विजय नहीं, बल्कि नैतिकता और मूल्यों पर आधारित दीर्घकालिक सफलता ही जीवन को सार्थक बनाती है। मैं आशा करता हूँ कि आप जहाँ भी कार्य करें, व्यक्तिगत उन्नति के साथ राष्ट्र और उत्तराखण्ड के विकास में सक्रिय योगदान देंगे। मैं इस सफल दीक्षान्त समारोह के लिए विश्वविद्यालय परिवार को बधाई देता हूँ और विश्वास व्यक्त करता हूँ कि यह विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति करते हुए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट पहचान स्थापित करेगा।
‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ भारतीय शिक्षा प्रणाली को गुलामी की मानसिकता के अंधकार से मुक्त कर, उसे भारतीय मूल्यों, नवाचार और समकालीन तकनीक से समृद्ध करने का सशक्त माध्यम बनेगी। इसी नीति के पथ पर चलते हुए हम अमृत काल में ऐसी दक्ष, चरित्रवान और राष्ट्रसेवी जनशक्ति का निर्माण करेंगे, जो भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाए। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और प्रतिबद्धता से अहम योगदान देंगे।
प्यारे बच्चों,
आपकी यात्रा केवल स्वप्न देखने की नहीं, उन्हें साकार करने की हो। केवल अपेक्षा की नहीं, कर्तव्य की हो। केवल सफलता की नहीं, उसकी सार्थकता की हो, और आपकी पहचान केवल प्रदर्शन से नहीं, बल्कि उच्च जीवन-दर्शन से बने। यही चेतना, यही मूल्य और यही दृष्टि आपके जीवन का परम ध्येय हो।
मैं आप सभी से यह अपेक्षा करता हूँ कि आप संकल्प, साधना, परिश्रम और त्याग के बल पर राष्ट्र के गौरव को निरंतर पल्लवित-पुष्पित करेंगे। इस आशा, अपेक्षा और विश्वास के साथ, आपके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करते हुए अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
जय हिन्द!