Close

    15-03-2024 : अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह के अवसर पर मा0 राज्यपाल महोदय का भाषण।

    प्रकाशित तिथि: मार्च 15, 2024

    (दिनांक 15 मार्च, 2024)

    विषयः स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और प्रबंधन में वैश्विक रुझान।

    जय हिन्द।

    “स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और प्रबंधन में वैश्विक रुझान” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में आप सभी विद्वत जनों के बीच पहुंचकर मुझे अपार खुशी हो रही है।

    इस संगोष्ठी हेतु देश-विदेश से आए स्वास्थ्य समेत अन्य क्षेत्र के विद्वत जनों का, मैं उत्तराखण्ड की पावन धरा में हृदय से स्वागत करता हूँ।

    साथियों,

    स्वास्थ्य, जीवन की महत्वपूर्ण आधारशिला होती है। भारत में संस्कृत की एक उक्ति है- ’’आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनं’’ अर्थात, ’’स्वास्थ्य ही परम धन है, और अच्छे स्वास्थ्य से हर कार्य पूरा किया जा सकता है।’’

    मुझे यह देखकर बहुत हर्ष हो रहा है कि ळ-20 सम्मेलन द्वारा हम भारतीयों ने दुनिया को ’वसुधैव कुटुम्बकम’ की जो राह दिखाई, उसी पर आगे बढ़ते हुए, हम आज की इस संगोष्ठी के पड़ाव पर पहुंचे हैं, जिसमें दुनिया के कोने-कोने से पहुंचे प्रतिभागी, मानव जाति के सतत और व्यापक कल्याण हेतु विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।

    साथियों,

    कोविड महामारी से हमें सबसे बड़ी सीख यह मिली कि हमें हमेशा ही हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा। वैश्विक हेल्थ सिस्टम को भी हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। जैसा कि हमने महामारी के दौरान देखा, दुनिया के एक हिस्से में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बहुत कम समय में ही दुनिया के अन्य सभी हिस्सों को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए हमें अगली स्वास्थ्य आपात स्थिति को रोकने और उसका मुकाबला करने के लिए तत्पर रहना होगा। आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में यह विशेष रूप से आवश्यक है।

    इस महामारी ने हमें सिखाया है कि स्वास्थ्य जैसा महत्वपूर्ण विषय, हमारे निर्णयों के केंद्र में होना चाहिए। इसने हमें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का मूल्य भी दिखाया, चाहे वह दवा और वैक्सीन आपूर्ति में हो, या अपने लोगों को घर वापस लाने में हो। वैक्सीन मैत्री पहल के तहत, भारत ने 100 से अधिक देशों को 300 मिलियन वैक्सीन पहुंचाई।

    पूरी दुनिया ने कोविड महामारी की त्रासदी को झेला है। हमें गर्व है अपने देश के वैज्ञानिकों पर, जिन्होंने कोविड की आपातकालीन परिस्थितियों में भी धैर्यपूर्वक कार्य करते हुए बहुत जल्दी पूर्णतः स्वदेशी कोविड वैक्सीन और दवाइयों का निर्माण कर इस त्रासदी में देश के साथ ही पूरे विश्व को भी सहयोग किया।

    साथियों,

    कोविड महामारी ने हमें जागृत किया है कि स्वास्थ्य तकनीकों तथा उनके प्रबंधन के बहुआयामी विकास को बहुत तेज़ रफ्तार की आवश्यकता है। इसके लिए जरूरी है कि शिक्षण संस्थान, अनुसंधानकर्ता, औद्योगिक इकाईयां, संबंधित अशासकीय और शासकीय संस्थाएं एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करें। इससे, मार्ग में आने वाली हर तरह की समस्या का अतिशीघ्र समाधान होगा जो न केवल उत्तराखण्ड या भारत के उत्थान में सहायक होगा अपितु संपूर्ण मानव जाति रोग-मुक्त होकर और बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर हो सकेगी।

    साथियों,

    भारत में हम समग्र और समावेशी दृष्टिकोण अपना रहे हैं। हम स्वास्थ्य अवसंरचना को विस्तार दे रहे हैं, चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियों को बढ़ावा दे रहे हैं और सभी को सस्ती स्वास्थ्य देखभाल प्रदान कर रहे हैं। पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मनाया जाना समग्र स्वास्थ्य के लिए सार्वभौमिक आकांक्षा का परिचायक है।

    हमारा मानना है कि समग्र स्वास्थ्य और कल्याण हर किसी की क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है। पारंपरिक औषधि का एक वैश्विक संग्रह तैयार करने के लिए भी हमें मिलकर प्रयास करना चाहिए।

    साथियों,

    स्वास्थ्य और पर्यावरण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। साफ हवा, सुरक्षित पेयजल, पर्याप्त पोषण और सुरक्षित आश्रय स्वास्थ्य के प्रमुख घटक हैं। ’’एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’’ का हमारा विजन संपूर्ण इकोसिस्टम में- मनुष्यों, पशुओं, पौधों और पर्यावरण के लिए अच्छे स्वास्थ्य की संकल्पना की गई है।

    साथियों,

    स्वास्थ्य पहल की सफलता में सार्वजनिक भागीदारी एक महत्वपूर्ण घटक है। यह भारत में कुष्ठ उन्मूलन अभियान की सफलता का एक मुख्य कारण था। टीबी उन्मूलन पर हमारा महत्वाकांक्षी कार्यक्रम जनभागीदारी को भी प्रोत्साहित करता है। और जन भागीदारी से ही अब हम टीबी उन्मूलन का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में 2030 के विश्व लक्ष्य से बहुत आगे हैं।

    साथियों,

    टेली-मेडिसिन जैसे डिजिटल समाधान के माध्यम से दूर-दराज के मरीजों को बेहतर देखभाल मिल सकती है। भारत के राष्ट्रीय मंच, ई-संजीवनी ने अब तक 140 मिलियन टेली-स्वास्थ्य परामर्श की सुविधा प्रदान की है। भारत के कोविन प्लेटफॉर्म ने मानव इतिहास में सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को सफलतापूर्वक संचालित किया। डिजिटल स्वास्थ्य पर वैश्विक पहल, विभिन्न डिजिटल स्वास्थ्य पहलों को एक साझा मंच पर लाएगी।

    आइये, हम जनकल्याण के लिए अपने नवाचारों के द्वार खोलें। आइये, हम वित्तपोषण के दोहराव से बचें। आइये, हम प्रौद्योगिकियों की समान उपलब्धता संभव करें। यह पहल सम्पूर्ण विश्व के देशों को स्वास्थ्य देखभाल आपूर्ति के अंतर को कम करने की सुविधा देगी, ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है।

    मुझे प्रसन्नता है कि वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय, देहरादून के कुलपति डॉ0 ओंकार सिंह के अनुभवी मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड तकनीकी उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में नई मंजिलों की ओर निरंतर अग्रसर है।

    मुझे इस बात की खुशी है कि उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय, देहरादून सम्बद्ध ग्लोबल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एण्ड रिसर्च (ळप्च्म्त्), काशीपुर का उच्च-शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उत्तराखण्ड में अतुल्य योगदान है।

    ळप्च्म्त् के अध्यक्ष एवं संस्थापक डॉ0 अनिल कुमार सक्सेना विश्व के सर्वोच्च 2ः वैज्ञानिकों की सूची में पिछले 3 वर्षोंं से अपना स्थान बनाये हुए हैं। शिक्षक एवं शोध क्षेत्र में उत्तम कार्य हेतु ळप्च्म्त् को अनेकों पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। मैं उल्लेखनीय योगदान के लिए संस्थान और इसके अध्यक्ष डॉ0 अनिल कुमार सक्सेना को बधाई देता हूँ।

    साथियों,

    मुझे बताया गया है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी एवं प्रबंधन की वैश्विक प्रवृत्तियों के समावेश हेतु ळप्च्म्त्ए काशीपुर द्वारा ग्लोबल हेल्थ टेक्नो मैनेजमेंट फोरम (ळभ्ज्डथ्) की स्थापना की गई है। ळभ्ज्डथ् न केवल भारत के अपितु पूरी दुनिया के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्योगपतियों, राजनीतिज्ञों, नीति निर्माताओं, शासकीय और अशासकीय संस्थाओं को एक साझा मंच प्रदान करता है जिससे व्यावसायिक संसाधनों को विकसित किया जा सके।

    ळभ्ज्डथ् समसामयिक विषयों जैसे ड्रग-डिज़ाइन एण्ड डिस्कवरी, स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटलीकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शोध एवं नवाचार, डिजिटल ग्रीन कृषि आदि के क्षेत्र में सतत विकास हेतु प्रयत्नशील है।

    आज की स्वास्थ्य तकनीकों एवं उनके प्रबंधन संबंधी अंर्तराष्ट्रीय संगोष्ठी, ग्लोबल ट्रेंड्स इन हेल्थ टेक्नोलाॅजी एण्ड मैनेजमेंट (ळज्भ्ज्ड-2024) का आयोजन तीनों ही संस्थानों के सांझा प्रयासों का परिणाम है। इस आयोजन की सफलता के लिए शिव के त्रिशूल की तरह जुटे तीनों ही संस्थानों को, मैं अपनी और से शुभकामनाएं देता हूँ, मुझे विश्वास है कि इस संगोष्ठी के सांझा विमर्श वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के क्षेत्र को नई दिशा देने में सफल होंगे।
    मुझे खुशी है कि उत्तराखण्ड की पावन धरा पर आज से तीन दिनों तक अमेरिका, रूस, जर्मनी, फ्रांस, तुर्की, मलेशिया, इंडोनेशिया, ग्रीस, बेल्जियम, स्लोवेनिया, ब्रिटेन, स्विट्जरलैण्ड, कोरिया आदि विभिन्न देशों एवं भारत के कोने-कोने से वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, उद्योगपति, सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठन स्वास्थ्य देखभाल, तकनीकी विकास और प्रबंधन-कौशल विकास के समसामयिक नए आयामों की समीक्षा करेंगे।

    देश-विदेश से पहुंचे विद्वत जनों के विचारों के संगम का लाभ पूरे विश्व को इस समीक्षा संगोष्ठी से मिलेगा जिससे भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का निवारण और आवश्यकताओं की पूर्ति बेहतर तरीकों से हो सकेगी, ऐसा मेरा भरोसा है।

    मैं मानवता के लिए एक प्राचीन भारतीय आकांक्षा के साथ अपनी बात समाप्त करता हूँः-

    सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयः, अर्थात, ’सभी सुखी रहें, सभी रोगमुक्त हों।’

    मैं पुनः आप सभी का अभिनन्दन करते हुए, इस तीन दिवसीय संगोष्ठी की सफलता की कामना करता हूँ।

    जय हिन्द!